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श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गर्भगृह की सच्चाई जनता के सामने लाएंगे : महेंद्र प्रताप

March 17, 2026

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गर्भगृह की सच्चाई जनता के सामने लाएंगे : महेंद्र प्रताप

वृंदावन। प्रज्ञान मिशन के तत्वावधान में फोगला आश्रम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में महेंद्र प्रताप सिंह ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में एच.एच. परमहंस प्रज्ञानंद जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ।
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का वास्तविक गर्भगृह स्थल अपने मूल स्वरूप में वापस आएगा और वहां भगवान का भव्य मंदिर स्थापित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी प्रकार के टकराव का नहीं, बल्कि संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सत्य की स्थापना का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष न्यायालय से लेकर जमीन तक शांतिपूर्ण तरीके से लड़ा जा रहा है और इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना है। “चलो गांव की ओर” एवं “श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति ज्योति यात्रा” जैसे अभियानों के माध्यम से इस विषय को देश-विदेश तक पहुंचाया जा रहा है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक जांच की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि तथ्यों को और स्पष्ट किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को जन्मभूमि के वास्तविक गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण के समर्थन में संकल्प दिलाया और शांतिपूर्ण तरीके से अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर संत स्वामी ब्रह्मानंद, स्वामी कृष्णानंद गिरी, भास्कर शास्त्री, कुसुम मिश्रा, रीना मुखर्जी, देवाशीष, भूषण पाटिल सहित देश-विदेश से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संत प्रज्ञानंद जी महाराज ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वे इस विषय को अपने कार्यक्रमों में प्रमुखता से उठाएंगे।

सच्ची भक्ति के लिए आत्मा की शुद्धि जरूरी : गोविंदानंद

Posted on 17.03.2026 Tuesday, Time 07.19 PM, Mathura Vrandavan, Atul Kumar
मथुरा। बलदेव कस्बा स्थित रीढ़ा में चल रही श्री मद्भागवत कथा में भागवत प्रवक्ता आचार्य मनीष गर्गाचार्य ने गोवर्धन पूजा की दिव्य कथा विस्तार पूर्वक सुनाई । इस अवसर पर भगवान गिरिराज जी महाराज के समक्ष सुंदर छप्पन भोग के दर्शन कराये गये।कथा में छठवें दिन रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
इस अवसर पर रमणरेती आश्रम से आए  गोविंदानंद महाराज ने कहा कि भगवान की सच्ची भक्ति के लिए आत्मा की शुद्धि जरूरी है। उन्होंने बताया कि संत के पास जाने का उद्देश्य केवल आत्म कल्याण और ईश्वर प्राप्ति होना चाहिए। सांसारिक चर्चाओं से बचना चाहिए।
इस अवसर पर परीक्षित श्याम सुन्दर अग्रवाल,रेखा अग्रवाल,थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह,बंटी पहलवान,अजीत पहलवान,नीरज चौधरी,शैलेंद्र चौधरी,पप्पू सिकरवार,सुदीप बंसल,विकास अग्रवाल,सुनील गर्ग,रवि गर्गाचार्य,शुभम अग्रवाल,देवेंद्र तिवारी,छैलबिहारी,बांकेलाल,धर्मेंद्र उपाध्याय,रवेंद्र सिंह, डॉ.दिलीप,अनिल सोनी, नीटू सोनी,बलदेव सेठ, लक्ष्मण सैनी,शिवम गोस्वामी,बलदेव सेठ,देव अग्रवाल, डॉ.देव परिहार,गुलबीर सिंह,अजय सिकरवार,ओमप्रकाश भगत जी,विष्णु तेहरिया,प्रतीक,अवधेश दुबे,अखिलेश पाठक,अनुज उपमन्यु,राजेश पाठक, डॉ. नत्थी सिंह,प्रदीप कुंतल,हरपाल सिंह,सतेंद्र पहलवान,सुरेन्द्र चौधरी,विनय अग्रवाल,शिवा उपाध्याय,युवा समाजसेवी सुजीत वर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

