शहीद अविनाश यादव की अंतिम यात्रा में उमड़ा देश भक्ति का सैलाब : : UP News | UP Web News

Web News

www.upwebnews.com

शहीद अविनाश यादव की अंतिम यात्रा में उमड़ा देश भक्ति का सैलाब

March 17, 2026

शहीद अविनाश यादव की अंतिम यात्रा में उमड़ा देश भक्ति का सैलाब

मैनपुरी, 16 मार्च 26 जनपद के लाल सूबेदार अविनाश यादव जम्मू कश्मीर में सेना के ऑपरेशन मेघदूत के दौरान शहीद हो गए। रविवार को शहीद सूबेदार का शव गांव पहुंचा। यहां शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हजारों की भीड़ ने शहीद के जयकारे लगाए। पैतृक गांव करुआमई नगरिया में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।
बेवर क्षेत्र के गांव करुआमई नगरिया निवासी सेवानिवृत्त हवलदार गिरीश चंद्र का छोटे पुत्र अविनाश यादव मई 2003 में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में सियाचिन में उनकी तैनाती थी। यहां सेना के ऑपरेशन मेघदूत के दौरान आठ मार्च की देर शाम उनकी हालत बिगड़ गई। सेना के अधिकारियों के अनुसार उन्हें हार्टअटैक आया, जिसके चलते पहले उनका लेह स्थित अस्पताल में उपचार चला। सुधार न होने पर उन्हें मिलिट्री हॉस्पिटल चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। यहां उपचार के दौरान 13 मार्च को उनका निधन हो गया। जैसे ही यह दुखद सूचना उनके परिवार और गांव तक पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार की दोपहर जैसे ही सेना के जवान उनका पार्थिव शरीर लेकर पैतृक गांव पहुंचे। हजारों की संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और आसपास के लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। लोगों ने भारत माता की जय और शहीद अविनाश यादव अमर रहें के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी। सेना के जवानों ने शहीद के शव को सशस्त्र सलामी दी। बेटे कर्तव्य यादव ने शहीद के शव को मुखाग्नि दी।
डीएम, एसपी सहित जन प्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
शहीद सूबेदार अविनाश यादव के शव को गांव करुआमई नगरिया में आगरा से सेना के अधिकारी कैप्टन अनुभव सुमन और कैप्टन एसपी मन्हास के नेतृत्व में सेना की टुकड़ी लेकर पहुंची। यहां श्रद्धांजलि देने वालों में भोगांव से भाजपा विधायक रामनरेश अग्निहोत्री, जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह, एसपी गणेश प्रसाद साहा, सपा जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ग्रुप कैप्टन आरके शर्मा, नरेंद्र यादव व सैनिक कल्याण बोर्ड का स्टाफ मौजूद रहा।
ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा भी रहे अविनाश यादव
सूबेदार अविनाश यादव अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद मई 2025 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी हिस्सा रहे थे। भाई आलोक ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में अविनाश यादव सेना के ज्वाइंट ऑपरेशन के सदस्य थे। आलोक के आंसू नहीं थम रहे थे बार-बार वह यही कह रहे थे कि भाई हमेशा कहता था कि देश हित के लिए कभी पीछे नहीं हटूंगा और वह अपने कर्तव्य का पालन करते हुए शहीद हो गया।
मां से किया था 20 मार्च को छुट्टी पर आने का वादा
शहीद अविनाश की पत्नी साधना अपनी बेटी अंशिका यादव और बेटा कर्तव्य यादव उर्फ कृष्णा के साथ वर्तमान में जयपुर में निवास करते हैं। साधना दोनों बच्चों की वहां पढ़ाई करा रही थी। दो फरवरी को बेटी का झांसी में बीईएमएस में एडमिशन कराने के लिए अविनाश अपने बड़े भाई आलोक के साथ झांसी पहुंचे थे। इसी दौरान मां बीना देवी से फोन पर बात हुई तो अविनाश ने कहा था कि वह 20 मार्च को छुट्टी पर घर आएंगे। ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था दिए गए समय से पांच दिन पहले तिरंगे में लिपटकर अविनाश का शव गांव पहुंचा। मां बीना देवी बार-बार रो-रोकर यही कह रही थी कि बेटा तुम्हें तो 20 मार्च को घर आना था पांच दिन पहले कैसे आ गए।
फोटो परिचय- शहीद को श्रद्धांजलि देते हुए अधिकारी व अन्य