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ईरान के खिलाफ अरब और यूरोप एकजुट

March 22, 2026

ईरान के खिलाफ अरब और यूरोप एकजुट

Posted on 22.03.2026 Time 07.00 PM, Sunday Article: Iran Israel war , Writer: Sarvesh Kumar Singh 

सर्वेश कुमार सिंह

ईरान अमेरिका के युद्ध के बीच ईरान गहरे आइसोलेशन में आ गया है। यानी कि उपेक्षा की स्थिति में है। ईरान पहले से ही अकेला लड़ रहा था। लेकिन अब उसके खिलाफ यूरोप और अरब देश एकजुट होने लगे हैं। यह आइसोलेशन ईरान के लिए बहुत ही मुश्किल वाला हो सकता है।

वजह साफ है ऊर्जा का संकट पूरी दुनिया में गहराता जा रहा है। ऊर्जा संकट के कारण अब जो देश अभी तक निरपेक्ष थे और केवल दृष्टा की स्थिति में थे, केवल युद्ध को देख रहे थे। अब उन देशों को भी कुछ ना कुछ रणनीति तय करनी पड़ रही है क्योंकि सबके सामने ऊर्जा संकट आता चला जा रहा है। एक कारण तो ऊर्जा संकट है और ऊर्जा संकट में महत्वपूर्ण भूमिका है, हॉर्मूज जलडमरू मध्य मार्ग की। इसे खुला रखना
ऊर्जा के लिए बहुत जरूरी है। ऊर्जा की आपूर्ति के लिए।

तो इस प्रकार दो कारण है जिनसे ईरान  को आइसोलेशन का सामना करना पड़ रहा है। पहला कारण जल डमरू मध्य होमस को खुला रखना है। ईरान ने चेतावनी दे रखी है कि वो अमेरिका, इजराइल और उसका समर्थन करने वाले देशों के जहाजों को इस मार्ग से नहीं गुजरने देगा। इसका असर यह हो रहा है कि ऊर्जा का संकट लगातार गहरा रहा है। तेल की आपूर्ति, गैस की आपूर्ति निर्बाध नहीं हो पा रही है। इससे जहां यूरोप के कई देश प्रभावित हो रहे हैं। वहीं जो अरब देश हैं उनकी आर्थिक स्थिति को भी यह प्रभावित कर रहा है।

जलडरू मध्य मार्ग को खुला रखने के लिए अमेरिका
ने एक अपील की थी दुनिया भर के देशों से। उस अपील का पहले तो कोई असर नहीं हुआ लेकिन जब देशों को लगा कई देशों को यह लगा यूरोप के कि वो भी इससे प्रभावित हो जाएंगे ऊर्जा की आपूर्ति को लेकर। तो उन्होंने एक निर्णय लिया और यह निर्णय है यूरोप के पांच देश एकजुट हुए हैं जिसमें ब्रिटेन,फ्रांस, जर्मनी,इटली और नीदरलैंड हैं एक और देश है जो जापान है। इसने भी इन देशों के साथ एकजुटता दिखाई है। और यह एकजुट इसलिए हुए हैं कि किसी भी कीमत पर इस जलडमरू मध्य मार्ग को खुला रखा जाए। हॉर्मूज को खुला रखने के लिए कुछ ना कुछ
रणनीति अब बनानी पड़ेगी। वो रणनीति क्या होगी? वो रणनीति के कई चरण हो सकते हैं। पहला यह छह देश ईरान से बात करेंगे। ईरान को इन्होंने संदेश दे भी दिया है कि इस मार्ग को खुला रखा जाए ताकि ऊर्जा की आपूर्ति निर्वाद बनी रहे। इसके अलावा ईरान से यह भी अपील की है उन्होंने कि जो ऊर्जा संयंत्रों पर ईरान की तरफ से हमले हो रहे हैं उनको भी बंद किया जाए। पहला चरण यह है। इसके अलावा फिर कूटनीतिक वार्ताएं होंगी। कूटनीतिक वार्ता से अगर बात नहीं बनेगी तो हो सकता है यह छह देश मिलकर कुछ अपनी सेना का या अपनी नेवी का अपना कुछ जहाजों को भेजकर भी वहां यह प्रैक्टिस कर सकते हैं और इस मार्ग को खुला रखने की बात जैसे कि अमेरिका ने कही थी डोनाल्ड ट्रंप ने कि वे अपनी सेना को भेजें अपने नौसैनिक बेड़े भेजें तो ये इस पर भी विचार हो सकता
है। तो ऐसे मामले में एक तो यूरोप यूरोप के सभी जो बड़े देश हैं वो एक तरह से उसमें फ्रांस भी शामिल है। तो जो देश शामिल हैं उसमें अब सभी लगभग यूरोप एकजुट हुआ है और वो ईरान के खिलाफ हुआ है। तो एक तरह से यूरोप में ईरान के लिए कोई समर्थन नहीं है और यूरोप एक तरह से विरोध में खड़ा हो गया है। दूसरा जो बड़ा क्षेत्र है वो अरब है। हालांकि ईरान ने साफ कहा कि हम अरब देशों पर हमले नहीं कर रहे हैं। लेकिन जो अमेरिका के सेंटर हैं, केंद्र हैं जो उनके सीआईए के केंद्र है या उनके एयर फोर्स के स्टेशन है या
उनके दूतावास हैं उन पर लगातार ईरान ने हमले किए हैं। लेकिन अब इधर ईरान ने अरब देशों के जो ऊर्जा संयंत्र हैं, तेल के कारखाने हैं, तेल उत्पादन के केंद्र हैं,
गैस उत्पादन के केंद्र हैं, उन पर भी हमले शुरू कर दिए हैं और बड़े हमले किए हैं। उससे यूरोप के साथ-साथ अब अरब देश भी ईरान के खिलाफ एकजुट होते चले जा रहे हैं। पहले भी वो ईरान के साथ नहीं थे, लेकिन वो तटस्थ स्थिति में थे। लेकिन अब वो ईरान के खिलाफ खुलकर बात करने लगे हैं। इस वजह से ऐसा लगने लगा है कि ये दोनों घटनाएं ऐसी हैं कि जिससे कि पूरा यूरोप और पूरा अरब अब ईरान के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है और ईरान की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो जाएंगी।