March 16, 2026

संघ के विस्तार का अर्थ राष्ट्रीय विचार का विस्तार- दत्तात्रेय होसबाले,

  • देश के नागरिकों का औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होना आवश्यक
  • भारतीय विमर्श समस्त विश्व के कल्याण का विचार
  • महापुरुष हम सबके हैं उनके योगदान और मार्गदर्शन पर हो बात
  • संघ में सबका स्वागत, राष्ट्र और समाज के लिए अच्छा काम करने वाले सभी लोगों को संघ का ही मानते हैं

किसी के विरोध के लिए संघ की स्थापना नहीं
कार्य विस्तार के कारण से होगा विकेंद्रीकरण

समालखा(पानीपत) 15 मार्च 26, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन कार्य में विस्तार, राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति की अधिक सक्रियता और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ सम्पन्न हो गई। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से संवाद किया। श्री होसबाले ने बताया कि पिछले वर्ष में संगठन कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाएं पहले लगभग छह हजार की वृद्धि के साथ 88 हजार से अधिक हो गई है तथा स्थान भी बढ़कर 55 हजार से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडली की संख्या भी बढ़ी है। संगठन कार्य में विस्तार को इस प्रकार देखना भी आवश्यक है कि अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में भी इस सांगठनिक विस्तार को स्पष्टता से देखा जा सकता है। अंडमान में हिंदू सम्मेलन में 9 द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग सम्मिलित हुए जिसमें सरसंघचालक जी की उपस्थिति रही। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश जैसे कम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश में भी 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की।

श्री दत्तात्रेय होसबाले के अनुसार सांगठनिक विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। भारतीय अथवा हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं बल्कि जीवन शैली है और इसके माध्यम से समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए। इसी उद्देश्य से समाज की सज्जन शक्ति को एकत्र करना और Power of Good का राष्ट्रहित में प्रवृत्त होना आवश्यक है।

सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के बलिदान के 350 वें वर्ष के अवसर पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम किए जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदेमातरम की 150 वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। उन्होने कहा कि आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650 वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रमों की योजना बनी है।

संघ के आगामी वर्ष के नियमित प्रशिक्षण वर्गों की जानकारी देते हुए दत्तात्रेय जी ने बताया कि 11 क्षेत्र के वर्ग तथा एक नागपुर के वर्ग को मिलाकर कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग संचालित किए जाएंगे। इस प्रतिनिधि सभा में गौसेवा और ग्रामविकास की भी योजनाओं पर विचार किया गया है। नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे घर की छत पर सब्जी गार्डन बनाएं उसमें देसी गोबर और गौमूत्र की खाद का उपयोग करें जिससे गौसंवर्धन में सभी सहयोग कर सकते हैं। इसी तरह हरित घर बनाने का भी संकल्प नागरिक ले सकते हैं जिससे घर में पॉलीथीन न्यूनतम उपयोग, जल संरक्षण आदि प्रयास किए जा सकते हैं।

संघ की संगठनात्मक संरचना में परिवर्तन संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री होसबाले ने कहा कि संरचना में विकेन्द्रीकरण पर विचार हुआ है जिसमें प्रांत के स्थान पर छोटी इकाई संभाग बनाने का प्रस्ताव है जिसके लागू होने पर 46 प्रांत के स्थान पर 80 से अधिक संभाग होंगे।

