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कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाया

March 10, 2026

कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाया

नई दिल्ली 10 मार्च 26, मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने  नई दिल्ली में संवाददाताओं को यह जानकारी दी।
उन्‍होंने बताया  कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में जल शक्ति मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन को बुनियादी ढांचे के निर्माण से लेकर सेवा वितरण के स्‍तर तक पुनर्गठित किया जाना है।
जल जीवन मिशन के पुनर्गठन के लिए मंत्रिमंडल ने इसके कुल परिव्यय को बढाकर 8 लाख 69 हजार करोड रुपये कर दिया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 3 लाख 59 हजार करोड़ रुपये की सहायता शामिल है।
सुजलम भारत की स्थापना को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने  इसके साथ ही एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा, “सुजलम भारत”, स्थापित करने को भी मंजूरी दी है। इसके तहत प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव/सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी। इससे स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा।
मदुरै हवाई अड्डे का दर्जा अंतरराष्ट्रीय 
मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा देने का फैसला किया है। मदुरै शहर में स्थित मदुरै हवाई अड्डा राज्य के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है। यह दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार और पर्यटन तथा तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। मदुरै हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा देने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। अंतर्राष्ट्रीय तीर्थयात्रियों और व्यवसायों को आकर्षित करने की हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप है।
जेवर हवाई अड्डे तक पहुंच के लिए धनराशि 
इस बीच, मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना सेक्‍शन से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोडने के लिए ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना के लिए 3 हजार 630 करोड 77 लाख रुपये मंजूर किए हैं। कुल करीब साढ़े 31 किलोमीटर लंबा यह गलियारा दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधे और तीव्र गति का संपर्क जरिया बनेगा। इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे से जुड़ेगा उज्जैन 
आर्थिक मामलों की समिति ने एनएच-752डी के बदनवार-पेटलावाद-थंदला-तिमरवानी खंड से 80दशमलव45 किलोमीटर लंबे चार-लेन कॉरिडोर के विकास को भी मंजूरी दी है। इसपर कुल 3 हजार 839 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत आएगी। यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर तिमरवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। प्रस्तावित चार-लेन कॉरिडोर परियोजना का प्रमुख उद्देश्य यात्रा को सुगम बनाने के साथ ही  यात्रा समय में लगभग एक घंटे की कमी लाना है।
कैबिनेट समिति ने रेल मंत्रालय की दो परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत 4 हजार 474 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में सैंथिया-पाकुर चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन बनाया जाना शामिल हैं। इससे भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।

उत्तराखंड: विधानसभा में “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” पेश

देहरादून, 10उत्तराखंड सरकार ने बजट सत्र के दौरान आज विधानसभा में “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” पेश किया। इसका उद्देश्‍य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन है। इस विधेयक के पारित हो जाने पर राज्य में एक एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा। इसमें परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य को मुखिया के रूप में दर्ज किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों में दर्ज लाभार्थियों के डेटा को एक साथ जोड़ा जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में सभी सरकारी विभाग अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस इस्तेमाल करते हैं, जिससे आंकड़ों में दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिलताएं और समन्वय की कमी जैसी समस्याएं आती हैं।

भूगर्भजल विभाग प्रदेश की भूजल सम्पदा का कर रहा है संरक्षण

भूगर्भ जल विभाग

( संजीवगुप्त की रिपोर्ट )
शाहजहांपुर: 10 मार्च, 2026
राज्य में भूगर्भ जल संसाधनों के निरन्तर बढ़ते महत्व एवं इसके प्रभावी प्रबंधन के दृष्टिगत भूगर्भ जल विभाग को प्रदेश की भूजल सम्पदा के सर्वेक्षण, अनुसंधान, नियोजन, विकास व प्रबन्धन तथा भूगर्भ जल दोहन के नियंत्रण एवं भूगर्भ जल संरक्षण, संचयन व विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही रिचार्ज योजनाओं के समन्वय तथा अनुश्रवण हेतु वर्ष 2004 में नोडल एजेंसी घोषित किया गया। प्रदेश के भूगर्भ जल विभाग के मुख्य कार्य व दायित्वों के अन्तर्गत प्रदेश की भूजल सम्पदा का सर्वेक्षण, आकलन, प्रबंधन व नियोजन तथा उससे जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिक अध्ययन, भूगर्भ जल दोहन पर नियंत्रण, भूजल संरक्षण, संचयन तथा रिचार्ज योजनाओं का तकनीकी समन्वय व अनुश्रवण करना है।
भूजल संसाधन का विकास, आकलन एवं सुदृढ़ीकरणः-
प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के 826 विकासखण्ड दिनांक 31-03-2025 के आंकड़ो पर आधारित नवीनतम भूजल संसाधनों के आंकलन के अनुसार 44 विकास खण्ड अतिदोहित श्रेणी, 48 विकास खण्ड क्रिटिकल श्रेणी, 171 विकास खण्ड सेमी क्रिटिकल श्रेणी तथा 563 विकास खण्ड को सुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
इस योजना के अन्तर्गत वितीय वर्ष 2024-25 में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर मापन कार्य के अन्तर्गत प्री-मानसून तथा पोस्ट-मानसून का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा निर्धारित लक्ष्यों के क्रम में 184 नं0 अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नये पीजोमीटर की स्थापना एवं 200 नं० पीजोमीटर के रख-रखाव/अनुरक्षण का कार्य भी शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नये पीजोमीटर की स्थापना के निर्धारित लक्ष्य 233 नं० का कार्य के सापेक्ष 233 नं0 का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा 200 नं० पीजोमीटर के रख-रखाव/अनुरक्षण के सापेक्ष शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