दूसरी तरफ एक और नया घटनाक्रम है। यह भी ईरान के लिए थोड़ा दिक्कत पैदा करने वाला है। यह घटनाक्रम है। संयुक्त अरब अमीरात यूएई की सरकार ने एक आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा किया है। और यह आतंकवादी नेटवर्क लेबनान के हिजबुल्ला और ईरान की सरकार के सहयोग से संचालित हो रहा था। यह यूएई का दावा है। यूएई का दावा यह है कि जो आतंकवादी नेटवर्क के लोग गिरफ्तार हुए हैं, उनका
संबंध ईरान से था और हिजबुल्लाह से था। उनको ईरान के मारफत आर्थिक सहायता भी मिल रही थी। उनको समर्थन भी मिल रहा था और इस नेटवर्क को संचालित करने में इन दोनों का हाथ रहा है। यानी कि अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर आतंकवादी नेटवर्क का भी एक खुलासा यूएई ने कर दिया है। यूएई एक अरब देशों का प्रमुख देश है। प्रमुख ये जो देश है अरब के उनमें इसका संयुक्त अरब
अमीरात का बड़ा स्थान है। महत्वपूर्ण स्थान है। तो एक तरह से वह अरब और यूरोप दोनों के निशाने पर अब ईरान है और उसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब उसकी छवि भी खराब होने की संभावना है क्योंकि जो आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा हुआ है इससे कोई भी दुनिया का देश ईरान का इस तरह समर्थन नहीं करेगा कि वो आतंकवादियों को फंडिंग करें। हालांकि अभी यह आरोप है यूएई का। इसके प्रमाण अभी सामने आएंगे तो पता चलेगा कि उसमें सच्चाई कितनी है। लेकिन अभी ये यूरोप ने इस तरह का संयुक्त अरब
अमीरात ने इस तरह का आरोप लगाया है।

एक और घटनाक्रम यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी संसद से इस युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर की मांग की है। यानी कि इस युद्ध में अमेरिका को भारी धनराशि खर्च करनी पड़ रही है और आगे युद्ध जारी रखने के लिए 200 अरब डॉलर संसद से चाहिए, कांग्रेस से चाहिए। इसकी डिमांड डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने की है। क्योंकि यह युद्ध बहुत भारी पड़ता जा रहा है और महंगा युद्ध होता जा रहा है।

