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अखिलेश यादव भगवान राम के दर्शन करें और सवालों के जवाब भी दें: पंकज चौधरी

November 7, 2026

अखिलेश यादव भगवान राम के दर्शन करें और सवालों के जवाब भी दें: पंकज चौधरी

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लखनऊ 07नवंबर । भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे और सोनिया गांधी के बाबरी विध्वंस पर दिए गए बयान को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव को रामलला के दर्शन की याद आने लगी है। जो नेता अब तक राम मंदिर और सनातन धर्म को लेकर सवालों के घेरे में रहे, उन्हें अब अयोध्या जाकर दर्शन करने की जरूरत महसूस हो रही है। आखिर चुनाव से ठीक पहले ही रामलला की याद क्यों आई? क्या अब आस्था भी चुनावी रणनीति का हिस्सा बन गई है?

श्री पंकज चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव को निश्चित रूप से रामलला के दर्शन करने चाहिए, लेकिन सनातन धर्म और हिंदू आस्था को लेकर उनके पुराने बयानों और राजनीतिक रुख पर भी उन्हें जवाब देना चाहिए। केवल चुनाव के समय मंदिर जाना और बाकी समय सनातन पर सवाल उठाना, जनता के बीच स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी बाबरी विध्वंस की घटना को फिर से राजनीतिक चर्चा में ला रही हैं। बाबरी विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत का फैसला आ चुका है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है और रामलला विराजमान हैं। देश इस विवाद से आगे बढ़ चुका है, लेकिन कांग्रेस एक बार फिर पुराने मुद्दे को चर्चा में लाने की कोशिश कर रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ समाजवादी पार्टी चुनाव से पहले राम मंदिर के जरिए अपनी राजनीतिक छवि बदलने की कोशिश करती दिखाई दे रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस बाबरी विध्वंस की याद दिलाकर अपनी राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती है।

उन्होंने कहा कि देश की जनता सब देख रही है। उसे पुराने विवादों पर राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि विकास, सुशासन और जनकल्याण के लिए ठोस काम चाहिए।

दीपावली दीयों का त्यौहार

“दीपोत्सव के पर्व में ‘पटाखा’ ना.. बाबा.. ना..!

