रबी विपणन वर्ष 2026-27 हेतु न्यूनतम समर्थन
मूल्य योजना के अन्तर्गत गेहूं क्रय नीति स्वीकृतमंत्रिपरिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अन्तर्गत गेहूं क्रय नीति को स्वीकृति प्रदान की है। भारत सरकार द्वारा घोषित गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति कुन्तल के आधार पर रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं का क्रय किया जाएगा। सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के लिए गेहूं क्रय की अवधि 25 मार्च, 2026 से 15 जून, 2026 तक प्रभावी रहेगी।
कृषकों को मूल्य समर्थन योजना का अधिकाधिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से किसान द्वारा क्रय केन्द्र पर गेहूं लेकर आने की स्थिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाएगी। 08 क्रय एजेंसियों द्वारा 6,500 क्रय केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अन्तर्गत खाद्य विभाग की विपणन शाखा के 1,250, उ0प्र0 राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद के 100, उत्तर प्रदेश सहकारी संघ (पी0सी0एफ0) के 3,300, उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन (यू0पी0पी0सी0यू0) के 700, उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ (यू0पी0एस0एस0) के 350, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) के 300, भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एन0सी0सी0एफ0) के 100 तथा भारतीय खाद्य निगम के 400 क्रय केन्द्र प्रस्तावित किए गए हैं।
गेहूं क्रय केन्द्र प्रातः 09 बजे से सायं 06 बजे तक खुले रखे जाएंगे, किन्तु जिलाधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार क्रय केन्द्र के खुलने व बन्द होने के समय में आवश्यक परिवर्तन करने हेतु अधिकृत होंगे। रविवार एवं राजपत्रित अवकाश को छोड़कर, शेष कार्य दिवसों एवं स्थानीय अवकाश व द्वितीय शनिवार को क्रय केन्द्र खुले रहेंगे। गेहूं क्रय केन्द्रों पर किसानों के लिए पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था एवं वाहन पार्किंग इत्यादि के लिए पर्याप्त स्थान की व्यवस्था की जाएगी। क्रय केन्द्रों पर गेहूं को वर्षा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए क्रेट्स व तिरपाल की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी स्थिति में गेहूं खराब न होने पाए।
मंत्रिपरिषद के निर्णयों की मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी देने हेतु आहूत ब्रीफिंग में कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि विभाग द्वारा प्रस्तावित कार्यकारी क्रय 30 लाख मीट्रिक टन को मुख्यमंत्री जी द्वारा बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन किए जाने का निर्णय लिया गया है।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 में इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज़ मशीन के माध्यम से किसानों के बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण द्वारा क्रय केन्द्रों/मोबाइल क्रय केन्द्रों पर गेहूं की खरीद की जायेगी। मोबाइल क्रय केन्द्रों पर होने वाली प्रत्येक खरीद का ई-पॉप डिवाइस द्वारा अक्षांश देशान्तर भी कैप्चर किया जायेगा।
बटाईदार कृषकों द्वारा भी पंजीकरण कराकर गेहूं की बिक्री की जा सकेगी। समस्त क्रय एजेंसियों द्वारा किसानों से क्रय गेहूं के मूल्य का भुगतान भारत सरकार के पी0एफ0एम0एस0 पोर्टल के माध्यम से यथासम्भव 48 घण्टे के अन्तर्गत उनके बैंक खाते में सुनिश्चित किया जायेगा।
गेहूं खरीद वर्ष 2026-27 के अन्तर्गत पंजीकृत ट्रस्ट का भी गेहूं क्रय किया जायेगा। क्रय केन्द्र पर ट्रस्ट के संचालक अधिकृत प्रतिनिधि का बायोमैट्रिक सत्यापन कराते हुए गेहूं क्रय किया जायेगा तथा भुगतान ट्रस्ट के बैंक खाते में पी0पी0ए0 मोड के माध्यम से कराया जायेगा।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान यदि गेहूं क्रय नीति के किसी प्राविधान में तात्कालिक रूप से किसी संशोधन की आवश्यकता होती है, तो नीति विषयक संशोधन/विचलन हेतु मुख्यमंत्री जी अधिकृत होंगे।
प्रदेश के जनपद मुख्यालय के नगरीय निकायों (नगर निगम को छोड़ते हुए) को विकसित किये जाने हेतु ‘नवयुग पालिका योजना’ का प्रस्ताव अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के जनपद मुख्यालय के नगरीय निकायों (नगर निगम को छोड़ते हुए) को विकसित किये जाने हेतु नवयुग पालिका योजना के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। परियोजना की समयावधि 05 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2025-26 से वित्तीय वर्ष 2029-30) तक होगी।
इस योजना के अन्तर्गत 58 नगरीय निकाय चयनित किये गये हैं। इनमें 55 नगर पालिका परिषदों (जिला मुख्यालय), 03 नगर पंचायतों (जिला मुख्यालय होने के कारण-नगर पंचायत अकबरपुर जनपद कानपुर देहात, नगर पंचायत ज्ञानपुर जनपद भदोही एवं नगर पंचायत चन्दौली जनपद चन्दौली) तथा जनपद गौतमबुद्धनगर की नगर पालिका परिषद दादरी (जिला मुख्यालय औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में आने के कारण) को सम्मिलित किया गया है।
