एटा 10 मार्च उप्रससे। मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पर नेशनल मानवाधिकार चेतना संगठन के दर्जनों कार्यकर्ता एकत्रित हुए। उन्होंने जिले में शिक्षा के क्षेत्र में हो रही कथित लूट को लेकर जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के कार्यालय में अतिरिक्त उपजिलाधिकारी पीयूष रावत को एक लिखित ज्ञापन सौंपा।
यह ज्ञापन संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी यादव के नेतृत्व में सौंपा गया। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में निजी संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाने और अभिभावकों के शोषण को बंद करने की मांग की गई है। संगठन ने प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें एनसीईआरटी/सरकारी मानक से अलग महंगी किताबें अनिवार्य करने पर तत्काल रोक लगाना शामिल है। साथ ही, हर वर्ष ड्रेस बदलने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और न्यूनतम 3-5 वर्ष तक एक ही ड्रेस अनिवार्य करने की मांग की गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किताबों व ड्रेस को किसी एक दुकान से खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए। सभी विद्यालयों द्वारा किताबों एवं ड्रेस से संबंधित स्पष्ट लिखित आदेश व सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर एक जांच समिति के गठन की मांग की गई, जिसमें अभिभावक प्रतिनिधि भी शामिल हों। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने और अभिभावकों के लिए गोपनीय शिकायत तंत्र लागू करने की भी मांग की गई है।
संगठन के सचिव पुष्पेंद्र यादव ने बताया कि यह ज्ञापन निजी विद्यालयों की मनमानी के विरुद्ध सौंपा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी विद्यालय मनमाने ढंग से फीस वसूल रहे हैं, कोर्स लगा रहे हैं और यूनिफॉर्म बदल रहे हैं।
चेतावनी देते हुए पुष्पेंद्र यादव ने कहा यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती है, तो संगठन आंदोलन करेगा। मनमानी फीस वसूली के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोग अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिलवा पा रहे हैं, इसलिए इन पर लगाम लगाना आवश्यक है।