संतोष देव गिरि
‘दीपावली’ यानि दीपोत्सव का पर्व, प्रकाश उल्लास का पर्व, लेकिन कुछ वर्षों में इस पर्व के नाम पटाखों का जो समावेश हुआ है वह समूचे समाज के लिए घातक होता आया है. जिसका दायरा भी समाप्त होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है. आज यह करोड़ों के कारोबार का घातक रुप लेते हुए कितने ही लोगों के लिए जीवन भर न भूलने वाला दर्द भी दे चुका है, बावजूद इसके के इसका प्रकोप जारी है। हाल के दिनों में ही देश के विभिन्न हिस्सों में पटाखा कारखाने से लेकर अन्य स्थलों पर हुए विस्फोट ने एक बार फिर से इसकी उपयोगिता को लेकर बहस छेड़ दी है कि उल्लास के पर्व में भला इसकी क्या उपयोगिता?
“दीपावली दीयों का त्यौहार है। पटाखे जला कर हमें फायर ब्रिगेड विभाग का कार्य नहीं बढ़ाना है. पटाखे जला कर हमें अस्पतालों में भीड़ नहीं बढ़ानी है.” यह संदेश दिया है वाराणसी की सुविख्यात संस्था ‘सत्या फाउंडेशन’ ने. बिना किसी सरकारी या विदेशी अनुदान के, प्रदूषण के खिलाफ अभियान चलाने वाली राष्ट्रीय संस्था, ‘सत्या फाउंडेशन’ के संस्थापक सचिव, चेतन उपाध्याय ने बताते हैं कि, “डीजे और पटाखे के कारण खुशी का हर उत्सव, मातम और दुःख में बदलता जा रहा है. चेतन उपाध्याय के मुताबिक पिछले वर्ष 2025 में वाराणसी के दारानगर इलाके में तेज आवाज के पटाखे से हृदय गति रुक जाने के कारण, एडवोकेट प्रहलाद तिवारी की मृत्यु हो गई थी और इस तरह की तमाम घटनाएं पूरे देश में होती रहती हैं, जिसकी जानकारी कई बार, पुलिस और आम जनता तक नहीं पहुंच पाती. आगजनी की घटनाओं के मद्देनजर, पड़ोसी देश चीन ने अपने सभी बड़े शहरों में आतिशबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है. सिक्किम राज्य से प्रेरणा लेते हुए पूरे भारत देश में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर 365 दिन का पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. और जब तक ऐसा प्रतिबंध नहीं लगता है, पुलिस-प्रशासन को इतना तो करना ही चाहिए कि रात 10 बजे के बाद पटाखा जलाने वालों की धरपकड़ और मुकदमा करने के लिए सभी थाना क्षेत्रों में उड़ाका दलों को सक्रिय किया जाए, ताकि प्रदूषण की मात्रा को कम किया जा सके.
पूर्वांचल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, डॉ. अजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि पटाखों से निकलने वाला वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण हम सभी के लिए बहुत नुकसानदायक है. अतः केवल दीपावली नहीं बल्कि शादी-विवाह या किसी भी खुशी के उत्सव या त्योहार में पटाखों के प्रयोग से बचना चाहिए.
बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, एडवोकेट विनोद कुमार शुक्ला ने कहा कि एक बार बाजार में पटाखा आने के बाद उसे नियंत्रित करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है. अतः पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना ही समस्या का सही समाधान है. उन्होंने आगे कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को शांतिपूर्ण और स्वस्थ माहौल में रहने का अधिकार देता है. जानलेवा डीजे और जहरीले पटाखे का मुद्दा पार्टियों के चुनवी घोषणा पत्र में होना चाहिए और डीजे तथा पटाखा को बढ़ावा देने की बात करने वाले राजनेताओं का बहिष्कार होना चाहिए.
काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्रा ने कहते हैं कि ‘सत्या फाउंडेशन’ के इस अभियान में सभी को अपना योगदान करना पड़ेगा और त्याग की शुरुआत अपने घर से करनी होगी.
रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन के अध्यक्ष, श्रीदेव भट्टाचार्य ने कहा कि हम सभी को अपने स्व-विवेक का उपयोग करते हुए पटाखों से खुद को और अपने बच्चों को बचाने के लिए प्रयास करना पड़ेगा. बारुद और गंधक वाले पटाखों और बमों के इस्तेमाल का अधिकार केवल देश की मिलिट्री (सेना) तक ही सीमित रहना चाहिए. आगे कहा कि काशी के लोग बहुत बुद्धिमान हैं और पटाखे पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने की माँग को स्वीकार करना देश के नेताओं की नैतिक जिम्मेदारी है.
किसी समय बनारस के एसपी रह चुके, पूर्व आईपीएस जुगुल किशोर बुंदेला ने कहा कि ‘सत्या फाउंडेशन’ के इस नि:स्वार्थ अभियान का सभी वर्ग के लोगों को समर्थन करना चाहिए. पर्यावरण को ठीक करने का जिम्मा केवल एक संस्था का नहीं है बल्कि यह कार्य पूरे समाज का है और सभी लोग धर्म में आ रही इन विकृतियों से मर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ग्रीन पटाखे के पीछे का काला सच सभी को जानना चाहिए. विभिन्न शोधों में यह बात सामने आई है कि ग्रीन पटाखे के जलने पर बेहद छोटे आकार के अल्ट्रा फाइन पार्टिकल्स (अत्यंत बारीक कण) निकलते हैं. सामान्य कणों की तुलना में ये बारीक प्रदूषक, सांस के जरिए फेफड़ों की गहराई तक और खून में बहुत आसानी से प्रवेश कर जाते हैं.

