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कार न मिलने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी, ससुराल पक्ष पर केस दर्ज

March 17, 2026

कार न मिलने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी, ससुराल पक्ष पर केस दर्ज

हाथरस। क्षेत्र में एक विवाहिता ने 15 मार्च रविवार देर रात अपने पति, ससुर और सास के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली में तहरीर देते हुए पीड़िता भूमिका दीक्षित ने बताया कि उनकी शादी 16 फरवरी 2021 को दिल्ली निवासी अक्षय भारद्वाज के साथ हुई थी। शादी में पीड़िता के परिवार ने अपनी सामथ्र्य के अनुसार नकदी और सोने के आभूषण तथा अन्य सामान दिया था। लेकिन दहेज लालची ससुराल वालों की भूख इससे भी शांत नहीं हुई। आरोप है कि शादी के महज एक सप्ताह बाद ही उसे यह कहकर प्रताड़ित किया जाने लगा कि शादी में कार नहीं दी गई। पीड़िता का आरोप है कि उसका पति अक्षय अक्सर शराब के नशे में धुत होकर उसके साथ बेरहमी से मारपीट करता था। ससुर द्वारा भी मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न और बढ़ गया। पीडिता ने पुलिस को बताया कि ससुराल वालों ने उसे डरा-धमक कर एक खाली कागज पर जबरन हस्ताक्षर भी करा लिए थे। अपनी जान को खतरे में देख, पीड़िता 22 फरवरी को किसी तरह घर से भागकर अपनी मौसी के यहां सासनी पहुंची और आपबीती सुनाई। कोतवाली प्रभारी अवधेश कुमार ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने पति अक्षय भारद्वाज, ससुर उपेन्द्र भारद्वाज और सास मिथिलेश के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

बीवी ने मिटाया सिंदूर: प्रेमी का प्यार पाने के लिए कातिल बनी सुनीति

अवैध संबंध में रोड़ा बना पति, पत्नी ने रची हत्या की साजिश
मैनपुरी 16 मार्च 26,  किशनी इलाके के गांव सुल्तानपुर निवासी डेयरीकर्मी कमलेश यादव की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। अवैध संबंध में रोड़ा बने पति को रास्ते से हटाने के लिए पत्नी ने ही हत्या की साजिश रची थी।
दरअसल, मैनपुरी के किशनी इलाके के गांव सुल्तानपुर निवासी कमलेश यादव कासगंज स्थित डेयरी पर काम करता था, उधर कमलेश की गैर मौजूदगी में 28 साल का सिथलेश घर पर आता था। कमलेश की पत्नी सुनीति(40) उम्र में सिथलेश से 12 साल बड़ी थी। उससे प्रेम संबंध हो गए थे।
यह सिलसिला चार साल से चल रहा था, मगर। सब कुछ जानते हुए भी कमलेश कुछ भी नहीं कर पा रहा था। इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है वह थी कि सिथलेश और कमलेश का साथ उठना बैठना और शराब पीना था।
सिथलेश अच्छा खासा कमाता था और कमलेश को भी अपने साथ रखने के लिए कहता रहता था। कमलेश ने कुछ समय से पत्नी पर सख्ती कर दी थी, जिससे वह प्रेमी सिथलेश से नहीं मिल पा रही थी।
इसके बाद सुनीति ने 12 साल छोटे प्रेमी सिथलेश से कमलेश को रास्ते से हटाने के लिए कहा। इसके बाद सिथलेश ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर कमलेश की हत्या की साजिश रची थी।
तीन बार नाकाम हो चुका था आरोपी
एसपी सिटी ने बताया कि 14 फरवरी और 15 फरवरी को आरोपी सिथलेश कासगंज की डेयरी पर गया था। उसने हत्या करने के इरादे से कमलेश को बुलाया था। मगर वह नहीं आया। 16 फरवरी को जब कमलेश आया तो उसके साथ डेयरी का एक कर्मी था। इस वजह से आरोपी कामयाब नहीं हो सका। 20 फरवरी को कमलेश छुट्टी लेकर घर आ रहा था। इस पर आरोपी और उसके साथियों ने घर छोड़ने की बात कहते हुए उसे कार में बैठाया और रास्ते में हत्या कर डाली।
आपस में व्हाट्सएप कॉल पर बात करते थे आरोपी
प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह ने बताया कि कमलेश की हत्या करने के बाद सभी आरोपी सतर्क हो गए थे। वे आपस में बात करने के लिए व्हाट्सएप कॉल का प्रयोग करते थे। हत्या कर शव को जब खेत में फेंका गया, तब सभी के मोबाइल बंद थे।
आरोपियों के कब्जे से कार, मोबाइल और अन्य सामान बरामद
पुलिस ने कमलेश हत्याकांड में पत्नी और प्रेमी सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त कार, तमंचा-कारतूस, तीन मोबाइल फोन व अन्य सामान बरामद किया है। सभी को जब्त कर पुलिस साक्ष्य के तौर पर पेश करेगी।
अवैध संबंध में रोड़ा बना पति, पत्नी ने रची हत्या की साजिश
गांव सुल्तानपुर निवासी डेयरीकर्मी कमलेश यादव की हत्या अवैध संबंध में रोड़ा बनने पर पत्नी ने कराई थी। इस वारदात को प्रेमी ने दो साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था। किशनी पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया है। पत्नी सहित सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

शहीद अविनाश यादव की अंतिम यात्रा में उमड़ा देश भक्ति का सैलाब

मैनपुरी, 16 मार्च 26 जनपद के लाल सूबेदार अविनाश यादव जम्मू कश्मीर में सेना के ऑपरेशन मेघदूत के दौरान शहीद हो गए। रविवार को शहीद सूबेदार का शव गांव पहुंचा। यहां शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हजारों की भीड़ ने शहीद के जयकारे लगाए। पैतृक गांव करुआमई नगरिया में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।
बेवर क्षेत्र के गांव करुआमई नगरिया निवासी सेवानिवृत्त हवलदार गिरीश चंद्र का छोटे पुत्र अविनाश यादव मई 2003 में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में सियाचिन में उनकी तैनाती थी। यहां सेना के ऑपरेशन मेघदूत के दौरान आठ मार्च की देर शाम उनकी हालत बिगड़ गई। सेना के अधिकारियों के अनुसार उन्हें हार्टअटैक आया, जिसके चलते पहले उनका लेह स्थित अस्पताल में उपचार चला। सुधार न होने पर उन्हें मिलिट्री हॉस्पिटल चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। यहां उपचार के दौरान 13 मार्च को उनका निधन हो गया। जैसे ही यह दुखद सूचना उनके परिवार और गांव तक पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार की दोपहर जैसे ही सेना के जवान उनका पार्थिव शरीर लेकर पैतृक गांव पहुंचे। हजारों की संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और आसपास के लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। लोगों ने भारत माता की जय और शहीद अविनाश यादव अमर रहें के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी। सेना के जवानों ने शहीद के शव को सशस्त्र सलामी दी। बेटे कर्तव्य यादव ने शहीद के शव को मुखाग्नि दी।
डीएम, एसपी सहित जन प्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
शहीद सूबेदार अविनाश यादव के शव को गांव करुआमई नगरिया में आगरा से सेना के अधिकारी कैप्टन अनुभव सुमन और कैप्टन एसपी मन्हास के नेतृत्व में सेना की टुकड़ी लेकर पहुंची। यहां श्रद्धांजलि देने वालों में भोगांव से भाजपा विधायक रामनरेश अग्निहोत्री, जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह, एसपी गणेश प्रसाद साहा, सपा जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ग्रुप कैप्टन आरके शर्मा, नरेंद्र यादव व सैनिक कल्याण बोर्ड का स्टाफ मौजूद रहा।
ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा भी रहे अविनाश यादव
सूबेदार अविनाश यादव अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद मई 2025 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी हिस्सा रहे थे। भाई आलोक ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में अविनाश यादव सेना के ज्वाइंट ऑपरेशन के सदस्य थे। आलोक के आंसू नहीं थम रहे थे बार-बार वह यही कह रहे थे कि भाई हमेशा कहता था कि देश हित के लिए कभी पीछे नहीं हटूंगा और वह अपने कर्तव्य का पालन करते हुए शहीद हो गया।
मां से किया था 20 मार्च को छुट्टी पर आने का वादा
शहीद अविनाश की पत्नी साधना अपनी बेटी अंशिका यादव और बेटा कर्तव्य यादव उर्फ कृष्णा के साथ वर्तमान में जयपुर में निवास करते हैं। साधना दोनों बच्चों की वहां पढ़ाई करा रही थी। दो फरवरी को बेटी का झांसी में बीईएमएस में एडमिशन कराने के लिए अविनाश अपने बड़े भाई आलोक के साथ झांसी पहुंचे थे। इसी दौरान मां बीना देवी से फोन पर बात हुई तो अविनाश ने कहा था कि वह 20 मार्च को छुट्टी पर घर आएंगे। ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था दिए गए समय से पांच दिन पहले तिरंगे में लिपटकर अविनाश का शव गांव पहुंचा। मां बीना देवी बार-बार रो-रोकर यही कह रही थी कि बेटा तुम्हें तो 20 मार्च को घर आना था पांच दिन पहले कैसे आ गए।
फोटो परिचय- शहीद को श्रद्धांजलि देते हुए अधिकारी व अन्य