योजना के अन्तर्गत चयनित नगर निकायों को उच्च गुणवत्तापूर्ण एवं सतत् विकास के साथ स्मार्ट नगरीय सेवाएं उपलब्ध कराया जाना है। योजना में सम्मिलित 58 नगरीय निकायों हेतु प्रतिवर्ष 583.20 करोड़ रुपये एवं 05 वर्षों में कुल 2,916 करोड़ रुपये की धनराशि का व्यय भार सम्भावित है। परियोजना में केन्द्र सरकार की भागीदारी नहीं है। यह पूर्णतया राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित होगी। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना हेतु कुल 145 करोड़ रुपये की धनराशि की व्यवस्था की गयी है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश में स्मार्ट सिटी मिशन के विस्तार हेतु स्मार्ट सिटी योजना की आधारभूत संरचनाओं का बहुउद्देशीय उपयोग सुनिश्चित करने के लिये जिला मुख्यालयों को विकसित किया जाना है। चूंकि जिला मुख्यालय शासन के शीर्ष एवं महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में कार्य करते हैं। अतः स्मार्ट सॉल्यूशन्स को प्राथमिकता देने से डिजिटल गवर्नेन्स जैसी सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा तथा विभिन्न मण्डलों के बीच अन्तरराज्यीय असमानताओं का निवारण करने में भी सहायक होगा। जिला मुख्यालयों में निवेश करने से नगर निगमों से परे आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के उन्नयन एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार को पूरे प्रदेश में समान रूप से विस्तारित करने में सहायक सिद्ध होगा। नगरीय नागरिकों के जीवन स्तर (ईज ऑफ लिविंग) में व्यापक सुधार, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वातावरण तथा गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
प्रदेश में तीव्र शहरीकरण को सुनियोजित रूप से बढ़ावा देने, नगरीय निकायों की आधारभूत संरचनाओं में सुधार करने एवं नगरीय परिवेश के समग्र विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से जनपद मुख्यालयों के नगरीय निकायों को विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
उ0प्र0 निजी बिज़नेस पार्क विकास योजना-2025 स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश निजी बिज़नेस पार्क विकास योजना-2025 के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। बिज़नेस पार्कों में वैश्विक निगमों हेतु कार्यालय, अनुसंधान एवं विकास केन्द्र, वैश्विक क्षमता केन्द्रों तथा संचालन केन्द्रों की स्थापना के लिए संचालन हेतु तैयार (रेडी-टू-ऑपरेट) एवं प्लग-एण्ड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी, जो सेवा तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में तीव्र विस्तार को प्रोत्साहित करेगी।
ऐसे बिज़नेस पार्क नवाचार-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करेंगे, जो नॉलेज-बेस्ड उद्योगों को आकर्षित करेंगे, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देंगे, अनुसंधान क्षमताओं में वृद्धि करेंगे तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करेंगे।
अवस्थापना वितरण में निजी क्षेत्र की भागीदारी एवं दक्षता को प्रोत्साहित करने हेतु इस योजना को डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, संचालन एवं हस्तांतरण (DBFOT) मॉडल के अन्तर्गत कार्यान्वित किया जाएगा। प्रत्येक बिज़नेस पार्क 45 वर्षों की रियायत अनुबन्ध अवधि पर विकसित किया जाएगा, जिसे अतिरिक्त 45 वर्षों हेतु बढ़ाया जा सकता है। इसके उपरान्त, विकसित की गयी सम्पत्तियां उत्तर प्रदेश सरकार को वापस हस्तांतरित हो जाएंगी।
प्रत्येक पार्क हेतु लगभग (न्यूनतम) 10 एकड़ भूमि पार्सल चिन्हित किए जाएंगे, जिसमें विशेष स्थानों पर भूमि की उपलब्धता एवं उपयुक्तता के आधार पर लचीलापन अनुमत होगा। इस योजना के अन्तर्गत वित्तीय रूपरेखा में अपफ्रंट लैण्ड प्रीमियम एवं राजस्व भागीदारी के घटकों का समावेश होगा। विकासकर्ता द्वारा रियायतग्राही, रियायत अवधि में पूर्ण बिज़नेस पार्क की योजना, डिज़ाइन, वित्त पोषण, निर्माण, संचालन, रख-रखाव तथा हस्तांतरण हेतु पूर्ण उत्तरदायित्वों का वहन किया जाएगा।
मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोंपरान्त यह योजना सरकार द्वारा अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगी। एक बार अधिसूचित होने के बाद, सम्बन्धित सरकारी भूमि स्वामित्व एजेंसियां उत्तर प्रदेश में बिज़नेस पार्कों के विकास के लिए इस योजना को अपनाएंगी। सम्बन्धित औद्योगिक विकास प्राधिकरण या सम्बन्धित सरकारी भूमि स्वामित्व एजेंसी, आवेदन और बोली प्रक्रिया का संचालन करेगी, जिसमें प्रस्ताव आमंत्रित करना, प्रारम्भिक जाँच और तकनीकी मूल्यांकन शामिल है।
इस योजना में उल्लिखित मानदण्डों के अनुसार पूर्व-निर्धारित मूल्यांकन के आधार पर सभी प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए एक स्क्रीनिंग समिति का गठन किया जाएगा। स्क्रीनिंग समिति नीलाम किए गए भूमि बैंक पर भूमि आवण्टन के अंतिम अनुमोदन के लिए प्राधिकरण/भूमि स्वामित्व वाली एजेंसी में स्थापित आवण्टन समिति को शॉर्टलिस्ट किए गए आवेदकों की अनुशंसा करेंगी। विकासकर्ता को अर्धवार्षिक प्रगति एवं वित्तीय रिपोर्ट्स को प्रस्तुत करना होगा। इनमें भौतिक प्रगति, व्यय का विवरण एवं अनुमोदित समय-सीमा के अनुपालन का विवरण नामित प्राधिकरण/भूमि स्वामित्व वाली एजेंसी को देना होगा।
इस नीति के आधार पर सम्बन्धित भूमि स्वामित्व वाले प्राधिकरणों द्वारा निर्गत निविदाओं पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पी0पी0पी0 दिशा-निर्देश लागू होंगे। इस नीति में उल्लिखित मॉडल के आधार पर प्रत्येक निविदा जारी करने हेतु सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा अपने प्रशासकीय विभाग से अनुमोदन प्राप्त कर बिज़नेस पार्क डेवलपर्स का चयन किया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में, आधुनिक एवं उपयोग हेतु तैयार (रेडी-टू-यूज़) अवस्थापना के अभाव के कारण परियोजनाओं में विलम्ब होता है तथा लागत में वृद्धि होती है। विश्वस्तरीय, प्लग-एण्ड-प्ले बिज़नेस पार्क्स की स्थापना से विभिन्न लाभ प्राप्त होंगे। इसमें शीघ्र औद्योगिक सेटअप, निवेश प्रोत्साहन रोजगार सृजन, राजस्व वृद्धि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा स्टार्ट-अप को समर्थन, औद्योगिक क्लस्टरिंग, साझा जोखिम मॉडल इत्यादि सम्मिलित हैं।