एक प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में जातिगत आधार पर विभेद को समाप्त करने के लिए मीडिया को भी आगे आना चाहिए और किसी भी चुनाव में मतदाताओं की संख्या का जाति आधारित आकलन बंद करना चाहिए। उन्होने वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की सरकार द्वारा राष्ट्रहित में किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की और कहा कि संघ विश्व में शांति और विकास का पक्षधर है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने किसी समुदाय और पंथ-पूजा पद्धति के विरोध के लिए संघ की स्थापना नहीं की। संघ के दूसरे सरसंघचालक श्री गुरुजी ने भी कहा कि हम सबके पूर्वज एक हैं और पूजा-पाठ की पद्धति की भिन्नता से कोई अंतर नहीं आता, इसमें डीएनए शब्द नहीं था किंतु अभिप्राय यही था। तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस ने भी कहा कि भारत को अपनी मातृभूमि व अपना राष्ट्र मानने वाले और भारतीयता को जीने वाले सभी हिंदू हैं। संघ में सबका स्वागत है, जो भी समाज के लिए अच्छा कार्य कर रहा है हम उसको संघ का स्वयंसेवक ही मानते हैं।

अंडमान, अरुणाचल सहित पूरे देश में संघ के लिए समाज में उत्साह

अंडमान में प्रमुख 9 द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग सरसंघचालक जी की उपस्थिति में हुए हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश जैसे कम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश में भी 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की।

जाति-पंथ के भेद से ऊपर उठकर हो महापुरुषों का सम्मान एवं अनुकरण

समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेगबहादुर जी के बलिदान के 350 वें वर्ष पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम किए जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए।

संघ की संगठनात्मक संरचना में विकेन्द्रीकरण की योजना

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विस्तार के साथ-साथ कार्य में गुणवत्ता तथा सुगमता की दृष्टि से संगठनात्मक संरचना के विकेन्द्रीकरण पर भी चर्चा हुई। आने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक तक प्रांत के स्थान पर संभाग बनाने का विचार हुआ है। इसके क्रियान्वयन के बाद वर्तमान में जो 46 प्रांत हैं उनके स्थान पर 80 से अधिक संभाग बनने की संभावना है।

वीर भूमि में योगी आदित्यनाथ की दहाड़

  • भारत की नींव को कमजोर कर रही जातिवाद की राजनीतिः मुख्यमंत्री
  • चित्तौड़गढ़ में जौहर स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित ‘जौहर श्रद्धांजलि समारोह’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
  • सनातन की मर्यादा अमर है और रहेगी, बाबर-औरंगजेब और अकबर के खानदान का पता नहीं, महाराणा प्रताप के वंशज मंच पर बैठे हैं: सीएम योगी
  • उत्तर प्रदेश में बेटियां अब नाइट शिफ्ट में भी काम करके सकुशल घर वापस आती हैः योगी
  • गोरक्षपीठाधीश्वर ने वीरभूमि से जोड़ा नाता, कहा- मेरे दादा गुरु इसी भूमि से गोरखपुर गए थे

चित्तौड़गढ़, 15 मार्च। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातिवाद फैलाने वालों को चित्तौड़गढ़ की धरती से दो टूक संदेश दिया। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां सुनाईं –
“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का-वीरों का
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर
जाति-जाति का शेर मचाते केवल कायर, क्रूर”
मुख्यमंत्री ने कहा, जिन्हें कुछ नहीं करना है, वे जातिवाद के आधार पर सामाजिक एकता को छिन्न-भिन्न करने का पाप कर रहे हैं। जातिवाद ने समाज की नींव को दरका दिया था, इसलिए देश कमजोर हुआ। जातिवाद की राजनीति भारत की नींव को कमजोर कर रही है। बांटने की राजनीति फिर से हम सबको गुलामी की तरफ धकेल रही है। इससे बचने के लिए हमें एकजुटता के भाव से बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को ईनाणी सिटी सेंटर, चित्तौड़गढ़ में जौहर श्रद्धांजलि समारोह में जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। उन्होंने पंजाब के पूर्व राज्यपाल वीपी सिंह की पुस्तक का विमोचन भी किया।

