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Bhagwat Katha ध्रुव की तपस्या और नृसिंह अवतार की कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु

July 20, 2026

Bhagwat Katha ध्रुव की तपस्या और नृसिंह अवतार की कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु

फोटो –कथा रसपान करते भक्त

हाथरस। श्रीकृष्ण गौशाला, गौशाला रोड स्थित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के तृतीय दिवस कथाव्यास आचार्य वल्लभ महाराज ने ध्रुव चरित्र, महाराज पृथु, अजामिल उपाख्यान, भक्त प्रह्लाद एवं भगवान नृसिंह अवतार की प्रेरणादायी कथाओं का रसपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए।आचार्य ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, अटूट श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने महाराज पृथु के आदर्श शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चा शासक वही है, जो प्रजा के सुख-दुख को अपना मानकर धर्म और लोककल्याण के मार्ग पर चले।अजामिल प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण कभी व्यर्थ नहीं जाता। वहीं भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह अवतार की कथा के माध्यम से बताया कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में अवतरित हो सकते हैं और अंततः सत्य व धर्म की ही विजय होती है।कथा के दौरान गौशाला परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा।आयोजन समिति के गोविंद बल्लभ ने बताया कि 21 जुलाई को कथा के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीराम जन्मोत्सव एवं भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी और विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन होगा।कार्यक्रम में गिरराज किशोर अग्रवाल, अजय अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, अनुपम अग्रवाल, आयुष्मान बंसल, कुशाग्र बंसल, पंकज खंडेलवाल, गोविंद बल्लभ, श्यामसुंदर शर्मा (बंटी भैया), पवन अग्रवाल, डॉ. रघुकुल दुबे, शिवशंकर, अनुप अग्रवाल, प्रशांत बग्गा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

July 17, 2026

सिर्फ शब्द पढ़ें नहीं, उन्हें आत्मसात भी करें: सतीश महाना

Lucknow News Posted on 17.07.2026 Time 09.38 PM, Friday, Gayatri Pariwar

केवल शब्दों को पढ़ने का नहीं, उन्हें आत्मसात करने का भी काम किया जाए : सतीश महाना

विधान सभा अध्यक्ष के सन्दर्भ पुस्तकालय में स्थापित हुआ 467वाँ युगऋषि वाङ्मय

लखनऊ, 17 जुलाई 2026, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना के सन्दर्भ पुस्तकालय में गायत्री ज्ञान मंदिर, इंदिरा नगर, लखनऊ के विचार क्रान्ति ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खण्डों के 467वें युगऋषि वाङ्मय की स्थापना की गई।

इस अवसर पर श्री महाना ने कहा कि “ऋषि का सद्साहित्य समाज के मार्गदर्शन के लिए है। ऐसे साहित्य से व्यक्ति को जीवन में सकारात्मक दिशा, संस्कार और सत्कर्म की प्रेरणा मिलती है। केवल शब्दों को पढ़ने का नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का भी प्रयास किया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ज्ञान और सद्विचारों पर आधारित साहित्य व्यक्ति के चरित्र निर्माण के साथ-साथ समाज को भी नई दिशा प्रदान करता है। युगऋषि वाङ्मय में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों का समावेश है, जो समाज के लिए प्रेरणादायी है।

युगऋषि वाङ्मय की स्थापना श्रीमती शशि गंगवार एवं देवेंद्र सिंह गंगवार द्वारा अपने बच्चों श्रीमती चारु सिंह, चि० स्वास्तिक सिंह एवं चि० विभव सिंह के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ जन्मदिन के अवसर पर समर्पित की गई। इस अवसर पर सन्दर्भ पुस्तकालय में युगऋषि वाङ्मय साहित्य के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को अखण्ड ज्योति पत्रिका भेंट की गई। कार्यक्रम में उपस्थित महानुभावों एवं विधान सभा कार्यालय के कर्मचारियों को भी अखण्ड ज्योति (हिन्दी) पत्रिका प्रदान की गई।
वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमाशंकर शर्मा ने कहा कि “ऋषि का सद्ज्ञान मनुष्य को सत्कर्म करने की शक्ति प्रदान करता है।” उन्होंने कहा कि युगऋषि वाङ्मय समाज को नैतिक मूल्यों, ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक चिंतन की दिशा प्रदान करने वाला अमूल्य साहित्य है।
इस अवसर पर विधान सभा के अधिकारीगण एवं कर्मचारी तथा गायत्री ज्ञान मंदिर के प्रतिनिधि उमाशंकर शर्मा, देवेंद्र सिंह गंगवार, श्रीमती शशि गंगवार, श्रीमती रुचि सिंह, श्रीमती सावित्री शर्मा, वी०के० श्रीवास्तव एवं प्रेम सिंह यादव सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

#GayatriParivar #ShriRamSharmaAcharya

July 3, 2026

श्रीराम जन्मभूमि प्रकरण: हिंदू समाज धैर्य और संयम बनाए रखे

RSS news Posted on 03.07.2026, Time 09.49 PM Friday, Dattatreya Hosbale

नई दिल्ली, 03 जुलाई 2025, श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना है।