यह योजना उत्तर प्रदेश की व्यापक औद्योगिक निवेश नीतियों का पूरक बनेगी। इस योजना से उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता तथा निर्यात में महत्वपूर्ण वृद्धि, वृहद स्तर पर निवेश आकर्षण तथा हजारों रोजगार सृजित होने की सम्भावना है, जिससे प्रदेश में समावेशी एवं सतत् आर्थिक विकास होगा।
‘उ0प्र0 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्
मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक-निजी भागीदारी डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्
उत्तर प्रदेश सरकार ने यू0एस0डी0 1 ट्रिलियन जी0एस0डी0पी0 लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए औद्योगीकरण की गति बढ़ाने, विनिर्माण क्षमता विस्तार करने तथा औद्योगिक इकाइयों के शीघ्र संचालन को प्रोत्साहित करने के लिए यह योजना प्रस्तावित की है।
वर्तमान ‘लीज़ एवं बिल्ड’ मॉडल में उद्यमी को भूमि लेने के बाद भवन, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज, एस0टी0पी0/ई0टी0पी0, अग्निशमन आदि पर भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे 18-36 माह तक उत्पादन शुरू होने में लग जाते हैं। यह एम0एस0एम0ई0 के लिए कार्यशील पूंजी, मशीनरी और तकनीकी उन्नयन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
प्रस्तावित योजना का मूल उद्देश्य पूर्व-निर्मित तथा आवश्यक उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स के माध्यम से उद्योगों को तैयार अवसंरचना उपलब्ध कराना है, ताकि भूमि-आधारित औद्योगिक विकास अधिक तेज, कुशल और रोजगारोन्मुख हो सके। यह मॉडल राज्य की भूमि का स्वामित्व बनाए रखते हुए निजी निवेश से अवसंरचना निर्मित कराने पर आधारित है।
योजना का प्रमुख लाभ यह है कि इससे अपफ्रण्ट लागत घटेगी, उत्पादन शीघ्र प्रारम्भ होगा, औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग होगा, रोजगार सृजन तेज होगा और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।
प्राथमिक क्षेत्र में लाइट इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, ई0वी0 कम्पोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल/गारमेण्ट, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक पैकेजिंग, डिफेंस, एयरोस्पेस तथा ई0एस0डी0एम0 शामिल हैं। आवश्यकतानुसार औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र-विशिष्ट आरक्षण और सीमित सहायक सुविधाएँ प्रदान कर सकती है।
योजना का संचालन DBFOT आधारित पी0पी0पी0 मॉडल में किया जाएगा, जिसमें औद्योगिक विकास प्राधिकरण भूमि का स्वामित्व अपने पास रखेगी और निजी डेवलपर (कन्सेशनायर) डिजाइन, वित्त, निर्माण, संचालन तथा हस्तांतरण का दायित्व निभाएगा। कन्सेशन अवधि 45 वर्ष होगी, जिसे अधिकतम 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
भूमि का न्यूनतम आकार 10 एकड़ प्रस्तावित है तथा पायलट परियोजनाओं के लिए 15-20 एकड़ को वरीयता दी जायेगी, ताकि परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता बनी रहे। निजी डेवलपर (कन्सेशनायर) पूर्व-निर्मित तथा आवश्यक उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स का विकास, संचालन एवं अनुरक्षण करेगा तथा उपयुक्त उद्यमों को सब लीज़ करेगा।
योजना के अन्तर्गत न्यूनतम विकास दायित्व (एम0डी0ओ0) निर्धारित किए गए हैं, ताकि भूमि का अनावश्यक संचयन (hoarding) न हो तथा समयबद्ध विकास सुनिश्चित किया जा सके। योजना के अनुसार, परियोजना की अवधि पूर्ण होने अथवा समाप्ति की स्थिति में सभी परिसम्पत्तियाँ उपयोग योग्य स्थिति में औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएँगी। भूमि का स्वामित्व किसी भी अवस्था में निजी कन्सेशनायर को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा।
वित्तीय दृष्टि से योजना को वित्तीय अनुशासन (fiscal prudence) के अनुरूप तैयार किया गया है। इस योजना के अन्तर्गत कोई बजटीय सहायता, व्यवहार्यता अंतर अनुदान (VGF) अथवा राज्य सरकार की गारण्टी प्रदान नहीं की जाएगी तथा राज्य पर कोई आकस्मिक देयता नहीं होगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एकमुश्त प्रीमियम, वार्षिक शुल्क तथा राजस्व साझेदारी (Revenue Share) के माध्यम से आय प्राप्त होगी।
प्लग-एण्ड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को तेजी प्रदान करने का एक व्यावहारिक, अल्प-जोखिम एवं उच्च-प्रभाव वाला दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। प्रत्यक्ष रूप से एम0एस0एम0ई0 को समर्थन प्रदान करने वाली यह योजना त्वरित रोजगार सृजन को सक्षम बनाती है, औद्योगिक भूमि के उपयोग में सुधार करती है तथा राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सुदृढ़ बनाती है। यह योजना राज्य सरकार पर किसी भी प्रकार का राजकोषीय भार अथवा आकस्मिक दायित्व सृजित किए बिना इन लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करती है।