लेख
भूगर्भ जल विभाग

भूगर्भजल विभाग प्रदेश की भूजल सम्पदा का कर रहा है संरक्षण

शाहजहांपुर: 10 मार्च, 2026
राज्य में भूगर्भ जल संसाधनों के निरन्तर बढ़ते महत्व एवं इसके प्रभावी प्रबंधन के दृष्टिगत भूगर्भ जल विभाग को प्रदेश की भूजल सम्पदा के सर्वेक्षण, अनुसंधान, नियोजन, विकास व प्रबन्धन तथा भूगर्भ जल दोहन के नियंत्रण एवं भूगर्भ जल संरक्षण, संचयन व विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही रिचार्ज योजनाओं के समन्वय तथा अनुश्रवण हेतु वर्ष 2004 में नोडल एजेंसी घोषित किया गया। प्रदेश के भूगर्भ जल विभाग के मुख्य कार्य व दायित्वों के अन्तर्गत प्रदेश की भूजल सम्पदा का सर्वेक्षण, आकलन, प्रबंधन व नियोजन तथा उससे जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिक अध्ययन, भूगर्भ जल दोहन पर नियंत्रण, भूजल संरक्षण, संचयन तथा रिचार्ज योजनाओं का तकनीकी समन्वय व अनुश्रवण करना है।
भूजल संसाधन का विकास, आकलन एवं सुदृढ़ीकरणः-
प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के 826 विकासखण्ड दिनांक 31-03-2025 के आंकड़ो पर आधारित नवीनतम भूजल संसाधनों के आंकलन के अनुसार 44 विकास खण्ड अतिदोहित श्रेणी, 48 विकास खण्ड क्रिटिकल श्रेणी, 171 विकास खण्ड सेमी क्रिटिकल श्रेणी तथा 563 विकास खण्ड को सुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
इस योजना के अन्तर्गत वितीय वर्ष 2024-25 में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर मापन कार्य के अन्तर्गत प्री-मानसून तथा पोस्ट-मानसून का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा निर्धारित लक्ष्यों के क्रम में 184 नं0 अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नये पीजोमीटर की स्थापना एवं 200 नं० पीजोमीटर के रख-रखाव/अनुरक्षण का कार्य भी शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नये पीजोमीटर की स्थापना के निर्धारित लक्ष्य 233 नं० का कार्य के सापेक्ष 233 नं0 का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा 200 नं० पीजोमीटर के रख-रखाव/अनुरक्षण के सापेक्ष शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

