बुलडोजर एक्शन-
महापौर ने बुलडोजर एक्शन पर उठाया सवाल, एक्शन पर महापौर-प्रशासन आमने-सामने
Post on 15.3.26
Sunday, Moradabad
Rajesh Bhatia
मुरादाबाद,(उप्र समाचार सेवा)।
मुरादाबाद में प्रशासन की बुलडोजर एक्शन से सत्तारूढ़ संगठन भाजपा में हलचल मची है। भाजपा नेता और मुरादाबाद के महापौर विनोद अग्रवाल व प्रशासन में धीमरी में जमीन को लेकर तनातनी है। प्रशासन की टीम ने तीन दिन पहले धीमरी में बाउंड्री वॉल को ढहा दिया।
प्रशासन का कहना है कि धीमरी में 20 बीघा जमीन सीएम माँडल कंपोजिट विद्यालय के लिए आरक्षित थी। प्रशासनिक टीम ने 12 मार्च को सरकारी जमीन पर चारदीवारी को अवैध कब्जा माना और चारदीवारी ढाह दी। प्रशासन की कार्रवाई से महापौर भड़के हुए हैं। बुलडोजर एक्शन को लेकर महापौर व प्रशासन आमने- सामने हैं।दो दिनों से इस जमीन पर पैमाइश चलीं। महापौर का कहना है कि इसमें से दस बीघा जमीन उनकी है। मामला अब शासन में पहुंच गया है। मेयर ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। मेयर ने यूपी सरकार के अधिकारियों को पत्र भेजकर जमीन की जांच कराए जाने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी है और इसे सरकारी विद्यालय परियोजना के लिए कब्जा मुक्त कराया गया है।
सदर तहसील में नेशनल हाईवे पर बाईपास के पास धीमरी गांव में 20 बीघा भूमि पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की।
प्रशासन का कहना है कि इस भूमि के एक हिस्से ‘सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ के निर्माण के लिए आरक्षित की गई। अधिकारियों का कहना है कि चिन्हित जमीन पर अवैध रूप से बाउंड्रीवाल बनी थी जिसे हटाकर भूमि को परियोजना के लिए कब्जा मुक्त किया गया।
मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल ने चारदीवारी गिराए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। कहा कि वर्ष 2017 में उन्होंने यह जमीन खरीदी और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के बाद उस पर बाउंड्रीवाल बनाई थी।
मेयर ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन ने बगैर नोटिस या सूचना के उनकी 55 मीटर लंबी चारदीवारी पर जेसीबी चलवा दी। इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ।
महापौर ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शासन में अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को पत्र भेजा है। साथ ही पूरे प्रकरण में जांच की मांग की है।कहा है कि यदि कोई अतिक्रमण था तो कानूनन पहले नोटिस दिया जाता। महापौर ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जमीन की पैमाइश किसी अन्य जिले के अधिकारी से कराए जाने की मांग की जिससे
निष्पक्ष जांच हो सकें।