ग्रेटर नोएडा में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024 के अन्तर्गत ग्रेटर नोएडा में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना हेतु उपलब्ध विशिष्ट भूखण्ड संख्या-01, सेक्टर कप्पा-02, क्षेत्रफल 174.12 एकड़ भूखण्ड के आवंटन के नियम व शर्तों सहित ब्रोशर के अंतिमीकरण एवं अनुमोदन सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एम0एम0एल0पी0) नीति-2024 के अन्तर्गत 01 हजार करोड़ रुपये के न्यूनतम निवेश वाली परियोजना प्रोत्साहन हेतु पात्र होगी। ऐसी परियोजना को 30 प्रतिशत फ्रण्ट एण्ड लैण्ड सब्सिडी दी जाएगी। यह लैण्ड सब्सिडी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों अथवा राज्य सरकार की किसी संस्था द्वारा लीज पर आवंटित किए जाने वाले भूखण्ड पर ही अनुमन्य होगी।
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा उक्त विशिष्ट भूखण्ड के आवंटन हेतु प्रकाशित की जाने वाली योजना के नियम व शर्तों को उच्चस्तरीय प्राधिकृत समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति की बैठक दिनांक 09.02.2026 में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की बोर्ड, मूल्यांकन समिति एवं औद्योगिक विकास विभाग की संस्तुति के क्रम में निविदा के माध्यम से चयनित बिडर को एम0एम0एल0पी0 नीति के अनुसार 30 प्रतिशत फ्रण्ट एण्ड लैण्ड सब्सिडी पर सैद्धान्तिक अनुमोदन प्रदान करते हुए मंत्रिपरिषद के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किए जाने की संस्तुति की गयी। यह सब्सिडी रिज़र्व प्राइस पर ही देय होगी। चयनित भूखण्ड हेतु बिडर का चयन ई-ऑक्शन मॉडल पर किया जाएगा।
भारत में पंजीकृत कोई भी साझेदारी फर्म, सीमित देयता साझेदारी फर्म (एल0एल0पी0), निजी व सार्वजनिक लि0 कम्पनी मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क भूखण्ड हेतु अपना आवेदन/प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी। कन्सोर्शियम/संयुक्त उद्यम (जे0वी0) को निविदा में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।
फ्रण्ट एण्ड लैण्ड सब्सिडी ड्राफ्ट निविदा में निर्दिष्ट भूमि के आरक्षित मूल्य पर अनुमन्य होगी। भूमि का आरक्षित मूल्य 11,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। सब्सिडी की गणना उत्तर प्रदेश मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024 के प्राविधानों के अनुरूप इसी आरक्षित मूल्य पर की जाएगी।
मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क के विकास हेतु सफल बोलीदाता को परियोजना सात (7) वर्षों की अवधि में पूर्ण करनी होगी, जिसमें प्रारम्भिक तीन (3) वर्षों में न्यूनतम 40 प्रतिशत विकास कार्य पूर्ण करना अनिवार्य होगा। वास्तविक एवं उचित विलम्ब की स्थिति में, अनुमन्य प्राविधानों के अनुसार आवण्टी को अधिकतम दो (2) वर्षों का विस्तार प्रदान किया जा सकता है।
परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने तथा निर्धारित निवेश प्रतिबद्धताओं की पूर्ति तक बोलीदाता/आवण्टी को निविदा की शर्तों एवं अनुमन्य नीतियों के अनुसार परियोजना से निर्गमन की अनुमति नहीं होगी।
उ0प्र0 राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन हेतु उ0प्र0 राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 प्रख्यापित किये जाने के संबंध में
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन हेतु उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को प्रख्यापित कराये जाने तथा उसके प्रतिस्थानी विधेयक के आलेख्य पर विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर उसे राज्य विधानमण्डल में पुनःस्थापित/पारित कराये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। इसके अन्तर्गत उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 की उपधारा-8 में परन्तुक बढ़ा दिया जाएगा। मंत्रिपरिषद ने उक्तानुसार संशोधन के उपरान्त उसके क्रियान्वयन में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो उसके समाधान हेतु शासनादेश निर्गत किये जाने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 की उपधारा-8 में परन्तुक बढ़ा दिये जाने से विकास प्राधिकरणों एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों अथवा किसी विनियमित क्षेत्र अथवा किसी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण अथवा उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन अधिसूचित क्षेत्र में गैर कृषिक उद्घोषणा हेतु दोहरी प्रक्रिया का सामना नहीं करना होगा।
इस संशोधन से उपरोक्त क्षेत्रों में निवेशकों/जनसामान्य हेतु गैर कृषिक उद्घोषणा का सरलीकरण हो जायेगा, जिससे निवेशकों को उक्त क्षेत्रों में निवेश करने में सुविधा होगी। इसके फलस्वरूप उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशक प्रोत्साहित होंगे। राज्य सरकार को अधिक निवेश की प्राप्ति होगी तथा प्रदेश औद्योगिक रूप से और विकसित होगा। इस व्यवस्था का सरलीकरण होने से निवेशकों/जनसामान्य को सीधा लाभ प्राप्त होने की सम्भावना है।
दि किसान सहकारी चीनी मिल लि0, बागपत की पेराई क्षमता 2,500 टी0सी0डी0 से बढ़ाकर 5,000 टी0सी0डी0 करते हुए नई चीनी मिल की स्थापना हेतु पब्लिक इन्वेस्टमेण्ट बोर्ड द्वारा संस्तुत लागत 37249.89 लाख रु0 का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने दि किसान सहकारी चीनी मिल लि0, बागपत की पेराई क्षमता 2,500 टी0सी0डी0 से बढ़ाकर 5,000 टी0सी0डी0 करते हुए नई चीनी मिल की स्थापना हेतु पी0आई0बी0 (पब्लिक इन्वेस्टमेण्ट बोर्ड) द्वारा संस्तुत लागत 37249.89 लाख रुपये के प्रस्ताव को अनुमोदित किया है। इसका वित्तपोषण 50 प्रतिशत राज्य सरकार की अंशपूँजी/अनुदान तथा 50 प्रतिशत राज्य सरकार से ऋण के रूप में किया जाएगा।