इसके अलावा भारत की भी सुरक्षा चिंताएं बहुत महत्वपूर्ण है और भारत सरकार इसके लिए सचेत है। जो भी आवश्यक कदम हैं यह भारत उठाता है। भारत के प्रधानमंत्री ने इस ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए और ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाद बनाए रखने के लिए ईरान
के राष्ट्रपति से भी बात की और उन्होंने क़तर के शेख से बात की है। उनको ईद की मुबारकबाद दी और इसके साथ ही कतर में जो बड़ा हमला ईरान की तरफ से हुआ है तेल संयंत्रों पर क्योंकि क़तर से बड़ी मात्रा में गैस की आपूर्ति भारत को होती है और कतर से तेल भी आता है तो कतर पर जो हमला हुआ है जो उनको नुकसान हुआ है उस पर चिंता व्यक्त की भारत ने और भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसकी निंदा भी की । तेल संयंत्रों पर हमले की भारत ने भी निंदा कर दी है तो एक तरह से जो ऊर्जा का मुद्दा है अब यह निर्णायक स्थिति में ले जाएगा। या तो देश तटस्थ रहे या फिर किसी ना किसी रूप से अपनी भूमिका निभाएं। क्योंकि ऊर्जा का जो ऐसा संकट है कि इससे हर देश प्रभावित होगा। हर व्यक्ति प्रभावित होगा। तो अब ईरान पर दबाव बढ़ना
लगातार शुरू हो गया है। और इस दबाव के आगे ईरान को संभवत झुकना पड़ेगा। क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए ईरान का जल डमरू मध्य को खुला रखना बहुत जरूरी है।  किसी भी कीमत पर तेल संयंत्रों पर हमले रोकने चाहिए।

इसमें अकेला ईरान ही जिम्मेदार नहीं है। ईरान के साथ-साथ इसमें इजराइल भी जिम्मेदार है और अमेरिका भी जिम्मेदार है। अमेरिका और इजराइल ने भी ईरान के तेल ठिकानों पे हमले किए। उसके जवाब में ईरान ने भी हमले किए। तो इसके लिए ऐसा नहीं है कि किसी एक को दोषी और किसी एक दूसरे को निर्दोष कहा जाए। दोषी तीनों हैं और इनको इस युद्ध में तेल क्षेत्रों पर ऊर्जा की जरूरतों को बचाना चाहिए था। जैसे नागरिक ठिकानों पर हमले नहीं करने चाहिए। अस्पतालों पर नहीं करने चाहिए। स्कूलों पर नहीं होने चाहिए। लेकिन इस युद्ध में सारी सीमाएं टूट गई हैं।
अस्पतालों पर भी हमले हो रहे हैं। स्कूलों पर भी हमले हो रहे हैं। तेल क्षेत्रों पर भी हमले हो रहे हैं। और यहां तक कि नेताओं पर भी हमले नहीं होते हैं युद्ध के दौरान। लेकिन नेताओं पर भी जो लीडरशिप है उस पर
भी हो रहे हैं। तो इस तरह से इस युद्ध में अब गंभीर ऊर्जा संकट सामने आने की आशंका है। ऐसे में अब ईरान अलग-थलग पड़ता जा रहा है और इसमें अब जो देश एकजुट हुए हैं उसमें अगर दूसरे देशों की भी संख्या बढ़ी तो ईरान को संभवत इस मामले पर झुकना पड़ेगा।

यह युद्ध जल्दी समाप्त होना चाहिए। नुकसान ईरान का भी बहुत हुआ है। इजराइल का भी हुआ है। अमेरिका तो क्योंकि दूर है लेकिन अमेरिका के जो ठिकाने हैं अरब क्षेत्रों में उन पर जरूर नुकसान हुआ है। उन पर हमले हुए हैं।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

लेखक स्वतंत्र पत्रकार है

 

