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बलिया: यूजीसी के विरोध में स्वर्णों ने निकाली रैली

January 26, 2026

बलिया: यूजीसी के विरोध में स्वर्णों ने निकाली रैली

बलिया, 26 जनवरी 2026, यूजीसी को लेकर बलिया में सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के लोगों ने अपने हाथों में दफ्ती लिए और नारेबाजी करते हुए पूरे शहर में रैली निकाल कर अपना विरोध प्रदर्शन किया।

वही अशोक सिंह ने बताया कि पहले मोदी और अमित शाह ने हिंदू मुस्लिम किए,हिंदू मुस्लिम कर अपनी सरकारें चलाई । सारे हिंदुओं ने एक होकर उनको गद्दी पर बैठाया। अब उनको लगाया है कि हिंदुओं को जातियों में बांट दो और जातियों में बांट कर अपनी राजनीति करें। पहली बार देश प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के फोटो पर लोगों ने अपना गुस्सा निकाला है।

Bareilly: City Magistrate ने यूजीसी के विरोध में दिया इस्तीफा

Alankar Agnihotri City Magistrate Bareilly PCS

नगर मैजिस्ट्रेट बरेली अलंकार अग्निहोत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद सरकारी आवास के बाहर पोस्टर प्रदर्शित करते हुए।

बरेली Bareilly, 26 जनवरी 2026, विश्विद्यालय अनुदान आयोग University Grants commission (UGC) Rules 2026 के नए नियम के विरोध में PCS Officer पीसीएस अधिकारी और यहां City Magistrate नगर मैजिस्ट्रेट के पद पर तैनात Alankar Agnihotri अलंकार अग्निहोत्री ने पद से त्यागपत्र दे दिया है।

राज्यपाल और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में श्री अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों को सवर्ण छात्रों, छात्राओं के लिए उत्पीड़नकारक बताया है। उन्होंने त्यागपत्र में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों की आलोचना की है। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी को विदेशी जनता पार्टी कहा है, तथा एक वैकल्पिक राजनीतिक दल की बात कही है।

श्री अलंकार 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। उन्होंने बीएचयू आईआईटी से बी टेक किया है। श्री अग्निहोत्री के इस्तीफे पर अभी तक शासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Resignation City Magistrate Bareilly 1

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का त्यागपत्र

Resignation letter Alankar Agnihotri

त्यागपत्र अलंकार अग्निहोत्री

ब्रेकिंग न्यूज /यूजीसी रूल्स के विरोध में बरेली सिटी मजिस्ट्रेट

ब्रेकिंग न्यूज /

    City Magistrate Bareilly बरेली के नगर मजिस्ट्रेट, अलंकार अग्निहोत्री ने दिया त्यागपत्र

बरेली, 26 जनवरी 2026, सिटी मजिस्ट्रेट एवं 2019 बैच के पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य मामले एवं UGC के नए नियमों के विरोध में पद से दिया इस्तीफा… अग्निहोत्री ने लिखा… ब्राह्मण बटुक शिष्यों की चोटी पकड़ कर मारपीट पर इस्तीफा दे रहा हूं..!! अपने बोर्ड पर नाम काट लिखा रिजाइन ……. फोटो सोशल मीडिया पर वायरल

किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

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श्रद्धांजलि: मार्क टली सर.. आप बहुत याद आएंगे…..

Mark Tuli, BBC Correspondent India

बीबीसी संवाददाता मार्क टुली (फाइल फोटो, वरिष्ठ पत्रकार रतिभान त्रिपाठी के साथ)

रतिभान त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार, राज्य मुख्यालय लखनऊ की फेसबुक वाल से साभार

Ratibhan Tripathi Senior Journalist

पत्रकारिता जगत में दैदीप्यमान नक्षत्र सरीखे पत्रकार और लेखक सर विलियम मार्क टली का रविवार को निधन हो गया। 90 वर्ष के मार्क टली भारत में बीबीसी के लिए काम करने वाले सबसे चर्चित पत्रकार रहे हैं। बीबीसी के लिए यूं तो वह अंग्रेजी में रिपोर्टिंग करते थे लेकिन उनका हिंदी ज्ञान ग़ज़ब का था। उनकी और मेरी पहली मुलाकात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जाने-माने पत्रकार व लेखक और पंडित नेहरू व इंदिरा गांधी के करीब रहे पीडी टंडन के प्रयागराज स्थित आवास में हुई थी। संभवतः वह किसी फ्रांसीसी फिल्म निर्माता के साथ टंडन जी से मिलने आए थे। फिल्म निर्माता फिरोज गांधी पर कोई डाॅक्यूमेंट्री बनाने की तैयारी में थे। टंडन जी ने उसी वक्त मुझे भी अपने घर बुलाया था। तब मैं दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग करता था। उन्होंने ही मार्क टली से मेरा परिचय कराया था।
अंग्रेज से अंग्रेजी भाषा में बोलने की अपेक्षा की जाती है लेकिन मार्क ने मुझसे हिंदी में बात की, अच्छी हिंदी में बात की। उनके बोल-चाल से लग ही नहीं रहा था कि वह अंग्रेज हैं। उनका उच्चारण विशुद्ध भारतीय था। उनका अंदाज देखकर मुझे बहुत सुखद अनुभूति हुई थी। वह तन से तो अंग्रेज थे लेकिन मन से भारतीय ही थे। ईसाई होते हुए भी वह एक हिंदू की तरह दाहिने हाथ में कलावा बांधते थे।
बातचीत में मार्क ने मुझे अपने जीवन की बहुत सारी बातें बताई थीं और अपना विजिटिंग कार्ड दिया था। मेरा नंबर भी लिया था। बाद में जब वह फिर से प्रयागराज आए तो मुझे फोन किया और जिस होटल में ठहरे थे, वहीं बुलाया। वह किसी रिपोर्टिंग के सिलसिले में ही आए थे। हम लोगों ने घंटों बातचीत की, चाय पी। उसी समय उन्होंने अपने साथ अयोध्या में हुई घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि कारसेवकों ने उन्हें किस तरह बंधक बनाया था। फिर प्रशासन ने उन्हें कैसे मुक्त कराया था। पत्रकारिता के लिए उन्हें पहले पद्मश्री और फिर पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने भारतीय राजनीति समेत अनेक विषयों पर कई महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी हैं।
मार्क टली को भारत और भारतीय परंपराओं का अच्छा ज्ञान था। उन्हें भारतीय परंपराओं से लगाव भी कम नहीं था। 1935 में कलकत्ता में जन्मे मार्क टली ने मुलाकात के दौरान बातचीत में मुझसे कहा था कि रतिभान जी, मैं हर हाल में भारत में रहना चाहता हूं। उनकी यह चाहत पूरी भी हुई। आज जब मार्क टली नहीं रहे तो उनकी यादों की बरात सी आ गई। उनके सान्निध्य में बिताए पल, उनकी बातचीत और हंसता मुस्कुराता चेहरा याद आ रहा है। अलविदा मार्क टली सर…आप बहुत याद आएंगे। आपकी पत्रकारिता और भारत के लिए प्रेम सदा याद किया जाएगा।

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