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Monday, Moradabad
Rajesh Bhatia
मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
शहर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने पथ संचलन किया। महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से निकले पर संचलन में तमाम लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत भी किया।
रविवार को महानगर में विभिन्न स्थानों पर एक दर्जन बस्तियों में पद संचलन व एकत्रीकरण के कार्यक्रम हुए। इनमें प्रमुख रूप से मिलन विहार में महानगर प्रचार प्रमुख संजीव चौधरी, विजय निकेतन संघ कार्यालय में भगवानदास, राय बैंकट हॉल सांईपुरम में संदीप विभाग व्यवस्था प्रमुख,सामुदायिक केंद्र प्रीत विहार में प्रमोद महानगर सहकार्यवाह,अर्धनारीश्वर मंदिर हिमगिरी में सुरेश ध्यानी, सरस्वती शिशु मन्दिर पाकबड़ा में ओम प्रकाश शास्त्री,शहनाई मंडप चंद्रनगर में विभाग प्रचारक ब्रजमोहन, डिप्टी जगन्नाथ सिंह विद्यालय में रणवीर जी बौद्धिक वक्ता रहे।
इस दौरान विभाग प्रचारक ब्रजमोहन ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से भारतीय नववर्ष का आरंभ होता है। यह दिन अनेक दृष्टियों से अत्यंत पवन और ऐतिहासिक है। मान्यता यह कि इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। भगवान श्री राम के राज्याभिषेक के लिए भी इसी दिन का चयन किया गया। इस तिथि को आर्य समाज की स्थापना व विक्रम संवत का प्रारंभ भी माना जाता है। राष्ट्र स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम पूजनीय डॉक्टर केशव राम बलिराम हेडगेवार का जन्म भी पावन दिवस पर हुआ।
महानगर प्रचार प्रमुख संजीव चौधरी ने कहा कि भारतीय काल गणना केवल समय बताने का माध्यम नहीं है बल्कि यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर संतुलित जीवन जीने की भी प्रेरणा देती है। संघ साल में 6 उत्सवों को संगठन के विशेष कार्यक्रम के रूप में मनाता है। संघ में मनाये जाने वाले छह पर्व की वजह उनको सीधे राष्ट्रभाव से जोड़ना है।यह अवसर केवल एक तिथि का परिवर्तन का नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना व परंपराओं के पुनःस्मरण का भी है। ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा की कि स्वयं सेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष के वर्ष में प्रत्येक कार्यक्रम में अपने पांच परिवर्तनों को लेकर के समाज के बीच जा रहा है। वह पांच परिवर्तन है-सामाजिक समरसनता, कुटुंब प्रबोधन,स्व का बोध,नागरिक कर्तव्य व पर्यावरण।
महानगर में विभिन्न स्थानों पर पद संचलन के दौरान प्रमुख रूप से विभाग संघचालक सुरेन्द्र, महानगर संघ चालक डाक्टर विनीत,विपिन, डा.पवन जैन,प्रमोद जोशी, शरद जैन, निपेंद्र, राजेश,राजीव, आशुतोष, शानू, जितेंद्र, संजय, दिनेंद्र, भगवान दास, वरद,आदि सारस्वत, हरिमोहन गुप्ता समेत समस्त स्वयंसेवक रहे।

