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सरकार भारत में ग्रीन यूरिया उत्पादन का सपना साकार करने की रूपरेखा तैयार कर रही है

June 28, 2026

सरकार भारत में ग्रीन यूरिया उत्पादन का सपना साकार करने की रूपरेखा तैयार कर रही है

प्रविष्टि तिथि: 26 JUN 2026 2:13PM by PIB Delhi

नई दिल्ली। सरकार ने सतत कृषि, कार्बन तटस्थता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस संबंध में उर्वरक विभाग ने भारत के पीडीआईएल में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए उच्च-स्तरीय ‘प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता डॉ. के.के. पाठक – संयुक्त सचिव (उर्वरक विभाग) ने की, जो पीडीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक भी हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में, उर्वरक विभाग ने भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ -ईओआई) के लिए निमंत्रण जारी किया था। पीडीआईएल मुख्यालय, नोएडा में आयोजित प्री-ईओआई बैठक ने निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के कई हितधारकों के लिए बेहतरीन मंच प्रदान किया। इनमें एनटीपीसी, भारतीय सौर ऊर्जा निगम, अमोनिया-यूरिया टेक्नोलॉजी सप्लायर्स, प्रमुख भारतीय उर्वरक कंपनियां और इलेक्ट्रोलाइज़र, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया बनाने वाली कंपनियां शामिल थीं। पूरी वैल्यू चेन से संभावित कंपनियों की बड़ी संख्या में ऑनलाइन और ऑफलाइन उपस्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इसमें शामिल सभी लोग इस पहल को निकट भविष्य में हकीकत बनाने के लिए कितने उत्सुक हैं।

नीति और परिचालन संबंधी मुख्य बातें

1. मंत्रालयों के बीच समन्वित सरकारी सहयोग: चर्चाओं में ग्रीन प्रोडक्शन को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए कई मंत्रालयों से मिलने वाले वित्तीय आवंटन पर ज़ोर दिया गया। बड़े स्तर पर फंडिंग की प्रतिबद्धताओं में ये शामिल हैं:

  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय: महत्वपूर्ण ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना को तेज़ी से बढ़ाने और भारत की स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी को मज़बूत करने के लिए ₹19,744 करोड़।
  • उर्वरक विभाग: ग्रीन अमोनिया को राष्ट्रीय उर्वरक निर्माण शृंखला में आसानी से शामिल करने के लिए संस्थागत और बाज़ार-समानता ढांचा तैयार करने का काम सौंपा गया।

2. अलग–अलग कीमत मैकेनिज़्म के ज़रिए निर्माताओं की सुरक्षा: लागत की चुनौतियों से निपटने और स्थानीय उर्वरक इकाइयों की सुरक्षा के लिए, मज़बूत ‘ऑफटेकर-साइड डिफरेंशियल प्राइसिंग मैकेनिज़्म’ (खरीददार-पक्ष की अलग-अलग कीमत व्यवस्था) की रूपरेखा तैयार की गई:

  • चुनौती: पारंपरिक ग्रे अमोनिया की तुलना में ग्रीन अमोनिया के उत्पादन में अभी ज़्यादा लागत आती है, जिससे बिना मदद के ग्रीन यूरिया प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाता।
  • समाधान: भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) ने उत्पादकों से ग्रीन अमोनिया खरीदने के लिए निविदा पहले ही जारी कर दी हैं। इसे घरेलू उर्वरक कंपनियों को स्टैंडर्ड मार्केट-लिंक्ड ग्रे अमोनिया की कीमतों (Platts और Argus इंडेक्स के दो हफ़्ते के औसत, साथ ही सीमा शुल्क और स्थानीय परिवहन  लागत के आधार पर) पर सप्लाई किया जाएगा। ग्रीन यूरिया के लिए भी कुछ इसी तरह के सिस्टम पर विचार किया जा सकता है।

