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ब्रज की लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं : किशन चौधरी

March 7, 2026

ब्रज की लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं : किशन चौधरी

मुखराई में 108 दीपों के साथ हुआ चरकुला नृत्य, जिपंअ-विधायक ने संयुक्त रूप से किया शुभारंभ
मथुरा। बृज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधा रानी की ननिहाल गांव मुखराई में बीतीरात 5 हज़ार वर्ष पुरानी परंपरा पुनः जीवंत हो उठी। गांव मुखराई की महिलाओ ने परम्परागत तरीके से विश्व प्रसिद्ध चरकुला नृत्य कर सभी का मनमोह लिया। मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी और गोवर्धन विधायक ठाकुर मेघश्याम सिंह, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष (गोवर्धन) ठाकुर परशुराम ने चरकुला नृत्य का शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके किया। पूरा गाँव राधा रानी की नानी ’मुखरा देवी’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मुख्य अतिथियों का ब्रज लोक कला फाउंडेशन के दानी शर्मा, राम किशोर शर्मा और राहुल दुबे सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने पटुका पहनाकर व श्रीराधाकृष्ण की छवि भेंटकर भव्य स्वागत किया।
चरकुला नृत्य का मुख्य आकर्षण वह क्षण रहा जब महिला कलाकारों ने अपने सिर पर 108 जलते दीपकों का भारी-भरकम पिंजरा (चरकुला) रखकर नृत्य का प्रदर्शन किया। इस कठिन साधना और संतुलन को देख उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गया। नृत्य की शुरुआत जय देवी ने ठाकुर मदन मोहन जी के द्वार से की, जिसके बाद जानकी, विजय देवी, उर्मिला देवी और नीतू जैसी नृत्यांगनाओं ने बारी-बारी से अपनी कला का प्रदर्शन कर दर्शकों को दाँतों तले उंगलियाँ दबाने पर मजबूर कर दिया। ’जुग-जुग जियो तुम नाचन हारि’ की गूँज व लोकगीतों की मधुर तान के बीच जहाँ हुरियारिनों ने हुरियारों पर प्रेम की लाठियाँ बरसाईं, वहीं हुरियारों ने “जुग-जुग जियो तुम नाचन हारि…“ जैसे पारंपरिक लोकगीतों से नृत्यांगनाओं का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने उपस्थित जनसमूह के साथ ब्रज की प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का आनंद लिया तथा चरकुला नृत्य के माध्यम से ब्रज की लोक संस्कृति और विरासत को सहेजने के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ब्रज की लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं, जिन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। ब्रज लोक कला फाउंडेशन के दानी शर्मा ने बताया कि चरकुला नृत्य की शुरुआत मुखराई गांव से ही मानी जाती है। उन्होंने बताया राधारानी के जन्म की खुशी में उनकी नानी मुखरा देवी ने रथ के पहिए को सिर पर रखकर नृत्य किया था। इसी परंपरा की स्मृति में हर वर्ष होली की दौज पर मुखराई में यह उत्सव मनाया जाता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे