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Economic Survey: कृषि विकास दर पांच वर्षों के दौरान औसत वार्षिक विकास दर 4.4 प्रतिशत

January 30, 2026

Economic Survey: कृषि विकास दर पांच वर्षों के दौरान औसत वार्षिक विकास दर 4.4 प्रतिशत

कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के केंद्र में होगी : आर्थिक समीक्षा

ECONOMIC SURVEY

आर्थिक सर्वे प्रस्तुत करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार डा वी अनन्त नागेश्वर

  • वित्तीय वर्ष 2016 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 के दौरान दशकीय वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है
  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में खाद्यानों का उत्पादन 3,577.3 लाख मिलियन टन (एलएमटी) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
  • कृषि मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र सबसे उज्ज्वल पक्ष के रूप में उभरा; इसका उत्पादन वित्तीय वर्ष 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन पहुंचा

Published on 30 JAN 2026 Time: 07.48 AM, Source: PIB

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 (पीआईबी) .केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि भारतीय कृषि की स्थिति निरंतर सुदृढ़ हुई है और मुख्य रूप से इसके सहयोगी क्षेत्रों में विकास होने से इसमें लगातार प्रगति हुई है।
आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि हाल के वर्षों में खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि हुई है और मवेशी, मत्स्य पालन तथा बागवानी जैसे उच्च मूल्य वाले सहयोगी क्षेत्र आय के अवसरों को बेहतर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को मज़बूत करने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आर्थिक समीक्षा में इस तथ्य को भी दर्ज किया गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में औसत वार्षिक विकास दर स्थिर मूल्य पर 4.4 प्रतिशत रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5 प्रतिशत रही। दशकीय वृद्धि दर (वित्तीय वर्ष 2016-वित्तीय वर्ष 2025) 4.45 प्रतिशत रही, जो कि पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है। यह वृद्धि दर मुख्य रूप से मवेशी (7.1 प्रतिशत) और मछली पकड़ने एवं उसके पालन (8.8 प्रतिशत) के मामले में सशक्त प्रदर्शन के परिणामस्वरूप संभव हुई है। इसके बाद फसल क्षेत्र का स्थान रहा, जिसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2015 से लेकर वित्तीय वर्ष 2024 के दौरान पशुधन क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गयी। इसके सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 195 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस क्षेत्र ने वर्तमान मूल्य पर 12.77 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर (सीएजीआर) दर्ज की। मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। वर्ष 2004-14 की तुलना में 2014-2025 के दौरान मछली के उत्पादन में 140 प्रतिशत से भी अधिक (88.14 लाख टन) की वृद्धि हुई। इस प्रकार, सहयोगी क्षेत्र निरंतर विकास के एक मुख्य वाहक के रूप में उभर रहे हैं और कृषि से होने वाली आय को बढ़ाने में अहम योगदान दे रहे हैं।
भारत के खाद्यान्न उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि हुई है और इसके कृषि वर्ष (एवाई) 2024-25 के दौरान 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंच जाने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 एलएमटी अधिक है। खाद्यान्न उत्पादन में यह बढ़ोतरी चावल, गेहूं, मक्का एवं मोटे अनाजों (श्री अन्न) की अधिक उपज के कारण संभव हुई है।
बागवानी क्षेत्र, जिसकी कृषि मूल्य वर्धन (जीवीए) में 33 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, देश की कृषि विकास यात्रा में एक उज्ज्वल पक्ष के रूप में उभरी है। वर्ष 2024-25 के दौरान, बागवानी क्षेत्र का उत्पादन 362.08 एमटी तक पहुंच गया और इसने खाद्यानों के 329.68 एमटी के अनुमानित उत्पादन को पीछे छोड़ दिया। अगस्त 2025 तक, बागवानी क्षेत्र का उत्पादन 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन तक जा पहुंचा।
खाद्यान्नों के उत्पादन में यह वृद्धि बेहद व्यापक रही है। फलों का उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जियों का उत्पादन 219.67 मिलियन टन तथा अन्य बागवानी आधारित फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा, जो कि कृषिगत उत्पादन एवं मूल्य में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
इसके अलावा, भारत विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश बन गया है और प्याज के वैश्विक उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सब्जियों, फलों एवं आलू के उत्पादन के मामले में भी भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है और वह प्रत्येक श्रेणी के वैश्विक उत्पादन में 12-13 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। ये उपलब्धियां बागवानी क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति, खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग को पूरा करने में इसकी बढ़ती भूमिका और उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन में उपलब्ध अवसरों को दर्शाती हैं।
अंत में, आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के केंद्र में होगी, समावेशी विकास को बढ़ावा देगी और करोड़ों लोगों की आजीविका को बेहतर बनाएगी। भारत ने कृषिगत उत्पादन, खासकर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन एवं बागवानी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।