अयोध्या में श्री रामलला मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और राम भक्तों की भावना एवं श्रद्धा को आघात पहुँचा है तथा इस घटना से हम सभी आहत हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के आग्रह पूर्वक निवेदन पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जाँच दल का गठन कर उसकी अनुशंसा पर क़ानूनी प्रक्रिया प्रारंभ की है। जाँच में जो भी दोषी पाए जाएँगे उन्हें कठोर दंड हो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित संपूर्ण हिंदू समाज की न्यास से स्वाभाविक ही अपेक्षा है कि इस घोर निंदनीय घटना को असाधारण मान कर गंभीरता से व्यवस्था एवं संचालन की सभी कमियों को दूर करने हेतु परिणामकारक कदम उठाए ताकि अयोध्या मंदिर पर करोड़ों रामभक्तों की आस्था व श्रद्धा अखंड एवं अटूट बनी रहे। वर्तमान भ्रम और असमंजस की स्थिति समाप्त होनी चाहिए। इस दृष्टि से हमारी अपेक्षा है कि सभी आवश्यक पहल मंदिर प्रबंधन और शासन द्वारा गठित विशेष जाँच दल करेंगे। हमारा यह विश्वास है कि समुचित वित्तीय प्रबंधन, सुचारू संचालन हेतु निर्दोष पारदर्शी व्यवस्थाओं एवं शुद्धता और पवित्रता से परिपूर्ण धार्मिकता से ओतप्रोत वातावरण के द्वारा श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास हिन्दू समाज की आस्था एवं विश्वास को सुदृढ़ बनाये रखेगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संपूर्ण हिन्दू समाज से भी आह्वान करता है कि इस कठिन क्षण में वह आवश्यक धैर्य और संयम का परिचय दें तथा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी शक्तियों के हिंदू धर्म एवं समाज को बदनाम करने के षड़यंत्रों को विफल करे।

June 23, 2026

प्रधानमंत्री मोदी ने योग के परिवर्तनकारी प्रभाव का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

PM Narendra Modi

Posted Date:- Jun 22, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की उल्लेखनीय सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनिया भर में लाखों लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद कर रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा किया।

“चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥”

यह सुभाषितम् बताता है कि योग मन को पूर्णतः शांत करने का साधन है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योग की दो प्रमुख विधियाँ बताई गई हैं: मन को शांत करना और श्वास के प्रवाह को नियमित करना।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म एक्‍स पर लिखा;

“अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बड़ी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनियाभर में करोड़ों लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥”

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बड़ी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनियाभर में करोड़ों लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा… pic.twitter.com/RotrHvHLLI

— Narendra Modi (@narendramodi) June 22, 2026

June 6, 2026

सनातन धर्म और वैदिक संस्कृति के समन्वय से ही विश्वगुरु बनेगा भारत : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

– अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के विकास के लिए रामभद्राचार्य ने दिए एक लाख रुपये
– सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति का सामंजस्य विषय पर विशिष्ट व्याख्यान
लखनऊ, 06 जून । पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति भारत की अक्षुण्ण धरोहर हैं, जिनमें मानव कल्याण, नैतिक मूल्यों और विश्वबंधुत्व की भावना निहित है। नई पीढ़ी को वैदिक परंपराओं और सनातन मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यही सांस्कृतिक सामंजस्य भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर करेगा। इस अवसर पर उन्हाेंने अखिल भारतीय संस्कृत परिषद के विकास के लिए एक लाख रुपये का योगदान देने की घोषणा की। वहीं लखनऊ उत्तर से विधायक नीरज बोरा ने पुस्तकालय एवं अन्य विकास कार्यों के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा की।
अखिल भारतीय संस्कृत परिषद लखनऊ के तत्वावधान में शनिवार को परिषद सभागार में सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति का सामंजस्य विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान एवं जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के अभिनंदन समारोह में देशभर के विद्वानों, शिक्षाविदों, संस्कृत प्रेमियों और शोधार्थियों ने सहभागिता की। ज्ञानपीठ, पद्मविभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत जगद्गुरु ने कहा कि प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति का संदेश भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव सभ्यता का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने भारतवर्ष और भक्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत के प्रति समर्पण ही सच्ची भक्ति और भारतीयता का आधार है। जगद्गुरु के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने भी अपने विचार रखे। राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा रचित भाष्यों की विशिष्टताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
परिषद के मंत्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने संस्था का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अशोक कुमार शतपथी ने किया। वैदिक मंगलाचरण एवं शांति पाठ कुलवंत और उनके साथियों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
समारोह में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, डॉ. रविकिशोर त्रिवेदी, डॉ. युग्गीलाल दीक्षित, डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, आईएएस डॉ. नीरज शुक्ल, डॉ. आशुतोष द्विवेदी, प्रो. हरिशंकर मिश्र, प्रो. रामसुमेर यादव, प्रो. अनिल प्रताप गिरि सहित अनेक विद्वान, शोधार्थी और संस्कृत प्रेमी उपस्थित थे।

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