मैनपुरी। तहसील करहल की ग्राम पंचायत भांती के मजरा दौलतपुर के एक किसान ने मूल जोत से चक हटा देने से आहत हो कर खुदकुशी कर ली। शव झोपड़ी में फंदे पर लटका मिला। किसान ने सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें उन्होंने चकबंदी के लिए रुपये मांगने का आरोप लगाकर आत्महत्या की बात कही।
सूचना पर एसडीएम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची, परिजन से जानकारी लेने के बाद जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया, पुलिस ने किसान के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय स्थित मोर्चरी भेजा
तहसील के कुर्रा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भांती में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत कई किसानों की मूल जोत से चक हटा दिए गए हैं। उन्हें दूसरे स्थान पर चक दिए हैं।किसान संग्राम सिंह ने एक सुसाइड नोट भी लिखा, जो कि परिजन ने वहां पहुंचे अधिकारियों को दिखाया। सुसाइड नोट में चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर किसान का दर्द छलक रहा था, नोट में कहा कि आलू भूड़ में उनका चक नहीं रहा। यह ब्लॉक में गए तो चकबंदी वालों ने रुपये मांगे, उनके पास रुपये नहीं थे, इसलिए खुदकुशी कर ली। सुसाइड नोट में यह भी लिखा था कि उनका शव उनके चक पर ही लगाया जाए, उनकी मूर्ति भी लगवाई जाए। शव का पोस्टमार्टम न कराया जाए। यह भी लिखा था कि उनके जाने के बाद बच्चों की सुनवाई की जाए और नौकरी लगवाई जाए ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत भांती के मजरा गांव तरा में 12 मार्च की रात किसान प्रदीप कुमार की भी मौत हो गई थी।। मृतक किसान की पत्नी ने चकबंदी प्रक्रिया से आहत होकर खुदकुशी करने का आरोप लगाया था।
ग्राम पंचायत के मजरा दौलतपुर के रहने वाले 70 वर्षीय किसान मूल जोत से चक हटाए जाने से आहत थे। उन्होंने अपनी झोपड़ी में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। मंगलवार सुबह जानकारी हुई तो परिजन में चीख पुकार मच गई। रोते बिलखते परिजन चकबंदी प्रक्रिया को गलत बताते हुए डीएम को बुलाने की मांग करने लगे। एसडीएम सुनिष्ठा सिंह, सीओ करहल व पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे
इस सम्बंध में सांसद डिंपल यादव ने किसान की आत्महत्या के मामले में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह को पत्र लिखा है। सांसद ने कहा कि चकबंदी प्रक्रिया के नाम पर जिस प्रकार की घूसखोरी, मनमानी और खुली अनियमिताएं चल रही हैं, वह अत्यन्त गंभीर और अस्वीकार्य हैं। पत्र में कहा गया है कि मृतक द्वारा छोड़े गये पत्र में स्पष्ट रूप से तहसील व चकबंदी अधिकारियों की ओर से अवैध धन की मांग, गलत निर्णय और लगातार उत्पीड़न का उल्लेख किया गया है। सांसद ने प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और उनके विरुद्ध थाने में प्राथमिकी दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई की जाए।