इस परियोजना से पुराने हो चुके जर्जर प्लाण्ट एवं पुरानी तकनीक पर आधारित होने के कारण हो रही तकनीकी हानियों को कम कर नयी तकनीक पर आधारित प्रस्तावित चीनी मिल के संचालन में सहायता मिलेगी। इस परियोजना से दि गन्ना किसान सहकारी चीनी मिल लि0, बागपत क्षेत्र के गन्ना किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाने, आय दोगुनी किये जाने एवं समय से गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किये जाने में सहायता मिलेगी।
नेयवेली उ0प्र0 पावर लि0 को आवंटित पछवारा साउथ कोल ब्लॉक के विकास हेतु आंकलित लागत 2242.90 करोड़ रु0 का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने नेयवेली उत्तर प्रदेश पावर लि0 को आवंटित पछवारा साउथ कोल ब्लॉक के विकास हेतु कोयला मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रदत्त अनुमोदन की समरूपता में, आंकलित लागत 2242.90 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। उक्त लागत का वित्तीय पोषण 70 प्रतिशत ऋण (1570.03 करोड़ रुपये) एवं 30 प्रतिशत अंश पूंजी के माध्यम से किया जाएगा।
पछवारा साउथ कोल ब्लॉक से प्राप्त होने वाले कोयले का उपयोग मुख्य रूप से जनपद कानपुर नगर स्थित 3ग660 मेगावॉट घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना की इकाईयों हेतु किया जायेगा। वर्तमान में कोल ब्लॉक का माईनिंग ऑपरेशन 19 दिसम्बर, 2025 से प्रारम्भ हो चुका है और अगस्त, 2026 से कोयले की निकासी लक्षित है। इस कोल ब्लॉक से प्राप्त कोयले से विद्युत उत्पादन लागत में कमी आयेगी, जिससे प्रदेश को सस्ती एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध होगी।
ज्ञातव्य है कि नेयवेली उत्तर प्रदेश पावर लि0, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि0 एवं एन0एल0सी0 इण्डिया लि0 का एक संयुक्त उपक्रम है। संयुक्त उपक्रम के अन्तर्गत घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना की प्रथम व द्वितीय इकाई क्रमशः 12.12.2024 व 09.12.2025 से वाणिज्यिक भार पर उत्पादनरत है।
गोरखपुर शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने हेतु चिलुआताल में 20 मेगावॉट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लाण्ट की स्थापना के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने गोरखपुर शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने हेतु चिलुआताल में 20 मेगावॉट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लाण्ट की स्थापना सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सोलर सिटी को एक ऐसे शहर के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां 05 वर्ष के अन्त में पारम्परिक ऊर्जा की अनुमानित कुल मांग में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी अक्षय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना और ऊर्जा दक्षता उपायों के माध्यम से प्राप्त की जायेगी।
गोरखपुर शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने हेतु 10 प्रतिशत अर्थात 121.8 मिलियन यूनिट ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से प्राप्त की जानी है। गोरखपुर में हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एच0यू0आर0एल0) के निकट तहसील सदर में स्थित चिलुआताल पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लाण्ट की स्थापना के लिए 80 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसके लिए पर्यटन विभाग, राजस्व विभाग एवं एच0यू0आर0एल0 के स्वामित्व के अधीन जलमग्न भूमि/ताल का उपयोग किया जा रहा है।
चिलुआताल पर 20 मेगावॉट क्षमता की प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर विद्युत उत्पादन परियोजना की स्थापना हेतु पर्यटन विभाग के स्वामित्व की 11.4181 हे0 (28.20 एकड़) भूमि उपयोग किये जाने हेतु कोल इण्डिया लि0 को निःशुल्क आवंटित किया जाना है। चिन्हित भूमि ताल श्रेणी की भूमि धारा-77 (1) के अन्तर्गत सुरक्षित श्रेणी की भूमि है, इसका उपयोग अगर सोलर प्लाण्ट के लिए किया जाता है, तो भूमि की प्रकृति में कोई परिवर्तन नही होगा।
कोल इण्डिया लिमिटेड द्वारा 20 मेगावॉट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर पावर प्लाण्ट की स्थापना स्वयं के स्रोतों से की जायेगी। इस परियोजना से प्रति वर्ष न्यूनतम 33.29 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा, जो ग्रिड में फीड की जायेगी तथा गोरखपुर की ऊर्जा मांग की पूर्ति में सहायक होगी। इससे रोजगार सृजन एवं निवेश प्राप्त होगा। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण में वृद्धि होगी।
उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग (गैर-पेय में उपयोग) हेतु उ0प्र0 राज्य नीति-2026 के प्रख्यापन के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग (गैर-पेय में उपयोग) हेतु उत्तर प्रदेश राज्य नीति (सेफ रि-यूज़ ऑफ ट्रीटेड वॉटर पॉलिसी)-2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रचुर जल संसाधनों से सम्पन्न होने के बावजूद उत्तर प्रदेश सिंचाई, घरेलू, औद्योगिक और बिजली क्षेत्रों की बढ़ती मांग के कारण जल संसाधनों की कमी का सामना कर रहा है। जनसंख्या वृद्धि के साथ इस समस्या के और बढ़ने की सम्भावना है। इसके दृष्टिगत शोधित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग हेतु नीति तैयार की गयी है।