प्रदेश के कुल 75 जनपदों में भूजल जन-जागरुकता के अन्तर्गत प्रतिवर्ष 15 से 22 जुलाई के मध्य ‘‘भूजल सप्ताह’’ का सफल आयोजन करायज्ञ जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के कुल 75 जनपदों में भूजल जन-जागरुकता के अन्तर्गत 16 जुलाई से 22 जुलाई, 2025 के मध्य ष्भूजल सप्ताहष् का सफल आयोजन कराते हुए जन जागरूकता लाई गई है।
इण्डिया-इजराइल बुन्देलखण्ड वाटर प्रोजेक्ट –
उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जल संसाधन के प्रबन्धन की परियोजना हेतु दिनांक 20 अगस्त, 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार तथा जल संसाधन मंत्रालय, इजराइल के मध्य ‘‘प्लान ऑफ को-आपरेशन’’ हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अन्तर्गत बुन्देलखण्ड में जल प्रबन्धन के क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधार किये जाने हेतु इण्डिया-इजराइल बुन्देलखण्ड वाटर प्रोजेक्ट योजना लागू की गई है। इस परियोजना के अन्तर्गत उन्नत कृषि उपायों, इन्टीग्रेटेड ड्रिप इरीगेशन के द्वारा क्षेत्र में जल संवर्धन के कार्य किया जा रहा है। योजना में बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के 26 ग्रार्मा को सम्मिलित करते हुए हाइड्रोजियोलाजिकल परिस्थितियों के आधार पर डिमान्ड साइड मैनेजमेंट के कार्यों को मुख्य रूप से इजराइल सरकार द्वारा सुझाई गयी नवीनतम तकनीकों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस योजना के प्रथम चरण में चयनित इजराइली कम्पनी द्वारा फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित की गयी, जिस पर अनुमोदन प्रदान किया जा चुका है। साथ ही इजराइली फर्म द्वारा जनपद-झांसी के विकास खण्ड-बडागांव के अन्तर्गत ग्राम-गंगावली में मिनी पायलेट प्रोजेक्ट तैयार कर उपलब्ध कराया गया है, जिस पर च्थ्।क् से अनुमोदन के उपरान्त नियमानुसार ई-निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर अनुबन्ध गठन किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश अटल भूजल योजना
प्रदेश में अटल भूजल योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 88 अतिदोहित/क्रिटिकल विकास खण्डों में वाटर सिक्योरिटी प्लान का विकास तथा 88 मध्यम गहरे पीजोमीटर की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष 04 नं० मध्यम गहरे पीजोमीटर की स्थापना का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा शेष कार्य प्रगति पर है। साथ ही प्रदेश के इन 88 विकास खण्डों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग की स्थापना किये जाने हेतु कुल 56000 वर्ग मीटर का लक्ष्य निर्धारित है, जिस हेतु आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
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प्रदेश के कुल 75 जनपदों में भूजल जन-जागरुकता के अन्तर्गत प्रतिवर्ष 15 से 22 जुलाई के मध्य ‘‘भूजल सप्ताह’’ का सफल आयोजन करायज्ञ जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के कुल 75 जनपदों में भूजल जन-जागरुकता के अन्तर्गत 16 जुलाई से 22 जुलाई, 2025 के मध्य ष्भूजल सप्ताहष् का सफल आयोजन कराते हुए जन जागरूकता लाई गई है।
इण्डिया-इजराइल बुन्देलखण्ड वाटर प्रोजेक्ट –
उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जल संसाधन के प्रबन्धन की परियोजना हेतु दिनांक 20 अगस्त, 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार तथा जल संसाधन मंत्रालय, इजराइल के मध्य ‘‘प्लान ऑफ को-आपरेशन’’ हस्ताक्षरित किया गया है, जिसके अन्तर्गत बुन्देलखण्ड में जल प्रबन्धन के क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधार किये जाने हेतु इण्डिया-इजराइल बुन्देलखण्ड वाटर प्रोजेक्ट योजना लागू की गई है। इस परियोजना के अन्तर्गत उन्नत कृषि उपायों, इन्टीग्रेटेड ड्रिप इरीगेशन के द्वारा क्षेत्र में जल संवर्धन के कार्य किया जा रहा है। योजना में बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के 26 ग्रार्मा को सम्मिलित करते हुए हाइड्रोजियोलाजिकल परिस्थितियों के आधार पर डिमान्ड साइड मैनेजमेंट के कार्यों को मुख्य रूप से इजराइल सरकार द्वारा सुझाई गयी नवीनतम तकनीकों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस योजना के प्रथम चरण में चयनित इजराइली कम्पनी द्वारा फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित की गयी, जिस पर अनुमोदन प्रदान किया जा चुका है। साथ ही इजराइली फर्म द्वारा जनपद-झांसी के विकास खण्ड-बडागांव के अन्तर्गत ग्राम-गंगावली में मिनी पायलेट प्रोजेक्ट तैयार कर उपलब्ध कराया गया है, जिस पर च्थ्।क् से अनुमोदन के उपरान्त नियमानुसार ई-निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर अनुबन्ध गठन किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश अटल भूजल योजना
प्रदेश में अटल भूजल योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 88 अतिदोहित/क्रिटिकल विकास खण्डों में वाटर सिक्योरिटी प्लान का विकास तथा 88 मध्यम गहरे पीजोमीटर की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष 04 नं० मध्यम गहरे पीजोमीटर की स्थापना का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा शेष कार्य प्रगति पर है। साथ ही प्रदेश के इन 88 विकास खण्डों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग की स्थापना किये जाने हेतु कुल 56000 वर्ग मीटर का लक्ष्य निर्धारित है, जिस हेतु आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
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आंगनवाड़ी से घूस मांगने के आरोप में एटा के सीडीओ सस्पेंड

