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बलरामपुर में सीएम ने परखी योजनाओं की गति, दिए निर्देश

March 11, 2026

बलरामपुर में सीएम ने परखी योजनाओं की गति, दिए निर्देश

बलरामपुर, 11 मार्च 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद में विकास कार्यों, कानून व्यवस्था एवं चैत्र नवरात्रि मेले की तैयारियों की समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ होने जा रही है। देवीपाटन शक्तिपीठ में चैत्र नवरात्रि मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आमगन होता है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम दर्शन, पेयजल, स्वच्छता, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और भीड़ प्रबन्धन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

नवरात्र में मंदिरों के समीप स्वच्छता के निर्देश

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नवरात्रि पर मन्दिरों एवं धार्मिक स्थलों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएं। आवश्यकतानुसार अतिरिक्त स्वच्छताकर्मी तैनात किए जाएं। मुख्यमंत्री को जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान ने मेले की तैयारियों से अवगत कराया।
कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक थाना क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों के आसपास एण्टी रोमियो स्क्वॉड तैनात रहे। शोहदों, चेन स्नेचरों आदि के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। ऐसे लोगों की फोटो सार्वजनिक स्थलों और सोशल मीडिया पर लगायी जाए। ग्राम चौकीदारों को सक्रिय किया जाए। जिला मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक नियमित हो। सभी अपराधियों को कानून के तहत सजा दिलायी जाए, जिससे उनमें कानून का भय हो।

मई तक वि वि का कार्य पूर्ण हो

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि माँ पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण में तेजी लाकर इसे मई 2026 तक पूर्ण किया जाए। यूनिवर्सिटी को रिसर्च सेण्टर के तौर पर भी विकसित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि मेडिकल कॉलेज में सभी औपचारिकता पूर्ण करते हुए नए सत्र से पढ़ाई के लिए तैयार किया जाएं। शीघ्र ही वहां मेडिकल की पढ़ाई शुरू करायी जाएगी।

थारू जनजाति तक विकास का लाभ पहुंचाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में थारू जनजाति एवं अन्य परिवार को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से संतृप्त किया जाए। थारू जनजाति क्षेत्र में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाया जाए। सी0एम0 युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत प्रशिक्षण कराया जाए। राजस्व वादों, पैमाइश एवं विरासत के निस्तारण में तेजी लायी जाए।
बाढ़ से बचाव के लिए अभी से तैयारी शुरू की जाए। नदियों, पहाड़ी नालों के ड्रेनेज-चैनलाइज का कार्य समय से पूर्ण किया जाए। महिलाओं एवं बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए चलायी जा रही विशेष योजनाओं (प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आदि) का लाभ हर पात्र को मिलना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिला उद्योग बन्धु एवं व्यापारी बन्धुओं की नियमित बैठकें हों और उनकी समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए।

गोवंश संरक्षण स्थल को सुदृढ़ किया जाय
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवंश संरक्षण स्थल को और सुदृढ़ किया जाए। सभी स्थल पर सी0सी0टी0वी0 कैमरे लगे हों और गोवंश की नियमित गणना हो। विधानसभा तुलसीपुर और गैसड़ी में सी0एम0 कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों, आमजन, विभिन्न संस्थाओं से प्रशासन का बेहतर संवाद हो। सभी अधिकारी प्रतिदिन जनसुनवाई करते हुए आमजन की समस्या एवं शिकायत का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी अप्रैल माह से परिषदीय विद्यालयों का नया सत्र प्रारम्भ हो रहा है। सभी बच्चों को ड्रेस, बैग, किताबें, जूते-मोजे आदि उपलब्ध करा दिए जाएं। ‘स्कूल चलो अभियान’ की तैयारियां समय से पूर्ण कर ली जाएं। आंगनबाड़ी केंद्रों में अच्छी व्यवस्था हो। शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर हो। मरीजों को जनपद में ही बेहतर इलाज मिले, उन्हें अन्य जनपदों में न जाना पड़े।
मुख्यमंत्री जी को जनपद में महिलाओं एवं बच्चों के पोषण सुधार के लिए प्रोजेक्ट संवर्धन, असंक्रमणीय भूमि को संक्रमणीय भूमिधर घोषित किए जाने के अभियान, अवैध अतिक्रमण, थारू जनजाति क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर विद्युतीकरण एवं सम्पर्क मार्ग बनाए जाने, आगामी सीजन हेतु सहकारी समितियां पर ऑनलाइन माध्यम से उर्वरक वितरण, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के उन्नयन, जारवा ईको टूरिज्म के विकास आदि के बारे में अवगत कराया गया।
मुख्यमंत्री जी द्वारा बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, सी0एम0 युवा स्वरोजगार योजना, नये औद्योगिक क्षेत्र के विकास, जल जीवन मिशन, निर्माणाधीन परियोजनाओं, रिंग रोड का निर्माण, 100 बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट, नगर पालिका में एस0टी0पी0 का निर्माण, सभी नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के लिए पेयजल पुनर्गठन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, सीमावर्ती क्षेत्र में थारू जनजाति एवं अन्य परिवारों को योजनाओं से संतृप्त किए जाने, एन0आर0एल0एम0, ऑपरेशन कायाकल्प, गो संरक्षण,  टीकाकरण,  ईयर टैगिंग, पौधरोपण, आई0जी0आर0एस0 समेत समस्त बिंदुओं पर समीक्षा की गई।
इसके पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रांगण में मौलश्री का पौधा लगाया। उन्होंने विश्वविद्यालय के मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने निर्माण एजेंसी को हर हाल में मई, 2026 तक निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में इसमें विलम्ब नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री जी को माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति ने कार्य की प्रगति के सम्बन्ध में अवगत कराया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गुणवत्ता हर हाल में सुनिश्चित होनी चाहिए। इसमें लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री जी ने अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया ।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पिता द्वारा  बेटे की फावड़े से हत्या 