3. धीरे–धीरे कम होने वाली मदद के साथ उत्पादक–पक्ष के लिए प्रोत्साहन: निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए, एनजीएचएम (ग्रीन अमोनिया मोड 2A) के तहत प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन योजना का विवरण दिया गया। एसईसीआई द्वारा प्रबंधित पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी ई-रिवर्स नीलामी के ज़रिए कुल 7.24 लाख एमटी/वर्ष ग्रीन अमोनिया की खरीद का लक्ष्य तय किया जाएगा। परियोजना के स्पष्ट चरणों में मदद दी जाएगी:

  • विकास चरण: नई ग्रीनफील्ड परियोजनाओं या निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए।
  • परिचालन चरण: वाणिज्यिक आपूर्ति की तारीख से नकद प्रोत्साहन शुरू होंगे।
  • दीर्घावधि निश्चितता: एक बाध्यकारी निश्चित समझौते (GAPA/GASA) के ज़रिए 10 वर्ष की अवधि के लिए लाभ सुरक्षित किए जाते हैं, जिससे डेवलपर्स को बाज़ार में मज़बूत भरोसा मिलता है।

तकनीकी आधार: पुदिमाडाका 150 TPD पायलट प्लांट

बातचीत में तकनीकी प्रक्रियाओं पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश के पुदिमाडाका में स्थित 150 TPD ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट को बेंचमार्क के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इस प्लांट को एनईटीआरए (एनटीपीसी की अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ) ने विकसित किया है। यह सुविधा एडवांस्ड कार्बन कैप्चर और यूटिलाइज़ेशन (सीसीयूएस) सिस्टम को वॉटर इलेक्ट्रोलेसिस के साथ जोड़ने का उदाहरण पेश करती है। इससे कार्बोनेटेड फ्लाई ऐश, फूड-ग्रेड मटीरियल और सिंथेटिक फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलता है।

यह पहल कार्बन-न्यूट्रल फर्टिलाइज़र प्रोडक्शन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भारतीय कृषि के लिए हरित भविष्य की दिशा में सोच-समझकर उठाया गया और अच्छी तरह से तैयार किया गया कदम है।

June 27, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए विक्‍टोरिया पहुंचे

विक्टोरिया (सेशेल्स) 27 जून 2926, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी तीन दिन की सेशेल्‍स यात्रा पर विक्‍टोरिया पहुंच गए हैं। हवाई अड्डे पर सेशेल्‍स के राष्‍ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने उनका हार्दिक स्‍वागत किया। सोशल मीडिया पोस्‍ट में श्री मोदी ने इसके लिए राष्‍ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेशेल्‍स हिंद महासागर में भारत का महत्‍वपूर्ण समुद्री साझेदार और करीबी मित्र है। श्री मोदी ने दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए भारत और सेशेल्‍स के दीर्घकालिक संबंधों और सहयोग को बढावा देने के लिए सार्थक यात्रा की उत्‍सुकता प्रकट की।

प्रधानमंत्री बोटैनिकल गार्डन्‍स देखने गए और पौध रोपण समारोह में शामिल हुए। इस दौरान श्री मोदी ने डॉक्‍टर हर्मिनी की उपस्थिति में कोको-डे-मेर का पौधा रोपा। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह प्रधानमंत्री की एक पेड़ मां के नाम पहल का अंग था। इससे पर्यावरण स्थिरता के प्रति भारत और सेशेल्‍स की साझा प्रतिबद्धता का पता चलता है।

श्री मोदी ने बोटैनिकल गार्डन में विशाल कछुआ भी देखा। सोशल मीडिया पोस्‍ट में श्री मोदी ने कहा कि इस विशाल अल्डाब्रा कछुए का संबंध भारत और सेशेल्‍स के बीच विशेष मैत्री से भी है। उनमें से दो कछुए 2014 में कोलकाता के अलीपुर प्राणी उद्यान को उपहार में दिए गए थे।