Yogi Adityanath in Chittorgarh, Rajasthan

*रामसेतु तोड़ने को उतावले लोग राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे*
सीएम योगी ने जनसमूह से पूछा कि वे कौन लोग हैं, जो जातिवाद के आधार पर समाज को बांट रहे हैं। अफवाह के आधार पर विश्वास का संकट खड़ा कर रहे हैं। भारत-भारत न बना रहे, इसके लिए दुष्चक्र कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने कहा था कि राम-कृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर आंदोलन में विरोधी पक्ष के साथ मिले और फैसला न होने देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। ये लोग रामसेतु तोड़ने के लिए उतावले दिखाई देते हैं, राम मंदिर निर्माण का विरोध करते हैं। ये लोग देश में अविश्वास का वातावरण पैदा कर रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इनका मकसद भारत को कठघरे में खड़ा करके अविश्वसनीय बना देना है। इन्हें देश की चिंता नहीं है। इनके अपने अस्तित्व पर संकट है, इसलिए भारत की अस्मिता से खिलवाड़ करने पर उतारू हैं।

CM Yogi Adityanath in Chittorgarh Rajasthan

*वीरभूमि ने दी भारत को पहचान*
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में परिवर्तन के पीछे प्रधानमंत्री मोदी जी का मार्गदर्शन है तो तेज राजस्थान, चित्तौड़गढ़ का है। इसके पीछे राजस्थान की वीरभूमि का भी योगदान है, क्योंकि मेरे पूज्य दादा गुरु इसी भूमि से गोरखपुर गए थे। राजस्थान, चित्तौड़गढ़, मेवाड़ के वीरों के शौर्य-पराक्रम, वीरांगनाओं के जौहर और मीराबाई की भक्ति की धुन से भारत अभिभूत होता है। नारी अस्मिता, सम्मान, स्वावलंबन की अमर गाथा हमें प्रेरणा प्रदान कर रही है। वीरभूमि ने भारत को पहचान दी है। चित्तौड़गढ़ का किला केवल पत्थरों से बना दुर्ग नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता का प्रहरी है। हर सच्चे भारतीय के मन में इस वीरभूमि और यहां के राणाओं के शौर्य व राष्ट्र के लिए उनके बलिदान के प्रति श्रद्धा का भाव है।

*देश-धर्म के लिए था महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी व गुरु गोबिंद सिंह का संघर्ष*
सीएम योगी ने महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज व गुरु गोविंद सिंह जैसे राष्ट्रनायकों को याद किया। उन्होंने कहा, इन लोगों ने अपने, परिवार या सत्ता के लिए बलिदान नहीं दिया था, बल्कि इनका संघर्ष देश-धर्म और भारत की स्वाधीनता के लिए था। हर संघर्ष में चट्टान की तरह सामने खड़े हुए और उसे नेस्तनाबूद भी किया। गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्र बलिदान हुए, लेकिन उन्होंने उफ नहीं किया। महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा, महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा, बप्पा रावल के लिए मन में श्रद्धा का भाव है, क्योंकि जो भी राष्ट्र के प्रति योगदान देगा, उसका स्मरण सदैव होता है।

UP CM Yogi Adityanath in Chittorgarh Rajasthan

*माता सीता का जो संकल्प था, वही संकल्प महारानी पद्मिनी ने दिखाया*
सीएम योगी ने कहा कि यह श्रद्धांजलि समारोह प्रेरित कर रहा है कि आने वाले समय में किसी बेटी-बहन को उस दौर से न गुजरना पड़े। 1303, 1535 और 1568 में तीन बड़े जौहर यहां देखने को मिले। भारत का इतिहास वीरांगनाओं के जौहर से भरा पड़ा है। शत्रु हमेशा धोखे से ही वीरों का मुकाबला कर पाए। आमने-सामने की लड़ाई में वे कहीं नहीं टिके। अलाउद्दीन खिलजी के धोखे से महाराणा रत्न सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। उनके सेनापति गोरा-बादल भी लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तो महारानी पद्मिनी के नेतृत्व में हजारों वीरांगनाओं ने नारी अस्मिता की रक्षा के लिए जौहर व्रत लिया था, क्योंकि वह उस समय की परिस्थिति थी। माता सीता ने धरती मां से कहा था कि अगर मेरा सतीत्व अखंड है तो मुझे अपनी गोद में समाहित करो। माता सीता का जो संकल्प था, वही संकल्प धर्म जौहर के नाम पर महारानी पद्मिनी ने यहां दिखाया था। यह संकल्प नारी गरिमा का प्रतीक था। यह भारत माता को विधर्मियों से मुक्त करने का संकल्प था।