हाथरस। सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव बाजिदपुर में पारिवारिक विवाद के दौरान पिता ने अपने ही बेटे पर फावड़े से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना से गांव में सनसनी फैल गई और परिवार में कोहराम मच गया।बताया गया है कि गांव निवासी 22 वर्षीय सतवीर सिंह का बुधवार दोपहर अपने पिता कोमल सिंह से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि उस समय पिता शराब के नशे में था। विवाद बढ़ने पर गुस्से में आकर उसने सतवीर के सिर और छाती पर फावड़े से कई वार कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।परिजन घायल सतवीर को इलाज के लिए अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही रास्ते में सतवीर ने दम तोड़ दिया।सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक सतवीर सिंह एक इंटरलॉकिंग प्लांट में काम करता था और अपने पीछे तीन छोटे बच्चों को छोड़ गया है।

गैस संकट: रनिंग रूम में मनमर्जी का खाना नहीं बनवा सकेंगे गार्ड-ड्राइवर

रेलवे।

-मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर रनिंग रूम में भी एलपीजी गैस का संकट
-खुद राशन बनवाने की सुविधा पर प्रशासन की रोक

Post on 11.3.26
Wednesday, Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद,(उप्र समाचार सेवा)।
देश मे एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति में आई कमी का असर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बाद रसोई गैस आपूर्ति को नियंत्रित करने की कोशिशें हो रही है।
गैस सिलेंडरकी आपूर्ति बाधित होने का संकट अब रेलवे में भी गहराया है।
बुधवार को मुरादाबाद में स्थित रनिंग रूम में स्वयं राशन बनवाने पर रोक लगा दी गई है। रनिंग रूम में अब लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर (गार्ड) पहले की तरह अपनी इच्छा का खाना नहीं बनवा सकेंगे। रेल कर्मियों को अब रनिंग रुम के मीनू के अनुसार बनने वाले खाने पर निर्भर रहना पड़ेगा।
पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में गैस संकट की खबरें है। युद्ध का असर रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ा है। कई जगहों पर होटल, रेस्त्रां आदि बंद हुए। रसोई गैस आपूर्ति में बाधित होने का असर रेलवे स्टेशनों पर पड़ा है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टीटीई रेस्ट हाउस की कैंटीन बंद हो गई। इससे रेल कर्मियों के सामने चाय, खाने के लिए परेशानी हुईं। गैस आपूर्ति बाधित होने का असर मुरादाबाद स्टेशन पर रनिंग रूम की व्यवस्था पर भी पड़ा है। रनिंग रूम में लोको पायलट, सहायक और ट्रेन मैनेजर के लिए खान पान की व्यवस्था है। मुरादाबाद रनिंग रूम में करीब चार सौ ड्राइवर व गार्ड का आना-जाना है। गैस आपूर्ति के संकट के चलते रनिंग रूम में स्वयं राशन बनवाने की सुविधा को भी रोक दिया गया है। इसका असर उन रेल कर्मियों पर पड़ेगा जो अपनी राशन सामग्री से अपनी जरुरत का खाना बनवाते। पर गैस आपूर्ति के संकट को देखते हुए अगले आदेश तक राशन बनवाने पर पाबंदी लगाई गई है।
इसे लेकर मंडल रेल प्रशासन का कहना है कि रनिंग रूम में खानपान का संकट नहीं है। रेल कर्मियों के स्वयं का राशन बनवा कर खाना बनाने पर रोक लगाई गई है।