March 17, 2026

तानाशाही के नाम पर: युद्ध नियंत्रण की आवश्यकता : डाॅ०राकेश सक्सेना

Rakesh Saxena

Posted on 17.03.2026, Tuesday

एटा 17 मार्च उप्रससे। युद्ध आक्रामक कृत्य है जो किसी भी राष्ट्र की अस्मिता के विनाश से जोड़ता है। इस विचार को दृष्टिगत रखते हुए मानव सभ्यता के इतिहास में युद्ध एक जटिल पक्ष रहा है। समय बदलाव के साथ युद्ध की प्रवृत्ति, साधन, उद्देश्य व परिणाम में व्यापक परिवर्तन हुए। प्राचीन युद्धों में तलवार, भाला, धनुष-बाण, गदा आदि अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग होता था किन्तु आधुनिक युद्धों में टैंक, मिसाइलें, लड़ाकू विमान, परमाणु बम, ड्रोन और साइबर तकनीक जैसे अत्याधुनिक साधनों का प्रयोग होता है। प्राचीन काल में युद्ध के कुछ नैतिक नियम और मर्यादाएँ थीं। दिन में युद्ध और रात्रि में विश्राम, निहत्थे व शरणागत पर आक्रमण न करना, स्त्रियों, बच्चों व निर्दोष नागरिकों की रक्षा करना आदि नियमों का पूर्णरूपेण पालन किया जाता था किन्तु आधुनिक युद्धों में ये मर्यादाएँ तार-तार हो चुकीं हैं। युद्ध किसी भी समस्या के समाधान नहीं होते। आज के युग में युद्ध अत्यधिक विनाशकारी हो गए हैं, इसकी विभीषिका, इसका दुष्प्रभाव समूचे समाज, संस्कृति और मानव जीवन पर पड़ता है, हजारों-लाखों लोग अपने प्राण ग॔वा बैठते हैं, परिवार उजड़ जाते हैं, माताएँ अपने पुत्रों को खो देतीं हैं, बच्चे अनाथ हो जाते हैं, उद्योग धंधे नष्ट हो जाते हैं, जनता अभाव का जीवन जीने को विवश हो जाती है, भय, असुरक्षा और अशान्ति का वातावरण समाज में फैल जाता है, हिंसा व घृणा का वातावरण पनपता है।
आज भारत-पाकिस्तान, अफगान-पाकिस्तान, यूक्रेन-रूस, इजरायल-फिलिस्तीन, अमेरिका-ईरान, इजरायल-ईरान आदि देशों के युद्धों से दृष्टिगोचर हो रहा है कि दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी है। वैश्विक राजनीति में ऊर्जा संसाधनों विशेषकर तेल का महत्वपूर्ण स्थान है। औद्योगिक विकास, सैन्य शक्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा भाग तेल पर निर्भर करता है, इसी कारण तेल -समृद्ध क्षेत्रों पर नियंत्रण को लेकर विश्व की महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा रही है। अमेरिका की विदेश नीति में तेल राजनीति की बड़ी भूमिका रही है, जिसके कारण आज वह अपनी तानाशाही दिखा रहा है। ट्रम्प नाम का पक्षी जो अमेरिका में पाया जाता है, वह सारी दुनिया पर अपनी चोंच मारना चाहता है, इसलिए उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को रातों-रात उठा लिया, ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई को मार दिया और इसी की प्रजाति वाले ने कुछ वर्षों पूर्व ईराक के सद्दाम हुसैन को मार दिया था, फिर भी दुनिया चुप है। सन् 2025 में आयोजित ब्रिक्स बैठक में अमेरिका- इजरायल के ईरान पर हमलों को लेकर निंदा की गई थी लेकिन आज संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों व संगठनों की ओर से इस तानाशाही का विरोध नहीं हो रहा है, जो चिंता का विषय है।
मध्य पूर्व विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार क्षेत्र है। इस क्षेत्र के सऊदी अरब, ईराक, ईरान, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात के पास विशाल तेल संसाधन हैं, इसलिए तानाशाह अमेरिका इन क्षेत्रों पर अपना प्रभाव जमाए हुए है। परस्पर इन देशों में एकजुटता का अभाव है, महाशक्तियाँ पीड़ित देशों के सहयोग हेतु आगे नहीं आ रहीं हैं, नाटो, ब्रिक्स, एससीओ पीस मिशन, शंघाई संगठन मौन साधे दूरी बनाए हुए हैं। डालर में अमेरिका के प्राण बसते हैं, उसके रक्षार्थ वह कुछ भी करता रहे, इस अहंकार को तोड़ना आवश्यक है। अमेरिका ने ईरान पर हमला करके विश्व अर्थव्यवस्था के समक्ष संकट बढ़ा दिया है और यदि युद्ध लम्बा खिचता है तो वह स्वयं भी इस संकट के घेरे में आ जाएगा। वैश्विक तेल कारोबार पर आधिपत्य जमाना किसी भी दृष्टि से न्यायोचित नहीं है। वेनेजुएला की भाँति ईरान भी अपना तेल डालर में नहीं बेच रहे थे। डालर का वर्चस्व अमेरिका कायम न रख पाए इसलिए उस पर अंकुश लगाने के लिए दुनिया के देशों को आगे आना ही होगा।