*”त्यौहार के नाम पर विभीषिका न फैले फैले”*
श्री गोवर्धन मठ, पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी भी अपना मत प्रकट करते हुए दीपोत्सव के इस पर्व पर ज्ञान का दीप, सद्भाव का दीप जलाकर समाज को जागृत करने का संदेश देते हुए
कह चुके हैं, “दीपावली के नाम पर दीपमालिका और यह दीपमालिका तो वातावरण के शोधन के लिए है, शास्त्र सम्मत पर्व है. उसका लौकिक फल- वायुमण्डल का शोधन है, लेकिन आजकल जितना वायुमंडल का दोहन किया जा रहा है, दीपावली के नाम पर वायुमंडल को विकृत किया जा रहा है. एक शिष्टमंडल होना चाहिए जो परम्परा प्राप्त, शास्त्रीय विधा के अनुसार हर पर्व-त्यौहार को मनायें. ऐसा न हो कि पर्व त्यौहार के नाम पर विभीषिका फैले. दीपावली के नाम पर कई व्यक्ति और बच्चे अंधे हो जाते हैं, कई लंगड़े हो जाते हैं और अंत में वातावरण बहुत ही मलिन (गंदा) हो जाता है. तो शुचिता और शास्त्र सम्मत शुद्धता, पूजन में और पर्व त्यौहार में बनी रहे, इसका ध्यान रखना चाहिए.
जबकि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी, ज्योतिष पीठ आश्चर्य प्रकट करते हुए कहते हैं कि, “मुझे आश्चर्य होता है कि सुप्रीम कोर्ट को केवल दिल्ली का प्रदूषण दिखाई पड़ता है, जबकि पटाखों के कारण केवल दिल्ली ही नहीं पूरे देश की आबो-हवा पर प्रभाव पड़ता है. पटाखों के जानलेवा प्रदूषण से जनता को बचाने के लिए सरकार और सुप्रीम कोर्ट को साहसिक कदम उठाने होंगे.

*पटाखा किसी भी धर्म का हिस्सा नहीं हो सकता*

पहले के जमाने में पटाखा जलाने से दमा रोगियों और आम जन को कम दिक्कत होती थी क्योंकि पेड़ पौधे सारे ध्वनि और वायु प्रदूषण को सोख लेते थे. मगर जनसँख्या नियंत्रण कानून के अभाव में कंक्रीट के जंगल बढ़ते गए और पेड़ पौधे कटते गए और आज हालत यह हो गयी कि वाराणसी जैसे शहर में हरियाली का प्रतिशत 1% से भी कम है और घर घर में लोग भयंकर बीमारियों से जूझ रहे हैं. एक दिन के शौक के चलते पूरे 4 दिनों तक अस्थमा के मरीज छटपटाते रहते हैं और पटाखों के चलते हर साल सभी अस्पतालों के आईसीयू और वार्ड फुल हो जाते हैं. जिस पटाखे के चलते इतनी अधिक तकलीफ और साल दर साल इतनी अधिक मौतें होती हैं, वह पटाखा किसी भी धर्म का हिस्सा नहीं हो सकता. लिहाजा पटाखे को धर्म से जोड़ने की भूल न करें.
सत्या फाउंडेशन वाराणसी के संस्थापक सचिव चेतन उपाध्याय बताते हैं, “पटाखों के चलते नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और यहां तक कि पालतू पशु-पक्षी भी बुरी तरह से परेशान हो जाते हैं, ऐसे में वह समाज के सभी जनों से अपील करते हैं कि किसी भी निजी अथवा सार्वजनिक उत्सव में पटाखों का बिल्कुल प्रयोग न करें. साथ ही साथ अन्य लोगों को भी प्रेरित करने का आह्वान करते हैं, ताकि समाज से इस कुव्यवस्था को जड़ से और सभी के सुझबूझ से समाप्त किया जा सके.
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एटा में दिवाली का सामान खरीदकर लौट रहे युवक की बाइक को सिलेंडर भरे वाहन ने मारी टक्कर, एक की मौत