इस नीति में सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट एवं फेकल स्लज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट से शोधित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग को बढ़ावा दिया जाना निहित है। प्रथम चरण में नगर पालिका उपयोग, सिविल निर्माण, बागवानी, सिंचाई आदि तथा द्वितीय चरण में औद्योगिक उपयोग, कृषि व जलीय कृषि, रेलवे बोगियों की धुलाई एवं तृतीय चरण में दोहरी पाइप प्रणाली प्रदान करके उपयोग किये गये जल की आपूर्ति करके गैर-पेय का घरेलू कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा।
नीति के लागू होने से उपचारित प्रयुक्त जल का गैर-पेय कार्यों में उपयोग करने पर यथालाभ सतही और भूजल संसाधनों पर दबाव कम होगा। जल निकायों का प्रदूषण कम होने से जन स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। गैर-पीने योग्य उपयोगों यथा-निर्माण, शीतलन, बागवानी फ्लशिंग के लिए उपचारित जल के पुनः उपयोग से ऊर्जा उपयोग में भी कमी आयेगी। साथ ही, तकनीकी एवं नवाचारों के प्रयोग से विकास पर बहुउद्देशीय प्रभाव पड़ेगा।
जनपद सम्भल में 24 कोसीय वंशगोपाल तीर्थ परिक्रमा मार्ग के नवनिर्माण/चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने जनपद सम्भल में 24 कोसीय वंशगोपाल तीर्थ परिक्रमा मार्ग के नवनिर्माण/चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य सम्बन्धी परियोजना के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। उक्त मार्ग की कुल लम्बाई 49.470 कि0मी0 है, जिसमें से 30.660 कि0मी0 भाग कच्चा है। अवशेष 18.810 कि0मी0 लम्बाई में पूर्व निर्मित पक्का मार्ग है, जिसकी चौड़ाई 3.00 मी0/3.75 मी0/7.00 मी0/14.00 मी0 है। इसको न्यूनतम 7.00 मी0 पेवमेण्ट एवं 3.00 मी0 रेज्ड फुटपाथ हेतु चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाना है। परिक्रमा मार्ग के निर्माण हेतु 35.8673 हे0 भूमि अधिग्रहीत किए जाने की आवश्यकता है, जिसका प्राविधान भी प्रारम्भिक आगणन में किया गया है। उक्त कार्य की लागत 30010.65 लाख रुपये है। प्रश्नगत मार्ग में 30.660 कि0मी0 भाग कच्चा है। मंत्रिपरिषद द्वारा पी0सी0यू0 के मानकों में शिथिलीकरण प्रदान करते हुए परियोजना की लागत को अनुमोदित किया गया है।
ज्ञातव्य है कि जनपद सम्भल के अन्तर्गत वंशगोपाल तीर्थ एक प्राचीन तीर्थस्थल है, जहां एक पौराणिक कदंब का वृक्ष है। इस अत्यन्त प्राचीन वृक्ष को श्रीकृष्ण कालीन परम्परा की स्मृति माना जाता है। वंशगोपाल तीर्थस्थल में प्रत्येक माह 24 कोसीय परिक्रमा होती है।
जनपद सम्भल के अन्तर्गत 68 तीर्थ एवं 19 कूप स्थित हैं, जिसमें से प्रमुख तीर्थ स्थलों में वंशगोपाल तीर्थ, भुवनेश्वर तीर्थ, चामुण्डा मन्दिर फिरोजपुर, क्षेमनाथ तीर्थ एवं चन्देश्वर तीर्थ चन्दायन आदि हैं। वंशगोपाल तीर्थ पर होने वाली 24 कोसीय परिक्रमा हेतु पक्का मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को कच्चे एवं कीचड़ युक्त मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके कारण श्रद्धालुओं को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। धार्मिक एवं पौराणिक रूप से महत्वपूर्ण 24 कोसीय परिक्रमा हेतु पक्के मार्ग का निर्माण कराए जाने की स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार मांग की जा रही है। अतः जनहित के दृष्टिगत 24 कोसीय वंशगोपाल परिक्रमा मार्ग का निर्माण किया जाना अत्यन्त आवश्यक है।
अटल इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्टर मिशन के अन्तर्गत गंगा एक्सप्रेस-वे के सन्निकट जनपद सम्भल में इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स की स्थापना हेतु प्रायोजना प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने अटल इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्टर मिशन के अन्तर्गत गंगा एक्सप्रेस-वे के सन्निकट जनपद सम्भल में इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आई0एम0एल0सी0) की स्थापना हेतु अवस्थापना निर्माण कार्यों से सम्बन्धित प्रायोजना प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। आई0एम0एल0सी0 सम्भल से सम्बन्धित प्रायोजना की प्रस्तावित लागत धनराशि 29359.90 लाख रुपये के सापेक्ष मंत्रिपरिषद द्वारा धनराशि 24542.56 लाख रुपये पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।
ज्ञातव्य है कि यूपीडा द्वारा संचालित इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना में जनपद सम्भल में इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आई0एम0एल0सी0) के अन्तर्गत सड़क, आर0सी0सी0, नालियां, आर0सी0सी0 कल्वर्ट, फायर स्टेशन, अवर जलाशय, वॉटर सप्लाई लाईन, फेन्सिंग, इलेक्ट्रिसिटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि का निर्माण प्रस्तावित है।
यूपीडा द्वारा विकसित किए गए एक्सप्रेस-वे यथा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, पूर्वान्चल एक्सप्रेस-वे, बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे एवं विकासशील गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे 29 स्थलों पर इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आई0एम0एल0सी0) की स्थापना व विकास किया जा रहा है।