*25 करोड़ के उत्तर प्रदेश में बेटियां अब नाइट शिफ्ट में भी काम करके सकुशल घर वापस आती हैं*
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में जब हमारी सरकार बनी तो प्रदेशवासियों से कहा कि अपराध-अपराधियों, नारी गरिमा-सुरक्षा के मामले में सरकार जीरो टॉलरेंस के तहत काम करेगी। किसी ने बहन-बेटी की सुरक्षा पर हाथ डाला तो अगले चौराहे पर यमराज उसका इंतजार कर रहे होंगे। 25 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश में बेटियां अब स्कूल भी जाती हैं, नाइट शिफ्ट में काम भी करती हैं और सकुशल घर आती हैं। हर नारी को सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन की गारंटी हर भारतीय नारी का अधिकार होना चाहिए।

*महाराणा सांगा ने घाव पर घाव सहे, लेकिन विधर्मियों को घुसने नहीं दिया*
सीएम योगी ने भारत की अस्मिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए महाराणा सांगा के शौर्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, महाराणा सांगा के शरीर पर 80 घाव थे। लेकिन, उन्हें स्वयं की नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता की चिंता थी। घाव पर घाव सहते गए पर विधर्मियों को घुसने नहीं दिया। महाराणा प्रताप ने महज 27 वर्ष की आयु में ही अकबर के खिलाफ युद्ध लड़ा था। उन्होंने अकबर को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। भारत के इतिहास ने हमेशा उनके शौर्य का स्मरण किया है।

*अयोध्या में राम मंदिर भी बना और गुलामी का कोई चिह्न भी नहीं बचा*
सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम परमपिता परमेश्वर हैं, लेकिन वह राम तब बन पाए, जब उन्होंने कहा कि मैं इस धरती को राक्षसविहीन कर दूंगा। वह भी केवल यह कहते कि मैं अयोध्या का राजा हूं, मुझे कुछ नहीं करना है तो वह राम जैसा सम्मान नहीं पाते। राजस्थान के लाखों नौजवान राम मंदिर आंदोलन में कूद पड़े थे। जब पूर्वजों के प्रति मन में भाव होता है तो परिणाम आने में देर नहीं लगती। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन गया, वहां गुलामी का कोई चिह्न नहीं बचा। देश एकजुट होकर एक दिशा में चलता है और जाति के नाम पर बांटने वाले नेताओं से सावधान रहता है तो हर भारतवासी को राम मंदिर जैसा सम्मान प्राप्त होता है। कंस के अत्याचार से त्रस्त मथुरा को अभय प्रदान करने के लिए श्रीकृष्ण को संकल्प लेना पड़ा था कि सज्जन शक्ति का संरक्षण करूंगा, लेकिन दुर्जनों के संहार में संकोच नहीं करूंगा।

*नेताजी होते तो पापी पाकिस्तान नहीं होता*
सीएम योगी ने कहा कि भारत के महापुरुषों ने शौर्य व पराक्रम के साथ जुड़ने का आह्वान किया था। आजादी के आंदोलन में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने 26 वर्ष की आयु में 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध शंखनाद किया था। 27 वर्ष की आयु में उनका बलिदान हो गया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आह्वान किया था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। नेताजी होते तो पापी पाकिस्तान भी नहीं होता। उनका आह्वान भारत की अस्मिता, आजादी और नौजवानों के लिए था। जापान, सिंगापुर, पोर्ट ब्लेयर, म्यांमार में उनके योगदान का स्मारक हमारा आह्वान करता है। सीएम ने काकोरी के नायकों के अलावा वीर सावरकर, स्वामी विवेकानंद को भी याद किया। कहा कि 1893 में शिकागो की धर्मसभा में स्वामी विवेकानंद ने कहा कि गर्व से कहो, हम हिंदू हैं। यह उद्घोष भारत को एकता के सूत्र में बांधता है। नेपाल में भी हिंदुओं का यह भाव हर व्यक्ति को जोड़ता है।