प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्‍यों के साथ बातचीत भी की। उन्‍होंने कहा कि प्रवासी भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच जीवंत पुल के रूप में कार्य करता है और लोगों के बीच साझेदारी को समृद्ध तथा मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री सेशेल्‍स के पचासवें स्‍वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि होंगे। वे सेशेल्‍स के राष्‍ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे।

June 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली में पश्चिमबंग दिवस समारोहों में हिस्सा लिया

प्रधानमंत्री ने रेलवे, कृषि, ग्रामीण विकास, मछली पालन और पशुपालन क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, समर्पण और शिलान्यास किया

पश्चिम बंगाल दिवस का यह समय, यह तारीख ज्यादा खास है; स्वतंत्रता के बाद बंगाल के उज्जवल भविष्य के लिए जो सपने देखे गए थे, बंगाल की महान आत्माओं ने जिस दृष्टि की कल्पना की थी आज, एक तरह से पहली बार, बंगाल दिवस पर हम इन सपनों को वास्तविकता में बदलते देख रहे हैंः प्रधानमंत्री

यह ऐतिहासिक दिन पश्चिम बंगाल के विकास के लिए प्रेरणा बने, हम एक नए और गरिमामय इतिहास का सृजन करेंः प्रधानमंत्री

आज, सैंकड़ों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास है, रेल, सड़क, कृषि और मछली पालन से संबंधित ये परियोजनाएं बंगाल के विकास को नई गति देंगी, राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगीः प्रधानमंत्री

बंगाल ने खूनखराबा सहा, बंगाल ने अपने लोगों को गंवाया; इसने अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखा, लेकिन बंगाल ने अपनी पहचान और आत्मबोध को नष्ट नहीं होने दियाः प्रधानमंत्री

पश्चिमबंग दिवस पर हम सिर्फ एक तारीख को याद नहीं कर रहे, हम समूचे इतिहास को स्मरण कर रहे हैं, हम बंगाल की हजारों साल पुरानी परंपरा को श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैंः प्रधानमंत्री

भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर रहा है, विकसित भारत के इस संकल्प की सबसे बड़ी बुनियाद पूर्वी भारत का विकास है, इसके लिए हम ‘मिशन पूर्वोदय’ पर काम कर रहे हैंः प्रधानमंत्री

Posted Date:- Jun 20, 2026

प्रधानमंत्री, श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज ‘पश्चिमबंग दिवस’ (पश्चिम बंगाल दिवस) समारोह में भाग लिया। इस राज्य-स्तरीय समारोह का आयोजन हुगली के तारकेश्वर में किया जा रहा है, जो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से जुड़ा एक ऐतिहासिक महत्व का स्थान है। इस वर्ष के पश्चिमबंग दिवस का मुख्य विषय: “पश्चिम बंगाल: विरासत, सद्भाव और विकास,” है। यह राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि, सामाजिक एकजुटता और विकास की आकांक्षाओं को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया, उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया और उनकी आधारशिला रखी। रेलवे, कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्रों से जुड़ी ये पहलकदमियां अवसंरचना को मजबूत करेंगी, आजीविका में सुधार करेंगी, किसानों के कल्याण को बढ़ावा देंगी और पूरे राज्य में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देंगी।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 23वीं किस्त भी जारी की। इस किस्त के तहत, देश भर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी जाएगी।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। हाल ही में हुए चुनावों और नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद राज्य का यह उनका पहला दौरा था। पश्चिम बंगाल और देश की जनता का अभिवादन करते हुए, श्री मोदी ने इस अवसर को एक ऐतिहासिक पल बताया, जो पूरे राज्य में नई उम्मीद, आत्मविश्वास और प्रगति की भावना को दर्शाता है। श्री मोदी ने कहा, “पश्चिम बंगाल विकास और राष्ट्र-निर्माण की एक नई यात्रा पर निकल पड़ा है। लोगों में दिख रहा उत्साह और राज्य का सकारात्मक माहौल एक उज्ज्वल भविष्य के प्रति बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री ने “स्वच्छता से स्वागत” पहल में हिस्सा लेने के लिए नागरिकों को बधाई दी और इस बात पर ज़ोर दिया कि स्वच्छता को रोज़मर्रा की ज़िंदगी और संवहनीय विकास का अहम हिस्सा बनाना चाहिए। पश्चिम बंगाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह अवसर स्वतंत्रता और विभाजन से पहले के उतार-चढ़ाव भरे दौर के दौरान बंगाल की सांस्कृतिक पहचान, विरासत और भारत के भीतर उसके स्थान को सुरक्षित रखने के लिए दिए गए बलिदानों की याद दिलाता है। उन्होंने उन मनीषियों, सामाजिक नेताओं, विद्वानों और सार्वजनिक हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने बंगाल के लोगों के हितों और आकांक्षाओं की रक्षा के लिए काम किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद किया, जिन्होंने विभाजन के समय बंगाल का एक हिस्सा भारत के पास बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने उन जाने-माने बुद्धिजीवियों, विद्वानों, समाज सुधारकों, समुदाय के नेताओं और उद्योगपतियों के सहयोग को भी सराहा, जिन्होंने उस ऐतिहासिक आंदोलन में हिस्सा लिया था। श्री मोदी ने कहा, “रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसी महान हस्तियों से समृद्ध पश्चिम बंगाल की विरासत देश को प्रेरित करती आ रही है। इस विरासत को संजोने और इसका जश्न मनाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर पैदा करने की भी ज़रूरत है।”