*2023 बैच के आईपीएस अरुण कुमार एस ने सीओ कैंट का पदभार संभाला

Santosh Kumar Singh
Gorakhpur
11/03/2026

गोरखपुर। 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुणकुमार एस ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) कैंट का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने मंगलवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया था, जबकि बुधवार को अपने कार्यालय पहुंचकर विधिवत रूप से कार्यभार संभालते हुए कर्मचारियों के साथ बैठक की तथा कैंट क्षेत्र की कानून व्यवस्था की जानकारी ली।
आईपीएस अरुणकुमार एस की प्रारंभिक पुलिस प्रशिक्षण कानपुर में हुई थी। इसके बाद अगस्त 2025 में प्रशिक्षण के दौरान ही उन्हें गोरखपुर के गीडा क्षेत्र में फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, जहां उन्होंने पुलिसिंग के व्यावहारिक पहलुओं को नजदीक से समझा और स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था के संचालन का अनुभव प्राप्त किया।
फील्ड ट्रेनिंग के बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए मुरादाबाद स्थित पुलिस प्रशिक्षण मुख्यालय भेजा गया, जहां उन्होंने पुलिस प्रशासन, अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया।
दिसंबर 2025 में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अरुणकुमार एस पुनः गोरखपुर आए और उन्हें क्षेत्राधिकारी (सीओ) गीडा के पद पर तैनाती दी गई। गीडा क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के साथ ही अपराध नियंत्रण और जनसुनवाई को प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने का प्रयास भी किया गया।
अब उन्हें शहर के महत्वपूर्ण और संवेदनशील माने जाने वाले कैंट क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंगलवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने के बाद बुधवार को उन्होंने अपने कार्यालय में विधिवत रूप से कार्यभार संभाला और पुलिस कर्मचारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की कानून व्यवस्था, लंबित मामलों और संवेदनशील बिंदुओं की जानकारी ली।
इस दौरान उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने पुलिस-जनता के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया।

विश्व किडनी दिवस 2026* : *”सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा

हरिद्वार। विश्व किडनी दिवस एक वार्षिक वैश्विक अभियान है, जिसका उद्देश्य किडनी स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और विश्वभर में किडनी रोग के बोझ को कम करना है। इस वर्ष इसे 12 मार्च को मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम दो परस्पर जुड़ी प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है: प्रत्येक व्यक्ति के लिए किडनी उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करना और पर्यावरणीय रूप से सतत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना। यह मान्यता देती है कि मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी का स्वास्थ्य एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, और एक की सुरक्षा के लिए दूसरे की रक्षा आवश्यक है।

किडनियां अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं जो जीवन बनाए रखने वाले कई कार्य करती हैं। वे रक्त से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को छानती हैं, रक्तचाप को नियंत्रित करती हैं, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखती हैं, और ऐसे हार्मोन बनाती हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन तथा हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में हानिकारक विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) की व्यापकता बढ़ रही है और वर्तमान में अनुमान है कि प्रत्येक 100 में से लगभग 15-20 लोगों में किसी न किसी स्तर की CKD मौजूद है। यह अब विश्वभर में मृत्यु के पांचवें प्रमुख कारण के रूप में उभर रही है। यह बीमारी धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती है, जिससे कई लोगों को उन्नत अवस्था तक अपनी बीमारी का पता नहीं चलता। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास शामिल हैं। तीव्र किडनी चोट (AKI), जो अवसर संक्रमण, निर्जलीकरण या विषैले पदार्थों के संपर्क से होती है, भी विश्वभर में बीमारी और मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है।

“सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य” का आह्वान देशों के बीच और देशों के भीतर किडनी उपचार में गहरी असमानताओं को दर्शाता है। प्रारंभिक जांच, निदान सेवाओं, आवश्यक दवाओं, डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण तक पहुंच में व्यापक अंतर है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डायलिसिस सीमित या महंगा हो सकता है, और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है। यहां तक कि समृद्ध देशों में भी ग्रामीण समुदायों, जातीय अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच असमानताएं बनी रहती हैं। हमारे देश में भी अधिकांश लोग अपनी जेब से अधिक खर्च, सीमित बीमा कवरेज और भौगोलिक बाधाओं का सामना करते हैं। इन असमानताओं को दूर करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार करना, सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना और सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यक्रम लागू करना आवश्यक है। प्रारंभिक पहचान और रोकथाम की रणनीतियां विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे किफायती हैं, रोग की प्रगति को धीमा कर सकती हैं और महंगे उपचारों की आवश्यकता को कम कर सकती हैं।

