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दुष्कर्म में बुलंदशहर के दोषी को बीस साल की सजा पाँक्सो कोर्ट-1 ने दोषी पर लगाया 96 हजार जुर्माना

February 25, 2026

दुष्कर्म में बुलंदशहर के दोषी को बीस साल की सजा पाँक्सो कोर्ट-1 ने दोषी पर लगाया 96 हजार जुर्माना

Post on 25.2.26
Wednesday time 6.45
Moradabad, Rajesh Bhatia

मुरादाबाद, 25 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
बुलंदशहर के युवक को नाबालिग को अगवा व दुष्कर्म में बीस साल की सजा मिली है।
बुधवार को विशेष न्यायाधीश- पाँक्सो कोर्ट-1 अविनाश चंद्र मिश्र ने बताया फैसला सुनाया।दस साल पूर्व घटना में साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार देते हुए युवक पर 96 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
मूंढापांडे थाने में एक छात्रा के अपहरण-दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज को तहरीर दी गई थी। वादी की ओर से रिपोर्ट में कहा गया कि कक्षा 10 छात्रा है। 15 मई, 2016 को रिजल्ट जारी हुआ। एक फोन आने के बाद वह मुरादाबाद चलीं गईं। पर पीड़िता का बुलंदशहर के डिबाई निवासी राजेंद्र सिंह अगवा कर ले गया। इस दौरान उसने दुष्कर्म किया। दो दिन बाद पीड़िता जैसे तैसे वापस घर पहुंची और परिजनों को बात बताई। पहले मूंढापांडे में तहरीर दी गई। पर घटनास्थल कटघर होने से पाँक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पाँक्सो) कोर्ट में हुईं। विशेष लोक अभियोजक अभिषेक भटनागर व मनोज कुमार वर्मा के अनुसार अदालत में गवाह और पीड़िता के बयान हुए। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद राजेन्द्र सिंह को दोषी ठहराया। अदालत ने बीस साल की सजा और अलग -अलग धाराओं में सजा व जुर्माना लगाया। दोषी पर 96 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसमें आधी रकम प्रतिकर के रूप में पीड़िता को देने के आदेश भी दिए।

शंकराचार्य के समर्थन में कांग्रेसी, कलेक्ट्रेट पर शंख बजाकर कांग्रेसियों का शंखनाद

Post on 25.2.26
Wednesday, time 5.45 PM
Moradabad, Rajesh Bhatia

मुरादाबाद,25 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बुधवार को कांग्रेसी सड़क पर उतरे। कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए शंख बजाकर शंखनाद किया और उनके व शिष्य के खिलाफ झूठे मुकदमे की स्वतंत्रत व उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग की। बाद में डीएम कार्यालय को ज्ञापन सौंपा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती व शिष्य के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर कांग्रेसियों ने विरोध दर्ज कराया। प्रदेश नेतृत्व के आहृवान पर बुधवार को जिले भर से कांग्रेसी एकत्रित हुए। कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनोद गुंबर ने शंख बजाकर विरोध की शुरुआत की। शहर अध्यक्ष हाजी जुनैद इकराम की अगुवाई में तमाम कांग्रेसी नारेबाजी करते हुए डीएम कार्यालय के सामने पहुंचे और शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज मुकदमे पर कड़ी आपत्ति जताई। कांग्रेस अध्यक्षों ने कहा कि षडयंत्र के तहत शंकराचार्य और शिष्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मुकदमा कायम किया गया। नेताओं ने कहा कि सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाना हिन्दुओं की आस्था पर आघात है।
विरोध जताते हुए कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया और मामले की किसी केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग की।
इस मौके पर पूर्व विधायक फूल कुंवर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष असलम खुर्शीद, पूर्व बार अध्यक्ष अमीरुल हसन जाफरी, अजय सारस्वत सोनी,एडवोकेट मो अब्बास,अरशद परवेज, निगम पार्षद मोअज्जम, कमर सलीम व नजीमुद्दीन कातिब, नजाकत ठेकेदार, सुहाना फातिमा, फहीम मिर्जा, मुशाहिद चौधरी, अल्ताफ, महबूब हसन, हाजी अनवर मुमताज,अनिल शर्मा, अशोक कपूर आदि रहे।