श्री मोदी ने कहा कि नई सरकार ने दशकों से जमा हो रही चुनौतियों का समाधान करना शुरू कर दिया है और विकास की गति बढ़ाने के लिए तेज़ी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए तेज़ी से फ़ैसले लिए जा रहे हैं और लंबे समय से पड़ी लंबित परियोजनाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, “इस कार्यक्रम के दौरान रेलवे, सड़कों, कृषि और मत्स्य पालन से जुड़े सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। ये पहलें ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करेंगी, कनेक्टिविटी में सुधार करेंगी, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देंगी और रोजगार व विकास के नए अवसर पैदा करेंगी।”

प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी किए जाने पर विशेष प्रकाश डाला, जो देश भर के 9 करोड़ से ज़्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजी गई है। उन्होंने सभी लाभार्थी किसान परिवारों को अपनी शुभकामनाएं दीं। नागरिकों से राज्य के इतिहास से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पास अपार सांस्कृतिक, बौद्धिक और आर्थिक शक्ति है और यह एक बार फिर भारत की विकास यात्रा में अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभर सकता है। श्री मोदी ने कहा, “पश्चिम बंगाल दिवस न केवल इतिहास को याद करने का दिन होना चाहिए, बल्कि विकास, प्रगति और राष्ट्रीय एकता के प्रति नए संकल्प का भी दिन होना चाहिए। राज्य के लोग एक मज़बूत और समृद्ध भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चुनावों के दौरान पश्चिम बंगाल की जनता से किए गए वादे तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि राज्य के हर जरूरतमंद  गरीब परिवार को अब ‘आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा’ योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने अन्नपूर्णा योजना की शुरुआत, जल जीवन मिशन के ज़रिए साफ़ पेयजल तक बेहतर पहुँच, सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा में छूट और महिलाओं के लिए मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा लागू करने का भी ज़िक्र किया। श्री मोदी ने कहा, “जो कल्याणकारी योजनाएँ बरसों से अटकी हुई थीं, वे अब जन-संपर्क शिविरों के ज़रिए सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित हो रही है और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है।”

