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आत्मशुद्धि,मानसिक शांति का सार है णमोकार मंत्र  : विशाल जैन

April 9, 2026

आत्मशुद्धि,मानसिक शांति का सार है णमोकार मंत्र  : विशाल जैन

मैनपुरी
 विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर करहल रोड स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में प्रातः श्री जी का अभिषेक व शांतिधारा करने का सौभाग्य पंडित अनंत कुमार,अमित कागजी,सुनील जैन, राहुल मेडिकल, शशांक धनी, सौरभ बॉबी को मिला। तत्पश्चात नवकार मंत्र की सामूहिक जाप का शुभारंभ अरुण कुमार जैन,सुशील,राहुल किराना, श्रीमती रेखा,निशंका जैन द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। तथा संजीव टाइप, आरती जैन ने पंच परमेष्ठि की स्तुति एवं मंगलाचरण कर ठीक 8 बजकर 5 मिनट पर णमोकार मंत्र जाप का शुभारंभ किया। जिसमें समाज की महिलाएं पुरुषों एवं बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।
इसी क्रम में कचहरी रोड स्थित श्री शांतिनाथ चैतयालय में साधना जैन,डा सौरभ,डॉ स्वाति,श्रेयांश जैन के सानिध्य में तथा श्री महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर बिसातखाना में नवकार मंत्र की सामूहिक जाप का आयोजन हुआ। इस अवसर पर उमेश चंद्र एडवोकेट,मनोज, गौरव उपवन,अंशुल,सौरभ इनवर्टर, यशवर्धन, हेमंत बॉबी,रमेश चंद,आदेश जैन, विजयलक्ष्मी,शालिनी, पूर्वी, अनुपम,शिल्पी,शौली,नरेश चंद्र,विकास बंटी,चंदन,प्रवीन बबलू, कविता,वर्षा, झुमरी,संजय संसारपुर,रेनू,साधना, रजनी,शिवानी जैन आदि मौजूद रहे।
महामंत्री विशाल जैन(जौली) ने बताया कि नवकार महामंत्र जैन धर्म का शाश्वत, अनादि और मूल मंत्र है, जो अरिहंत, सिद्ध, आचार्य,उपाध्याय और साधु—इन पांच परमेष्ठियों के गुणों को नमन करता है। यह मंत्र आत्मशुद्धि, मानसिक शांति,सकारात्मक ऊर्जा और अहिंसा के प्रसार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। णमोकार महामंत्र’एक लोकोत्तर मंत्र है। जोकि संपूर्ण रूप से विकसित और विकासमान विशुद्ध आत्मस्वरूप का ही दर्शन, स्मरण, चिंतन,ध्यान एवं अनुभव किया जाता है। इसलिए यह अनादि और अक्षयस्वरूपी मंत्र है। जो किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि शुद्ध आत्मा की शक्ति का आह्वान करता है।
वैश्विक संस्थाओं के सहयोग से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी इस दिव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होकर इस मंत्र का महत्व बताया कि नवकार महामंत्र मंत्र नहीं है यह हमारी आस्था का केंद्र है जैन धर्म हमें बाहरी दुनिया नहीं खुद को जीतने की प्रेरणा देता है। जब हम खुद को जीतते हैं हम अरिहंत बनते हैं जैन धर्म का साहित्य भारत के बौद्धिक एवं विश्वास वैभव की रीड है। विश्व आज जिन परिस्थितियों से जूझ रहा है जैसे युद्ध,आतंकवाद या पर्यावरण की समस्याएं हो ऐसी चुनौतियों का हल जैन धर्म की मूल सिद्धांतों में समाहित है आज भारत पर दुनिया का विश्वास और भी गहरा हो रहा है जिससे दूसरों के लिए रास्ते खुलते हैं यही तो जैन धर्म की भावना है इस अवसर पर पूरे विश्व को प्रेम,शांति ,एकता और सकारात्मकता का संदेश दिया।
इस आयोजन में प्रभाष जैन,सुशील पारले,गिर्राज किशोर,वीरेंद्र किन्हावर,ब्रजेश,राजेश,योगेंद्र, वसुधा,कादम्बिनी,नीतू, मोनिका, नीलमतृप्ति,अनीता,सरिता,सलोनी, कविता,अनंतकांत,शैलेश मोदी,प्रशांत अन्नू ,संतोष, जलज,अनुपम,अनुष्का जैन आदि अनेक भक्तजन सम्मिलित हुए ।