March 7, 2026

नारी: शक्ति, संवेदना और सृजन -डाॅ० राकेश सक्सेना


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर

एटा 06 मार्च उप्रससे। सृष्टि के विकास में नर और नारी दोनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। प्रकृतिस्वरूपा होने के कारण सृष्टि पहले से ही रहस्यात्मक थी किन्तु इसको गंभीरतम बनाने में नर-नारी का मिथुनस्वरूप सहायक सिद्ध हुआ। अपने पौरुष, साहस,शौर्य और तेज के कारण यदि नर एक भिन्न वर्ग में आ गया तो नारी भी अपनी दया, त्याग, उदारता, सहनशीलता, सुकुमारता और धैर्य के कारण एक अलग वर्ग में समझी जाने लगी। चुम्बक और धातु की तरह ये दोनों एक-दूसरे से आकृष्ट होने लगे, इसी कारण मानव जीवन में नर और नारी का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है। नारी के बिना नर और नर के बिना नारी दोनों अपूर्ण हैं। नर यदि अग्नि है तो नारी ईंधन। नर यदि समुद्र है तो नारी किनारा। नर यदि दीपक है तो नारी प्रकाश। नर यदि वृक्ष है तो नारी उसका फल। दोनों का अपने-अपने स्थान पर महत्व है।
यौन आकर्षण को प्रजनन प्रेरणा के नाम से मानव जगत में पुकारा जाता है। प्रजनन जीव का महत्वपूर्ण कार्य है। गर्भ धारण करके संतान को जन्म देना,उसका पालन-पोषण करना मुख्यतः नारी का ही काम है,जो मानव जीवन की निरंतरता का आधार है। यह केवल जैविक प्रक्रिया नहीं बल्कि सृष्टि चक्र को आगे बढ़ाने वाली सृजनात्मक शक्ति है। प्रकृति ने नारी को मातृत्व का अद्भुत गुण प्रदान किया है। याज्ञवल्क्य मुनि का कथन है कि जिस तरह चने अथवा सीप का आधा दल दूसरे से मिलकर पूर्ण होता है उसी प्रकार पुरुष के सामने का खाली आकाश नारी के साथ मिलने से पूर्ण होता है। प्रकृति की इस मनोरम पुत्री ने अपने सौन्दर्य,व्यक्तित्व और कृतित्व के विविध रूपों से नर का पोषण किया है। माता, पत्नी, भगिनी, पुत्री, सखी, सेविका, परिचारिका, तपस्विनी आदि भूमिकाओं में नारी ने हमेशा ही संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय दिया है। वह शक्ति,करुणा और सृजन का समन्वित रूप है।
भारतीय समाज व साहित्य में नारी को देवी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। भारतीय आदर्श जैसे विद्या का आदर्श सरस्वती, धन का लक्ष्मी में, पराक्रम का दुर्गा में, सौन्दर्य का रति में, पवित्रता का गंगा आदि नारी में ही समाहित है। इसीलिए महर्षि मनु ने कहा- ‘ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता ‘ अर्थात् जहाँ नारी का पूजन होता है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ आदर नहीं होता वहाँ सभी कार्य विफल होते हैं, इसी अर्थ में फिर एक स्थान पर उन्होंने कहा-‘ शोचन्ति जाम यो यत्र विनश्यत्पाशु तत्कुलम् ‘ अर्थात् जिस घर में स्त्रियाँ शोक करतीं हैं, वह शीघ्र ही नष्ट होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री नारी केवल कोमलता नहीं अपितु साहस और आत्मबल की धनी है। आधुनिक युग में शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, अंतरिक्ष और खेल आदि क्षेत्रों में भी वह शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाई दे रही है। शक्ति के साथ ही उसके हृदय में संवेदना, ममता और सहानुभूति का प्रवाह है जो परिवार,समाज और संस्कृति को मानवीय आधार प्रदान करती है। वह सम्बन्धों का निर्वाह ही नहीं करती बल्कि आत्मीयता से सींचती भी है। उसकी संवेदना का प्रथम रूप मातृत्व में ही दिखाई देता है जहाँ शिशु की पीड़ा को वह बिना शब्दों के ही समझ लेती है। परिवार को एकसूत्र में बाँधने का कार्य भी नारी ही करती है। आज की नारी शिक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रही है। वह अपने कार्यस्थल पर नेतृत्व करते हुए मानवीय मूल्यों को वरीयता प्रदान करती है, प्रेम की भाषा बोलती है, करुणा की ज्योति जलाए रखती है।
सृष्टि के मूल में नारी वह चेतना है जिसके बिना जीवन की कल्पना ही अधूरी है। वह जन्मदायिनी शक्ति के साथ हमारी संस्कृति, आदर्श और मूल्यों की भी सर्जक है, परिवार की शिक्षिका है। अपनी सृजनात्मक प्रतिभा से नारी ने साहित्य,चित्रकला, संगीत, नृत्य, नाट्यों, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रशासन, शिक्षा आदि सभी क्षेत्रों में नारी की सृजनशीलता हमारे समाज को नई दृष्टि प्रदान कर रही है। कहने का तात्पर्य यह है कि नारी शक्ति है क्योंकि वह संघर्ष में मुस्कुराती है, नारी संवेदना है क्योंकि वह टूटे सम्बन्धों को जोड़ती है,नारी सृजन है क्योंकि वह भविष्य को जन्म देती है। वह परिवार तक ही सीमित नहीं है अपितु समाज व राष्ट्र के उत्थान की प्रेरक शक्ति है। उसको जिस क्षेत्र में दायित्व सौंपा गया है वहाँ वह पुरुषों की तुलना में सफल व सक्षम सिद्ध हो रही है। उसने समाज को सोचने के लिए विवश कर दिया है कि वह नारी के प्रति अपना दृष्टिकोण बदले! उसको शिक्षित, स्वावलंबी, सुयोग्य, समुन्नत बनाने पर ध्यान दे।

