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ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ रामचन्द्र मिशन आश्रम

February 13, 2026

ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ रामचन्द्र मिशन आश्रम

शाहजहांपुर में बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ

Dada Ji D Patel, Ramchandra Mission

ध्यान करते दादा जी

Posted on 13.02.2026 Time 06.29 Friday, Shahjahanpur, Ramchandra Mission, Meditation, DADA ji, Dhyan Sadhana

शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम की पुण्य धरा पर आज बीस दिवसीय बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ पूर्ण दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के अनुपम वातावरण में हुआ। प्रातःकालीन साधना से प्रारंभ हुआ यह महोत्सव मानो साधकों की चेतना को नवप्रकाश से आलोकित करने का विराट यज्ञ बन गया। देश–विदेश से आये हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान-साधना कर मानव कल्याण और विश्व शांति के लिए मंगल कामना कीं।

Ramchandra Mission Shahjahanpur

Ramchandra मिशन

उत्सव का शुभारंभ सुबह के ध्यान सत्र के साथ हुआ, जिसमें वातावरण शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ ने अपने प्रेरक संदेश में बसंत पंचमी के आध्यात्मिक रहस्य को उद्घाटित करते हुए कहा कि बसंत केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि चेतना के नवीकरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि सहज मार्ग के साधकों के लिए बसंत पंचमी केवल प्राकृतिक उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि एक दिव्य स्मृति और चेतना का उत्सव है। इसी पावन तिथि को दिव्य प्रकाश ने पृथ्वी पर अवतरण का संकल्प लिया था। वर्ष 1873 की बसंत पंचमी को फतेहगढ़ में एक ऐसी महान आत्मा का अवतरण हुआ, जिसने मानवता की आध्यात्मिक यात्रा को नवीन दिशा प्रदान की। वही महापुरुष आगे चलकर ‘लालाजी महाराज’ के नाम से विख्यात हुए। संसार उस समय उनके महत्त्व से अनभिज्ञ था, क्योंकि महान आत्माएं प्रायः बिना किसी उद्घोष के सामान्य मानव रूप में प्रकट होती हैं। परंतु प्रकृति ने उस दिवस मानव जाति को मौन वचन दिया था कि चेतना का पुनरुत्थान एक नई ज्योति के रूप में प्रकट होगा।
दाजी ने कहा कि लालाजी महाराज के माध्यम से मानवता को एक विस्मृत आध्यात्मिक धरोहर प्राणाहुति का पवित्र विज्ञान पुनः प्राप्त हुआ, जिसे ‘प्राणस्य प्राणः’, अर्थात जीवन के मूल तत्व का संचार कहा गया है। यह सूक्ष्म, गूढ़ और दिव्य विद्या मानव अंतःकरण में ईश्वरीय चेतना के संचार का माध्यम बनी। उन्होंने उल्लेख किया कि यह परंपरा सर्वप्रथम अयोध्या में भगवान श्रीरामचन्द्र से तिहत्तर पीढ़ी पूर्व पूज्य ऋषभदेवजी महाराज द्वारा प्रतिपादित की गई थी।


पूज्य दाजी ने मिशन के अभ्यासियों से आह्वान किया कि वे इस बसंत उत्सव को केवल एक पर्व के रूप में न देखें, बल्कि इसे आत्म-परिष्कार, अंतर्मुखी साधना और चेतना के उत्कर्ष का अवसर बनाएं। उन्होंने कहा कि जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति अपने पुराने आवरण को त्यागकर नव सृजन की ओर अग्रसर होती है, वैसे ही अभ्यासी को भी अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पुष्प खिलाने चाहिए।
बसंत उत्सव में संपूर्ण आश्रम परिसर में श्रद्धा, साधना और शांति का दिव्य वातावरण दिखाई दिया ।यह उत्सव आने वाले बीस दिनों तक साधना, सेवा और सत्संग के माध्यम से मानव चेतना को उन्नत करने का अनुपम अवसर प्रदान करेगा।
सायंकाल में भी ध्यान सत्र में दाजी ने ध्यान कराया।
#dajji #heartfulness #sriramchandramission
#meditation