सात प्रतिशत वृद्धि के साथ भारत का ओद्योगिक प्रदर्शन मजबूतः निर्मला सीतारमण

बजट पूर्व आर्थिक समीक्षा संसद के दोनों सदनों प्रस्तुत

FM NIRMALA SITHARAMAN PRESENTED ECONOMIC SURVEY IN PARLIAMENT

संसद में बजट 2026-27 के पूर्व आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत करती हुईं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण

Published on 30 JAN 2026 Time: 07.04 AM, Source: PIB

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 (पीआईबी) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि वित्‍त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में वास्‍तविक आधार पर उद्योग का संवर्धित सकल मूल्‍य (जीवीए) में साल दर साल 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत का औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत बना रहा। इससे पिछले वित्‍त वर्ष (2024-25) में वृद्धि में 5.9 प्रतिशत की नरमी के बाद यह अच्‍छी बढ़ोतरी का संकेत है।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्‍त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण जीवीए क्रमश: 7.72 और 9.13 प्रतिशत बढ़ा। इस सुधार की मुख्‍य वजह विनिर्माण क्षेत्र में जारी ढांचागत बदलाव हैं, जिनमें धीरे-धीरे मंहगे विनिर्माण खंड की ओर रुझान, कॉरिडोर आधारित विकास के माध्‍यम से औद्योगिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की उपलब्‍धता में सुधार और प्रौद्योगिकी को बड़े स्‍तर पर अपनाना एवं कंपनियों का औपचारीकरण शामिल हैं।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि भारत के कुल विनिर्माण मूल्‍य संवर्धन में मध्‍यम और उच्‍च प्रौद्योगिकी गतिविधियों की हिस्‍सेदारी 46.3 प्रतिशत हो गई। इसकी मुख्‍य वजह उत्‍पादन से जुड़े प्रोत्‍साहन (पीएलआई) योजनाएं और भारतीय सेमीकंडटर मिशन जैसी विभिन्न सरकारी पहल के साथ-साथ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, फार्मास्‍युटिकल, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमता में विस्‍तार हैं। समीक्षा में 2023 में प्रतिस्‍पर्धी औद्योगिक प्रदर्शन (सीआईपी) के मामले में भारत की रैंकिंग सुधरकर 37वें पायदान पर पहुंचने के साथ देश की वैश्विक स्थिति में मजबूती की बात कही गई, जबकि 2022 में भारत 40वें पायदान पर था।
समीक्षा कहती है कि भले ही, वाणिज्यिक बैंकों की तरफ से बैंक आधारित औद्योगिक कर्ज में बढ़ोतरी वित्‍त वर्ष 24 के 9.39 प्रतिशत की तुलना में घटकर वित्‍त वर्ष 25 में 8.24 प्रतिशत रह गई, लेकिन विभिन्‍न आकलनों से वर्तमान में जारी विविधीकरण के चलते बैंकों से वित्‍त के स्रोतों के दूर होने के संकेत मिले हैं। अगस्‍त 2025 की मासिक आर्थिक समीक्षा का उल्‍लेख करते हुए समीक्षा कहती है, ‘बैंक कर्ज में कमी वाणिज्यिक क्षेत्र के वित्‍तीय संसाधनों के समग्र प्रवाह में बढोतरी से मेल खाती है। वित्‍त वर्ष 20 से वित्‍त वर्ष 25 के दौरान गैर बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए वित्‍त के प्रवाह में 17.32 की सीएजीआर बढोतरी दर्ज की गई।
मुख्‍य इनपुट उद्योग
आर्थिक समीक्षा जोर देकर कहती है कि भारत के इस्‍पात और सीमेंट क्षेत्र में दुनिया के दूसरे बड़े उत्‍पादक बने रहने के साथ मुख्‍य उद्योगों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा बड़ा सीमेट उत्‍पादक है। प्रति व्‍यक्ति 540 किलोग्राम के वैश्विक औसत की तुलना में भारत में सीमेंट की घरेलू खपत प्रति व्‍यक्ति लगभग 290 किलोग्राम है। समीक्षा कहती है कि सरकार का मुख्‍य रूप से राजमार्ग, रेलवे, आवासीय योजनाओं, स्‍मार्ट सिटीज जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ग्रामीण विकास एवं औद्योगिक वृद्धि पर जोर है, जिससे सीमेंट की मांग में खासी बढ़ोतरी का अनुमान है।
निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र से मजबू‍त घरेलू मांग के चलते, बीते पांच साल में इस्‍पात क्षेत्र में व्‍यापक बदलाव देखने को मिला।
वित्‍त वर्ष 25 में 1,047.52 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्‍पादन के साथ भारत का कोयला उद्योग ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उत्‍पादन बीते वित्‍त वर्ष के 997.83 एमटी की तुलना में 4.98 प्रतिशत ज्‍यादा था।
रसायन और पेट्रो-रसायन क्षेत्र की अर्थव्‍यवस्‍था के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका बनी रही, जिसने वित्‍त वर्ष 24 में समग्र विनिर्माण क्षेत्र के जीवीए में 8.1 प्रतिशत का योगदान किया।
वित्‍त वर्ष 15-25 के  दौरान वाहन उद्योग के उत्‍पादन में लगभग 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को प्रोत्‍साहन देने के लिए कई कदम उठाए। समीक्षा में उल्‍लेख किया गया कि सरकारी पहलों के चलते हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
समीक्षा के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रणनीतिक‍ नीतिगत हस्‍तक्षेपों में ऑटोमोबाइल और वाहन कलपुर्जा उद्योग के लिए पीएलआई स्कीम (पीएलआई-ऑटो स्‍कीम), ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री सेल (एसीसी) बैटरी स्‍टोरेज’ के लिए पीएलआई स्‍कीम (पीएलआई एसीसी स्‍कीम), पीएम ई-ड्राइव स्‍कीम, पीएम ई-बस सेवा-पेमेंट सिक्‍योरिटी मैकेनिज्‍म (पीएसएम) स्‍कीम, स्‍कीम टू प्रमोट मै‍न्‍युफैक्‍चरिंग और इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार्स इन इंडिया (एसएमईसी) शामिल हैं।
समीक्षा में उल्‍लेख किया गया है कि वित्‍त वर्ष 22 के सातवीं की तुलना में वित्‍त वर्ष 25 में तीसरी बड़ी निर्यात श्रेणी बनने के साथ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सेक्‍टर हाल के वर्षों में बड़े ढांचागत बदलाव का साक्षी बना है। इस वृद्धि को घरेलू उत्‍पादन और निर्यात (चार्ट VIII. 16) में शानदार बढ़ोतरी से बल मिला है। इस बढ़ोतरी के केंद्र में मोबाइल विनिर्माण खंड रहा, जिसका उत्‍पादन मूल्‍य वित्‍त वर्ष 15 के 18,000  करोड़ रुपए से 30 गुना बढ़कर वित्‍त वर्ष 25 में 5.45 लाख करोड़ रुपए के स्‍तर पर पहुंच गया।
वॉल्‍यूम के लिहाज से दुनिया में तीसरे पायदान पर मौजूद भारत का फार्मास्‍युटिकल उद्योग वित्‍त वर्ष 25 में 191 देशों को निर्यात के साथ वैश्विक जेनेरिक्स की मांग में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। समीक्षा में उल्‍लेख किया गया है कि पिछले दशक (वित्‍त वर्ष 15 से वित्‍त वर्ष 25) में निर्यात में 7 प्रतिशत सीएजीआर बढ़ोतरी के साथ वित्‍त वर्ष 25 में फार्मास्‍युटिकल क्षेत्र का सालाना टर्नओवर 4.72 लाख करोड़ रुपए के स्‍तर पर पहुंच गया।
भविष्‍य के विकास के लिए एक रोडमैप
वैश्विक स्‍तर पर चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, लॉजिस्टिक, कारोबार में सुगमता और नवीन प्रणालियों में सुधार के साथ भारत का औद्योगिक क्षेत्र अच्‍छी तेजी का गवाह बना है। आर्थिक समीक्षा कहती है कि औद्योगीकरण के अगले दौर के लिए देश को आयात विकल्‍प पर आधारित मॉडल की तुलना में व्‍यापकता, प्रतिस्‍पर्धा, नावाचार और जीवीसी में व्‍यापक एकीकरण पर जोर देना होगा। हर खंड में पूर्ण आत्‍मनिर्भरता हासिल करने के बजाए, भारत को विविधीकरण के माध्‍यम से रणनीतिक लचीलेपन का विकास और व्‍यापक क्षमताएं हासिल करने की जरूरत है। इसके लिए आरएंडडी, प्रौद्योगिकी को अपनाने, कौशल और गुणवत्‍ता प्रणालियों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने की जरूरत है।