डाॅ०राकेश सक्सेना, पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष, 68, शान्तीनगर, एटा ( उ०प्र० ) 207001*

March 1, 2026

योगी के विदेशी दौरों में सनातन धर्म और विकसित भारत की झलक

CM YOGI ADITYANATH
मृत्युंजय दीक्षित
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश के ऐसे प्रथम मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने भगवा वस्त्र धारण कर सिंगापुर और जापान की सफल विदेश यात्रा की और सनातन की धर्म ध्वजा फहराकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने में सफल रहे। मुख्यमंत्री योगी सिंगापुर और जापान से प्रदेश के विकास के लिए अनेक निवेश प्रस्ताव लेकर आए हैं और कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए हैं, स्वाभाविक है इससे प्रदेश के विकास को एक नया बल मिलेगा।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की पहली विदेश यात्रा जापान की थी और मुख्यमंत्री योगी भी अपनी विदेश यात्रा में सिंगापुर होते हुए जापान पहुंचे यानी कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अब प्रदेश के विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पदचिह्नों का अनुगमन कर रहे हैं। दोनों ही देशों में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में जय श्रीराम की गूंज रही, अयोध्या में दिव्य व भव्य राम मंदिर से लेकर काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण का उल्लास सिंगापुर और जापान में भी दिखाई दिया। साथ ही मुख्यमंत्री सिंगापुर और जापान में जो बोल रहे थे उसका प्रभाव यूपी व देश की राजनीति पर भी दिखाई दे रहा था। योगी जी के वक्तव्यों पर वार पलटवार खूब हुए किंतु इन विदेश यात्राओं से यह तय हो गया कि अब यूपी का विकास थमने वाला नहीं है । पीडीए वाले हों या फिर बहुजन समाजवादी अब कोई भी यूपी में योगी जी को नहीं रोक सकता।
सिंगापुर व जापान के दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 60 से अधिक संवाद कार्यक्रमों में भाग लिया और राज्य में निवेश को लेकर 500 से अधिक निवेशकों के साथ संपर्क करके निवेश का आमंत्रण दिया। योगी जी की यात्रा के दौरान 1.5लाख करोड़ रुपए के निवेश को लेकर विभिन्न कंपनियों के साथ समझौते हुए और 2.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल को मिले हैं। यह निवेश धरातल पर उतरने के बाद राज्य के पांच लाख युवाओं को कौशल विकास रोजगार के अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री की सिंगापुर और जापान यात्रा के दौरान सिंगापुर टोक्यो और यामानाशी में तीन बड़े निवेश रोड शो भी आयोजित किए गए । इनमें करीब 500 निवेशकों और वित्तीय संसाधनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जापान में मुख्यमंत्री योगी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हम सूर्यपुत्र हैं ओैर हमें सूर्य जैसी रोशनी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को बताया कि यूपी में अब कोई दंगा नहीं होता है, सब चंगा है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिनकी प्रवृत्ति डकैती की थी उन्होंने यूपी को अंधेरे में रखा। अंधेरे मे काम करने वालों को उजाला रास नहीं आता। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने प्रदेश को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त कर उजाले की ओर अग्रसर किया है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रदेश को दंगों और कर्फ्यू की खबरों से पहचाना जाता था वहीं अब दीपोत्सव, महाकुंभ और वैश्विक निवेश उसकी नई पहचान बन रहे हैं। अयोध्या में दीपोत्सव, काशी में देव दीपावली और मथुरा -वृन्दावन में रंगोत्सव सकारात्मक परिवर्तन के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए।
