Web News

www.upwebnews.com

इंडी गठबंधन ने अक्षम्य पाप किया है: योगी आदित्यनाथ

April 19, 2026

इंडी गठबंधन ने अक्षम्य पाप किया है: योगी आदित्यनाथ

Posted on 19.04.2026 Time 06.59 PM Sunday, CM Yogi Adityanath, BJP, UP News, UP Samachar
लखनऊ 19 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पारित नहीं होने देने पर विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन द्वारा किया गया यह कृत्य न केवल नारी सम्मान के खिलाफ है, बल्कि “अक्षम्य पाप” है, जिसके लिए देश की नारी शक्ति उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। विधेयक गिरने के बाद विपक्षी दलों द्वारा जिस प्रकार जश्न मनाया गया और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां की गईं, उसने भारतीय इतिहास के उस पीड़ादायक प्रसंग की याद दिला दी, जब भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण हुआ था। मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र और महिला सम्मान, दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह आचरण विपक्ष की नारी-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। श्री आदित्यनाथ आज बीजेपी ऑफिस में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ने 2014 में सत्ता संभालने पर एक बात बहुत स्पष्ट रूप से कही थी कि देश के अंदर चार ही जातियां हैं- गरीब, युवा, किसान व नारी। भारत को कमजोर करने की नीयत से जिन लोगों ने जातिवाद के नाम पर अपने परिवार का भरण-पोषण किया और देश को लूटा, स्वाभाविक रूप से उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती थी और चेतावनी भी। इसीलिए जब भी प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में कोई प्रगतिशील कदम उठाया गया, कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों ने हमेशा उस प्रगतिशील सोच और देशहित में उठाए जाने वाले कदमों का विरोध किया है।

भारतीय जनता पार्टी के राज्य मुख्यालय पर रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी के साथ पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में विपक्ष के नारी-विरोधी आचरण के प्रति आधी आबादी के मन में भारी आक्रोश है। यह आक्रोश कांग्रेस और इंडी गठबंधन के सहयोगी दलों, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, टीएमसी, डीएमके और अन्य उन दलों के प्रति है, जो इस पाप में भागीदार थे। आधी आबादी में यह आक्रोश साफ देखा जा रहा है कि प्रधानमंत्री जी द्वारा उठाए गए एक-एक कदम, जो समाज के हर वर्ग और देशहित में थे, इंडी गठबंधन ने कैसे बैरियर की तरह खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए षड्यंत्र किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था। जब महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों ने इस बात की मांग की कि यह अधिनियम 2034 के बजाय 2029 में लागू हो, तो उनकी मांग के अनुरूप प्रधानमंत्री जी ने सभी पक्षों से विचार-विमर्श करने के उपरांत नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में जरूरी संशोधन लेकर संसद के विशेष अधिवेशन में इसे पेश किया। कुछ राज्यों ने इस बात की मांग उठाई थी कि कहीं ऐसा न हो कि इसके माध्यम से उनके हक को कम कर दिया जाए। प्रधानमंत्री जी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होते समय स्पष्ट किया था कि किसी का भी हक नहीं लिया जाएगा। इस 33 प्रतिशत आरक्षण को माता-बहनों को उपलब्ध कराने के लिए हम लोकसभा और विधानसभाओं में अतिरिक्त सीटें बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब यह चर्चा में आया कि दक्षिण भारत के राज्य मांग उठा रहे हैं कि उनका हक कम हो जाएगा, तो प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया कि 2011 की जनगणना के अनुसार जो व्यवस्था है, उसी के तहत जैसे उत्तर और पूर्व के राज्यों में सीटें बढ़ेंगी, वैसे ही दक्षिण के राज्यों में भी उसी अनुपात में सीटें बढ़ाई जाएंगी। किसी का हक कम नहीं होगा। सरकार की एकमात्र इच्छा थी कि पूरा सदन मिलकर भारत की नारियों को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को इस संशोधन के साथ पारित कर दे, ताकि 2029 में ही उन्हें उनका अधिकार मिल जाए।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने मुद्दा छेड़ा कि इसमें मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं मिल पा रहा है। ये संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भावनाओं के प्रतिकूल आचरण यहां भी देखने को मिला। जब भारत का संविधान निर्माण हो रहा था, उस समय भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने की मांग उठी थी। तब सभी पक्षों ने इसका विरोध किया था। बाबा साहेब ने इस पर बहुत तीखी टिप्पणी की थी कि एक बार विभाजन हो गया है, अब भारत दूसरे विभाजन के लिए तैयार नहीं हो सकता। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी इसका पुरजोर विरोध किया। उस समय संविधान निर्माण समिति से जुड़े सभी सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो मुस्लिम महिलाओं की बात करते हैं, वे तब कहां थे जब शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस की सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को पूरी तरह वंचित करने का प्रयास किया था? जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस के पाप का परिमार्जन कर ट्रिपल तलाक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया और तय किया कि भारत का कानून शादी-विवाह के मामले में प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से लागू होगा, तब ट्रिपल तलाक के खिलाफ बने कानून का भी कांग्रेस व इंडी गठबंधन के सभी दलों, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, डीएमके ने कड़ा विरोध किया था। यह उनके दोहरे आचरण को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति के लिए किए गए प्रयासों में सबसे पहले ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का प्रस्ताव पास किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने बेटी की रक्षा के लिए भ्रूण हत्या रोकने और लिंगानुपात को सही करने का संकल्प लिया। देश भर में इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया। मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृत्व रक्षा को मजबूत किया गया। बेटी गर्भ में भी सुरक्षित रहे और उसके जन्म के बाद टीकाकरण हो, इसके लिए इंद्रधनुष जैसे कार्यक्रम चलाए गए। परिणाम सामने आए, मातृ और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