एटा 07 नवंबर उप्रससे। जनपद में दिवाली के त्योहार की खुशियां एक परिवार के लिए मातम में बदल गईं। जिस घर में त्योहार की तैयारियां चल रही थीं और खुशियों का माहौल था, वहां अचानक चीख-पुकार मच गई।

निधौली कलां क्षेत्र के गांव नगला खैराती के समीप शनिवार को दिवाली के लिए घर का जरूरी सामान और सब्जियां खरीदकर लौट रहे 20 वर्षीय युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई। जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां-बाप और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
गांव चंद्रभानपुर निवासी 20 वर्षीय मनीष कुमार पुत्र सोरन सिंह दिवाली के त्योहार को लेकर घर का सामान और सब्जियां खरीदने बाइक से गया था। खरीदारी करने के बाद वह खुशी-खुशी अपने घर लौट रहा था। तभी गांव नगला खैराती समीप रास्ते में गैस सिलेंडरों से भरे चार पहिया वाहन और उसकी बाइक की भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मनीष गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। हादसे की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग घटनास्थल पर पहुंचे। आनन-फानन में घायल मनीष को जिला मेडिकल कॉलेज एटा की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
जिस भाई को परिवार दिवाली की खुशियों के बीच घर लौटने का इंतजार कर रहा था, उसकी मौत की खबर ने सभी को तोड़कर रख दिया। त्योहार की तैयारियां अधूरी रह गईं और घर में खुशियों की जगह मातम छा गया। सूचना पर पहुंची निधौली कलां पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है।

आतिशबाजी के साथ 15 दिवसीय ऐतिहासिक दशहरा मेले का समापन, समाजसेवी और पत्रकार हुए सम्मानित

उ प्र समाचार सेवा

लखीमपुर खीरी। जनपद के ऐतिहासिक दशहरा मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुक्रवार की रात भव्य आतिशबाजी के साथ समापन हो गया। नगर पालिका परिषद लखीमपुर द्वारा आयोजित इस 15 दिवसीय मेले के समापन अवसर पर उत्कृष्ट योगदान देने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पुलिस विभाग और नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के सफल संचालन और विशिष्ट सहयोग के लिए जाने-माने समाजसेवी एवं साहित्यकार राम मोहन गुप्त ‘अमर’ को ‘विशिष्ट सम्मान’ से नवाजा गया। उन्होंने 15 दिनों तक चले इस आयोजन के उद्घाटन सत्रों सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का कुशलतापूर्वक संचालन किया था।समापन समारोह के दौरान रंगारंग और सुरक्षित आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी उमड़े। इसके बाद नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी संजय कुमार, मेलाध्यक्ष रवींद्र रावत ‘डब्बू’ और मेलाधिकारी समरा सईद सहित विभिन्न सभासदों ने मंच से सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी ने मेले को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस बल, जागरूक दुकानदारों, मीडिया कर्मियों और सम्मानित नगर वासियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

Ayodhya: रामपथ पर साकार हुई रामायण, ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमी अयोध्या

*सातों कांडों की झांकियों में जीवंत हुई प्रभु श्रीराम की गाथा, रामपथ पर उमड़ा आस्था का सैलाब*

*कंधों पर ढोल रखकर महिला कलाकारों ने दी थाप, नगाड़ों की गूंज और करतब ने बांधा समां*

*21 झांकियों में रामकथा के साथ योगी सरकार की विकास यात्रा का भव्य प्रदर्शन*

*पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह बोले, हर बार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ता है दीपोत्सव*