निवेश और औद्योगिक साझेदारियों के साथ सिंगापुर और जापान का दौरा यूपी की सांस्कृतिक विरासत के प्रसार के लिए भी महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने प्रमुख नेताओं और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों और बच्चों को यूपी के पारंपरिक शिल्प से तैयार 500 से अधिक विशिष्ट स्मृति चिह्न भेंट कर प्रदेश की कारीगरी को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। यह पहल वोकल फॉर लोकल तथा आत्मनिर्भर भारत की सोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का अहम हिस्सा रही। निवेश वार्ताओं के समानांतर सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने का भी प्रयास किया कि यूपी केवल निवेश का गंतव्य नहीं अपितु समृद्ध परंपरा और शिल्प कौशल की धरती भी है। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर और जापान के बच्चों के लिए मंडला आर्ट से बनी 300 कलाकृतियां तैयार करवाई थीं।
विदेशियों ने यूपी की बारीक शिल्पकला की खुले मन से प्रशंसा की। उपहारों में फिरोजाबाद के रंगीन कांच से बनी भगवान श्रीराम, शिव ,राधा -कृष्ण और बुद्ध की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मुरादाबाद से ब्रास की शिव व बुद्ध प्रतिमाएं, वाराणसी की गुलाबी मीनाकरी से सुसज्जित काशी विश्वनाथ मंदिर का मॉडल, बुद्ध और मोर की कलाकृतियां तथा सहारनपुर की लकड़ी से तैयार शिव और राधा कृष्ण की प्रतिमाएं भेट कीं। इन उपहारों को पाकर बच्चों और निवेशकों के चेहरे खिल उठे। बनारस की मीनाकरी ने विदेशी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर की धरती से जेवर एयरपोर्ट का जल्द संचालन प्रारंभ होने की घोषणा की और बताया कि अब प्रदेश का विकास रुकने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विदेशी दौरे में हिंदी भाषा में संवाद स्थापित कर सभी हिंदी प्रेमियों का भी दिल जीत लिया।
सिंगापुर और जापान दोनों ही देशों में मुख्यमंत्री योगी को अपने बीच देखकर भारतीय समुदाय में उत्साह छा गया और लगभग हर कार्यक्रम में “योगी -योगी“ और जयश्रीराम के नारे लगे। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर और बड़े उपभेक्ता बाजार को निवेश के अनुकूल बताया। ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टरइलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डाटा सेंटर, लाजिस्टिक, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग की सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने यामानाशी में ग्रीन हाइड्रोजन के प्लांट का भी भ्रमण किया। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर के खानीपुर गांव में प्रदेश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट आरंभ हो चुका है।
एक ओर जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान में उत्तर प्रदेश का झंडा गाड़ रहे थे वही दूसरी ओर प्रदेश के उपमुख्यंत्री केशव प्रसाद मौर्य जर्मनी में प्रदेश की ध्वजा लहरा रहे थे । उप मुख्यमंत्री भी प्रदेश के विकास के लिए निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रहे। इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरते ही प्रदेश में आर्थिक बदलाव का अनुभव होगा।