January 29, 2026

Haridwar: श्रमजीवी पत्रकार यूनियन का रजत जयंती समारोह आयोजित

आज के दौर में पत्रकारिता बड़ी जिम्मेदारी-अरूण शर्मा
समाज को सही दिशा देने में पत्रकारों की बड़ी भूमिका-आदेश चौहान
पत्रकार समाज का आईना हैं-किरण जैसल

Published on 29.01.2026, Thursday, 09:51 PM, Report by Ramchandra Kannojia, Haridwar, UP Samachar Sewa
हरिद्वार, 29 जनवरी (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा)। उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन का रजत जयंती समारोह आयोजित किया गया। प्रेस क्लब सभागार में आयोजित पत्रकार यूनियन के रजत जयंती समारोह में पत्रकारिता के मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और भविष्य की दिशा पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां शारदा की स्तुति के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कथावाचक रविदेव शास्त्री ने की। मुख्य अतिथि के रूप में रानीपुर विधायक आदेश चौहान तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रजनीकांत शुक्ला ने किया। जिलाध्यक्ष संजय आर्य ने यूनियन के गठन से लेकर वर्तमान तक की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने सदैव जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों की आवाज़ को बुलंद किया है। कार्यक्रम संयोजक डा.हिमांशु द्विवेदी ने सभी अतिथियों, पत्रकार साथियों और गणमान्य नागरिकों का पटका पहनाकर स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा ने यूनियन के 25 वर्षों के संघर्ष, उपलब्धियों और पत्रकार हितों के लिए किए गए आंदोलनों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पत्रकारिता एक बड़ी जिम्मेदारी है। जिसमें सत्य, निष्पक्षता और सामाजिक प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे मानकों और मर्यादाओं का पालन करते हुए निर्भीक और ईमानदार पत्रकारिता करें। उन्होंने बताया कि यूनियन लगातार पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान के लिए संघर्षरत है। मुख्य अतिथि विधायक आदेश चौहान ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विधायक आदेश चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य का गठन संभव हो पाया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में हो रहे विकास कार्यों की भी सराहना की। मेयर किरण जैसल ने समारोह में उपस्थित पत्रकारों को रजत जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पत्रकार समाज का आईना हैं और उनकी लेखनी समाज को जागरूक करने का कार्य करती है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी एवं प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु शंकर करौरी महादेव ने ऑडियो संदेश के माध्यम से यूनियन को 25 वर्ष पूर्ण होने पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं और पत्रकारों की भूमिका की सराहना की। प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने सभी अतिथियों, पत्रकारों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समारोह पत्रकारिता के मूल्यों को सशक्त करने वाला रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि बदलते समय में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां हैं। लेकिन श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने सदैव सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दी है। इस अवसर पर जगदीश लाल पाहवा, डा.विशाल गर्ग, विजयपाल बघेल ग्रीन मैन, नितिन गौतम, लोकेंद्र अंतवाल, विजयपाल सिंह, प्रेस क्लब महामंत्री दीपक मिश्रा सहित शहर के अनेक प्रतिष्ठित नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं डा.हिमांशु द्विवेदी, अमित कुमार गुप्ता, मनोज कुमार खन्ना, राजकुमार पाल, संजय शर्मा, गगनदीप गोस्वामी, सुनील दत्त पांडे, रामचंद्र कनौजिया, दीपक नौटियाल, सुभाष कपिल, रोहित सिखोला, मनोज रावत, लव शर्मा, महेश पारिक, ऋषि सचदेवा, विपिन शर्मा, संदीप गोयल, संजय संतोषी, संजय रावल, जगदीश प्रेमी, अनिरुद्ध भाटी, संजय चौहान, सुनील शेट्टी, नरेंद्र ढीला, गौरव चक्रपाणि, देशप्रेमी, रामकुमार शर्मा, देवेश शर्मा, सुमित तिवारी, कुलदीप अग्रवाल, आशु शर्मा सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।

यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026, विवादित यूजीसी नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।

नियमों के खिलाफ दायर रिट याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमालया बागची ने की। अग्रिम निर्णय तक यूजीसी के 2012 में अधिसूचित नियम ही लागू रहेंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है।

ज्ञातव्य है कि 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विनियम 2026 जारी किए थे। इनकी धारा 3 सी पर विवाद था। इस मामले को लेकर अधिवक्ता विनीत जिंदल ने याचिका दायर की थी।

UGC Rules stayed by Supreme court

January 28, 2026

ब्रेकिंग न्यूज: विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार समेत 6 का निधन

    Ajit Pawar, NCP leader अजित पवार, उप मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र
Posted on : 28.01.2026, Wednesday Time: 10:08 AM,  Source:  Social Media

मुंबई, 28 जनवरी 2026, (यूपी समाचार).। महाराष्ट्र में आज सुबह हुई विमान दुर्घटना में उप मुख्यमंत्री अजित पवार और उनके सहयोगियों समेत 6 लोगों का निधन हो गया। दुर्घटना पुणे जिला अंतर्गत बारामती में हुई।

जानकारी के अनुसार अजित पवार आज सुबह बारामती में एक मीटिंग के लिए गए थे। सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर उनका प्राइवेट चार्टर विमान लैंडिंग करते समय दुर्घटना ग्रस्त हो गया। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए अजित पवार, उनके पीएसओ, सहयोगी, दो क्रू मेंबर और एक अन्य को गंभीर रूप से घायल अवस्था में चिकित्सालय लाया गया, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।

#अजित पवार #Ajit Pawar #Planecresh

 

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