*अयोध्या, 7 नवंबर।* रामपथ पर रामायण साकार हो उठी। ढोल-नगाड़ों की गूंज, लोक कलाकारों की थिरकन और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच जब रथों पर सजी झांकियां आगे बढ़ीं तो लगा मानो त्रेतायुग अयोध्या की धरती पर उतर आया हो। कहीं प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के दिव्य स्वरूप, कहीं गदा उठाए बजरंगबली का पराक्रम। रामायण के प्रसंगों का सजीव मंचन श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रहा था। शोभायात्रा में महिला कलाकार कंधों पर ढोल रखकर थाप दे रही थीं। नगाड़ों और ताशों की गूंज के बीच कलाकारों के करतब और विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य रामपथ को उत्सव के विराट मंच में बदल रहे थे। दर्शकों की आंखों में श्रद्धा, चेहरों पर उल्लास और वातावरण में रामनाम की गूंज। दसवें दीपोत्सव की शोभायात्रा में आस्था, संस्कृति और परंपरा का ऐसा संगम दिखाई दिया, जिसने अयोध्या की भव्यता को एक नया आयाम दिया।

*पर्यटन मंत्री ने दिखाई हरी झंडी, तीन किलोमीटर का सफर तय कर पहुंची शोभायात्रा*
साकेत महाविद्यालय से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। करीब तीन किलोमीटर का सफर तय कर शोभायात्रा रामकथा पार्क पहुंची। इस बार शोभायात्रा में 21 भव्य झांकियां शामिल हैं। इनमें 14 झांकियां योगी सरकार की उपलब्धियों और सात झांकियां रामायण के सातों कांडों पर आधारित हैं। बालकांड में रामजन्म और बाल लीलाओं से लेकर अयोध्याकांड में वनगमन, अरण्यकांड में वनवास के प्रसंग, किष्किन्धाकांड में सुग्रीव और हनुमान से मिलन, सुंदरकांड में बजरंगबली का पराक्रम, लंकाकांड में रावण के साथ युद्ध और उत्तरकांड की कथा को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया। एक के बाद एक आगे बढ़ती झांकियां दर्शकों को रामायण की संपूर्ण गाथा का दर्शन करा रही थीं।

*सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को भी मिला झांकियों में स्थान*
जल जीवन मिशन, ओडीओपी, कृषि एवं पशुपालन, आयुष्मान कैशलेस योजना, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस, मिशन शक्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की झांकियों में प्रदेश की विकास यात्रा भी दिखाई दी। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों के लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने शोभायात्रा को सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम बना दिया।

*दीपोत्सव अब पूरे विश्व का पर्व बन चुका है : जयवीर सिंह*
शोभायात्रा की भव्यता देखकर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव अलौकिक, दिव्य और भव्य है। आज शाम होने वाला दीपोत्सव का कार्यक्रम भी अत्यंत भव्य होगा। सनातनियों के लिए इससे बड़ा गौरव का पर्व कोई हो ही नहीं सकता। हम हर वर्ष पिछले वर्ष का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हैं और इस बार भी नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। दीपोत्सव अब केवल उत्तर प्रदेश का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे विश्व का पर्व बन चुका है। सातों कांडों की झांकियां राम में अयोध्या, सनातन में अयोध्या और विरासत में अयोध्या का दर्शन करा रही हैं।

*श्रद्धालुओं ने सराहा रामायण के प्रसंगों का सजीव मंचन*
शोभायात्रा के साक्षी बने उन्नाव के सुशील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में अयोध्या का ऐसा दिव्य और भव्य स्वरूप देखने को मिल रहा है। दीपोत्सव और शोभायात्रा देखकर मन आनंदित हो गया। जौनपुर से आए राम कुमार ने रामायण की झांकियों और कलाकारों की प्रस्तुतियों को सराहा। बलरामपुर की सुशीला ने कहा कि रामकथा के सजीव मंचन और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया।

रामपथ पर विराजमान दर्शक और श्रद्धालु शोभायात्रा के हर दृश्य को अपलक निहारते रहे। प्रभु श्रीराम के स्वरूपों के दर्शन कर कई श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। किसी की आंखें श्रद्धा से नम थीं तो कोई हाथ जोड़कर रामनाम में लीन नजर आया। जय श्रीराम के उद्घोष, ढोल-नगाड़ों की गूंज और रामायण के जीवंत प्रसंगों के बीच पूरा रामपथ भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अयोध्या की धरती पर रामकथा केवल दिखाई नहीं दे रही, बल्कि जन-जन के हृदय में उतर रही हो।

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