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महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने जूना अखाड़े के श्रीमहंतों पर लगाए गंभीर आरोप

March 15, 2026

महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने जूना अखाड़े के श्रीमहंतों पर लगाए गंभीर आरोप

हरिद्वार, 15 जनवरी। हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने जूना अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर अखाड़े और सनातन परम्परा को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 30 नवंबर को जूना अखाड़े ने एक पत्र जारी कर उन्हें और उनके गुरु को अखाड़े से निष्कासित कर दिया था। सोशल मीडिया से इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने निष्कासन के आरोपों का जवाब एक करोड़ की मानहानि के साथ अधिवक्ता के माध्यम से अखाड़े के पदाधिकारियों को भेजा था। लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अखाड़े द्वारा उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा और अखाड़े की सदस्यता नहीं ली। वर्ष 2007 में प्रयागराज में संतों द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर के रूप में सम्मानित किया गया था। वर्ष 2021 में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी द्वारा उनका अभिषेक किया गया था और इस प्रक्रिया को किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा निरस्त नहीं किया जा सकता। ना ही किसी को उन्हें निष्कासित करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाने के नाम पर लाखों रूपए की धनराशि ली जाती है। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने यह आरोप भी लगाया कि कुंभ मेले में कुछ लोगों को अस्थायी रूप से नागा साधु बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिसका उन्होंने विरोध किया है। फर्जी नागा के रूप में उन्होंने अपनी ही संस्था हिन्दू रक्षा सेना के लोगों को पकड़ा है। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरि गिरी, श्रीमहंत मोहन भारती, श्रीमहंत प्रेम गिरी और श्रीमहंत नारायण गिरी पर आरोप लगाते हुए उनका पंक्ति पत्तल वहिष्कार किए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि वह इन चारों को अपने यहां पंक्ति में नहीं बुलाएंगे और न ही उनके यहां जाएंगे। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने श्रीमहंत हरि गिरी से अखाड़े की आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए जिस व्यक्ति को फर्जी संत और कालनेमि बताकर पूर्व में जिसका निष्कासन किया गया था। अखाड़े के पदाधिकारी आज उसी को जगद्गुरु बना रहे हैं। जबकि उन्हें जगद्गुरु बनाने का कोई अधिकार ही नहीं है। उन्होंने अखाड़े के पदाधिकारियों पर इस्लामिक जेहादियों से सांठगांठ का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी हत्या करायी जा सकती है। केंद्र सरकार से संबंधित लोगों की संपत्ति और गतिविधियों की विशेष जांच एजेंसी से जांच कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित मांग करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि वह जीवन भर सनातन धर्म, गौसेवा और संतों की सेवा के लिए कार्य करते रहेंगे तथा देशभर में धर्म जागरण के लिए निरंतर अभियान चलाते रहेंगे। प्रैसवार्ता के दौरान स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती, स्वामी ओमानंद, प्रकाशानंद सरस्वती, वीरेन्द्र स्वरूप, प्रज्ञानंद गिरि, लक्की वर्मा, अमित वर्मा व लक्की राठौर आदि मौजूद रहे।

March 11, 2026

विश्व किडनी दिवस 2026* : *”सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा

हरिद्वार। विश्व किडनी दिवस एक वार्षिक वैश्विक अभियान है, जिसका उद्देश्य किडनी स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और विश्वभर में किडनी रोग के बोझ को कम करना है। इस वर्ष इसे 12 मार्च को मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम दो परस्पर जुड़ी प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है: प्रत्येक व्यक्ति के लिए किडनी उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करना और पर्यावरणीय रूप से सतत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना। यह मान्यता देती है कि मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी का स्वास्थ्य एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, और एक की सुरक्षा के लिए दूसरे की रक्षा आवश्यक है।

किडनियां अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं जो जीवन बनाए रखने वाले कई कार्य करती हैं। वे रक्त से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को छानती हैं, रक्तचाप को नियंत्रित करती हैं, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखती हैं, और ऐसे हार्मोन बनाती हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन तथा हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में हानिकारक विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) की व्यापकता बढ़ रही है और वर्तमान में अनुमान है कि प्रत्येक 100 में से लगभग 15-20 लोगों में किसी न किसी स्तर की CKD मौजूद है। यह अब विश्वभर में मृत्यु के पांचवें प्रमुख कारण के रूप में उभर रही है। यह बीमारी धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती है, जिससे कई लोगों को उन्नत अवस्था तक अपनी बीमारी का पता नहीं चलता। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास शामिल हैं। तीव्र किडनी चोट (AKI), जो अवसर संक्रमण, निर्जलीकरण या विषैले पदार्थों के संपर्क से होती है, भी विश्वभर में बीमारी और मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है।

“सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य” का आह्वान देशों के बीच और देशों के भीतर किडनी उपचार में गहरी असमानताओं को दर्शाता है। प्रारंभिक जांच, निदान सेवाओं, आवश्यक दवाओं, डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण तक पहुंच में व्यापक अंतर है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डायलिसिस सीमित या महंगा हो सकता है, और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है। यहां तक कि समृद्ध देशों में भी ग्रामीण समुदायों, जातीय अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच असमानताएं बनी रहती हैं। हमारे देश में भी अधिकांश लोग अपनी जेब से अधिक खर्च, सीमित बीमा कवरेज और भौगोलिक बाधाओं का सामना करते हैं। इन असमानताओं को दूर करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार करना, सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना और सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग कार्यक्रम लागू करना आवश्यक है। प्रारंभिक पहचान और रोकथाम की रणनीतियां विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे किफायती हैं, रोग की प्रगति को धीमा कर सकती हैं और महंगे उपचारों की आवश्यकता को कम कर सकती हैं।

इस वर्ष की थीम किडनी उपचार, विशेषकर डायलिसिस, के पर्यावरणीय प्रभाव पर भी ध्यान आकर्षित करती है। हेमोडायलिसिस, जो किडनी विफलता के रोगियों के लिए जीवनरक्षक उपचार है, संसाधन-गहन प्रक्रिया है। प्रत्येक सत्र में बड़ी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता होती है तथा डिस्पोजेबल सामग्री से काफी प्लास्टिक और चिकित्सा कचरा उत्पन्न होता है। जब इसे विश्वभर के लाखों रोगियों के संदर्भ में देखा जाए, तो इसका पर्यावरणीय प्रभाव बहुत बड़ा हो जाता है। टेलीमेडिसिन और स्थानीय उपचार केंद्र न केवल अधिक सुविधाजनक हैं, बल्कि रोगियों और पर्यावरण दोनों के लिए अधिक अनुकूल विकल्प हैं। दूसरी ओर, बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाएं निर्जलीकरण, हीट स्ट्रेस और विषैले पदार्थों के संपर्क के माध्यम से किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाती हैं। इस प्रकार, किडनी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य प्रदाताओं और नीति-निर्माताओं को अधिक टिकाऊ किडनी देखभाल मॉडल की दिशा में कार्य करना चाहिए। जल पुनर्चक्रण प्रणालियां, ऊर्जा-कुशल डायलिसिस मशीनें और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन जैसी नवाचार तकनीकें पर्यावरणीय प्रभाव को काफी कम कर सकती हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और हरित खरीद नीतियां कार्बन उत्सर्जन को घटा सकती हैं। टेलीमेडिसिन सेवाएं नियमित परामर्श और फॉलो-अप के लिए यात्रा की आवश्यकता को कम कर सकती हैं
रोकथाम सबसे प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल रणनीतियों में से एक है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है और मधुमेह, किडनी रोग तथा हृदय रोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत के लिए निम्नलिखित कदम अपनाएं:

1. धूम्रपान न करें। यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ना आपके स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

2. रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखें।

3. स्वस्थ वजन बनाए रखें। मोटापा मधुमेह और किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाता है।

4. संतुलित और पौष्टिक आहार लें। अत्यधिक नमक, संतृप्त वसा और साधारण

कार्बोहाइड्रेट से बचें। पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पिएं।

5. अप्रमाणित और गैर-वैज्ञानिक वैकल्पिक उपचारों से बचें।

6. दर्दनाशक और एंटी-एसिड दवाओं का स्वयं सेवन न करें।

7. सप्ताह में 4-5 दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। प्रतिदिन आधा घंटा चलना

भी लाभदायक है।

8. नियमित योग लाभकारी है और तनाव कम करने में सहायक है।

9. प्रतिवर्ष स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं।

इन उपायों से किडनी विफलता की दर कम की जा सकती है और महंगे उपचारों पर निर्भरता घटाई जा सकती है।