पंचायत में खूनखराबा करने वाला दामाद पुलिस मुठभेड़ में ढेर

सास-साले की चाकू से हत्या के बाद फरार था आरोपी, पुलिस पर फायरिंग के बाद जवाबी कार्रवाई में लगी गोली

बरेली। इज्जतनगर थाना क्षेत्र में पंचायत के दौरान सास और साले की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी अफसर उर्फ बौरा को मंगलवार तड़के पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर आरोपी की घेराबंदी की गई थी। खुद को पुलिस से घिरा देख उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। घायल आरोपी को जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

इज्जतनगर थाना क्षेत्र के गांव रहपुरा चौधरी में सोमवार को पारिवारिक विवाद सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई थी। बताया जा रहा है कि आरोपी अफसर खान का अपनी 24 वर्षीय पत्नी सायमा से लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के लोग गांव में बैठे थे। इसी दौरान अचानक आरोपी अफसर खान ने चाकू निकाल लिया और वहां मौजूद लोगों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

सास और साले की मौके पर मौत

हमले में उसकी 45 वर्षीय सास आसमा और 19 वर्षीय साला आदिल गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन और ग्रामीण उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

पत्नी भी गंभीर रूप से घायल

आरोपी ने अपनी पत्नी सायमा पर भी हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

घटना से गांव में मचा हड़कंप

घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल फैल गया। सूचना मिलने पर इज्जतनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश में टीमें लगा दी थीं।

घेराबंदी के दौरान पुलिस पर की फायरिंग

मंगलवार तड़के पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी इलाके में छिपा हुआ है। पुलिस ने घेराबंदी की तो आरोपी ने खुद को घिरा देख पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लग गई।

अस्पताल ले जाते समय हुई मौत

घायल आरोपी को पुलिस जिला अस्पताल ले जा रही थी, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की आगे की जांच की जा रही है।

भाजपा की शहर कमेटी में कई जातियों को नहीं मिली जगह

सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए भाजपाई, जबकि महिला आरक्षण भी पूरा नहीं, चार‌ महिलाएं पदाधिकारी
पिछली बार चार की बजाय तीन महामंत्री, सिख समुदाय भी छूटा

Post on 17.3.26
Tuesday, Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
सालों बाद घोषित भाजपा की नई कमेटी में कई बड़ी जातियों को जगह नहीं मिल पाईं।धोबी , पाल, कश्यप व प्रजापति के अलावा ठाकुर बिरादरी भी उपेक्षित हो गई। साथ ही भाजपा का महिला आरक्षण का भी कोटा पूरा नहीं है। पिछली बार के मुकाबले अबकी तीन महामंत्री ही बनाए गए।
पार्टी की पिछली शहर कमेटी 2019 में घोषित हुईं थीं। धर्मेन्द्र मिश्रा अध्यक्ष बने और फिर कार्यकारिणी की घोषणा हुईं। करीब सवा छह साल बाद शहर कमेटी का ऐलान हुआ। पार्टी नेतृत्व ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कार्यकर्ताओं को समायोजित कर बूस्टर खुराक देने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने
सभी जातियों को शामिल कर समायोजित करने का प्रयास किया पर घोषित कमेटी में कई बड़ी जातियों को अहमियत नहीं मिल सकी।कश्यप, पाल, धोबी,
प्रजापति आदि के अलावा ठाकुर को भी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।
सबसे ज्यादा महिला आरक्षण का कोटा अधूरा रहा।20 पदाधिकारियों की कमेटी में चार महिलाएं शामिल की गई। 2019 के मुकाबले इस बार कार्यकारिणी में बदलाव करने की कोशिश की गई। धर्मेन्द्र मिश्रा के संग दो पंजाबी गिरीश भंडूला और कमल गुलाटी थे। इस बार अध्यक्ष इस समुदाय से महिला को जगह मिली। जबकि कमल गुलाटी को नामित पार्षद बनाया गया है।

पूर्व पार्षद अब शहर कमेटी में शामिल
नगर निगम में पूर्व पार्षद हेमराज सैनी, अशोक सैनी को महानगर उपाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि हेमराज की पुत्रवधू निगम की चुनिंदा पार्षद है। जबकि कपिल देव भी कमेटी में उपाध्यक्ष बने। हालांकि दो चुनाव पहले उनकी पत्नी निगम की पार्षद रह चुकीं हैं।

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