 

उन्होंने कहा कि पहली बार देश के इतिहास में 12 करोड़ परिवारों के लिए एक-एक शौचालय बनाए गए। इन शौचालयों ने न केवल स्वच्छता का मानक तय किया, बल्कि नारी गरिमा की रक्षा भी की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत मिशन के कारण इंसेफेलाइटिस जैसी संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करने में हम सफल हुए। 4 करोड़ गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक-एक पक्का मकान उपलब्ध कराया गया। अब हर नारी अपने बच्चों और परिवार को एक सुरक्षित छत दे पा रही है। उत्तर प्रदेश में 65 लाख गरीब परिवारों को इस योजना का लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक, पहली बार भारत की संसद में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक हो गई है। लेकिन इस संख्या को 33 प्रतिशत और आगे चलकर 50 प्रतिशत तक ले जाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी का जो अभिनव प्रयास था, नारी शक्ति वंदन अधिनियम उसमें इंडी गठबंधन, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, टीएमसी, डीएमके जैसे दलों ने बैरियर बनने का काम किया। इन दलों के पास अपने पापों का परिमार्जन करने का एक सुनहरा अवसर था।

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी का नाम लेते हैं, तो यही याद आता है कि “देख सपाई, बिटिया घबराई”। सपा के पास स्टेट गेस्ट हाउस कांड जैसे कृत्यों का पाप धोने का एक अच्छा अवसर था। उन्हें इस अधिनियम को पारित करने में अपना योगदान देना चाहिए था। दुर्भाग्य है कि ये लोग बैरियर बनकर खड़े हो गए। इनका एकमात्र उद्देश्य है कि सब कुछ इन्हें और इनके परिवार को मिले, किसी नारी को न मिले, किसी गरीब को न मिले, किसी युवा को न मिले और किसी किसान को न मिले। यही इनकी युक्ति रही है और इसीलिए ये संसद की कार्यवाही में हमेशा बाधक बनते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस अवसर पर हम प्रधानमंत्री मोदी जी के इस प्रयास के लिए उनका अभिनंदन करते हैं। बिना रुके, बिना थके और बिना डिगे उनके नेतृत्व में देश मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। समाज के प्रत्येक तबके के लिए जो काम किए गए हैं और जो कदम उठाए गए हैं, उन सबके लिए देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य होने के नाते उत्तर प्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी जी के साथ पूर्ण रूप से खड़ा है। हम उनका आभार व्यक्त करते हैं, उनका अभिनंदन करते हैं और उनके प्रयासों की सराहना करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति के मन में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के प्रति जो आक्रोश है, उनके नारी-विरोधी कृत्यों के प्रति जो रोष है, उसमें पूरा एनडीए एकजुट होकर उत्तर प्रदेश की आधी आबादी के साथ खड़ा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के अन्य दलों को अपने इस नारी-विरोधी आचरण के लिए माफी मांगनी चाहिए। लेकिन उनका यह कृत्य अक्षम्य है और किसी भी स्थित में आधी आबादी उन्हें माफ नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने देश की आधी आबादी से, सभी बहनों और बेटियों से अपील की कि इस महिला-विरोधी और नारी-विरोधी आचरण को कभी स्वीकार न करें। यह आचरण वास्तव में देश के विकास को अवरुद्ध करने का है।

