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पंचनद शोध संस्थान द्वारा भारतीय नैरेटिव पर विशेष व्याख्यान 27 मार्च को चंडीगढ़ में आयोजित हुआ।
चंडीगढ़। भारतीय चिंतन, संस्कृति और समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण बौद्धिक संवाद के रूप में पंचनद रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा 27 मार्च 2026, एन.आई.टी.टी.टी.आर. ऑडिटोरियम, चंडीगढ़ में एक विशेष व्याख्यान का रहा। कार्यक्रम का विषय “वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय विमर्श” था, जो वर्तमान समय में भारतीय विचारधारा की भूमिका और उसके वैश्विक प्रभाव को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि युद्ध की कहानी रम्य होती है, लेकिन युद्ध प्रत्यक्ष करना अच्छा नहीं लगता है। जो युद्ध शुरू करता है, वही युद्ध बंद करने की बात करता है, यह भी देखने को आज के दिन में मिलता है। रामायण से पूरा विश्व विचार शुद्धि और आचरण शुद्धि सीख सकता है। रामायण पुस्तकों में नहीं है, धर्म आचरण में है। भारत की संस्कृति और सभ्यता में उपलब्ध है। ताक़तवर देश होने के बावजूद भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया।
उन्होंने कहा कि भारत केवल एक मिलिट्री स्टेट नहीं है, भारत एक सभ्यता मूलक संस्कृति आधारित अध्यात्म प्रेरित देश है। दुनिया में इसको ही स्थापित करने के लिए हमारा प्रयास है। लेकिन ये प्रयास अपने कुटुंब से और अपने समाज से ही प्रारंभ होगा।
व्याख्यान में सम्बोधन के बाद उपस्थित जनों के प्रश्नों का उत्तर दिए। एक प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि शायद प्रश्न में इन दिनों सोशल मीडिया पर चल रही अफवाह के बारे में पूछा गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में अफवाह नहीं फैलाना चाहिए। भारतीय विमर्श में विरोधी है, तो भी अफवाह नहीं फैलायी जाती। उन्होंने कहा कि भारतीय परम्परा में शास्त्रार्थ के बाद गले मिलने की परम्परा रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, बठिंडा के कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) जगबीर सिंह ने की। प्रो. जगबीर सिंह मध्यकालीन पंजाबी साहित्य, लोक साहित्य एवं साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्वान हैं। कार्यक्रम में पंचनद के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर ब्रज किशोर कुठियाला भी उपस्थित रहे।
