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एटा में ग्रामीणों ने सरकारी पटरी पर अवैध कब्जे की शिकायत

March 25, 2026

एटा में ग्रामीणों ने सरकारी पटरी पर अवैध कब्जे की शिकायत

राजस्व विभाग पर मिलीभगत का लगाया आरोप

एटा 25 मार्च उप्रससे। जनपद में सकीट क्षेत्र के मानपुर गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर सरकारी पटरी पर अवैध अतिक्रमण की लिखित शिकायत की। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के दबंग व्यक्ति दिनेश प्रताप और हरि प्रकाश, पुत्रगण लक्ष्मण इस भूमि पर कब्जा कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच करवाकर अवैध कब्जा रुकवाने की मांग की है। इस दौरान उन्होंने राजस्व टीम पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया।

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी इस भूमि की पैमाइश हुई थी, लेकिन राजस्व कर्मियों द्वारा गलत आख्या प्रस्तुत कर दी गई थी।

गांव के मैनपाल ने बताया कि दिनेश प्रताप सिंह और हरिप्रकाश द्वारा गुंडागर्दी के बल पर पटरी पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इस कारण गांव वालों को रास्ता निकालने में परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय में न्याय की गुहार लगाई है। कि रास्ता खुलवाया जाए और अवैध रूप से भरी गई नींव को हटाकर अतिक्रमण समाप्त किया जाए।

भारतीय संस्कृति के आदर्शों का उत्सव: रामनवमी – डाॅ०राकेश सक्सेना

Rakesh Saxena

एटा 25 मार्च उप्रससे। भारतीय संस्कृति में पर्व समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के आधार होते हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण पर्वों में रामनवमी का विशिष्ट स्थान है जो धर्म और आदर्श जीवन के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मोत्सव रूप में मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमीं तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय जनमानस में आस्था, आदर्श और नैतिक मूल्यों का संवाहक है।प्राचीन भारतीय ग्रंथों विशेषकर वाल्मीक रामायण एवं गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस में भगवान राम के जन्म का वर्णन इस प्रकार मिलता है, उदाहरणार्थ’ ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतुनां षट समत्ययु:। ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नवमिके तिथौ। ‘ इस श्लोक के अनुसार यज्ञ के उपरांत चैत्र मास की नवमीं तिथि को राम का जन्म हुआ। गोस्वामी तुलसीदास ने राम के अवतरण को लोकमंगल की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है, यथा- भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी सुनि मन हारी, अद्भुत रूप विचारी।।
यह चौपाई केवल राम के जन्म का ही वर्णन नहीं करती अपितु यह संकेत देती है कि भगवान राम का अवतरण करुणा, धर्म और लोककल्याणार्थ हुआ है।
आधुनिक समाज में नैतिक मूल्यों के संकट की चर्चा अक्सर की जाती है। ऐसे समय में राम का चरित्र, आदर्श जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। उनको मर्यादापुरुषोत्तम कहा गया क्योंकि उन्होंने पुत्रधर्म, भ्रातृप्रेम, दाम्पत्य निष्ठा, राजधर्म आदि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आदर्श स्थापित किए। राम के चरित्र का सार यह है कि जीवन में कर्तव्य सर्वोपरि होना चाहिए। इसी संदर्भ में महात्मा गाँधी का कथन उल्लेखनीय है। रामराज्य का अर्थ किसी विशेष धार्मिक शासन से नहीं बल्कि न्याय, सत्य और नैतिकता पर आधारित व्यवस्था से है। ‘ यह विचार आधुनिक लोकतांत्रिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। रामकथा में सामाजिक समरसता का सुन्दर चित्रण मिलता है। भगवान राम ने निषादराज,शबरी, हनुमान, सुग्रीव, वानर सेना आदि समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ समान व्यवहार किया, जो यह दर्शाता है कि समाज की शक्ति उसकी विविधता और सहयोग में निहित है। रामधारीसिंह दिनकर ने राम के चरित्र की इसी विशेषता का संकेत करते हुए लिखा है– ‘ राम का व्यक्तित्व भारतीय संस्कृति की समन्वयकारी शक्ति का प्रतीक है। ‘ आधुनिक वैश्विक संस्कृति के प्रभाव में प्राय: आदर्श और परम्पराएँ कमजोर पड़ने लगतीं हैं, ऐसी स्थिति में रामनवमी के सामूहिक आयोजनों में रामकथा समाज में एकता और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करती है तथा समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम भी करती है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने भी राम के महत्व को रेखांकित करते हुए लिखा था– ‘ राम भारतीय संस्कृति के आदर्श मनुष्य हैं जिनमें धर्म,नीति और करुणा का अद्भुत समन्वय है। ‘
रामनवमी के संदर्भ में रामराज्य की कल्पना भी महत्वपूर्ण है। रामराज्य न्याय, समानता और लोककल्याण पर आधारित आदर्श शासन का प्रतीक है। यदि रामराज्य की मूल भावना सत्य, पारदर्शिता, लोकहित और उत्तरदायित्व को अपनाया जाए तो आधुनिक समाज के प्रशासन और राजनीति के क्षेत्र में संतुलन और विश्वास स्थापित किया जा सकता है। रामकथा से जीवन-मूल्यों की शिक्षा मिलती है, सामाजिक एकता का माध्यम बनती है, परम्पराओं और लोकसंस्कृति को जीवित रखने में सहायक बनती है तथा भक्ति और आत्मिक शांति की अनुभूति कराती है। समग्र रूप से देखा जाए तो रामनवमी मात्र धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं अपितु राम के आदर्शों को अपनाकर न्यायपूर्ण, समरस, आदर्शोन्मुख नैतिक समाज की स्थापना करने का उत्सव है।