बुलन्दशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में 14 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने बुलन्दशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में 14 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। विकास क्षेत्र की निरन्तरता एवं सुनियोजित विकास हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा उत्तर प्रदेश नगर-योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा-3 के अन्तर्गत बुलन्दशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में 14 राजस्व ग्रामों को सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया है।
14 राजस्व ग्रामों में से 13 जनपद बुलन्दशहर व 01 राजस्व ग्राम जनपद गौतमबुद्धनगर का है। जनपद बुलन्दशहर के अन्तर्गत तहसील बुलन्दशहर के राजस्व ग्राम किशनपुर व ताजपुर, तहसील शिकारपुर के राजस्व ग्राम खैरपुर, बड़ौदा, फरीदपुर हवेली, भटौला, नबादा तथा कोंदूपुर, तहसील खुर्जा के राजस्व ग्राम चीती, नगला शेखू व सैण्डा फरीदपुर, तहसील सिकन्द्राबाद के राजस्व ग्राम शाहवाजपुर और सलैमपुर कायस्थ सम्मिलित हैं। जनपद गौतमबुद्धनगर के अन्तर्गत तहसील दादरी का राजस्व ग्राम बील अकबरपुर (भाग) (एन0एच0-34 के दक्षिण का भाग) सम्मिलित किया गया है।
बुलन्दशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र की सीमा में वृद्धि हो जाने पर क्षेत्र का नियोजित विकास होगा। आधारभूत अवसंरचना का निर्माण होगा। इससे जनसुविधाएं बढ़ेंगी और लोगों का जीवन सुगम बनेगा।
लखनऊ में इण्टरनेशनल एग्ज़ीबिशन-सह-कन्वेंशन सेण्टर की पुनरीक्षित लागत का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ में प्रस्तावित इण्टरनेशनल एग्ज़ीबिशन-सह-कन्वेंशन सेण्टर की पुनरीक्षित लागत के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। उक्त परियोजना में किसी संशोधन/परिमार्जन की आवश्यकता होने पर मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित होने वाले सम्मेलनों, प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं राजनीतिक कार्यक्रमों सहित अन्य कार्यक्रमों को सुगमता के साथ कराए जाने हेतु वृन्दावन योजना सेक्टर-15 में 10,000 व्यक्तियों की क्षमता के एक इण्टरनेशनल एग्ज़ीबिशन-सह-कन्वेंशन सेण्टर का ई0पी0सी0 मोड पर निर्माण कराने के लिए शासनादेश दिनांक 07.07.2025 द्वारा 1297.42 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति निर्गत की गयी थी।
उक्त कन्वेंशन सेण्टर के निर्माण हेतु 02 बार निविदा आमंत्रित करने के बावजूद स्वीकृत लागत से अधिक पर निविदा प्राप्त होने के कारण, परियोजना की व्यय वित्त समिति द्वारा पुनरीक्षित लागत 1435.25 करोड़ रुपये (जी0एस0टी0, लेबर सेस, कन्टीजेंसी एवं सुपरविजन चार्जेज़ व अन्य व्यय सहित) पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।
कन्वेंशन सेन्टर में 10,000 व्यक्तियों की क्षमता का कन्वेंशन हॉल एवं 2,500 व्यक्तियों की क्षमता का ऑडिटोरियम होगा, जिसे आवश्यकतानुसार कम क्षमता के एक से अधिक आयोजनों के लिए भी प्रयोग किये जाने की सुविधा होगी। प्रस्तावित कन्वेंशन सेन्टर में वृहद पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होगी। कन्वेंशन सेन्टर में सुरक्षा मानकों, भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ न्यूनतम 5,000 व्यक्तियों के भोजन व जलपान की व्यवस्था का समुचित प्रबन्ध किया जायेगा।
कन्वेंशन सेन्टर के अन्तर्गत एग्ज़ीबिशन स्थल पर डिफेंस एक्सपो आदि आयोजनों के समय भारी आयुद्ध उपकरणों यथा-टैंक, तोप आदि के प्रदर्शन की भी सुविधा उपलब्ध होगी। कन्वेंशन सेन्टर के निकट 5 स्टार एवं बजट होटल का भी प्राविधान सुनिश्चित किया गया है, जिससे आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
लखनऊ स्थित रोशन-उद-दौला व छतर मंजिल को पी0पी0पी0 मॉडल पर हेरिटेज पर्यटन इकाइयों के रूप में विकसित करने हेतु भूमि का स्वामित्व पर्यटन
विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित/आवंटित किए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ स्थित प्राचीन धरोहर भवनों रोशन-उद-दौला व छतर मंजिल को एडाप्टिव रि-यूज़ के अन्तर्गत सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मॉडल पर हेरिटेज पर्यटन इकाइयों के रूप में विकसित किए जाने हेतु भूमि का स्वामित्व पर्यटन विभाग को कतिपय शर्तों/प्रतिबन्धों के अधीन निःशुल्क हस्तांतरित/आवंटित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। यह हस्तांतरण अपवादस्वरूप होगा तथा इसे भविष्य में दृष्टांत के रूप में नहीं माना जाएगा।
ज्ञातव्य है कि जनपद लखनऊ में मोहल्ला बाजार झाऊलाल, स्टेशन-सहादतगंज स्थित छतर मंजिल, नजूल भूमि खसरा संख्या-38 क्षेत्रफल बी0 0-8-13-8 (1,096.84 वर्गमीटर) पर स्थित है। सम्पत्ति रजिस्टर 1907 के अनुसार मोहल्ला बाजार झाऊलाल, स्टेशन-गणेशगंज स्थित कोठी रोशन-उद-दौला बिल्डिंग, नजूल भूमि खसरा संख्या-322 क्षेत्रफल बी0 1-12-14-16 (4,141.91 वर्गमीटर) पर स्थित है।
लखनऊ स्थित इन विरासत सम्पत्तियों का पुनः उपयोग में लाए जाने से ऐसे भवनों को संरक्षित किया जा सकेगा, प्रदेश में पर्यटन गन्तव्यों में वृद्धि होगी तथा पर्यटन सेवाओं मेंं बढ़ोत्तरी होने से रोजगार सृजन होगा।
लखनऊ में दुबग्गा चौराहे पर 03 लेन फ्लाई ओवर की निर्माण परियोजना स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ में लखनऊ-हरदोई मार्ग पर दुबग्गा चौराहे पर 03 लेन में फ्लाई ओवर के निर्माण कार्य (लम्बाई 1811.72 मी0) की सम्पूर्ण परियोजना एवं उक्त कार्य की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 30531.37 लाख रुपये (तीन सौ पांच करोड़ इकत्तीस लाख सैंतीस हजार मात्र) के व्यय प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि जनपद लखनऊ में लखनऊ-हरदोई मार्ग पर दुबग्गा चौराहा स्थित है, जिसमें कानपुर बाईपास से हरदोई, सीतापुर मलिहाबाद, चौक, बुद्धेश्वर चौराहे, आगरा एक्सप्रेस-वे, कानपुर रोड तथा आई0आई0एम0 रोड से आने-जाने वाले यातायात से प्रायः जाम की स्थिति बनी रहती है। उक्त स्थल पर फ्लाई ओवर के बन जाने से दुबग्गा चौराहे पर लगने वाले जाम की समस्या से निजात मिलेगी, जिससे समय की बचत होगी व ईंधन की खपत तथा प्रदूषण में कमी आएगी।
