एटा 08 मार्च उप्रससे। जनपद में जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार डाॅ० राकेश सक्सेना ने उत्तर प्रदेश व केन्द्र सरकार से यमुना एक्सप्रेस वे गौतमबुद्धनगर जेवर में बन रहे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम ऋषि दयानंद सरस्वती एयरपोर्ट, जेवर रखने का विनम्र आग्रह किया है। उन्होंने नामकरण की सार्थकता पर तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने वैदिक ज्ञान की पुनर्स्थापना के प्रयास में अनेक विषयों पर विचार व्यक्त किए जिनमें विमान विद्या का उल्लेख भी मिलता है। उनकी मान्यता थी कि वैदिक साहित्य केवल आध्यात्मिक ही नहीं अपितु उसमें विज्ञान और तकनीक से जुड़े अनेक संकेत भी समाहित हैं।
डाॅ० राकेश ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने ग्रंथ ऋग्वेदादिभाष्य भूमिका एवं सत्यार्थ प्रकाश में यह विचार व्यक्त किया था कि वेदों में वर्णित विमान केवल कल्पना नहीं, उन्नत यांत्रिक साधनों का संकेत है। उनका मत था कि प्राचीन ऋषियों के पास प्रकृति और यांत्रिकी का गहरा ज्ञान था। आकाशयान की कल्पना केवल वैदिक साहित्य तक ही सीमित नहीं है बल्कि पुराणों और महाकाव्यों में भी इसका उल्लेख मिलता है। राम और रावण द्वारा पुष्पक विमान उपयोग किए जाने की कथा सर्वविदित है। इसी संदर्भ में डाॅ० सक्सेना ने विनम्र आग्रह करते हुए प्रदेश व केन्द्र सरकार से विमान विद्या सम्बन्धी अवधारणा को जन-जन तक पहुँचाने वाले ऋषि दयानंद सरस्वती के नाम पर जेवर हवाई अड्डे का नामकरण रखने हेतु अपील की है।
