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उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना

February 16, 2026

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना

Uttarakhand weather Forecast

उत्तराखंड मौसम की सूचना

उप्र समाचार सेवा (UPSS)
दिनांक: 16 फरवरी 2026 | स्थान: वीरभद्र, ऋषिकेश (उत्तराखंड), उत्तराखंड में मौसम का बदलेगा मिजाज, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी के आसार
उत्तराखंड में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है और दिन में हल्की धूप लोगों को राहत दे रही है, जबकि सुबह-शाम ठंड का असर बरकरार है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के अधिकांश जिलों में 16 फरवरी को मौसम साफ रहने की संभावना है तथा कहीं भी बारिश या बर्फबारी के संकेत नहीं हैं।

हालांकि 17 और 18 फरवरी को पर्वतीय जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के लगभग 3300 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में कहीं-कहीं बहुत हल्की बारिश या बर्फबारी के आसार जताए गए हैं। मैदानी क्षेत्रों में इस दौरान भी मौसम शुष्क रहेगा और धूप खिली रहने की संभावना है।

19 फरवरी से प्रदेशभर में पुनः मौसम साफ होने की उम्मीद है और किसी प्रकार की वर्षा या बर्फबारी के संकेत नहीं हैं।

यात्रियों के लिए सलाह
ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को प्रस्थान से पहले मौसम की ताजा जानकारी लेने, गर्म कपड़ों की पर्याप्त व्यवस्था रखने तथा संवेदनशील पर्वतीय मार्गों पर वाहन चलाते समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

प्रदेश में फिलहाल किसी बड़े मौसमी व्यवधान की संभावना नहीं है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा।