*हमेशा प्रेरणा प्रदान करता है भारत का वैभव*
सीएम योगी ने कहा कि भारत का वैभव हमेशा प्रेरणा प्रदान करता है। वैदिक कालीन भारत, आदर्श भारत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित भारत, जहां किसान उत्पादक था, कारीगर उद्यमी और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु। ग्राम स्वराज हमारी पहचान थी। आक्रांता साम्राज्य नारी अस्मिता के साथ खिलवाड़ और संस्कृति, परंपरा व बौद्धिक संपदा को रौंदते-लूटते हैं। उन्होंने शोषण की जो प्रवृत्ति पैदा की, उसका दुष्परिणाम था कि किसान उत्पादक से उपभोक्ता और उपभोक्ता से कर्जदाता हो गया। कारीगर श्रमिक होकर बेरोजगार हो गया। व्यापारी कर्ज के बोझ से आजीविका के लिए भटकने लगा। औपनिवेशिक कालखंड के शोषण के इस दुष्चक्र को समाप्त करने के लिए आजादी के बाद वर्ष दर वर्ष बीतते गए, लेकिन भारत की अस्मिता को पहचानने का प्रयास नहीं किया गया। अब आत्मनिर्भर व विकसित भारत की नींव को मजबूत बनाने की आधारभूत इकाई ग्राम पंचायतें, ग्राम सभाएं व कस्बे बनेंगे।

*बाबर, औरंगजेब और अकबर के खानदान का पता नहीं, महाराणा प्रताप के वंशज मंच पर बैठे हैं*
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरभूमि चित्तौड़गढ़ को देखकर मुझे यूपी के साहित्यकार श्याम नारायण पांडेय की रचना हल्दीघाटी की पंक्तियां याद आती हैं – “एकलिंग का आसन है, इस पर न किसी का शासन है…”। खिलजी के नाम पर भारत में आज कोई नमूना दिखाई नहीं देता। बाबर, औरंगजेब और अकबर के खानदान का अतापता नहीं है, लेकिन महाराणा प्रताप की वंशावली महाराजा साहब मंच पर उपस्थित हैं। रानी पद्मिनी की वंशावली सैकड़ों वर्ष बाद आज भी है। सनातन की मर्यादा सदैव अमर है और रहेगी। सनातन धर्म कभी पददलित नहीं होगा। हमने अनेक चुनौतियां का मुकाबला किया और करेंगे, लेकिन हमारी अमरता पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता। मातृशक्ति का साहस अजेय था और रहेगा। स्वाभिमान की ज्वाला भी शाश्वत बनी रहेगी।

इस अवसर पर मेवाड़ के महाराणा विश्वराज सिंह, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान सरकार के मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, गौतम दक, सांसद सीपी जोशी, विधायक रविंद्र सिंह भाटी, श्रीचंद कृपलानी, चंद्रभान सिंह आक्या, अर्जुन जिंगर, हमीर सिंह, दिलीप सिंह परिहार, वीरेंद्र सिंह, स्वामी निरंजन नाथ, जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष रावत नरेंद्र सिंह, महामंत्री तेजपाल सिंह आदि मौजूद रहे।

टीएमयू के राँक आँन में युवाओं में छाएं बादशाह-आकासा

टीएमयू में रविवार शाम बनीं बेमिसाल, दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन परिसर में हुआ रंगारंग कार्यक्रम
रंग बिरंगी रोशनी, लेजर प्रभाव, धुनों के बीच रैपर बादशाह की प्रस्तुतियों पर तमाम लोग थिरके