17 अप्रैल काला दिवस के रूप में जाना जाएगा – अन्नपूर्णा देवी’

प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है और अब उन्हें राजनीतिक रूप से सशक्त करने की दिशा में ठोस पहल की जा रही थी। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा सार्थक रही, लेकिन विपक्षी दलों कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके ने बिल का विरोध कर महिलाओं की आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाई।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इन दलों ने हमेशा की तरह इस बार भी नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लटकाने, भटकाने और अटकाने की राजनीति अपनाई। इसके लिए 17 अप्रैल काला दिवस के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक और सशक्त हो चुकी हैं तथा हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। महिलाएं अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े होने वालों को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगी। केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को उसका अधिकार नहीं दिया। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का कार्य एनडीए सरकार ने किया। सपा पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने मुखर होकर कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और राहुल गांधी परिवारवाद की राजनीति कर रहे हैं। इन्हें देश की जनता के हितों से कोई लेना देना नहीं है।

इस अवसर पर एनडीए घटक दलों के नेता सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद, प्रदेश सरकार में मंत्री व लोक दल नेता अनिल कुमार, अपना दल विधायक राम निवास वर्मा सहित महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती गीता शाक्य, प्रदेश महामंत्री श्रीमती प्रियंका रावत, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव व श्रीमती चारू चौधरी, राज्य महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष श्रीमती कमलावती सिंह, विधायक श्रीमती जयदेवी उपस्थित रहीं।

Mathura News चौमुहां में धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम जयंती

मथुरा(चौमुहां) कस्बा चौमुहां में भगवान परशुराम जयंती बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाई गई। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज के विप्र बंधुओं ने भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के कोषाध्यक्ष हेमंत शर्मा ने सभी विप्र बंधुओं का हृदय से स्वागत किया। अध्यक्षता कर रहे हुकम चंद शर्मा ने भगवान परशुराम को आदर्श बताते हुए उनके पदचिह्नों पर चलने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर रमाकांत गौड़ ने भगवान परशुराम के अवतार एवं उनकी शक्तियों का वर्णन करते हुए उन्हें जीवन में अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में ब्राह्मण समाज चौमुहां के अध्यक्ष यतेंद्र कुमार भारद्वाज ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में राहुल शर्मा, गौरव दीक्षित, लखन शर्मा, कुक्की पंडित, सुनील शर्मा, भानू मेंबर, हरीश शर्मा, खेमचंद शर्मा, गणेश शर्मा, छोटू, मोनू पंडित, त्रिनेत्र मोहन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

लोजपा (रामविलास) की वर्चुअल बैठक, संगठन मजबूती पर दिया गया जोर

Mathura News

Mathura Samachar

मथुरा। अतुल कुमार जिंदल।लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पवन कुमार वर्मा द्वारा एक जूम मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें संगठन को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में पवन कुमार वर्मा ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में प्रदेश अध्यक्ष का दौरा किया जाएगा। साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रभारी एवं सांसद अरुण भारती का भी प्रदेशभर में दौरा प्रस्तावित है।
उन्होंने सभी प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों से आह्वान किया कि वे मिलकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें, ताकि पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर पर सुदृढ़ हो सके।
बैठक में यह भी बताया गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे ध्यान में रखते हुए संगठन विस्तार और मजबूती को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
इस वर्चुअल बैठक में पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

महिला आरक्षण: नारी शक्ति या सत्ता का नया मुखौटा?

