हरिद्वार। प्रयागराज में हिन्दुओं के राजा ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के कनखल स्थित आश्रम में पहुंचकर उनके शिष्य कमलेश पांडेय जी से मिलकर उत्तरप्रदेश की योगी और केंद्र सरकार की मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश प्रकट किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सैनी और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष विकास चंद्रा ने कहा कि माघ मेले में शंकराचार्य जी और उनके शिष्यों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई अभद्रता हिंदुओं की आस्था पर चोट करना है। ये शंकराचार्य जी का अपमान नहीं बल्कि देश के करोड़ों हिंदुओं का अपमान है और हिन्दू धर्म इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा। युवा नेता अखिल शर्मा त्यागी और मनोज जाटव ने कहा कि मुगलशासको के समय ब्राह्मणों को अपने जनेऊ की रक्षा करनी पड़ती थी।
आज खुद को सनातनी सरकार कहने वाली सरकार से ब्राह्मणों को अपनी शिखा की रक्षा करनी पड़ेगी। हिंदुओं और भगवान राम के नाम पर सत्ता में आई सरकार अब राम के नाम पर राजनीतिक व्यापार और सत्ता के मद में चूर हिंदुओं के राजा के अपमान करने से भी नहीं डर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें हिंदुओं के खिलाफ ही कार्य कर रही है, उन्हें सिर्फ हिन्दू धर्म में आस्था के हिंदुओं का वोट चाहिए। शंकराचार्य जी के शिष्य कमलेश पांडेय जी ने बताया कि योगी सरकार को शंकराचार्य जी के अपमान की कीमत चुकानी पड़ेगी। अब पूरा हिंदू समाज शंकराचार्य जी के समर्थन में उतर आया है और उन्होंने योगी सरकार के ख़िलाफ़ बिगुल बजा दिया है। योगी सरकार द्वारा शंकराचार्य जी को लगातार मिल रहे नोटिस से स्पष्ट है कि भाजपा सरकार हिन्दू विरोधी ही नहीं हिंदुओं के भी अपमान करने से नहीं बाज नहीं आ रही है।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं को नियोजित गतिरोध पर चेताया
सदन में नियोजित गतिरोध पर दलीय नेताओं को चेताया
86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) लखनऊ में संपन्न; लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र को किया संबोधित
विधायिका को अधिक प्रभावी और जनोपयोगी बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा: लोक सभा अध्यक्ष
राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए: लोक सभा अध्यक्ष
Disruption नहीं, Discussion और Dialogue की संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा: लोक सभा अध्यक्ष
पीठासीन अधिकारी संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक हैं: लोक सभा अध्यक्ष
लखनऊ; 21 जनवरी, 2026: उत्तर प्रदेश विधान भवन, लखनऊ में 19 से 21 जनवरी, 2026 तक आयोजित 86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) आज लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन भाषण के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य सभा के उपसभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति एवं उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष ने अपने विचार व्यक्त किए।
अपने समापन भाषण में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा, जिससे देशभर के विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि हो सके। उन्होंने इस संबंध में एक समिति के गठन की जानकारी भी दी।
श्री बिरला ने कहा कि राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विधानमंडल जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का एक प्रभावी मंच बन सकें। उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।
नियोजित गतिरोध लोकतंत्र के लिए हानिकारक
लोक सभा अध्यक्ष ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया। आगामी बजट सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के बारे में सवाल का जवाब देते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में लगातार नियोजित गतिरोध और व्यवधान देश के लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हैं। जब सदन में व्यवधान होता है, तो सबसे अधिक नुकसान उस नागरिक का होता है जिसकी समस्या पर चर्चा होनी थी। उन्होंने कहा कि हमें Disruption नहीं, बल्कि Discussion और Dialogue की संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा।
उन्होंने सभी दलों के नेताओं व सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की तथा कहा कि लोकतंत्र में लोक सर्वोपरि है, और जनता के प्रति हमारी जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर दिन और हर क्षण है।
श्री बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी केवल कार्यवाही संचालित करने वाले नहीं होते, बल्कि वे संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक होते हैं। उनकी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और दृढ़ता ही सदन की दिशा तय करती है।
86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में कुल छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए
संकल्प संख्या 1 – सभी पीठासीन अधिकारी अपनी-अपनी विधायिकाओं के कार्य संचालन के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करेंगे, ताकि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दिया जा सके।
संकल्प संख्या 2 – सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाकर राज्य विधायी निकायों की न्यूनतम तीस (30) बैठकें प्रति वर्ष की जाएँ तथा विधायी कार्यों के लिए उपलब्ध समय और संसाधनों का रचनात्मक एवं प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाएं जनता के प्रति उत्तरदायी हो सकें।