अवसंरचना के विकास पर ज़ोर देते हुए, श्री मोदी ने बताया कि काफी समय से लंबित कई परियोजनाएं अब तीव्र गति से आगे बढ़ रही हैं। इनमें चिंगरीघाटा क्रॉसिंग पर कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन का काम पूरा होना, हावड़ा में नए डिविज़नल रेलवे हॉस्पिटल की आधारशिला रखना, पूर्वी मेदिनीपुर में रोड ओवरब्रिज और संकराइल-सांत्रागाछी रेल लिंक परियोजना शामिल हैं। किसानों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ शुरू किए जाने का स्वागत किया, जो फसल के नुकसान से किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने ‘डिजिटल कृषि मिशन’ में राज्य को शामिल करने की भी घोषणा की, जिससे किसानों की रजिस्ट्री, ज़मीन के डिजिटल रिकॉर्ड और कृषि सेवाओं व लाभों की बेहतर डिलीवरी संभव हो सकेगी। श्री मोदी ने कहा, “पीएम धन-धान्य कृषि योजना के तहत, पश्चिम बंगाल के चार ज़िलों—पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झारग्राम—को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, भण्डारण अवसंरचना को मज़बूत करने और ऋण तक पहुँच में सुधार करने के लिए विशेष सहायता दी जाएगी।”

राज्य की अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन के महत्व को स्वीकार करते हुए, श्री मोदी ने दक्षिण 24 परगना में फ्रेजरगंज मत्स्य बंदरगाह के विस्तार और बीरभूम में एक आधुनिक मछली बाजार के विकास पर ज़ोर दिया। इससे आजीविका को बढ़ावा मिलने और मत्स्य क्षेत्र के मजबूत होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने देश भर के किसानों से सरकार के “खेत बचाओ अभियान” में भाग लेने की भी अपील की। यह अभियान मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने को बढ़ावा देता है।

वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सरकार के दृष्टिकोण को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘पूर्वोदय पहल’ के तहत पूर्वी भारत का विकास इस मिशन के केंद्र में है, जिसमें पश्चिम बंगाल क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विकास को गति देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। श्री मोदी ने कहा, “संवहनीय विकास के साथ-साथ शांति, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण भी आवश्यक है, ताकि सामूहिक प्रगति के लिए मिलकर काम करते हुए बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत किया जा सके।”

अपने संबोधन के समापन पर, प्रधानमंत्री ने राज्य भर के लोगों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया और विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदो की यह भूमि योग, कल्याण और मानवीय एकता के संदेश के माध्यम से एक बार फिर दुनिया को प्रेरित करेगी।

यह देश धर्मशाला नहीं है; घुसपैठियों को चुन-चुनकर निकाला जाएगा” – कोल्हापुर से गृह मंत्री अमित शाह का स्पष्ट संदेश

  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज कोल्हापुर, महाराष्ट्र में आयोजित ‘धन्यवाद सभा’ को मुख्य अतिथि के रुप में सम्बोधित किया
  • ₹1500 करोड़ की लागत से अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण की शुरुआत महाराष्ट्र में एक बार फिर धर्म और संस्कृति के शासन का आरंभ है
  • राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ-बद्रीनाथ, सोमनाथ और कामाख्या के बाद अब अंबाबाई कॉरिडोर – विरासत के संरक्षण के प्रति हमारी सरकार कटिबद्ध
  • ग्रामीण-सहकारी विकास से लेकर सेमीकंडक्टर, क्वांटम और न्यू-एज टेक्नोलॉजी तक, हर क्षेत्र में मोदी जी ने भारत को नई पहचान दिलाई

Posted Date:- Jun 20, 2026, News Maharastra Kolhapur, Amit Shah

कोल्हापुर (महाराष्ट्र), 20 जून 2026, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज यहां आयोजित ‘धन्यवाद सभा’ को मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडण्वीस और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर श्री शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में, जब से नरेन्द्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से असंभव माने जाने वाले अनेक कार्य हमारे नेता नरेन्द्र मोदी जी ने पूरे कर के दिखाए हैं। प्रभु श्री राम की ही कृपा से वर्ष 2014 में मोदी जी प्रधानमंत्री बने और अयोध्या में भव्य राम मंदिर आज अपनी दिव्य भव्यता के साथ खड़ा है। इसके साथ ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, केदारधाम और बद्रीधाम का पुनर्निर्माण किया गया। सोमनाथ मंदिर को फिर से सोने का बनाया जा रहा है। माँ कामाख्या का कॉरिडोर बन रहा है और अब अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर का कॉरिडोर बनाने का कार्य भी शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि देशभर में‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र के तहत संस्कृति का पुनर्जागरण हो रहा है। महाराष्ट्र में सभी ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ मंदिर पुनर्निर्मित हो रहे है, ये हमारे लिए गौरव का विषय है।