एटा में प्रत्येक आंगनबाड़ी से 10 हजार हजार रुपए रिश्वत मांगने का सीडीओ पर आरोप, शासन ने लिया संज्ञान

एटा 10 मार्च उप्रससे। जनपद के मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र नारायण मिश्रा ने प्रत्येक आंगनबाड़ी से 10 हजार रुपये की मांग करते हुए डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर संजीव पचौरी के समक्ष रखी।

सूत्रों ने बताया मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र नारायण मिश्रा ने डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर संजीव पचौरी से “10 हजार की व्यवस्था” कराने की बात की हैं। संजीव पचौरी पोषण अभियान के तहत डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर के पद पर तैनात हैं।

यह मामला आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती से जुड़ा है। आंगनबाड़ी का रिजल्ट 10 तारीख के बाद आउट होगा।

सीडीओ ने डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर से आत्मीयता जताते हुए पैसों के लेन-देन की बात की और अपने “हिस्से” की चर्चा की। जब डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर ने असहजता व्यक्त करते हुए पूछा कि यह कैसे होगा, तो सीडीओ ने कथित तौर पर कहा, “क्या कैंडिडेट से लिया नहीं जा रहा है?”प्रत्येक कैंडिडेट से 10000 रुपए चाहिए। इस बात को सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। नगेंद्र नारायण मिश्रा पदोन्नत होकर बीडीओ से सीडीओ बने हैं और वर्तमान में एटा में तैनात हैं। इस घटना का संज्ञान लेते हुए शासन ने मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र नारायण मिश्र को सस्पेंड कर दिया है।

बलिया में रसोई गैस के लिए हाहाकार!

लगन और रमजान के बीच लगी लंबी कतारें, कालाबाजारी की शिकायत पर प्रशासन अलर्ट

बलिया – जिले में इन दिनों रसोई गैस को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। लगन के सीजन और पवित्र माह रमजान के बीच अचानक गैस सिलेंडरों की मांग इतनी बढ़ गई है कि गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। बेल्थरारोड, नगरा, रसड़ा और सिकंदरपुर समेत कई इलाकों में गैस के लिए मारामारी की स्थिति है। नौबत यहां तक आ गई है कि व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ रही है और लोग मुख्यमंत्री पोर्टल तक पर कालाबाजारी की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।

जिले में हालात यह हैं कि लोग भोर से ही तीन-तीन घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। यह समस्या होली के पहले से ही बनी हुई है। बेल्थरारोड में प्रतिदिन गैस की मांग करीब 1500 सिलिंडर तक पहुंच गई है, जबकि आपूर्ति महज 675 की हो पा रही है। सोमवार को छुट्टी के दिन 525 सिलेंडर बंटे, लेकिन कतार में 1000 से ज्यादा लोग खड़े बताये गये । नगरा ब्लॉक के इंदरपुर में तो गैस के लिए इतनी मारामारी हुई कि वितरण रोकना पड़ा और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की खबरों के बीच गैस महंगी होने की अफवाहों ने भी आग में घी का काम किया है। लोग गैस डंप करने में जुट गए हैं। इसी बीच, बेल्थरारोड के वरिष्ठ अधिवक्ता राशिद कमाल पाशा ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि गैस वितरण करने वाले डिलीवरी बॉय फोन बंद किए हुए हैं और एजेंसी संचालक भोली-भाली जनता को परेशान कर कालाबाजारी कर रहे हैं। शिकायतों का संज्ञान लेते हुए आपूर्ति निरीक्षक विजय कुमार राय ने स्थानीय एचपी गैस गोदाम का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस की कोई किल्लत नहीं है, बल्कि लोग घबराहट में स्टॉक कर रहे हैं। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया है कि ग्रामीण इलाकों में गाड़ियां भेजी जा रही हैं और कोई भी बिना गैस के वापस नहीं लौटेगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि किसी ने ब्लैक में गैस बेची, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन भले ही गैस की पर्याप्त कमी न होने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीन पर जनता की परेशानी साफ नजर आ रही है। भारत मीडिया भी आपसे अपील करता है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के हिसाब से ही गैस लें, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

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