February 12, 2026

Shahjahanpur साधना की सुवास से दमका Ramchandra Mission रामचंद्र मिशन आश्रम

ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ बसंतोत्सव

शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत

Ramchandra Mission Shahjahanpur

Posted on 12.02.2026 Time 04.05 PM Thursday 
(संजीव गुप्ता उ. प.समाचार शाहजहांपुर से)
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, रामचंद्र मिशन आश्रम में बसंत उत्सव का शुभारंभ आज से
शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, बाबूजी के प्रपौत्र विनीत चंद्रा सुयश सिन्हा, सुमन अग्रवाल, ममता अग्रवाल, सौमेंद्र त्यागी, सहित सैकड़ों अभ्यासियों और छोटे छोटे बच्चों ने फूल भेंटकर ने उनका भव्य स्वागत किया ।
पूज्य दाजी के आगमन से आश्रम परिसर मानो साधना की सुवास और चेतना की उजास से आलोकित हो उठा। वातावरण में शांति, प्रेम और आत्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम दृष्टिगोचर हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक स्पंदित कर दिया।
यहां पहुंचने के बाद दाजी पूरे आश्रम का निरीक्षण किया।
उत्सव में सहभागिता हेतु देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेशों से भी हजारों अभ्यासी शाहजहांपुर आश्रम पहुँच रहे हैं।
शाम को पूज्य दाजी ने उपस्थितअभ्यासियों को ध्यान कराया।

रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर दिन भर अभ्यासियों का तांता लगा
शाहजहांपुर । श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में मनाये जा रहे बसंत उत्सव के लिए देश विदेश से अभ्यासियों के आने का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया जो बुधवार देर रात तक जारी रहा। रेलवे और बस स्टेशन से मिशन के स्वंय सेवकों ने अभ्यासियों को बस द्वारा आश्रम पहुंचाया।
#daaji #heartfulness #meditation #kanhashantivanam
@everyone

February 10, 2026

शाहजहांपुर में ध्यान साधना का महाकुंभ 12 फरवरी से

श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम का स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ से गूंजेगी आध्यात्मिक चेतना 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में होगा आयोजन

Ramchandra Mission Press Conference

रामचंद्र मिशन की प्रेस वार्ता

Posted on 10.02.2026 Tuesday, Time 07.17 PM, Shahjahanpur by Sanjiv Gupta
(संजीव गुप्त, उप्र समाचार सेवा)

शाहजहांपुर, 10 फरवरी 2026, शाहजहांपुर की धरती केवल ऐतिहासिक और अमर शहीदों की स्मृतियों की ही वाहक नहीं रही है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना की भी एक उज्ज्वल प्रयोगशाला रही है।

यह हम सब के लिए गौरव की बात है कि वर्ष 1945 में इसी पुण्यभूमि पर महात्मा रामचन्द्र जी महाराज ने श्री रामचन्द्र मिशन की स्थापना की थी। यह स्थापना मात्र एक संस्था का जन्म नहीं था बल्कि मानव हृदय को आत्मबोध की ओर ले जाने वाला एक आध्यात्मिक आंदोलन था जिसने निरंतर विस्तार पाया और आज विश्व के 164 देशों में श्री रामचन्द्र मिशन के केंद्र हैं। वर्ष 1976 में शाहजहांपुर में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (बाबूजी) ने अपने गुरु फतेहगढ़ के महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (लालाजी) की स्मृति में मिशन के प्रथम आश्रम की स्थापना की थी। यह आश्रम साधकों के लिए साधना, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना के विकास का स्थायी केंद्र बना। यह आश्रम केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि अनगिनत आत्माओं के अंतर्मन को शांति, प्रेम और सौहार्द से आलोकित करने वाला आध्यात्मिक तीर्थ बन गया।

अब यह आश्रम अपनी स्वर्ण जयंती की देहरी पर खड़ा है-पचास वर्षों की साधना, सेवा और संकल्प की गौरवशाली कथा को समेटे हुए इस ऐतिहासिक अवसर पर आश्रम का वृहद स्तर पर जीर्णोद्धार किया गया है। आश्रम की पचास वर्षों की स्वर्णिम यात्रा के पूर्ण होने पर श्री रामचन्द्र मिशन के अध्यक्ष और पूज्य गुरुदेव कमलेश डी पटेल (दाजी) के सानिध्य और मार्गदर्शन में स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।