Mratunjay Dixit, Journalist lucknow

प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. – 9198571540

February 27, 2026

अब आतंकवाद पर होगा निर्णायक “प्रहार“

Mratunjay Dixit, Journalist lucknow
मृत्युंजय दीक्षित
विभाजन की विभीषिका के साथ स्वतंत्र हुआ भारत, स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से पीड़ित रहा किन्तु अभी तक उसके पास आतंकवाद से लड़ने की कोई स्पष्ट नीति या रणनीति ही नहीं थी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति स्पष्ट हुयी। पहली बार माओवाद जैसे आतंकवाद को समाप्त करने के लिए एक तारीख तय की गई और उस दिशा में काम हुआ जिसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। आतंकवादी हमले होने पर सीमा पार जाकर आतंकवादियों का दमन किया जाता है। अब भारत शत्रु के घर में घुसकर बदला लेता है, ऑपरेशन सिंदूर में भारत का क्रोध सम्पूर्ण विश्व ने देखा है।
आतंकवाद के बढ़ते खतरों व देश विरोधी षड्यंत्रों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देश में पहली आतंकवाद रोधी नीति “प्रहार” जारी की है। प्रहार आतंकवाद के खिलाफ एक बहुस्तरीय रणनीति है जो खुफिया जानकारी के आधार पर चरमपंथी हिंसा की रोकथाम और उसे निष्क्रिय करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य आतंकवादियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थको को धन, हथियार और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच से वंचित करना है। इसमें साइबर क्राइम, ड्रोन हमलों. सीमा पार आतंकवाद और जटिल सुरक्षा खतरों से निपटने के सुगठित राष्ट्रीय ढांचे का भी उल्लेख किया गया है।
आजकल बहुत से आतंकवादी संगठन युवाओं की भर्ती के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहे हैं, इंटरनेट के माध्यम से ही साइबर ठगी आदि करके लिए धन संग्रह कर रहे हैं व लोगों की मानसिकता को अपने पक्ष में करने के लिए छद्म तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे हैं, प्रहार रणनीति आतंकवाद के इन नए तरीकों से निपटने का मार्ग दिखाती है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा जारी की गई प्रहार रणनीति, भारत के अन्दर या विदेश से उत्पन्न होने वाले आतंकी खतरों का सामना करने के लिए सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इसमें पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा गया है कि, भारत के पड़ोस में अस्थिरता का इतिहास रहा है जिसके कारण अराजक क्षेत्र उत्पन्न हुए हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र के कुछ देशों ने कभी -कभी आतंकवाद को राज्यनीति के एक साधन के रूप मे इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद भारत आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्टीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। भारत ने हमेशा आतंकवाद और किसी भी तत्व द्वारा, किसी भी घोषित या अघोषित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इसके उपयोग की स्पष्ट व निर्विवाद रूप से निंदा की है।
नीति दस्तावेज में कहा गया है कि भारत लगातार आतंकवाद के पीड़ितों के साथ खड़ा रहा है और इस पर अडिग है कि दुनिया में हिंसा का कोई औचित्य नहीं हो सकता। यही सैद्धांतिक दृष्टिकोण आतंकवाद के विरुद्ध नई दिल्ली की शून्य सहिष्णुता की नीति का आधार है। दस्तावेज में कहा गया है, भारत लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित रहा है, जिसमें जेहादी आतंकवादी संगठन और उनके सहयोगी संगठन भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाने, समन्वय करने, सुविधा प्रदान करने एवं उन्हें अंजाम देने में संलिप्त हैं। भारत अलकायदा और इस्लामिक स्टेट आफ इराक एंड सीरिया जैसे वैश्विक आंतकी समूहों के निशाने पर रहा है। जो स्लीपर सेल्स के माध्यम से देश में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
नई प्रहार नीति मे बताया गया है कि, विदेशीर धरती से संचालित आतंकवादियों ने भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए साजिशें रची हैं और उनके लिए काम करने वाले पंजाब व जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हमलो को अंजाम देने के लिए ड्रोन सहित नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साजो सा’मान प्राप्त करने के लिए संगठित आपराधिक नेटवर्क से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। अब आतकी इंटरनेट के नये तरीकों का भरपूर उपयोग करने लगे हैं।
प्रहार (PRAHAAR) की परिभाषा अंग्रेजी के सात शब्दों मे संयोजित है, जिसमें पहला है पी से प्रिवेंशन यानी नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलो की रोकथाम। दूसरा है आर से रिस्पॉन्स अर्थात त्वरित, आनुपातिक और सुनियोजित सैन्य व नागरिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना। तीसरा है ए से एग्रीगेटिंग इंटरनल कैपासिटीज अर्थात आतंरिक क्षमताओं को एकीकृत करना जिसमें केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और सुरक्षा बलों का आधुनिक तकनीक (AI, ड्रोन) से लैस करना शामिल है। चौथा है एच से ह्यूमन राइट्स एंड रूल आफ ला -खतरों को कम करने के लिए मानवाधिकार और कानून व्यवस्था पर आधारित प्रतिक्रिया। पांचवां ए से अटेन्यूएटिंग रेडिकलाजेशन यानी कट्टरता सहित आतंकवाद में सहायता करने वाली परिस्थितियों को कम करना। छठा भी ए से है – एलाइनिंग इंटरनेशनल एफर्ट्स जिसमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय करना शामिल है तथा अंतिम और सातवां है आर से रिकवरी एंड रेसिलिएंस यानी समग्र समाज को मानसिक और भौतिक रूप से सशक्त बनाना।
प्रहार नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि जेसे ही आतंकी समूहों की साजिश का पता चले उसे उसी समय समाप्त कर देना भी है। गृह मंत्रालय की यह नीति उसी समय आई है जब हाल ही में तमिलनाडु से 6 संदिग्धों को पकड़ा गया है और उनसे काफी सनसनीखेज जानकारियां सामने आ रही है।
भारत सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रधानमंत्री मोदी हर वैश्विक मंच पर दोहराते रहे हैं किंतु अब सरकार ने प्रहार नीति जारी करके अपना संकल्प स्पष्ट कर दिया है कि भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले चाहे जहां पर भी बसे हों बच नहीं सकेंगे।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं . 9198571540

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