केन्द्रीय गृह एवं सहाकारिता मंत्री ने कहा इन 12 वर्षों में अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर के जीर्णोद्धार और कॉरिडोर निर्माण का कार्य शुरू होना भी कई अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर निर्माण की शुरुआत, महाराष्ट्र में एक बार फिर से धर्म के शासन और सांस्कृतिक जागरूकता को नई ऊँचाई दी है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 12 वर्षों में मोदी जी के नेतृत्व में सोमनाथ से लेकर गंगासागर तक पूरे देश में हमारी सरकार को जनता का समर्थन और विश्वास मिला है। श्री शाह ने कहा कि न केवल बंगाल की सीमाओं से घुसपैठ पूरी तरह बंद की जाएगी, बल्कि देश भर से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा, यह देश कोई धर्मशाला नहीं है।

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केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ चाहे ग्रामीण विकास हो, शहरी विकास हो, कृषि को समृद्ध बनाने के लिए सहकारिता मंत्रालय का गठन हो, नगर नियोजन के नए मानक स्थापित करना हो या पीएलआई स्कीम लाकर भारत को वैश्विक उत्पादन का हब बनाना हो — हर क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर, क्वांटम इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, डेटा सेंटर और न्यू एज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने की ठोस शुरुआत की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने चंद्रयान-3 के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक पहुंचकर ‘शिव शक्ति पॉइंट’ स्थापित किया और समूचे भारतवासियों के हृदय को गर्व और खुशी से भर दिया।

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केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, कोल्हापुर में पवित्र करवीर क्षेत्र स्थित माता अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर, जहां माता स्वयं सैकड़ों वर्षों से विराजमान हैं, के जीर्णोद्धार और विकास के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कार्य शुरू किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा करवीर नगर स्थित श्री अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर के जीर्णोद्धार तथा मंदिर कॉरिडोर निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना की कुल लागत 1500 करोड़ रुपये है और यह 28,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सातवीं शताब्दी में स्थापित इस प्राचीन मंदिर के पुनर्विकास के दौरान पुरातत्व विभाग के परामर्श से आसपास के लगभग 41छोटे-बड़े मंदिरों के संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से युक्त करते हुए एआई आधारित सुरक्षा कैमरों, एलईडी प्रकाश सज्जा, आउटडोर गैलरी, हेरिटेज वॉकवे, लाइट एवं साउंड शो, मल्टीपर्पस हॉल, अन्नछत्र, पुलिस चौकी तथा हेरिटेज कोर्टयार्ड सहित पूर्ण यात्री सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। श्री शाह ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने पर कोल्हापुर का यह पावन तीर्थ स्थल छह माह के भीतर एक पूर्ण विकसित यात्रा धाम बन जाएगा। इससे न केवल अंबाबाई माता के लाखों भक्तों में भक्ति का पुनर्जागरण होगा, बल्कि कोल्हापुर और महाराष्ट्र के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास को संरक्षित और प्रचारित करने का अवसर भी मिलेगा, जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि 1500 करोड़ रुपये कोई बड़ी राशि नहीं है, क्योंकि जहां हमारा इतिहास, हमारी आस्था और हमारी संस्कृति बसी हुई है, ऐसे पावन स्थानों का विकास और महिमा-मंडन पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है।

June 19, 2026

सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक लेनदेन, बड़े निर्माण और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर रहे पैनी नजर, 5 वर्षों के भूमि रिकॉर्ड की हो गहन जांच