इस वर्ष की थीम किडनी उपचार, विशेषकर डायलिसिस, के पर्यावरणीय प्रभाव पर भी ध्यान आकर्षित करती है। हेमोडायलिसिस, जो किडनी विफलता के रोगियों के लिए जीवनरक्षक उपचार है, संसाधन-गहन प्रक्रिया है। प्रत्येक सत्र में बड़ी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता होती है तथा डिस्पोजेबल सामग्री से काफी प्लास्टिक और चिकित्सा कचरा उत्पन्न होता है। जब इसे विश्वभर के लाखों रोगियों के संदर्भ में देखा जाए, तो इसका पर्यावरणीय प्रभाव बहुत बड़ा हो जाता है। टेलीमेडिसिन और स्थानीय उपचार केंद्र न केवल अधिक सुविधाजनक हैं, बल्कि रोगियों और पर्यावरण दोनों के लिए अधिक अनुकूल विकल्प हैं। दूसरी ओर, बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाएं निर्जलीकरण, हीट स्ट्रेस और विषैले पदार्थों के संपर्क के माध्यम से किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाती हैं। इस प्रकार, किडनी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य प्रदाताओं और नीति-निर्माताओं को अधिक टिकाऊ किडनी देखभाल मॉडल की दिशा में कार्य करना चाहिए। जल पुनर्चक्रण प्रणालियां, ऊर्जा-कुशल डायलिसिस मशीनें और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन जैसी नवाचार तकनीकें पर्यावरणीय प्रभाव को काफी कम कर सकती हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और हरित खरीद नीतियां कार्बन उत्सर्जन को घटा सकती हैं। टेलीमेडिसिन सेवाएं नियमित परामर्श और फॉलो-अप के लिए यात्रा की आवश्यकता को कम कर सकती हैं
रोकथाम सबसे प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल रणनीतियों में से एक है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है और मधुमेह, किडनी रोग तथा हृदय रोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत के लिए निम्नलिखित कदम अपनाएं:

1. धूम्रपान न करें। यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ना आपके स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

2. रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखें।

3. स्वस्थ वजन बनाए रखें। मोटापा मधुमेह और किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाता है।

4. संतुलित और पौष्टिक आहार लें। अत्यधिक नमक, संतृप्त वसा और साधारण

कार्बोहाइड्रेट से बचें। पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पिएं।

5. अप्रमाणित और गैर-वैज्ञानिक वैकल्पिक उपचारों से बचें।

6. दर्दनाशक और एंटी-एसिड दवाओं का स्वयं सेवन न करें।

7. सप्ताह में 4-5 दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। प्रतिदिन आधा घंटा चलना

भी लाभदायक है।

8. नियमित योग लाभकारी है और तनाव कम करने में सहायक है।

9. प्रतिवर्ष स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं।

इन उपायों से किडनी विफलता की दर कम की जा सकती है और महंगे उपचारों पर निर्भरता घटाई जा सकती है।

सरकारी नीतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य” को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य रणनीतियों में किडनी रोग की रोकथाम और प्रबंधन को शामिल करना, प्रारंभिक पहचान कार्यक्रमों को वित्तीय सहायता देना और सतत स्वास्थ्य अवसंरचना में निवेश करना आवश्यक है। पोर्टेबल या पहनने योग्य डायलिसिस उपकरण, कृत्रिम किडनी, प्रारंभिक निदान के बेहतर बायोमार्कर और टिकाऊ चिकित्सा सामग्री जैसे नवाचार रोगी देखभाल में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। सरकार को किडनी प्रत्यारोपण के लिए पात्र रोगियों की प्रक्रिया को प्राथमिकता और तीव्रता से आगे बढ़ाना चाहिए।

सामुदायिक सहभागिता और शिक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जन-जागरूकता अभियान लोगों को जोखिम कारकों, नियमित जांच के महत्व और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

नैतिक दृष्टि से यह थीम स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी को रेखांकित करती है कि वे रोगी देखभाल के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा का भी संतुलन बनाए रखें। जीवनरक्षक उपचार प्रदान करते समय पृथ्वी को न्यूनतम हानि पहुंचाना आवश्यक है।

अंत में, “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा” विश्व किडनी दिवस 2026 का संदेश है कि किडनी स्वास्थ्य के लिए एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाए। रोकथाम को प्राथमिकता देकर, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाकर, नवाचार को अपनाकर और पर्यावरण की रक्षा करके हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं जहां गुणवत्तापूर्ण किडनी उपचार सभी के लिए सुलभ हो।

याद रखें, आपकी किडनियां हीरे की तरह हैं एक बार क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता

प्रोफेसर (डॉ.) संजीव गुलाटी

एमडी, डीएनबी (बाल रोग), डीएम, डीएनबी (नेफ्रोलॉजी) एफआईएसएन, एफआईएपी (ऑस्ट्रेलिया), एफआरसीपीसी (कनाडा), एफआईएसओटी

चेयरमैन, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण, फोर्टिस अस्पताल समूह, एनसीआर

एडजंक्ट प्रोफेसर, नेफ्रोलॉजी विभाग, मणिपाल विश्वविद्यालय सदस्य, गवर्निंग बॉडी, इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांट पूर्व सचिव, नॉर्थ ज़ोन चैप्टर, इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ISN)

पूर्व अध्यक्ष, इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी

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