 (आरक्षण, नैतिकता और राजनीति का असली सवाल)
Dr Priyanka Saurabh Writer, Poet
– डॉ. प्रियंका सौरभ
देश में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, तो इसे “ऐतिहासिक” बताया गया, संसद में तालियां बजीं और महिला सशक्तिकरण के नए युग की घोषणा की गई, लेकिन इस पूरे उत्सव के बीच एक असहज सवाल लगातार सिर उठाता रहा—क्या सच में महिलाओं के लिए राजनीति के दरवाजे खुले हैं, या केवल एक नया प्रतीकात्मक फ्रेम तैयार किया गया है जिसमें वही पुरानी सत्ता की तस्वीर फिट कर दी जाएगी। भारतीय राजनीति का चरित्र आदर्शवाद जितना नहीं, उससे कहीं अधिक यथार्थवादी और कई बार कठोर भी रहा है, जहां सिद्धांतों से ज्यादा समीकरण काम करते हैं और नैतिकता अक्सर सत्ता की सुविधा के हिसाब से बदलती रहती है, ऐसे में यह उम्मीद करना कि केवल आरक्षण से व्यवस्था का चरित्र बदल जाएगा, शायद एक भोला विश्वास हो सकता है। महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़नी चाहिए, यह एक बुनियादी लोकतांत्रिक आवश्यकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भागीदारी वास्तविक सशक्तिकरण में बदलेगी या फिर वही सत्ता संरचना उन्हें अपने ढांचे में ढाल लेगी, जैसा वह हर नए प्रवेशकर्ता के साथ करती आई है। राजनीति में प्रवेश का रास्ता आज भी बेहद जटिल है, जहां परिवार, पूंजी, संपर्क और दलगत निष्ठा का दबाव काम करता है, और महिलाओं के लिए यह राह और अधिक कठिन हो जाती है क्योंकि उन्हें सामाजिक बंधनों, चरित्र पर सवाल और अवसरों की कमी जैसे अतिरिक्त अवरोधों से गुजरना पड़ता है, ऐसे में यह मान लेना कि हर महिला जो आगे बढ़ेगी वह केवल समझौतों के रास्ते ही बढ़ेगी, यह न केवल सरलीकरण है बल्कि उन हजारों महिलाओं के संघर्ष का अपमान भी है जो अपनी मेहनत और योग्यता से जगह बना रही हैं।
असल समस्या यह है कि जिस सिस्टम में यह आरक्षण लागू हो रहा है, वह खुद पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं है, राजनीतिक दलों के भीतर लोकतंत्र की कमी, टिकट वितरण में अपारदर्शिता और नेतृत्व का केंद्रीकरण यह सुनिश्चित करता है कि अवसर योग्यता से अधिक नजदीकियों के आधार पर बांटे जाते हैं, ऐसे में अगर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित भी हो जाती हैं, तो यह जरूरी नहीं कि वे वास्तव में स्वतंत्र और सशक्त प्रतिनिधि बनकर उभरें, बल्कि यह भी संभव है कि वे उसी सत्ता खेल का हिस्सा बन जाएं जहां निर्णय कहीं और होते हैं और चेहरे कहीं और दिखते हैं। यही कारण है कि इस कानून को लेकर आशा के साथ-साथ आशंका भी स्वाभाविक है, क्योंकि अगर संरचना नहीं बदली, तो परिणाम भी वैसा ही रहेगा जैसा अब तक रहा है। राजनीति में नैतिकता का सवाल भी इस बहस के केंद्र में है, क्योंकि सत्ता के गलियारों में “संपर्क” और “समझौते” की संस्कृति लंबे समय से मौजूद है, और यह केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली हुई है, ऐसे में अगर इस संस्कृति को चुनौती नहीं दी गई, तो आरक्षण भी उसी ढांचे में समाहित होकर अपना मूल उद्देश्य खो सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि प्रतिनिधित्व बढ़ाने से परिवर्तन की गारंटी नहीं मिलती, कई बार नए लोग भी पुराने ढर्रे पर चलने लगते हैं क्योंकि व्यवस्था उन्हें वैसा बनने के लिए मजबूर करती है, इसलिए किसी भी सुधार का मूल्यांकन केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उसके