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प्रयागराज में कोल्ड स्टोर की छत गिरी, 4 की मृत्यु 12 घायल

March 23, 2026

प्रयागराज में कोल्ड स्टोर की छत गिरी, 4 की मृत्यु 12 घायल

प्रयागराज 23 मार्च 26, जिले के फाफामऊ इलाके में आज दोपहर एक कोल्ड स्टोरेज केन्‍द्र की छत गिरने से 4 लोगों की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए।

मलबे से 17 मजदूरों को बचाया गया है और कई अन्य के फंसे होने की आशंका है। राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्‍य आपदा मोचन बल की टीमें बचाव और राहत अभियान में लगी हैं। मलबा हटाने के लिए 7 जेसीबी मशीनें मौके पर मौजूद हैं।

राज्य सरकार ने एडीएम वित्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है जो अगले 48 घंटे में जांच करेगी और कोल्ड स्टोरेज केन्‍द्र की छत गिरने के कारणों का पता लगाएगी।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय प्रशासन को तत्काल राहत प्रदान करने और घायलों के लिए उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री ने घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की।

March 21, 2026

टीईटी परीक्षा आवेदन 27 मार्च से

UP TET EXAM

प्रयागराज, 21 मार्च 26, यूपी टीईटी परीक्षा के फॉर्म ऑनलाइन 27 मार्च से भरे जाएंगे। इसके लिए विज्ञापन जारी हो गया है। आवेदन भरने की अंतिम तिथि 26 अप्रैल है।

February 27, 2026

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक

Posted on 27.02.2026 Friday Time 08.53 PM, Allahabad High court, Sami

प्रयागराज, 27 फरवरी 2026, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई 12 मार्च को होगी, तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

एक सदस्यीय पीठ के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अंतरिम आदेश जारी कर अगली सुनवाई की तिथि 12 मार्च तय की है। तब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी नहीं होगी। लेकिन पुलिस जांच जारी रहेगी। इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सहयोग करने को कहा गया है।

दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद दिए निर्णय में जस्टिस सिन्हा ने आदेश में कहा की ऑर्डर रिजर्व किया जाता है। अगली तारीख पर दोनों पक्षों के अधिवक्ता लिखित वक्तव्य प्रस्तुत करें और नया शपथ पत्र दें।

The Allahabad High Court has granted an interim stay on the arrest of Swami Avimukteshwaranand in a POCSO case. The case will be heard on March 12, until then he will not be arrested.

अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण में high court में तीखी बहस, अग्रिम जमानत पर सुनवाई

Posted on 27.02.2026 Friday Time 08.26 PM, Allahabad High court, Avimukteshveranand

 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में नाबालिगों के साथ यौन शोषण के मामले में दर्ज एफआईआर से जुड़ी अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट आना सामान्य प्रक्रिया नहीं है और इसके लिए असाधारण परिस्थितियों का होना जरूरी है। उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया।
वहीं शंकराचार्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़ित की ओर से मुकदमा एक संरक्षक के जरिए दर्ज कराया गया है, जबकि उसके माता-पिता या वास्तविक अभिभावकों का कोई स्पष्ट पता नहीं है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट न आया जाए।
शंकराचार्य के वकील ने यह भी कहा कि पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन मारपीट से जुड़ी एक अर्जी दी गई थी, जिस पर केस दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद पॉक्सो एक्ट के तहत अर्जी दाखिल की गई, जिससे पूरे मामले में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुकदमा साजिश के तहत और किसी दबाव में दर्ज कराया गया है।
अधिवक्ता ने यह आरोप भी लगाया कि शंकराचार्य के खिलाफ केस दर्ज कराने वाला व्यक्ति खुद हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर गौहत्या, दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं और वह 25 हजार रुपये का इनामी है। साथ ही सवाल उठाया गया कि नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति के समक्ष क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया और उनके माता-पिता कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से स्पष्ट पूछा कि बच्चे इस समय कहां हैं।
शंकराचार्य की ओर से विवेचना पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए। कहा गया कि जिन बच्चों को पेश किया गया है, उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वे वहां के संस्थागत छात्र हैं। यह भी दलील दी गई कि पूरा विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ और यह सब सरकार की ओर से प्रायोजित प्रतीत होता है। बच्चों का मेडिकल परीक्षण भी कथित तौर पर करीब एक माह बाद कराया गया।
सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति के माध्यम से उनके माता-पिता को सौंप दिया गया है।
इससे पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सुनवाई को लेकर बयान देते हुए कहा कि कोर्ट में झूठ की कलई खुल जाएगी। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि झूठी कहानियां बनाकर कब तक लोगों को बरगलाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस भी उन्हें संरक्षण दे रही है और बच्चों के साथ कुकर्म से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट तथा दोषियों को साबित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

February 21, 2026

UP Breaking News: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR के आदेश

 

Posted on :21.02.2026 Time: 08.13 PM, Saturday, Prayagraj, Allahabad, Pocso Court, Police Station Jhunsi

  • झूंसी थाने में होगी यौन उत्पीड़न की एफआईआर
  • आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर फंसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 

प्रयागराज 21 फरवरी 2026 (यूपी समाचार सेवा)। जनपद की पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी डंडी स्वामी और शिष्य मुकुंदानंद व अन्य के खिलाफ नाबालिग बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोप में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मामला माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और जिला प्रशासन के मध्य हुए विवाद के बाद उनपर लगे आरोपों से चर्चा में आया।

पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना झूंसी पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में शाकंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने न्यायालय में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया था कि माघ मेला के दौरान कुछ नाबालिग बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं हुईं। ये घटनाएं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में हुईं। कथित रूप से इन घटनाओं में अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद की संलिप्तता बताई गई।

शिकायत गंभीर प्रकृति की होने और स्वयं को शंकराचार्य घोषित किए हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा होने के कारण जज ने स्वयं मामले में बच्चों के ऑन कैमरा अकेले में बयान दर्ज किए। साथ ही पुलिस कमिश्नर को भी गोपनीय जांच को कहा गया। पुलिस की ओर से पुलिस उप महानिरीक्षक ने जांच की और रिपोर्ट न्यायालय को सौंप दी।

पुलिस की रिपोर्ट और स्वयं लिए बयानों के बाद आरोपों को गंभीर मानते हुए पॉक्सो अदालत ने यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट Sexual harrasment की FIR दर्ज करने के आदेश झूंसी पुलिस को दे दिए।

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