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गोरखपुर से निषाद पार्टी का चुनावी बिगुल, आरक्षण को बनाया मुद्दा 160 सीटों पर है निशाना

March 22, 2026

गोरखपुर से निषाद पार्टी का चुनावी बिगुल, आरक्षण को बनाया मुद्दा 160 सीटों पर है निशाना

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
22/03/2026

गोरखपुर : गोरखपुर से निषाद पार्टी ने पूर्वांचल के राजनीतिक केंद्र गोरखपुर से अपनी चुनावी रणनीति का बिगुल बजा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के नेतृत्व में आयोजित इस मेगा रैली को गठबंधन राजनीति के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है। इस रैली के बाद प्रदेश के चार अन्य महानगरों में भी बड़े स्तर की रैलियां होनी हैं।
रैली में शक्तिप्रदर्शन कर समाज को एकजुट करने का दावा

रैली में निषाद पार्टी के कार्यकर्ता बाइक जुलूस के रूप में पहुंचे। मीडिया से बातचीत में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज पहले लैला पीकर दूसरे की रैलियों का रेला बनाता था, अन्य दलों का “पिछलग्गू” बनकर रह गया था, लेकिन अब समाज खुद सरकार बनाने की स्थिति में आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने वर्षों तक निषाद समाज की उपेक्षा की।

*सबसे बड़ी मांग: निषाद समाज को SC दर्जा दिया जाय*

रैली के जरिए निषाद पार्टी ने समाज के केवट-मल्लाह समेत 17 जातियों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया। पार्टी का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनाव में बड़ा राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है।

*प्रदेश की 160 सीटों पर नजर है निषाद पार्टी का*

निषाद पार्टी का दावा है कि प्रदेश की लगभग 160 विधानसभा सीटों पर केवट-मल्लाह समुदाय का निर्णायक प्रभाव है। इसी सामाजिक समीकरण को साधने के लिए पार्टी लगातार जनसभाएं और रैलियां आयोजित कर रही है।

*गोरखपुर इसलिए है खास*

गोरखपुर निषाद पार्टी के लिए सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि राजनीतिक आधार भी है।
2018 के उपचुनाव में निषाद पार्टी को पहली बड़ी सफलता यहीं से मिली थी ।
यह सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी। बाद में पार्टी ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की
2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के साथ गठबंधन में उतरकर निषाद पार्टी ने कई सीटों पर जीत हासिल की और विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

*भविष्य की क्या है रणनीति*

गोरखपुर रैली के बाद पार्टी चार और बड़े शहरों में मेगा रैलियां करेगी। इसका उद्देश्य साफ है निषाद समाज को राजनीतिक रूप से एकजुट करना है ।