प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए, क्या महिलाओं की संख्या बढ़ने से नीतियों में संवेदनशीलता आएगी, क्या सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी, या फिर राजनीति केवल नए चेहरों के साथ पुरानी दिशा में चलती रहेगी, यह एक खुला सवाल है जिसका जवाब समय ही देगा। इस पूरे परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण तत्व जवाबदेही है, अगर कोई भी व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला, सत्ता का दुरुपयोग करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि हमारे संस्थान स्वतंत्र और मजबूत हों, जो बिना राजनीतिक दबाव के काम कर सकें, दुर्भाग्य से आज अपराध और राजनीति का गठजोड़ एक गंभीर समस्या बन चुका है, जहां कई मामलों में आरोपियों को संरक्षण मिलता है और पीड़ितों की आवाज दबा दी जाती है, ऐसे में यह उम्मीद करना कि केवल आरक्षण इस समस्या को खत्म कर देगा, यथार्थवादी नहीं है।
समाधान के रूप में हमें व्यापक सुधारों की जरूरत है, राजनीतिक दलों के भीतर पारदर्शिता लानी होगी, टिकट वितरण के स्पष्ट और निष्पक्ष मानदंड तय करने होंगे, महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र शिकायत तंत्र विकसित करना होगा ताकि वे बिना डर के अपनी बात रख सकें, साथ ही उन्हें केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधि के रूप में नहीं बल्कि सक्षम और प्रशिक्षित नेतृत्व के रूप में तैयार करना होगा, इसके लिए राजनीतिक शिक्षा, संसाधन और संस्थागत समर्थन जरूरी है, और सबसे महत्वपूर्ण, समाज की मानसिकता में बदलाव लाना होगा क्योंकि जब तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी कानून अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाएगा। अंततः यह समझना होगा कि देश की समस्याओं का समाधान केवल सीटों की संख्या बढ़ाने में नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में है, क्योंकि एक सशक्त समाज ही एक सशक्त लोकतंत्र की नींव रख सकता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक अवसर है, लेकिन यह अवसर तभी सार्थक होगा जब इसे ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा, अन्यथा यह भी एक नया मुखौटा बनकर रह जाएगा, जिसके पीछे वही पुरानी सत्ता की तस्वीर छिपी होगी।

छह माह के बेटे से बिछुड़ी मां, ससुराल पक्ष पर मारपीट व बच्चे को छीनने का आरोप

हाथरस। शहर के खोड़ा हजारी क्षेत्र की रहने वाली ममता ने अपने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का कहना है कि उसका 6 साल का बेटा उससे छीन लिया गया है, जिसके लिए वह दर-दर भटकने को मजबूर है।ममता के अनुसार उसकी शादी 4 दिसम्बर 2024 को मथुरा निवासी सचिन के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति और ससुराल पक्ष द्वारा दहेज में गाड़ी की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि कई बार उसके साथ मारपीट भी की गई।पीड़िता का कहना है कि ससुराल वालों ने मारपीट करते हुए उसके बच्चे को जबरन छीन लिया और उसे घर से निकाल दिया। इतना ही नहीं, आरोप है कि दबाव बनाकर उसका वीडियो भी बनाया गया, जिसमें उससे जबरन तलाक की बात कबूल कराई गई।ममता ने बताया कि उसने इस संबंध में हाथरस के महिला थाने में शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़िता ने प्रशासन से अपने बच्चे को वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

« Newer PostsOlder Posts »