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जिलाधिकारी ने श्री राम नवमी पर देवरहा बाबा गो-आश्रय स्थल का किया निरीक्षण

March 27, 2026

जिलाधिकारी ने श्री राम नवमी पर देवरहा बाबा गो-आश्रय स्थल का किया निरीक्षण

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मथुरा 27 मार्च 26 ,श्री राम नवमी के पावन अवसर पर जिलाधिकारी  चंद्र प्रकाश सिंह ने राल स्थित ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबा गो-आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान एवं मंत्रोच्चारण के साथ गौ-पूजन किया तथा आश्रय स्थल में संरक्षित गौवंशों को गुड़ एवं हरा चारा खिलाया।
जिलाधिकारी ने गौशाला परिसर में संचालित गौधाम गुरुकुल (स्कूल) के बच्चों को मिष्ठान वितरित किया। गुरुकुल में लगभग 80 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। उन्होंने कक्षाओं का निरीक्षण करते हुए बच्चों द्वारा बनाए गए शिल्प एवं हस्तकला का अवलोकन किया और उनसे पढ़ाई व भोजन की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  चंद्र प्रकाश सिंह एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. पंकज कुमार वर्मा ने गौशाला में श्रमदान करते हुए साफ-सफाई भी की। जिलाधिकारी ने स्वयं झाड़ू लगाकर परिसर को स्वच्छ रखने का संदेश दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबा गो-आश्रय स्थल में लगभग 8600 गौवंश संरक्षित हैं। 136 एकड़ क्षेत्रफल में फैली इस गौशाला में गौवंशों के लिए 27 शेड उपलब्ध हैं। उन्होंने गौ उत्पाद केंद्र का भी निरीक्षण किया, जहां गोबर व गौमूत्र से बने साबुन, फेसवॉश, दीपक, फिनाइल, घी और धूपबत्ती आदि उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने अपर जिलाधिकारी डॉ. पंकज कुमार वर्मा को निर्देश दिए कि इन उत्पादों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए तथा केंद्र पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी तैयार कराई जाए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गो-आश्रय स्थल की व्यवस्थाओं—भूसा, हरा चारा, पेयजल, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं एवं शेड—का गहनता से निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि गौवंश के लिए पर्याप्त हरा चारा और स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही पशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार के भी निर्देश दिए।

March 26, 2026

केएम विश्वविद्यालय में भव्य शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में गायिका सुनंदा ने बांधा समां

ध्यान केन्द्रित करने से तन, मन के साथ शरीर हो जाता है तरोताजा

कुलसचिव ने प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका के जीवन चरित्र से कराया छात्र-छात्राओं को अवगत