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने त्रिपुरा के सालबगान में सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में भारत सरकार सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हर सीमावर्ती क्षेत्र को सुरक्षित और सशक्त बना रही है

सीमा सुरक्षा आइसोलेटेड ड्यूटी नहीं, टेरिटोरियल रिस्पॉन्सिबिलिटी है, DM, SP, पटवारी, सरपंच, मॉडर्न टेक्नोलॉजी और BSF मिलकर बनाएगा फुल-प्रूफ सुरक्षा ग्रिड

सिर्फ फेंसिंग नहीं, टोटल टेरिटोरियल डिफेंस -लोकल एडमिनिस्ट्रेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और BSF मिलकर बनाएँगे फुली सिक्योर्ड, लीक-प्रूफ बॉर्डर ग्रिड

सीमावासियों को हथियार और नारकोटिक्स की चुनौती से निपटने की ट्रेनिंग के लिए लगें कैंप, पटवारी से लेकर थाना और BSF तक हों शामिल

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बॉर्डर एरिया में हथियारों और ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चले सघन अभियान, नशे की पूरी चेन पर रूथलेस अप्रोच से हो कार्रवाई

सरहदी जिलों में फाइनेंशियल डिसिप्लिन लाना राज्य की भी जिम्मेदारी, कलेक्टर और GST अधिकारी हों प्रशिक्षित, फेक करेंसी के खिलाफ CBDT कराए सर्वे

Posted Date:- Jun 06, 2026

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने त्रिपुरा के सालबगान में सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत-बांग्लादेश सीमा (IBB) से सटे त्रिपुरा के सीमावर्ती जिलों से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्य के सभी 8 सीमावर्ती जिलों के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया। बैठक में राज्य सरकार के तंत्र के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सीमा प्रबंधन को सशक्त एवं व्यापक बनाने पर जोर दिया गया।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा कोई आइसोलेटेड ड्यूटी नहीं, बल्कि टेरिटोरियल रिस्पॉन्सिबिलिटी है। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, पटवारी, सरपंच, मॉडर्न टेक्नोलॉजी और सीमा सुरक्षा बल (BSF) मिलकर एक फुल-प्रूफ सुरक्षा ग्रिड का निर्माण करेगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि सिर्फ फेंसिंग ही नहीं, बल्कि टोटल टेरिटोरियल डिफेंस की अवधारणा पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और BSF मिलकर एक फुली सिक्योर्ड और लीक-प्रूफ बॉर्डर ग्रिड बनाएँगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि सीमा पर रहने वाले लोगों को हथियारों और नारकोटिक्स की चुनौती से निपटने की ट्रेनिंग देने के लिए कैंप आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि इन कैंपों में पटवारी से लेकर स्थानीय थाने और BSF के जवानों तक की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय के CCTV मॉडल को सबसे पहले त्रिपुरा में लागू किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि BSF के सभी कैमरों को अपग्रेड कर डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन से जोड़ा जाए।

श्री अमित शाह ने कहा कि बॉर्डर एरिया में हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ सघन अभियान निरंतर चलाए जाएं तथा नशे के कारोबार में योगदान देने वाली पूरी चेन के विरुद्ध रूथलेस अप्रोच के साथ कार्रवाई की जाए।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सरहदी जिलों में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना राज्य सरकार की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिया कि कलेक्टरों और GST अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाए तथा फेक करेंसी के विरुद्ध केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) सर्वे कराए।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक लेनदेन, बड़े निर्माण कार्यों और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर पैनी नजर रखी जाए। उन्होंने पिछले 5 वर्षों के भूमि रिकॉर्ड की गहन जांच कराने का भी निर्देश दिया।

बैठक में रेखांकित किया गया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में भारत सरकार सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हर सीमावर्ती क्षेत्र को सुरक्षित और सशक्त बना रही है। साथ ही, केन्द्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देकर सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

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