सरकारी नीतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य” को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य रणनीतियों में किडनी रोग की रोकथाम और प्रबंधन को शामिल करना, प्रारंभिक पहचान कार्यक्रमों को वित्तीय सहायता देना और सतत स्वास्थ्य अवसंरचना में निवेश करना आवश्यक है। पोर्टेबल या पहनने योग्य डायलिसिस उपकरण, कृत्रिम किडनी, प्रारंभिक निदान के बेहतर बायोमार्कर और टिकाऊ चिकित्सा सामग्री जैसे नवाचार रोगी देखभाल में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। सरकार को किडनी प्रत्यारोपण के लिए पात्र रोगियों की प्रक्रिया को प्राथमिकता और तीव्रता से आगे बढ़ाना चाहिए।

सामुदायिक सहभागिता और शिक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जन-जागरूकता अभियान लोगों को जोखिम कारकों, नियमित जांच के महत्व और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

नैतिक दृष्टि से यह थीम स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी को रेखांकित करती है कि वे रोगी देखभाल के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा का भी संतुलन बनाए रखें। जीवनरक्षक उपचार प्रदान करते समय पृथ्वी को न्यूनतम हानि पहुंचाना आवश्यक है।

अंत में, “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य लोगों की देखभाल, पृथ्वी की रक्षा” विश्व किडनी दिवस 2026 का संदेश है कि किडनी स्वास्थ्य के लिए एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाए। रोकथाम को प्राथमिकता देकर, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाकर, नवाचार को अपनाकर और पर्यावरण की रक्षा करके हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं जहां गुणवत्तापूर्ण किडनी उपचार सभी के लिए सुलभ हो।

याद रखें, आपकी किडनियां हीरे की तरह हैं एक बार क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता

प्रोफेसर (डॉ.) संजीव गुलाटी

एमडी, डीएनबी (बाल रोग), डीएम, डीएनबी (नेफ्रोलॉजी) एफआईएसएन, एफआईएपी (ऑस्ट्रेलिया), एफआरसीपीसी (कनाडा), एफआईएसओटी

चेयरमैन, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण, फोर्टिस अस्पताल समूह, एनसीआर

एडजंक्ट प्रोफेसर, नेफ्रोलॉजी विभाग, मणिपाल विश्वविद्यालय सदस्य, गवर्निंग बॉडी, इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांट पूर्व सचिव, नॉर्थ ज़ोन चैप्टर, इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ISN)

पूर्व अध्यक्ष, इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी

मनसा देवी पैदल मार्ग से हटाए गए दुकानदारों ने की पुनः दुकानें लगवाने की मांग


एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो करेंगे वन विभाग कार्यालय का घेराव-संजय चोपड़ा
हरिद्वार, 11 मार्च। गत वर्ष मनसा देवी मंदिर पैदल मार्ग पर हुई दुर्घटना के बाद मार्ग से हटाए गए दुकानदारों ने पुनः दुकानें लगवाने की मांग की है। हटाए गए दुकानदारों के समर्थन में प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए लघु व्यापार एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय चोपड़ा ने कहा कि गत वर्ष 27 जुलाई को हुए हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मनसा देवी पैदल मार्ग बंद कर दिया था और करीब 150 अस्थायी दुकानें हटवा दी गयी थी। लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी मार्ग नहीं खोला गया। दुकानें हटाए जाने से कई परिवारों का रोजगार पूरी तरह समाप्त हो गया है। दुकानें हटने से लघु व्यापारियों के आर्थिक हालात बेहद खराब हो गए हैं। कई लोग बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं और घर की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को मार्ग खोलने के साथ प्रभावित व्यापारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संजय चोपड़ा ने कहा कि वन विभाग व्यापारियों की समस्या के समाधान के लिए समिति का गठन करे। एक सप्ताह में समिति का गठन नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। लघु व्यापार एसोसिएशन की मनसा देवी इकाई के अध्यक्ष कमल प्रताप सिंह ने कहा कि दुकानदार कर्ज लेकर घर का खर्च चला रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा मार्ग के चौड़ीकरण की घोषणा की गयी थी। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर पैदल मार्ग नहीं खोला गया तो व्यापारी वन विभाग के कार्यालय का घेराव करेंगे। पत्रकार वार्ता में जुगल किशोर, संतोष, दयाराम गोस्वामी, राजकुमार, शशिकांत, रक्षाराम मौर्य, रमेश मौर्य, विजय गुप्ता और दिलीप मिश्रा सहित कई लघु व्यापारी मौजूद रहे।

देववाणी परोपकार मिशन का पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न

हरिद्वार, 11 मार्च 26, देववाणी परोपकार मिशन हरिद्वार द्वारा 11 वां सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता 2025 ,26 प्रेस क्लब हरिद्वार में पुरस्कार वितरण किया गया।