बर्डपुर पिपरहवा मार्ग की 9.400 कि0मी0 लम्बाई में 4-लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण परियोजना के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के विकास हेतु जनपद सिद्धार्थनगर में बर्डपुर पिपरहवा मार्ग (अन्य जिला मार्ग) के चैनेज 0.000 से 9.400 तक (लम्बाई 9.400 कि0मी0) मार्ग के 04 लेन चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण परियोजना तथा कार्य की 05 वर्षीय अनुरक्षण सहित व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 26149.63 लाख (दो सौ इकसठ करोड़ उन्चास लाख तिरसठ हजार मात्र) रुपये के व्यय प्रस्ताव को स्वीकृत किया है।
नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के अन्तर्गत इस मार्ग को 04 लेन में विकसित किए जाने से पर्यटन, शिक्षा, व्यापार, सीमा सुरक्षा एवं क्षेत्रीय विकास एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, भारत-नेपाल के मध्य होने वाला अन्तरराष्ट्रीय आवागमन अधिक सुगम, सुरक्षित एवं समयबद्ध हो सकेगा।
जनपद बलरामपुर में बलरामपुर-श्रावस्ती-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-730 पर गोण्डा-बलरामपुर रेल सेक्शन पर बलरामपुर-झारखण्डी रेलवे स्टेशन के मध्य स्थित सम्पार संख्या-136 स्पेशल/3ई पर 02 लेन रेल उपरिगामी सेतु निर्माण कार्य की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने जनपद बलरामपुर में विधानसभा क्षेत्र बलरामपुर के अन्तर्गत बलरामपुर-श्रावस्ती-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-730 पर गोण्डा-बलरामपुर रेल सेक्शन पर बलरामपुर-झारखण्डी रेलवे स्टेशन के मध्य स्थित सम्पार संख्या-136 स्पेशल/3ई पर 02 लेन रेल उपरिगामी सेतु निर्माण कार्य की सम्पूर्ण परियोजना, उक्त परियोजना की सम्पूर्ण लागत का व्ययभार राज्य सरकार द्वारा वहन किये जाने तथा उक्त कार्य का व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 29221.35 लाख रुपये (दो सौ बानबे करोड़ इक्कीस लाख पैंतीस हजार रुपये मात्र) के व्यय प्रस्ताव को स्वीकित प्रदान कर दी है।
ज्ञातव्य है कि जनपद बलरामपुर नगर मुख्यालय एवं बलरामपुर शहर से जनपद गोण्डा, बहराइच, श्रावस्ती, तुलसीपुर, देवीपाटन मन्दिर तथा अन्य जनपदों के लिए यातायात का मुख्य मार्ग गुजरता है। उक्त मार्ग पर बलरामपुर-झारखण्डी रेलवे स्टेशन के मध्य स्थित सम्पार संख्या-136 स्पेशल/3ई का रेलवे फाटक बन्द होने के कारण प्रायः अत्यधिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। रेलवे फाटक के लम्बे समय तक बन्द रहने से शहर के भीतर यातायात का प्रवाह बाधित होता है, जिससे आम जनमानस को गम्भीर असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। सेतु निर्माण से शहर में जाम की समस्या से निजात मिलेगी, ध्वनि एवं वायु प्रदूषण में कमी आएगी तथा जनसुविधा में समग्र सुधार होगा। विशेष रूप से मरीजों को अस्पताल तक पहुँचने में कठिनाई, विद्यार्थियों के विद्यालय समय पर न पहुँच पाने की समस्या, स्थानीय नागरिकों एवं व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से मुक्ति मिलेगी ।
जनपद ललितपुर में पी0एम0 अभीम के अन्तर्गत जिला चिकित्सालय/राजकीय मेडिकल कॉलेज स्तर पर इन्टीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब और 50/100 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लाक निर्मित कराये जाने हेतु निःशुल्क भूमि आवण्टित किये जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने जिलाधिकारी ललितपुर से प्राप्त प्रस्ताव के क्रम में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के कार्यालय ज्ञाप संख्या-ए-2-75/दस-77-14(4)/74 दिनांक 03 फरवरी, 1977 के प्राविधानों को शिथिल करते हुये अपवाद स्वरूप नजूल आराजी संख्या 3727/2 रकबा 1.416 हेक्टेयर, जो मौजा ललितपुर परगना, तहसील व जिला ललितपुर के खेवट खाता संख्या 53 नजूल नगर पालिका के खाता संख्या 360 में दर्ज है, इस आराजी में से मात्र 3,250 वर्ग मीटर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में कतिपय शर्तों/प्रतिबन्धों के अधीन निःशुल्क आवण्टित/हस्तांतरित किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। यह हस्तान्तरण अपवादस्वरूप होगा तथा इसे भविष्य में दृष्टान्त के रूप में नहीं माना जायेगा।
ज्ञातव्य है कि जिलाधिकारी, ललितपुर के पत्र संख्या-1453/ 23-एल0बी0सी0-नजूल-आवंटन (2023-24) दिनांक 07 अप्रैल, 2025 द्वारा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन (पी0एम0 अभीम) के अन्तर्गत जिला चिकित्सालय/राजकीय मेडिकल कॉलेज स्तर पर इन्टीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब और 50/100 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक निर्मित कराये जाने हेतु निःशुल्क नजूल भूमि आवण्टित किये जाने का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया है।
भारत सरकार द्वारा गवर्नमेण्ट ग्राण्ट एक्ट, 1895 को रिपील कर दिये जाने के दृष्टिगत शासनादेश संख्या-3/2020/460/आठ-4-2020-