एआई सम्मेलन – भारत की अभूतपूर्व सफलता और व्यथित कांग्रेस

India AI Impact Summit 2026, New Delhi
मृत्युंजय दीक्षित
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में आए विश्व के बड़े बड़े नेता इस पहल से अचंभित थे और भारत की प्रगति की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे। बड़ी बड़ी एआई कंपनियां व निवेशक भारत के साथ समझौते कर रही थीं। जन सामान्य गर्वित हो रहा था क्योंकि यहाँ भारत की युवा प्रतिभाओं की सराहना हो रही थी। सदा से ही राष्ट्र विमुख रही कांग्रेस पार्टी से ये देखा नहीं गया और उनके कुछ चुनिंदा कार्यकर्ता वहां अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने पहुँच गए। वास्तव में अब कांग्रेस पार्टी अब प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा का विरोध करते -करते पूरी तरह भारत विरोधी हो गई है।
कांग्रेस का यह विरोध ऐसा ही था जैसे जब प्राचीन काल में जब ऋषि गण अपने आश्रमो मे किसी अच्छे कार्य के लिए यज्ञादि करते थे तो कुछ राक्षस उस यज्ञ को अपवित्र करने के लिए यज्ञकुंड में हड्डियां डालकर उसे अपवित्र करने का प्रयास करते थे। कांग्रेस ने जो कृत्य विदेशी मेहमानों के समक्ष किया है उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस घोर अराजकतावादी बन चुकी है जिसकी अब सारी उम्मीदें समाप्त होती जा रही हैं।
एआई समिट कांग्रेस द्वारा की गई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से भारत का जेन- जी भी नाराज़ है जिसको भड़काकर कांग्रेस सड़क पर लाना चाहत है। भाजपा कांग्रेस द्वारा दिए गए इस अवसर को गंवाना नहीं चाहती । पार्टी की तरफ से संपूर्ण भारत में कांग्रेस कर्यालयों के बाहर धरना -प्रदर्शन आयोजित हो रहे हैं। मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी भी कांग्रेस पर हमलावर हुए ओैर कहा कि कांग्रेस ने एआई समिट को अपनी नग्न राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि देश तो जानता ही है कि आप पहले से ही नंगे हो फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी? यह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अब वैचारिक रूप से कितनी दिवालिया और दरिद्र हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि जब मैं कांग्रेस की आलोचना करता हूं तो ऐसी सुर्खियां न चलाएं कि मोदी ने विपक्ष पर हमला बोला। कांग्रेस को बचाने की ये चालाकियां बंद करें।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस को सपा बसपा सहित कई अन्य छोटे क्षेत्रीय दलो का समर्थन नहीं मिला है जिनको कांग्रेस इंडी ब्लॉक की पार्टियाँ कहती है। कांग्रेस के इस कृत्य का लालू यादव की पार्टी राजद ने भी कड़ा विरोध किया है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी विरोध किया है। कांग्रेस ने इस तरह का प्रदर्शन करके सहयोगी दलों के बीच भी अपनी फजीहत करवा ली है। आगामी समय में यह दल कांग्रेस से दूरी बनाने पर विचार भी कर सकते हैं यही कारण हे कि इन सभी दलों की प्रधानमंत्री मोदी ने सराहना की है।
कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता जिस प्रकार टी वी चैनलों व सोशल मीडिया पर इस हरकत को सही ठहरा रहे हैं उससे स्पष्ट है कि यह कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ही योजना थी। उनका कहना है कि लोकतंत्र मे अपनी बात कहने और सरकार का विरोध करने का अधिकार सबको है, उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की इस हरकत से पुराने परंपरागत कांग्रेसी से भी खुश नहीं हैं और अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे है। पुराने कांग्रेस नेताओं को इस घटना से कोई हैरानी नहीं है अपितु उनका कहना है कि यह बदली हुई कांग्रेस की बदलती हुई संस्कृति की निशानी है। कांग्रेस नेता शशि थरूर भी एआई समिट को अत्यंत सफल आयोजन बता रहे हैं और कांग्रेस के अर्धनग्न प्रदर्शन की निंदा कर रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में कांग्रेस ने भारत की छवि व भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया और इस तरह होली के स्वागत में अपने मुंह पर ही कालिख मल ली।
कांग्रेस के नेताओं की दिली इच्छा रही है कि किसी न किसी प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की छवि को पूरी दुनिया में खराब किया जाए और भारत में बांग्लादेश व नेपाल जैसी अराजकता का वातावरण पैदा कर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जाए किंतु उसका यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है और यही कारण है कि कांग्रेस हताश होकर नंगी राजनीति पर उतर आई है।