Bangladesh Election ढाका में बदलाव, भारत के सामने नई कसौटी

New Government of Bangladesh
Posted on 16.02.2026, Monday Time 10.07 AM , Dhaka, Writer Priyanka Saurabh 
(सत्रह वर्षों बाद सत्ता में लौटी बीएनपी ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदली है; भारत के सामने अब अवसरों के साथ नई अनिश्चितताएँ भी खड़ी हैं।)
 डॉ. प्रियंका सौरभ
बांग्लादेश के हालिया आम चुनावों में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने तारिक रहमान Tarik Rehman के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। सत्रह वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद राजनीति में लौटे तारिक रहमान ने अपनी माँ और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया Khalida Jiya की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए पार्टी को दो-तिहाई से अधिक सीटें दिलाईं। यह जीत न केवल एक चुनावी सफलता है, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में सत्ता संतुलन के व्यापक पुनर्संयोजन और एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत का संकेत भी देती है। भारत के लिए यह परिणाम अवसरों के साथ-साथ कई रणनीतिक अनिश्चितताएँ भी लेकर आया है, जिनका प्रबंधन आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेगा।
पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय तक बांग्लादेश की राजनीति पर अवामी लीग और शेख हसीना Sheikh Hasina का वर्चस्व रहा। इस अवधि में स्थिरता, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सहयोग के साथ-साथ सत्ता के केंद्रीकरण, विपक्ष के दमन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने के आरोप भी लगातार लगते रहे। लंबे समय तक एक ही राजनीतिक धारा के प्रभुत्व ने मतदाताओं में प्रशासनिक थकान और परिवर्तन की आकांक्षा को जन्म दिया। बीएनपी की जीत को इसी व्यापक जन-असंतोष और राजनीतिक विकल्प की तलाश के परिणाम के रूप में देखा जा सकता।
तारिक रहमान लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रभावशाली, किंतु विवादास्पद चेहरा रहे हैं। निर्वासन काल के दौरान उन पर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और कट्टरपंथी तत्वों से संबंधों जैसे आरोप लगे, जिनके कारण उनकी छवि धूमिल हुई। हालांकि दिसंबर 2025 में लंदन से स्वदेश वापसी के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण में बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने पार्टी संगठन का पुनर्गठन किया, युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया और जमीनी स्तर पर जन आंदोलन को पुनर्जीवित किया। निर्वासन काल के अनुभवों को उन्होंने राजनीतिक पूंजी में बदला और बीएनपी को चुनावी रूप से पुनर्स्थापित किया। इस संदर्भ में यह जीत केवल पारिवारिक विरासत का विस्तार नहीं, बल्कि रणनीतिक पुनर्संयोजन, संगठनात्मक अनुशासन और बदलते राजनीतिक यथार्थ को समझने की क्षमता की सफलता भी मानी जा रही है।
बीएनपी ने 13वें आम चुनावों में आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार उन्मूलन और अल्पसंख्यक सुरक्षा को अपने प्रमुख चुनावी मुद्दों के रूप में प्रस्तुत किया। बेरोज़गारी, महँगाई और शासन में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों ने मतदाताओं को गहराई से प्रभावित किया। पार्टी ने अपनी पारंपरिक कट्टरपंथी छवि से दूरी बनाने का प्रयास किया और हिंदू समुदाय सहित सभी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का आश्वासन दिया। यह जनादेश इस बात को रेखांकित करता है कि लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व और प्रशासनिक थकान के बाद मतदाताओं ने परिवर्तन को प्राथमिकता दी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्ता परिवर्तन ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेशी समाज स्थिरता के साथ-साथ उत्तरदायी शासन की अपेक्षा रखता है।
भारत के दृष्टिकोण से बीएनपी की यह जीत मिश्रित संकेत देती है। ऐतिहासिक रूप से भारत के संबंध अवामी लीग सरकार के साथ अधिक सहज और स्थिर रहे हैं। सीमा प्रबंधन, आतंकवाद-रोधी सहयोग और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में शेख हसीना सरकार ने भारत के साथ घनिष्ठ तालमेल रखा। इसके विपरीत, बीएनपी को लेकर नई दिल्ली में हमेशा संदेह बना रहा है, विशेषकर 2001–06 के शासनकाल के अनुभवों के कारण। हालांकि हाल के वर्षों में तारिक रहमान ने भारत के प्रति अपेक्षाकृत संतुलित और व्यावहारिक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। चुनावों से पहले भारत द्वारा बीएनपी को अनौपचारिक रूप से “ग्रीन सिग्नल” देना इसी बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह संकेत करता है कि भारत अब बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में किसी एक दल पर निर्भर रहने के बजाय बहुआयामी संवाद की नीति अपनाने को तैयार है।
आर्थिक दृष्टि से बीएनपी सरकार भारत के लिए नए अवसर खोल सकती है। बांग्लादेश भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दक्षिण एशिया में भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का अहम स्तंभ भी है। नई सरकार के कार्यकाल में द्विपक्षीय व्यापार के 20 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना जताई जा रही है। कनेक्टिविटी परियोजनाओं, जलविद्युत सहयोग, सीमा व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिल सकती है। बांग्लादेश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारतीय निवेश के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत करती है। अल्पसंख्यक हितों की रक्षा को लेकर बीएनपी की सार्वजनिक प्रतिबद्धता भारत की सामाजिक और राजनीतिक चिंताओं को कुछ हद तक कम करती है।
इसके बावजूद, अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। बीएनपी पर कट्टरपंथी तत्वों के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की भूमिका को लेकर सतर्कता आवश्यक है। तारिक रहमान पर लगे पुराने भ्रष्टाचार आरोप, पाकिस्तान के साथ कथित संबंध और हालिया सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाती हैं। भारत–बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ, तस्करी, मानव तस्करी और आतंकवाद से जुड़े जोखिम भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। यदि इन मुद्दों पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो द्विपक्षीय विश्वास प्रभावित हो सकता है।
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का असर केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव व्यापक दक्षिण एशियाई भू-राजनीति पर भी पड़ेगा। चीन और पाकिस्तान क्षेत्र में अपने प्रभाव को लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए आवश्यक होगा कि वह बांग्लादेश के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत रखे, ताकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भारत के प्रतिकूल न जाए। बहुपक्षीय मंचों और उप-क्षेत्रीय सहयोग पहलों के माध्यम से संवाद और सहयोग को सुदृढ़ किया जा सकता है।
ऐसे परिदृश्य में भारत के लिए संतुलित और सक्रिय कूटनीति अपनाना अनिवार्य होगा। अवामी लीग के साथ पुराने संबंधों को बनाए रखते हुए बीएनपी सरकार के साथ संवाद स्थापित करना भारत के दीर्घकालिक हित में है। एकतरफा झुकाव के बजाय संस्थागत और बहुदलीय संपर्क भारत को अधिक रणनीतिक लचीलापन प्रदान करेगा।
मानवाधिकार, अल्पसंख्यक सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के मुद्दों पर भारत को न तो उपेक्षा करनी चाहिए और न ही अत्यधिक हस्तक्षेप करना चाहिए। विवेकपूर्ण संतुलन ही भारत की प्रभावशीलता को बनाए रख सकता है।
तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी की यह जीत भारत के लिए न तो पूरी तरह जोखिमपूर्ण है और न ही पूर्णतः अवसर-प्रधान। यह एक संक्रमणकालीन दौर है, जिसमें सतर्कता, संवाद और व्यावहारिक कूटनीति के माध्यम से भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर सकता है, बल्कि भारत–बांग्लादेश संबंधों को एक नई और अधिक परिपक्व दिशा भी दे सकता है। यदि अनिश्चितताओं का प्रभावी प्रबंधन किया गया और सहयोग के क्षेत्रों को सुदृढ़ किया गया, तो यह राजनीतिक परिवर्तन न केवल द्विपक्षीय संबंधों को, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में स्थिरता और सहयोग की संभावनाओं को भी सशक्त कर सकता है।
Dr Priyanka Saurabh Writer, Poet

डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान)
कवयित्री | सामाजिक चिंतक | स्तंभकार

सड़क हादसा: ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई कार, दो बच्चों की मौत

हाथरस। आगरा से जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने आए एक परिवार की कार आगरा-अलीगढ़ हाईवे पर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई। हादसे में दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार आगरा के बल्केश्वर निवासी विशाल गोयल 14 फरवरी को हाथरस में आयोजित एक जन्मदिन समारोह में परिवार सहित आए थे। देर रात लौटते समय चंदपा क्षेत्र के गांव संटीकरा के पास उनकी कार आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
हादसे में विशाल गोयल के 15 वर्षीय पुत्र आदि तथा 8 वर्षीय भतीजे कृष्णा (पुत्र आकाश) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं विशाल गोयल, उनकी पत्नी चारु और पुत्र अंकित गोयल घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से दो की हालत गंभीर होने पर आगरा रेफर कर दिया गया।
घटना के बाद परिजन देर रात ही दोनों बच्चों के शव बिना किसी कानूनी कार्रवाई के आगरा ले गए। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को कब्जे में ले लिया है। क्षेत्राधिकारी सादाबाद अमित पाठक ने बताया  परिवार की ओर से अभी तक कोई तहरीर नहीं दी गई है। मामले में आगे की कार्रवाई परिजनों की शिकायत मिलने के बाद की जाएगी।

February 15, 2026

प्रतापगढ़ में चलती कार पर गिरा 1000 किलो का हाईमास्ट पोल, सपा नेता की मौत

प्रतापगढ़ 15 फरवरी , जिले में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। अंतू क्षेत्र के बाबूगंज बाजार में भारत पेट्रोलियम पेट्रोल पंप के सामने हाईमास्ट लाइट लगाने के दौरान 1000 किलो वजनी पोल अचानक अनियंत्रित होकर चलती कार पर गिर पड़ा। हादसे में समाजवादी पार्टी (समाजवादी पार्टी) के नेता लाल बहादुर यादव की मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पोल कार के ड्राइवर साइड आगे की ओर गिरा, जिससे टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का पिछला हिस्सा करीब दो फीट तक ऊपर उठ गया। हादसा इतना अचानक हुआ कि लाल बहादुर यादव को चीखने तक का मौका नहीं मिला।
घटना रविवार दोपहर करीब एक बजे की है। उस समय हाईमास्ट लाइट का पोल मजदूरों द्वारा खड़ा किया जा रहा था। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से पोल सीधे सड़क से गुजर रही कार पर गिर गया। हादसे का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मृतक लाल बहादुर यादव (47) अंतू नगर पंचायत से वर्ष 2022 में चुनाव लड़ चुके थे। वह पेशे से PWD के ठेकेदार थे और उनके पास देशी शराब का ठेका भी था। घटना के समय वह अपनी क्रेटा कार से शहर की ओर जा रहे थे। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है और निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों पर सवाल उठ रहे हैं।

भारतीय डाक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष उपेंद्र, राहुल सचिव

Posted on 15.02.2026 Time 09.47 PM Sunday, Rajesh Bhatia Moradabad

मुरादाबाद, 15 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
रविवार को भारतीय डाक कर्मचारी संघ ग्रुप सी के अधिवेशन में संगठन का गठन किया गया। संघ के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह व मंडलीय सचिव राहुल कुमार को चुना गया। इसके साथ ही सोलह सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
मुरादाबाद में प्रधान डाकघर में भारतीय डाक कर्मचारी संघ का अधिवेशन हुआ। अधिवेशन में संघ के प्रांतीय सचिव राजीव सिंह, उप प्रांतीय सचिव अशोक यादव, सहायक प्रांतीय मंत्री संदीप कुमार रहे। इस दौरान विभागीय पर्यवेक्षक के तौर पर सहायक अधीक्षक उत्तरीय प्रवीन कुमार गुप्ता भी रहे।
इस दौरान कर्मचारी संघ के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह, व मंडलीय सचिव राहुल कुमार को चुना गया। इसके अलावा उपाध्यक्ष संजीव कुमार व अशोक कुमार, सहायक सचिव – वैभव भारद्वाज, नवीन अग्रवाल, अंशुल सक्सेना व दिनेश कुमार, कोषाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, संगठन मंत्री-विनीत चौहान, संदीप सिंह व योगेंद्र सिंह व संगठन मंत्री विकेंद्र सिंह व अमर सिंह और लेखा परीक्षक सत्य प्रकाश बने।

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