देववाणी परोपकार मिशन के अध्यक्ष ईश्वर सुयाल ने बताया कि सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय तृतीय छात्र-छात्राओं को नगद पुरस्कार एवं शील्ड प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया जिसमें प्रथम स्थान आलोक पांडे वेद विद्यार्थी देहरादून जया रेडियंट पब्लिक स्कूल द्वितीय स्थान प्राची भारद्वाज सिवा नेशनल स्कूल भव्य कानेकर ,साध्वी आनंद ज्योति स्कूल ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान राशि अग्रवाल चेतन ज्योति जूनियर हाई स्कूल ,सारांश कौशिक भागीरथी विद्यालय हरिपुर ने संयुक्त रूप से प्राप्त किया प्रतिभागियों को संयुक्त रूप से क्रमशः 5100,₹2100 और ₹1100 नगद पुरस्कार प्रदान किया गया इसके साथ ही हिमालयन अकैडमी हिमांगी, अंशिका , दून पब्लिक स्कूल के गुंजन सिंह, गिरीश चंद्र रवाली, हरि भारती संस्कृत विद्यालय में राहुल भट्ट ,सरोज ,आयुष गॉड शिव नेशनल स्कूल से स्नेहा गुप्ता ,प्राची भारद्वाज आयुषी जोशी सप्त ऋषि संस्कृत विद्यालय से रवि पांडे ,रोशन कुमार दुबे भागीरथी विद्यालय सार्थक राणा को मंच पर शील्ड प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया इस मौके पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हरिद्वार नगर निगम महापौर श्रीमती किरण जैसल ने कहा कि छात्र-छात्राओं में स्कूली ज्ञान के साथ-साथ सामान्य ज्ञान होना बहुत जरूरी है इससे छात्रों को एक मंच मिलता है और अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर होता है जो आने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं में उनके लिए मील का पत्थर साबित होगी उन्होंने ऐसे आयोजन पर देववाणी परोपकार मिशन को शुभकामनाएं दी गरीब दासी आश्रम के अध्यक्ष स्वामी रवि देव शास्त्री ने कहा कि हिंदी संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता से छात्र-छात्राओं में प्रतिस्पर्धा का मार्ग खुलता है छात्रों को अध्ययन अध्यापन के साथ सामान्य ज्ञान बहुत जरूरी है आज के इस भौतिक आधुनिक युग में पूरे विश्व भर की खबरें हर किसी को पता होना चाहिए इस मौके पर युवा भारत साधु समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम महंत ने कहा कि संस्कृत हिंदी सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता बहुत ही उपयोगी है जहां छात्रों को संस्कृत और हिंदी अंग्रेजी सभी माध्यमों के छात्रों को एकजुट होकर परीक्षाएं देनी हो रही हैं इस अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष ईश्वर सुयाल ने सभी का अभिनंदन स्वागत किया इस मौके पर विनय यादव मोहित जोशी नवीन सुयाल राहुल भट्ट स्नेहा गुप्ता राजवीर सिंह मुकेश सैनी प्रदीप कुमार कमल किशोर प्राची देवी गुंजन सिंह आयुषी जोशी आदि उपस्थित रहे

March 10, 2026

अवैध खनन के लिए जिम्मेदार लोगों पर की जाए कार्रवाई-फैजान

बाणगंगा में अवैध खनन का आरोप लगाया
हरिद्वार, 10 मार्च। भारतीय किसान यूनियन तोमर के कार्यकर्ताओं ने बाण गंगा में अवैध खनन का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए भारतीय किसान यूनियन तोमर के मीडिया सलाहकार फैजान ने बताया कि निहंदपुर सुठारी गांव के पास बहने वाली बाणगंगा नदी में परमिशन की आड़ में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। जिससे नदी और आसपास के क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। फैजान ने बताया कि खनन करने वाले लोग नदी क्षेत्र में गहरे गहरे गड्ढे खोद रहे हैं। इसके साथ ही गरीबों को आवंटित किए गए पट्टों की जमीन भी खोदी जा रही है। अवैध खनन के लिए खोदे गए गड्ढों के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। गड्ढों के कारण कई ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अवैध खनन पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। खनन केवल सरकार द्वारा तय नीतियों और नियमों के अनुसार ही कराया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा बनी रहे। उन्होंने मांग की कि सरकारी भूमि पर आवंटित किए गए पट्टों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। प्रैसवार्ता में आदिल हसन, गुलजार मोहम्मद, खालिद, भी मौजूद रहे।

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