March 24, 2026

निरंकारी संत समागम में एटा से उमड़े हजारों श्रद्धालु

निरंकारी संत समागम ने जगाई मानव एकता व प्रेम की ज्योति

एटा 24 मार्च उप्रससे। भक्ति भावना एवं मानवीय दिव्य गुणों के साथ निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा के दिव्य आशीर्वाद एवं निरंकारी राजपिता की गरिमामयी उपस्थिति में रेलवे ग्राउंड, पराग डेयरी, कानपुर में उत्तर प्रदेश प्रादेशिक निरंकारी संत समागम का भव्य, सुव्यवस्थित एवं अत्यंत प्रेरणादायी आयोजन संपन्न हुआ। जहाँ भक्तों को आध्यात्म, प्रेम, अनुशासन, श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना का अद्वितीय संगम देखने को मिला।

उक्त जानकरी निरंकारी मिशन क़ी शाखा एटा के मीडिया सहायक अमित कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों एवं शहरों से आए हजारों श्रद्धालुओं में जिला एटा के अनेक क्षेत्रों से भी निरंकारी भक्तों ने सहभागिता कर इस आयोजन को एक विराट आध्यात्मिक पर्व का स्वरूप दिया। समागम स्थल को एक सुव्यवस्थित टेंट नगरी के रूप में विकसित किया गया, जहाँ स्वच्छता, अनुशासन और आध्यात्मिक प्रेम का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु एक परिवार की भांति आपसी प्रेम, एकत्व, शांति और सद्भावना के साथ एकत्रित हुए। समागम से पूर्व निरंकारी यूथ फोरम (एन.वाई.एफ.) द्वारा खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सुंदर आयोजन किया गया। युवाओं ने क्रिकेट, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, फुटबॉल आदि खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर टीम भावना, अनुशासन और सहयोग जैसे मूल्यों को आत्मसात किया। साथ ही, निरंकारी यूथ सिम्पोजियम (एन.वाई.एस.) के माध्यम से युवाओं को आध्यात्मिक विषयों पर चिंतन एवं अभिव्यक्ति का मंच प्रदान किया गया। समागम के दौरान “छः तत्व” विषय पर आधारित स्किट, गीत एवं पैनल चर्चा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आध्यात्मिकता केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सार्थक शैली है। गीत, प्रवचन, कविताओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने भक्ति भाव को व्यक्त किया, जिससे सेवा, प्रेम और मानवीय मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुँचा।

निरंकारी संत संगम

तितली के उदाहरण द्वारा माता ने समझाया कि जैसे तितली परिवर्तन के बाद सुंदर बनती है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उसे श्रेष्ठ बनाना चाहिए। उन्होंने प्रेरित किया कि हम बिच्छू की तरह डसने वाले नहीं, बल्कि भलाई करने वाले बनें—हमारे कर्म दिखावे से रहित, सच्चाई और नेकी से भरपूर हों। सच्ची भक्ति और सत्संग से मन की पीड़ा दूर होती है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। जब मनुष्य निराकार को प्राथमिकता देता है, तब वह जीते-जी मुक्ति का अनुभव करता है। सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन का आधार बताते हुए उन्होंने समर्पण भाव से जीवन जीने की प्रेरणा दी। अंत में निरंकारी मिशन की ओर से प्रशासन एवं सभी विभागों का इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में दिए गए सहयोग हेतु हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

March 23, 2026

एटा में सोशल मीडिया पर भड़काऊ रील बनाने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

एटा 23 मार्च उप्रससे। जनपद के कस्बा मारहरा में पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ रील बनाने और उसे पोस्ट करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह रील 21 मार्च 2026 को बनाई गई थी।

गिरफ्तार किए गए आरोपी उवैश पुत्र चांदमियां और शोएब आजम पुत्र हमीद हुसैन दोनों मारहरा थाना क्षेत्र के निवासी हैं।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक फिल्म के डायलॉग का इस्तेमाल करते हुए एक भड़काऊ रील बनाई थी और उसे सोशल मीडिया पर भी वायरल किया था। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया जाएगा। गिरफ्तारी के समय उपनिरीक्षक लालबहादुर सिंह, हेड कांस्टेबल प्रदीप कुमार और पी.सी. होमगार्ड अरविन्द कुमार शामिल थे।

वंदे मातरम’ चौराहे की मांग कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

एटा में शहीद दिवस पर विश्व हिंदू महासंघ

एटा 23 मार्च उप्रससे। जनपद में विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों ने एटा कलेक्ट्रेट पहुंचकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक लिखित ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने जिले के प्रत्येक चौराहे को ‘वंदे मातरम चौराहा’ घोषित करने की मांग उठाई है। यह मांग शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस के अवसर पर की गई।

संगठन के जिलाध्यक्ष उपेंद्र सिंह जादौन के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया। इसे जिलाधिकारी कार्यालय में अतिरिक्त एसडीएम राजकुमार मौर्य को दिया गया। ज्ञापन में जिले के सभी चौराहों को ‘वंदे मातरम चौराहा’ नाम देने की अपील की गई है।

जिलाध्यक्ष उपेंद्र सिंह जादौन ने बताया कि 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी थी। आज सोमवार को उनका 95वां शहादत दिवस है, जिसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ से देश भावना जागृत होती है, इसलिए चौराहों को यह नाम दिया जाना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने वालों में अनिल कुमार, साहब की तस्वीर सिंह राजपूत, निशांत गौरव सिंह सिकरवार, कमलेश सिंह, अजय शर्मा, विवेक कुमार, अमन, बृजेश बर्थडे, आकाश कश्यप, जितेंद्र, विवेक गुप्ता, अजय गुप्ता और अनुराग कुमार सहित दर्जनों संगठन कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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