मथुरा। केएम विश्वविद्यालय में आज दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर भव्य शास्त्रीय संगीत की सुरमयी महफिल सजी। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि देवी सिंह भारतीय शास्त्रीय गायन की दिग्गज और पदम विभूषण से सम्मानित डा. विदुषी गिरिजा देवी की शिष्या सुनंदा शर्मा, विवि के कुलपति डा. एनसी प्रजापति, कुलसचिव डा. पूरन सिंह, परीक्षा नियंत्रक समीक्षा भारद्वाज, मेडीकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे ने संयुक्त रूप से ज्ञान व संगीत की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए विवि के रजिस्ट्रार पूरन सिंह ने शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात गायिका सुनंदा शर्मा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा हिमाचल प्रदेश के पठानकोट के पास स्थित गांव दाह के शांत वातावरण में उनका जन्म हुआ और पांच वर्ष की आयु में अपने पिता पंडित सुदर्शन शर्मा के मार्गदर्शन में संगीत का प्रशिक्षण शुरू किया। संगीत में स्नातक करते हुए पंजाब विश्वविद्यालय से भारतीय शास्त्रीय गायन में स्वर्ण पदक के साथ मास्टर की उपाधि प्राप्त की। हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में उनकी प्रतिभा को देखकर पदम विभूषण से सम्मानित डा. विदुषी गिरिजा देवी ने उन्हें शिष्या के रूप में स्वीकार की और उन्हें पंडित किशन महाराज और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे दिग्गजों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। सुनंदा शर्माजी नौ वर्षों तक बनारस और कोलकाता में अपनी गुरु के साथ रहीं और संगीत की उन बारीकियों को आत्मसात किया जो आज उनके गायन की पहचान बन चुकी है। हालाँकि उनकी मुख्य विशेषज्ञता ’ख्याल’, ’टप्पा’, ’ठुमरी’, ’दादरा’ और ’चैती’ गायन में है, लेकिन उन्होंने पंजाब और हिमाचल की लोक-परंपराओं, भक्ति संगीत और विभिन्न संस्कृतियों के मेल से बनी संगीत-शैलियों को भी अपनाया है। उन्होंने कई प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं, जिनमें ’तानसेन संगीत सम्मेलन’, ’सप्तक महोत्सव’, ’ठुमरी महोत्सव’ और ’स्पिक मैके’ के कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने लंदन, पेरिस, ब्रसेल्स, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और इटली जैसे देशों के अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
गायिका के जीवन वक्तत्व को सुनकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सुनंदा शर्माजी ने सभागार में मौजूद सभी को नमस्कार करके संबोधन किया, उन्होंने कहा गुरु गिरिजा देवी के साथ रहना केवल संगीत सीखना ही नहीं था, बल्कि यह जीवन जीने का एक सलीका सीखना था, उन्होंने संगीत के हर सुर में अनुशासन के साथ-साथ भाव भी होना चाहिए, उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से कहा शिक्षा हो या किसी भी मैदान में ध्यान होना अहम बात है, ध्यान केन्द्रित करने से तन, मन के साथ शरीर भी ताजा हो जाता है, उन्हीं में से एक क्षण संगीत सुनना भी है। आपकी शिक्षा यात्रा में जिम्मेदारी है, जिसमें ड्रिप्रेशन होना संभव है, जिसे संगीत दूर कर सकता है, संगीत ईश्वर की देन है। प्रख्यात गायिका सुनंदा शर्मा ने स्वर विस्तार और तानों की सधी हुई प्रस्तुती देते हुए देशी राग, भजन में पायो जी मैंने (राम भजन) और रघुपति राघव राजा राम….’ के भजनों का रसापान कराया। राग में श्रृंगार और विरह के भावों का सुंदर संगम देखने को मिला। गायिका ने राग की प्रकृति के अनुरूप भावों का संतुलित संप्रेषण किया, जिस पर सभागार तालियों से गूंज उठा। सुनंदा शर्मा ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुती से श्रोताओं को मंत्रमग्ध कर दिया और भक्ति के रंगों से सराबोर कर दिया। हारमोनियम पर पंडित सुमित मिश्रा, तबले पर पंडित गोपाल मिश्रा की संगत ने प्रस्तुति को सशक्त आधार दिया। कार्यक्रम के अंत में केएम विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव ने प्रसिद्ध गायिका सुनंदा शर्मा को सम्मानित किया और उन्हें पारंपरिक अंगवस्त्र तथा स्मृति चिन्ह भेंट किए। विवि के कुलपति डा. एनसी प्रजापति ने कहा भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करने का यह प्रयास है, ऐसे आयोजन हमारी संस्कृति की कालजयी विरासत के और करीब लाने का प्रयास है, ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय में भविष्य में भी होते रहेंगे, जिससे छात्र-छात्राएं भारतीय संस्कृति को जान सकें। इस दौरान कार्यक्रम में ’स्पिक मैके’ की शैफाली मल्हौत्रा, केएम पशु चिकित्सालय के डीन डा. अजय प्रकाश, एसोसिएट डीन डा. पीताम्बर सिंह, प्रोफेसर डा. अशोक कुमार, खेल निदेशक आरके शर्मा, डिप्टी रजिस्ट्रार सुनील अग्रवाल सहित विवि के सभी संकायों के डीन-प्रोफेसरों सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।