12 फरवरी से उत्सव का शुभारंभ

श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम में 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।

पांच चरणों में होगा उत्सव

बसंत उत्सव पांच चरणों आयोजित किया जा रहा है प्रत्येक चरण में देश विदेश से करीब पांच हजार लोग सहभागिता कर आध्यात्मिक विकास के वाहक बनेंगे।

पहला चरण 12 फरवरी से 14 फरवरी, दूसरा चरण 16 फरवरी से 18 फरवरी, तीसरा चरण 20 फरवरी से 22 फरवरी, चौथा चरण 24 फरवरी से 26 फरवरी तथा पांचवा चरण 28 फरवरी से 2 मार्च तक चलेगा। इस तरह 20 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक महाकुंभ में लगभग 25 से 30 हजार लोगों के यहां पहुंचने की संभावना है।

अभ्यासियों के ठहरने और अन्य व्यवस्थाएं

बाहर से आने वाले अभ्यासियों के ठहरने की व्यवस्था आश्रम परिसर और विभिन्न होटलों और गेस्ट हाउस में की गई है। सभी अभ्यासियों के भोजन की व्यवस्था आश्रम परिसर में रहेगी।

आवागमन की व्यवस्था

बाहर से आने वाले अभ्यासियों के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन से आश्रम लाने और वापस पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। 24 घंटे मिशन के स्वंय सेवक रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर मौजूद रहेंगे। साथ ही लखनऊ हवाई अड्डा, दिल्ली हवाई अड्डा, लखनऊ रेलवे स्टेशन पर भी किसी अभ्यासी को असुविधा न हो इसके लिए मिशन के स्वंय सेवक मौजूद रहेंगे।

यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक मिलन का महाकुंभ होगा। विविध आध्यात्मिक सत्र, ध्यान शिविर और सत्संग कार्यक्रमों के माध्यम से यह समारोह मानव जीवन को अंतर्मुखी बनाने की प्रेरणा देगा। यह स्वर्ण जयंती समारोह अतीत की उपलब्धियों का स्मरण और भविष्य के संकल्पों का उद्घोष है। शाहजहांपुर की इस पुण्य धरा से उठने वाली साधना की यह ध्वनि आज विश्व के कोने-कोने तक पहुँच चुकी है। श्री रामचन्द्र मिशन का यह आश्रम आज भी मानव को मानवता से जोड़ना के मूल उद्देश्य को लेकर अग्रसर है। स्वर्ण जयंती का यह महापर्व केवल एक संस्था का उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के उत्थान का सामूहिक संकल्प है, जहाँ श्रद्धा, साधना और सेवा एक साथ प्रवाहित होगें।

February 7, 2026

आज 7 फरवरी 2027, शनिवार का पंचांग

मुरादाबाद। आज 7 फरवरी का पंचांग। नारदानंद ऋषि आश्रम लालबाग के अध्यक्ष बाबा संजीव आकांक्षी ने जिसे जारी किया।

Panchang 07 February 2027

07 फरवरी 2027 का पंचांग

February 6, 2026

रामभक्तों का अपमान विरासत का अपमान: योगी आदित्यनाथ

 

Haridwar Samachar

हरिद्वार समाचार सेवा

  • आध्यात्मिक मूल्यों के क्षरण से प्रदेश बना था अराजकता का अड्डा
  • आज दंगा-दंगाई दोनों गायब, अब बेटी सुरक्षित और व्यापारी भी
  • एक संन्यासी ने आश्रम पद्धति से सीखा, कैसे चलाना है प्रशासन
  • हरिद्वार में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति के स्थापना समारोह को संबोधित किया सीएम योगी ने