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
रविवार की शाम तीर्थांकर महावीर यूनिवर्सिटी(TMU) के परिसर में रैपर बादशाह की एंट्री के साथ ही यादगार बन गई। घंटों चलें राँक आँन में बादशाह व आकासा सिंह की प्रस्तुतियों पर तमाम लोग झूमे।तालियों की गूंज,सीटियां और लोगों के जोश ने पूरे माहौल को अपने रंग में रंग दिया।
दीक्षांत समारोह के अगले दिन रैपर बादशाह और आकासा के गाए गीतों पर पूरा परिसर देर तक झूमता रहा। बादशाह की प्रस्तुतियों से समां बांधा और दर्शक मंत्रमुग्ध होकर संगीत में बंध गए।

-मोबाइल की फ्लैश लाइट पंडाल जगमगाया, हर धुन पर बढ़ाया उत्साह
*अपने* ऊर्जावान गानों के लिए खास पहचान बनाने वाली लोक प्रिय भारतीय गायिका आकासा सिंह ने अपने गीतों से समां बांधा। उनके चर्चित गीत ” ना गिन गिन, हुस्न तेरा तौबा तौबा-तौबा, माई नेम इज शीला, ऐ दिल है मुश्किल” गीतों की धुनों पर पूरा परिसर झूठ उठा। गीत कू साथ हर धुन की हर पंक्ति में छात्र छात्राओं ने पूरा उत्साह दिखाया। पूरा समय कार्यक्रम अपने रोमांच पर रहा।
छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या मंच के सामने खड़ी होकर धुनों पर थिरकती रही। एक समय ऐसा भी आया जब हजारों मोबाइल फ्लैशलाइट एक साथ चमक उठीं और पूरा पंडाल रोशनी की लहरों में डूब गया। आकासा स्टेज से ही छात्रों के जोश की तारीफ किए बिना रह सकीं। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुरेश जैन सहित पूरे टीएमयू परिवार का आभार जताया।
कार्यक्रम में जैसे ही बादशाह मंच पर पहुंचे, पूरा परिसर तालियों गूंज उठा। देर से आने के लिए माफी मांगते हुए बादशाह ने जरा भी समय नहीं गंवाया। और पुराने गीत “जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा से किया। इसके साथ ही संगीत का सिलसिला जारी हो गया। छात्रों
में ऐसा जोश व जुनून कि हर बीट पर हजारों कदम एक साथ थिरके।

*सुपरहिट रैप से हाइप पर पहुंचा लाइव कॉन्सर्ट*
बादशाह ने अपने सुपरहिट अंदाज और शानदार मंचीय उपस्थिति से शुरुआत करते हुए माहौल को तुरंत ऊर्जावान बना दिया। “कर गई चुल”, “गेंदा फूल”, “डीजे वाले बाबू”, “पागल”, “सनक” और “अभी तो पार्टी शुरू हुई है” जैसे गीतों की धुन शुरू होते ही छात्र अपनी जगहों से उठ खड़े हुए। मंच के सामने मौजूद भीड़ ने लगभग हर गीत की पंक्तियां उनके साथ गाईं और पूरा पंडाल एक साथ झूमता दिखाई दिया। विशेष रूप से “अभी तो पार्टी शुरू हुई है” बजते ही कार्यक्रम स्थल का उत्साह कई गुना बढ़ गया। युवाओं का जोश भर धुन के साथ बढ़ा। हाथ हवा में उठाकर छात्र गीतों के साथ सुर मिलाते रहे। मोबाइल की फ्लैश लाइट की चमक, मंच के सामने झूमती भीड़ और लगातार उठती हूटिंग ने ऐसा दृश्य बनाया कि हर ओर युवा ऊर्जा दिखाई दे रही थी। देर रात तक परिसर में यही उत्साह बना रहा। बादशाह ने भी टीएमयू परिवार की जमकर तारीफ की। विवि के कुलाधिपति सुरेश जैन का आभार जताया।