Mratunjay Dixit, Journalist lucknow

मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. – 9198571540

लोकपर्व होली: परम्परा एवं प्रतीक चिंतन – डाॅ० राकेश सक्सेना

एटा 25 फरवरी उप्रससे। भारत में होली एक लोकपर्व है जिसका वर्तमान स्वरूप पौराणिक कथाओं विशेषकर प्रह्लाद-होलिका प्रसंग और वसंतोत्सव की परम्परा से जुड़ा है। जैमिनी रचित पूर्व मीमांसा सूत्र और उनसे सम्बन्धित काठक गृह्य सूत्र में होली ( होलिका ) का उल्लेख एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार के रूप में मिलता है जो ईसा पूर्व से मनाया जा रहा है। यह सूत्र बताते हैं कि होली विवाहित महिलाओं द्वारा अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए की जाने वाली एक पूजा थी जो पूर्णमासी को मनाई जाती थी। प्राचीन उत्सव के रूप में इसको मान्यता प्राप्त है, ईसा पूर्व ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। वैदिक साहित्य में वसंतोत्सव की भावना, अग्नि की पवित्रता, ऋतु परिवर्तन का उत्सव तथा सामूहिक मंगल कामना के आधार पर होली का सांस्कृतिक बीज रूपांतरण वैदिक परम्परा में निहित है, जिसका वर्तमान स्वरूप कालांतर में पौराणिक और लोक परम्पराओं के साथ विकसित हुआ।
होली का इतिहास कई पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं से जुड़ा है। राधा-कृष्ण की प्रेमलीला, हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद( बुराई पर अच्छाई की जीत ), कामदेव की कथा (शिव के ध्यान को भंग करने के लिए कामदेव ने पुष्प वाण चलाया जिससे क्रोधित होकर शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया, बाद में रति की प्रार्थना पर शिव ने उन्हें पुनर्जीवित किया) कामदेव के पुनर्जीवन को कुछ क्षेत्रों में होली के रूप में मनाते हैं। होली को प्राचीन ग्रंथों में ‘ वसंतोत्सव ‘ कहा गया है और यह फाल्गुन मास में मनाया जाता है इसलिए इसे फाग भी कहते हैं। यह ऋतु परिवर्तन और नई फसल के स्वागत का उत्सव भी है जिसमें किसान अग्नि को अन्न समर्पित करते हैं।
मान्यता है कि इस उत्सव की शुरुआत झाँसी मुख्यालय से करीब सत्तर कि०मी० दूर ‘एरच’ कस्बा से हुई है तो कुछ लोगों का मानना है कि हरदोई से हुई जिसका उल्लेख गजेटियर्स में भी मिलता है। बहरहाल इस पर्व को मनाने की पृष्ठभूमि में मुख्य कथा हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद की है। हिरण्यकशिपु नामक असुर राजा अपने पुत्र प्रह्लाद से घृणा करता था क्योंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। उसने अपनी बहन होलिका (जिसे आग से न जलने का वरदान था) को प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने का आदेश दिया परिणामस्वरूप होलिका जल गई लेकिन प्रह्लाद बच गया। यह बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है जिसे होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। असुर राजा हिरण्यकशिपु की बहन और प्रह्लाद की मौसी होलिका से ही ‘ होली ‘ शब्द की व्युत्पत्ति हुई है। इस कथा में एक प्रतीकात्मक संदेश भी निहित है। हिरण्यकशिपु का अर्थ है– हिरण्य (सोना) और कशिपु (पलंग) अर्थात स्वर्ण पलंग वाला। हिरण्यकशिपु एक ऐसा राजा था जो अपार धन- सम्पत्ति में डूबा हुआ था जिसके कारण वह सर्वोच्च शक्ति के रूप में सभी से अधीनता की माँग करता था। प्रह्लाद का अर्थ है– जो स्वाभाविक रूप से सुख और शान्ति का भाव उत्पन्न करता है। यह शब्द ‘ आह्वाद ‘ से आया है जो पुनरुत्थान, ताजगी, आनंद को दर्शाता है। नरसिम्हा द्वारा हिरण्यकशिपु बध से यही शिक्षा प्राप्त होती है कि मनुष्य को अहंकार नहीं करनी चाहिए, अनैतिक जीवनशैली हिंसक अंत की ओर ले जाती है। होलिका दहन की परम्परा इसी कारण से हुई होगी जो दुर्भावना के सामूहिक दहन का प्रतीक बन गया। होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक है। लकड़ियों को एकत्र करके सामूहिक रूप से अग्नि प्रज्वलित करके परिक्रमा लगाना, यह सामूहिकता प्राचीन यज्ञ संस्कृति को जीवंत करती है। यह अनुष्ठान ईर्ष्या, द्वेष व अहंकार के दहन का प्रतीक भी माना जाता है।
होली पर एक-दूसरे के गालों पर रंग, गुलाल,अबीर लगाने की परम्परा है। इसकी पृष्ठभूमि में कथा अनुसार- भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को ग्वालिन राधा से प्रेम हो गया था लेकिन उन्हें इस बात का दु:ख था कि उनकी त्वचा गहरे नीले रंग की है जबकि राधा की त्वचा गोरी। इस दु:ख को दूर करने के लिए उन्होंने खेलते हुए शरारत में राधा के चेहरे पर रंग लगा दिया। माना जाता है कि रंगीन पानी एवं रंग लगाने की परम्परा यहीं से प्रारम्भ हुई। वस्तुत: रंग आनंद ही नहीं देते अपितु हमारे जीवन का आधार भी होते हैं। भारतीय संस्कृति में रंगों का विशेष महत्व रहा है। होली जैसे उत्सव में रंग- प्रेम, सौहार्द और समानता का संदेश देते हैं। रंग मानव की भावनाओं का प्रतीक भी हैं। लाल रंग यदि प्रेम और उत्साह का प्रतीक है तो सफेद शांति और पवित्रता का द्योतक है। हरा रंग समृद्धि और विकास का संकेत देता है तो नीला रंग विश्वास और स्थिरता को दर्शाता है। अत: कहा जा सकता है कि रंग जीवन के प्राण हैं, रंग ही जीवन को ऊर्जा, आनंद के साथ ही साथ जीवन को अर्थ प्रदान करते हैं। जब हमारे विचार सकारात्मक व रंगीन होंगे तभी हमारा जीवन आनंदमय बनेगा। इस प्रकार लोक जीवन से जुड़ा होली का पर्व केवल रंगों का ही नहीं अपितु प्रेम, सद्भाव, एकता,भाईचारे एवं सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