संकल्प संख्या 3 – विधायी कार्यों की सुगमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को निरंतर सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके।
संकल्प संख्या 4 – सहभागी शासन की सभी संस्थाओं को आदर्श नेतृत्व प्रदान करना निरंतर जारी रखना, ताकि राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराएँ और मूल्य और अधिक गहरे तथा सशक्त बन सकें।
संकल्प संख्या 5 – डिजिटल प्रौद्योगिकी के कुशल उपयोग के क्षेत्र में सांसदों एवं विधायकों की क्षमता निर्माण का निरंतर समर्थन तथा विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ़ करना।
संकल्प संख्या 6 – विधायी निकायों के कार्य संपादन का वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर मूल्यांकन एवं तुलनात्मक आकलन (बेंचमार्किंग) करने हेतु एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) का निर्माण, जिससे जनहित में अधिक उत्तरदायित्व के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने हेतु अनुकूल वातावरण स्थापित हो सके।
तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई।
• पारदर्शी, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग,
• विधायकों की क्षमता-वृद्धि द्वारा कार्यकुशलता में सुधार एवं लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना, तथा
• जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही।
इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से 36 पीठासीन अधिकारियों ने भागीदारी की। इस प्रकार सहभागिता की दृष्टि से 86वाँ AIPOC अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन रहा।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाते हैं, आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
श्री बिरला ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश विधान सभा, विधान परिषद, लोक सभा एवं राज्य सभा सचिवालय, तथा सभी प्रतिभागी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा पर विचार व्यक्त करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि अब नितिन नबीन मेरे बास हैं। यह बात उन्होंने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नबीन के पद भार ग्रहण समारोह में कही। प्रधानमंत्री ने नितिन नबीन को बधाई देते हुए उहें जिम्मेदारियां भी बताईं और आशा भी व्यक्त की कि वे सफल होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में पदाधिकारी का दायित्व बदलता है दिशा और नीति नहीं बदलती। भाजपा के संस्कार है।
पार्टी कार्यालय में आयोजित समारोह में श्री मोदी ने कहा कि पार्टी का कार्यकर्ता होना उनके खुद के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा हमारी पार्टी में अध्यक्ष बदलते हैं, आदर्श नहीं बदलते। नेतृत्व बदलता है लेकिन दिशा नहीं बदलती। श्री मोदी ने कहा भाजपा एक संस्कार है भाजपा एक परिवार है। हमारे यहां मेम्बरशिप Membership से भी ज्यादा रिलेशनशिप Relationship होती है। भाजपा एक ऐसी परंपरा है जो पद से नहीं चलती बल्कि प्रक्रिया से चलती है। हमारे यहां पदभार एक व्यवस्था है और कार्यभार जीवन भर की जिम्मेदारी।
मंगलवार 20 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पार्टी कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व भाजपा अध्यक्षों राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह, जेपी नड्डा ने नितिन नबीन को अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण कराया
नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए हुए सर्वसम्मत चुनाव के बाद आज नितिन नबीन के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा हो गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के निवर्तमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह और जगत प्रकाश नड्डा समेत भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद थे। श्री नबीन का निर्वाचन कल ही तय हो गया था क्योंकि उनका अकेला नामांकन इस पद के लिए आया था। घोषणा आज समारोह पूर्वक की गई।
भारतीय जनता पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखकर नबीन का चयन किया है। वे कायस्थ जाति से हैं, जिसका पश्चिम बंगाल से लेकर, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश में खासा प्रभाव है। बुद्धिजीवी वर्ग में ब्राह्मण के बाद यह दूसरी ऐसी जाति है जिसके समाज के लोग विभिन्न सेवाओं में भारी संख्या में हैं और प्रभाव रखते हैं। इसलिए यह वर्ग जनमत बनाने और नैरेटिव सैट करने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा सकता है।
बिहार के निवासी नितिन नबीन युवा अध्यक्ष के रूप में पद संभालने वाले पहले नेता हैं। वे बिहार सरकार में पांच बार विधायक रहे हैं। उनके पिता भी भाजपा के विधायक थे। श्री नबीन भाजपा के लिए कई महत्वपूर्ण अभियानों में सफलता पूर्वक परिणाम दे चुके हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव में प्रभारी बनाया गया था। वहां भाजपा को सफलता मिली, इसके बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा को उल्लेखनीय जीत मिली थी।
हालांकि नबीन का चयन देश भर के लिए चौंकाने वाला फैसला रहा। लेकिन भाजपा के लिए पूरी तरह से कैलकुलेटिव है। पूरा गणित लगा कर भाजपा नेतृत्व ने फैसला लिया है। वे 45 वर्ष के हैं और अगले 25 वर्ष तक वे पार्टी की अनवरत सेवा कर सकते हैं।