चौमुंहा (मथुरा)। ब्रजभूमि में होली का उत्साह अभी भी पूरे शबाब पर है। इसी क्रम में कस्बा चौमुंहा के ऐतिहासिक तकिया मैदान में भव्य हुरंगे का आयोजन किया गया। सतरंगी गुलाल और रंगों की उड़ती बौछारों के बीच जब हुरियारिनों ने छड़ियां बरसानी शुरू कीं तो हुरियारे उनके जोश के आगे बेबस नजर आए। इस पारंपरिक उत्सव को देखने के लिए क्षेत्रीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भी भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
हुरंगे की शुरुआत होते ही कस्बे के मारूफ, दाऊद, मनी, जुझार और थमू थोक की हुरियारिनें अपने-अपने दल के साथ मैदान में उतरीं। ब्रज के लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच हुरियारों ने जब हुरियारिनों पर रसिया के रंग डाले, तो जवाब में हुरियारिनों ने प्रेम से भरी अपनी छड़ियों से उन्हें जमकर छकाया। हुरियारों की ढालें भी हुरियारिनों के उत्साह के आगे फीकी पड़ती नजर आईं।
कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि मुख्य मंच पर क्षेत्र के गणमान्य लोगों का जमावड़ा लगा रहा। विशिष्ट अतिथियों का साफा पहनाकर और माला अर्पित कर स्वागत किया गया। आयोजन समिति ने हुरंगे में सक्रिय भागीदारी करने वाली और बेहतर कौशल दिखाने वाली विजेता महिलाओं को इनाम देकर सम्मानित किया। साथ ही सभी प्रतिभागी हुरियारिनों का मुंह मीठा कराने के लिए मिठाइयों का वितरण किया गया।
नगर पंचायत चेयरमैन सुषमा सिसोदिया ने कहा कि ब्रज की यह प्राचीन संस्कृति और हुरंगे की परंपरा हमारी अमूल्य धरोहर है। चौमुंहा का तकिया मैदान सदियों से इस परंपरा का साक्षी रहा है। वहीं समाजसेवी कालू पहलवान ने कहा कि हुरंगा केवल एक खेल नहीं बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश देने वाला उत्सव है। चेयरमैन प्रतिनिधि कारे बाबा ने भी प्राचीन संस्कृति को समाज में भाईचारे की भावना को जीवंत रखने वाला बताया।
देर शाम तक चले इस उत्सव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद रहा। शांतिपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर ब्रज की होली के अनूठे रंगों से सभी को सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर देवो काका, नारायण सिंह, ऋतिक सिसोदिया, हरेंद्र सिंह, पुष्पेंद्र, सौदान सिंह, लोकेश, भारतपाल मुंशी, भूपेंद्र पंडित, महावीर, बांके सिंह, राजू सिंह, जोली सेठ, पप्पू मुखिया सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