अवैध वसूली में सर्विलांस टीम के प्रभारी समेत पांच पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई, निलंबित

 

Post on 25.2.26
Wednesday, time 8.00 Am
Moradabad, Rajesh Bhatia

मुरादाबाद, 25 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
मेडिकल स्टोर पर अवैध छापेमारी और संचालक को छोड़ने की एवज में मोटी रकम वसूलने में पुलिस कर्मियों पर गाज गिरी है। एसएसपी ने सर्विलांस सेल के प्रभारी समेत पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया। मामला शहर के कोतवाली क्षेत्र में मेडिकल स्टोर का है। विभागीय जांच में सर्विलांस टीम को जिम्मेदार ठहराया गया।
कोतवाली क्षेत्र में रेती स्ट्रीट में उबैद कुरैशी के मेडिकल स्टोर पर सर्विलांस टीम ने छापा मारा। टीम ने अपने को ड्रग विभाग का उड़न दस्ता बताया।टीम ने मेडिकल स्टोर से प्रतिबंधित दवाइयां रखने और बेचने का आरोप लगाते हुए हिरासत में लिया। आरोप है कि टीम ने मेडिकल स्टोर में लगे सीसीटीवी तोड़ दिए और डीवीआर को नष्ट कर दिया। हिरासत में लिए स्टोर संचालक से छोड़ने की एवज में एक लाख रुपए की मांग की गई। सौदेबाजी के बीच संचालक ने चालीस हजार रुपए टीम को दिए।
पूरे मामले की शिकायत संचालक के अधिवक्ता भाई ने पुलिस अधिकारियों से की। एसएसपी सतपाल अंतिल ने मामले की जांच सीओ कटघर से कराईं। जांच में सर्विलांस टीम को जिम्मेदार ठहराया गया। इस पर एसएसपी ने सर्विलांस टीम प्रभारी वीर बोस, सिपाही शिवम चिकारा, मऩोज यादव, यश दहिया विपिन शर्मा को निलंबित कर दिया गया।

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