Posted on 06.02.2026 Friday, Time: 08.51 PM, Haridwar 

हरिद्वार, 06 फरवरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक समय था, जब विरासत को कोसा जाता था, अपमानित किया जाता था, लांछित किया जाता था। राम भक्तों पर गोलियां चलती थीं, उनका अपमान किया जाता था। लेकिन, यह रामभक्तों का नहीं, भारत की विरासत का अपमान होता था, भारत के आध्यात्मिक मूल्यों का अपमान होता था। इसका परिणाम यह निकला कि उत्तर प्रदेश अराजकता का अड्डा बन गया, लूट का अड्डा बन गया और दंगों की आग में झुलसने लगा। गुंडागर्दी भी चरम पर, ना बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हमारी सरकार में विरासत का सम्मान हुआ तो बेटी सुरक्षित हो गई और व्यापारी भी। आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था के रूप में भी आगे बढ़ रहा है।
सीएम योगी शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद है, न गुंडागर्दी है। न कर्फ्यू है, न दंगा है – यूपी में अब सब चंगा है। दंगा और दंगाई, दोनों गायब हो गए हैं। कर्फ्यू दंगाइयों पर लग गया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि नीति स्पष्ट थी, नीयत साफ थी। कोई सोचता था कि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो पाएगा? लेकिन, आज भव्य राम मंदिर बन गया।

आश्रम से मिला एमबीए का वास्तविक ज्ञान
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक अनुभव के आप उत्तर प्रदेश कैसे चला रहे हैं, तो मेरा उत्तर होता है कि आश्रम व्यवस्था से जुड़ा हूं। प्रशासन कैसे चलाना है, प्रबंधन कैसे करना है, भारत का संन्यासी आश्रम पद्धति से सीखता है। प्रशासन हमारे संस्कारों व जींस का हिस्सा है। एमबीए की वास्तविक शिक्षा तो भारतीय आश्रम पद्धति से ही मिलती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन का मॉडल बनकर उभरा है। भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें, आश्रम व गुरुकुल परंपरा में हैं। जहां कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प व प्रशासन जैसे विषयों का केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।

माघ मेले में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालुओं का स्नान
सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यहां पहले केवल अव्यवस्था देखने को मिलती थी, लेकिन आज अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बने हैं। भारत राष्ट्र यहीं से शक्ति प्राप्त करता है, और जब हमने इन आस्था केंद्रों को सम्मान के साथ आगे बढ़ाया, संरक्षित करने का काम किया, परिणाम भी सामने आया है। लंबे समय तक बीमारू रहा उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा जन्म इसी देवभूमि उत्तराखंड में हुआ है। वर्ष 1982 में भारत माता मंदिर के भव्य लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व सर संघचालक बालासाहब देवरस, दोनों की उपस्थिति रही। यह स्पष्ट करता था कि राष्ट्राध्यक्ष के प्रति हमारा सम्मान सदैव रहेगा, लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं होगा। जब देश विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहा था, तब पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत माता मंदिर के भव्य निर्माण और उसके लोकार्पण के माध्यम से पूरे देश के सामने आध्यात्मिक नेतृत्व का चिरस्थायी स्मारक समर्पित किया।

न जाति का भेद और न धर्म का अंतर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड के चार धाम भारत की चेतना के आधार हैं। जब हम लोग बचपन में हरिद्वार आते थे, तो सबके मन में यह भाव रहता था कि हरि की पैड़ी में स्नान करना है और भारत माता मंदिर के दर्शन भी करने हैं। यहां न जाति भेद था और न धर्म का कोई अंतर। भारत माता मंदिर में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक, पूरे भारत का स्वरूप प्रतिबिंबित किया गया। यह उस समय की सबसे ऊंची (हाई-राइज) इमारत भी थी। मेरा सौभाग्य है कि देश के भीतर पिछले 11 वर्षों में हमने व्यापक परिवर्तन देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी और बदरीनाथ से हरिद्वार तक, विकास की एक लंबी गाथा विरासत को संजोते हुए बढ़ रही है। यह नए भारत निर्माण की वही गाथा है, जिसका सैकड़ों वर्षों से वर्तमान पीढ़ी को इंतजार था। यह पीढ़ी यह सोच रही थी कि क्या हमारी भावनाओं के अनुरूप भारत का निर्माण हो पा रहा है या नहीं। एक प्रकार की असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। उस असमंजस से उबरने का कार्य पिछले 11 वर्षों में हमने स्पष्ट देखा है।

भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम भारत की बात करते हैं, तो भारत केवल एक भौगोलिक टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र है। यह किसी सत्ता की उपज नहीं है, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या से निकली शाश्वत चेतना का केंद्र बिंदु है। भारत का उच्चतम न्यायालय भी इस मंत्र को अंगीकार करता है कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। धर्म और विजय का यह शाश्वत स्वरूप हमें यह आभास कराता है कि धर्म कभी कमजोर नहीं होता, बल्कि उसे जानबूझकर कमजोर किया जाता है। इतिहास साक्षी है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न तो वर्तमान को सुधार पाता है और न ही भविष्य को सुरक्षित रख पाता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है। आक्रांताओं के आने से पहले भारत कोई अविकसित या उपेक्षित भूभाग नहीं था, बल्कि एक पूर्ण विकसित सभ्यता और समृद्ध संस्कृति था। यह राष्ट्र हमारे ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2000 वर्ष पहले, जिसे हम भारत का स्वर्ण युग कहते हैं, उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। इसी प्रकार आज से करीब 400 वर्ष पहले भी विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी। यह सामर्थ्य इन्हीं ऋषि-मुनियों की तपस्या के बल पर, अन्नदाता किसानों की सृजनशीलता के बल पर और कारीगरों के परिश्रम के बल पर था। जैसे ही हमने इन मूल्यों से मुंह मोड़ा, पतन की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन, आज फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत गांव आधारित राष्ट्र था। गांव आत्मनिर्भर इकाइयां थे। यहां कृषि थी, पशुपालन था, हस्तशिल्प था, चाहे वस्त्र निर्माण हो या धातु का कार्य, सब कुछ गांवों के भीतर ही होता था। यहां बाहरी सत्ता का हस्तक्षेप नहीं था, न ही किसी अनुदान पर निर्भरता थी। स्वरोजगार भारत की मूल शक्ति था। हमारा किसान उत्पादक था, कारीगर उद्यमी था, और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु। यह पूरा ढांचा ग्राम स्वराज आधारित शासन का एक सशक्त मॉडल था। भारतीय नारी की अर्थव्यवस्था में समान सहभागिता थी। उसे कभी पराधीन नहीं बनाया गया, बल्कि वह समाज और अर्थव्यवस्था की सक्रिय शक्ति रही है। लेकिन आक्रांताओं के साथ-साथ लाभ आधारित अर्थतंत्र ने स्थानीय उत्पादन व्यवस्था को नष्ट किया। स्वरोजगार की जगह टैक्स आधारित व्यवस्था ने ले ली। इस व्यवस्था में कारीगर को गुलाम बना दिया गया और किसान को करदाता बना दिया गया। जैसे ही हम आश्रम पद्धति से विमुख हुए और गुरुकुलों की परंपरा से मुंह मोड़ा, वैसे ही कारीगर गुलामी की स्थिति में पहुंच गया और किसान पर निर्भरता का बोझ बढ़ता चला गया, यहां तक कि वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। हमें याद रखना होगा कि ग्राम स्वराज की अवधारणा क्या है, जब एक गांव टूटता है, तो उसे केवल एक घटना नहीं माना जाना चाहिए। एक गांव का टूटना, उस राष्ट्र की नींव को हिला देता है।
समारोह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी मौजूद थे।

संत बोले, उत्तर प्रदेश के शेर हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह में संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘उत्तर प्रदेश का शेर’ बताते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ सबके प्रिय हैं और सबके हितकारी हैं। इनको संभाल कर रखना है। जब से योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली, तब से यूपी में रामराज्य जैसा माहौल दिखाई देता है। आज उत्तर प्रदेश में कहीं भय, अराजकता और उन्माद नहीं दिखाई देता। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि जब पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे नेता नेतृत्व कर रहे हैं, तो हमें कोई संदेह नहीं कि भारत को फिर उसी वैभव के साथ देखेंगे, जैसा हर्षवर्धन के कार्यकाल में, विक्रमादित्य के काल में देखने को मिला था।

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