जमानत न मिलने से आहत विचाराधीन कैदी ने की आत्महत्या, इलाज के दौरान मौत

मथुरा। जिला कारागार में बंद एक विचाराधीन कैदी द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। जमानत न मिलने से मानसिक तनाव में चल रहे कैदी ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
मृतक की पहचान सुरेश, निवासी गोवर्धन के रूप में हुई है। वह एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में मई 2025 से जिला कारागार में बंद था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार रात करीब साढ़े नौ बजे सुरेश शौचालय के लिए गया, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटा। लगभग दस मिनट बाद ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों को संदेह हुआ, जिसके बाद शौचालय का दरवाजा खोला गया।
अंदर का दृश्य देखकर जेलकर्मी सन्न रह गए। सुरेश ने अपने लोअर को गेट की कुंडी में बांधकर फांसी लगा ली थी। तत्काल उसे नीचे उतारकर जेल अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां गुरुवार तड़के इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि सुरेश लंबे समय से जमानत न मिलने के कारण मानसिक तनाव में था। परिजनों द्वारा हाईकोर्ट में जमानत के लिए अपील भी की गई थी, लेकिन 24 मार्च को भी मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सका। घटना से पहले उसने अपने पिता से फोन पर बातचीत कर नाराजगी जताई थी।
घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना के कारणों की गहन पड़ताल की जा रही है।

March 23, 2026

पुलिस की पहल: गौरक्षक दलों संग बैठक

फरसा बाबा प्रकरण , अफवाहों से दूर रहने की अपील
मथुरा। जनपद में हाल ही में हुए फरसा बाबा प्रकरण के बाद कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में 22 मार्च 2026 को विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा गौरक्षक दलों व अन्य संगठनों के साथ गोष्ठियों का आयोजन किया गया।
पुलिस के अनुसार, 21 मार्च की सुबह थाना कोसीकलां क्षेत्र में घने कोहरे के चलते हुई सड़क दुर्घटना में चन्द्रशेखर उर्फ फरसा बाबा की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई थी। इसके बाद कुछ अराजक एवं बाहरी तत्वों द्वारा अफवाहें फैलाई गईं, जिसके चलते छाता क्षेत्र में कुछ लोगों ने एनएच जाम कर पथराव किया। इस मामले में थाना छाता पर गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने युवाओं, विशेषकर गौरक्षकों, राष्ट्रीय भगवा दल, हिन्दू जागरण मंच तथा अन्य संगठनों के सदस्यों के साथ बैठक कर शासन के दिशा-निर्देशों से अवगत कराया।
गोष्ठी में सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए झूठी अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई। साथ ही संगठनों और पुलिस-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने, संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान और जनपद में शांति व्यवस्था कायम रखने पर विस्तृत चर्चा की गई।
पुलिस अधिकारियों ने सभी से अपील की कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी न फैलाएं, जिससे जनपद की कानून व्यवस्था प्रभावित न हो।

एनएच-19 जाम, फायरिंग व पथराव मामले में 15 गिरफ्तार 

फरसा बाबा प्रकरण:
मथुरा। छाता थाना पुलिस ने फरसा वाले बाबा स्व. चन्द्रशेखर की दुर्घटना में मृत्यु के बाद हाईवे जाम, फायरिंग, पथराव और तोड़फोड़ करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अवैध डंडे, ईंट-पत्थर, चप्पलें और खोखा कारतूस भी बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, 21 मार्च 2026 को बाबा चन्द्रशेखर की दुर्घटना में मृत्यु के बाद आक्रोशित लोगों ने कस्बा छाता स्थित एनएच-19 पर शव रखकर हाईवे जाम कर दिया था। इस दौरान पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता के बीच भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग व पथराव शुरू कर दिया।
घटना के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आम जनमानस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करते हुए पुलिस ने मौके से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य आरोपी को 22 मार्च को शेरगढ़ तिराहे से पकड़ा गया।
गिरफ्तार अभियुक्तों में गौरव उर्फ भूरा, नरेश, हिमांशु, पवन, कपिल, धर्मेंद्र, विष्णु, अनुज, शनि, केशव, अरुण, अमन, सुभाष सहित अन्य शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
घटनास्थल से 15 मोटरसाइकिल, ईंट-पत्थर, लाठी-डंडों के टुकड़े तथा .315 व .312 बोर के खोखा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपियों का पूर्व आपराधिक इतिहास भी सामने आया है।
इस कार्रवाई में छाता, शेरगढ़, कोसीकला, बरसाना समेत कई थानों की पुलिस टीमों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
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