कलाकारों के करीब आने व तस्वीरें लेने को उत्सुकता

कार्यक्रम में दोनों कलाकारों को करीब से देखने की चाह हरेक में रहीं। मंच के सामने डटे छात्र- छात्राएं लगातार आगे बढ़कर हाथ मिलाने को बेताब दिखे। कार्यक्रम को कैमरे में कैद करने के लिए मोबाइल लगातार चलते रहे। कार्यक्रम की तस्वीरें व वीडियो बनाने का सिलसिला चलता रहा। किसी ने दोस्तों के साथ यादगार पल कैद किए तो कोई ने कलाकारों को फोकस कर तस्वीरें लेता दिखा। छात्र हर पल को अपने फोन में सहेजते नजर आए।

रंगारंग कार्यक्रम में पूरे समय रहा कुलाधिपति और परिवार
–देर रात तक चले कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी चांसलर सुरेश जैन, यूनिवर्सिटी की फर्स्ट लेडी वीना जैन, वाइस चेयरमैन मनीष जैन व परिवार के सदस्य अमित जैन जी, कार्यकारी निदेशक अक्षत जैन, यूनिवर्सिटी की वीसी प्रो. वीके जैन, ऋचा जैन, जाह्नवी जैन, नंदनी जैन सहित यूनिवर्सिटी के अधिकारी और कर्मचारी रहे।

बोले छात्र —

बादशाह और आकासा मेरे फैवरेट सिंगर हैं, इसलिए रॉक ऑन को लेकर सुबह से ही बहुत ज्यादा एक्साइटमेंट बनी हुई है और माहौल भी शानदार लग रहा है। — पारुल, टीएमयू छात्रा

Parul TMU

इस दिन का हर टीएमयू छात्र पूरे साल इंतजार करता है, क्योंकि इस दिन हर कोई दिल खोलकर मस्ती करता है और दोस्तों के साथ खूब एंजॉय करता है। — हिमांशी समरवाल, टीएमयू छात्रा

Himansi TMU

सुबह से ही हम लोग अपनी तैयारी में लगे थे। बड़ी सेलिब्रिटी को सामने से सुनने और देखने का मजा ही अलग होता है और यादगार बन जाता है। — अरहम, टीएमयू छात्र

Arham TMU

आज सभी छात्र अच्छे से तैयार होकर इस कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं। ऐसे प्रोग्राम्स के लिए टीएमयू का दिल से धन्यवाद, क्योंकि माहौल बहुत अच्छा रहता है। —शिवम जैन, टीएमयू छात्र

Shivam JAin TMU

जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं ज्यादा मज़ा आज के रॉक ऑन में आया। यहां का हर रॉक ऑन हमेशा बेहद शानदार रहता है और सभी को पसंद आता है। — प्रथम शुक्ला, टीएमयू छात्र

Pratam Shukla TMU

काफी समय से सेलिब्रिटी का इंतजार था, लेकिन प्रोग्राम शुरू होते ही पूरा माहौल और भी ज्यादा जोश से भर गया और सभी बहुत उत्साहित दिखे।— मतांसा, टीएमयू छात्रा

Matansa TMU

आज रॉक ऑन के लिए सुबह से ही एक्साइटमेंट थी, क्योंकि इस बार सेलिब्रिटी को लेकर काफी सस्पेंस बना हुआ था और उत्सुकता लगातार बनी रही। — शिवानी, टीएमयू छात्रा

Shivani TMU

रॉक ऑन टीएमयू के छात्रों का सबसे ज्यादा पसंदीदा कार्यक्रम है। इस दिन सब जमकर मस्ती करते हैं और खूब आनंद लेते हैं, इसलिए इंतजार भी रहता है। — यश, टीएमयू छात्र।

Yas TMU

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