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भारत की शक्ति उसके सांस्कृतिक स्वबोध में निहित : डॉ. मोहन भागवत

October 20, 2026

भारत की शक्ति उसके सांस्कृतिक स्वबोध में निहित : डॉ. मोहन भागवत

विजयादशमी उद्बोधन में सरसंघचालक ने पंच परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता पर दिया विशेष बल

( हेमेन्द्र क्षीरसागर पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार )

नागपुर में 20 अक्टूबर 2026,  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी उत्सव पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन भारतीय समाज के आत्मबोध, सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित रहा। संघ की शताब्दी के कार्यक्रमों के समापन अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सशक्त, आत्मनिर्भर और विश्वकल्याण के लिए प्रतिबद्ध भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और चारित्रिक उत्थान से संभव है।

हम भारत के लोग

सरसंघचालक के उद्बोधन का मूल स्वर अपनी सभ्यतागत पहचान को समझने और उसे समकालीन जीवन में उतारने का रहा। भारत की विविधता को कमजोरी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संपन्नता मानते हुए उन्होंने उस एकात्म भाव को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। जो विभिन्न मत-पंथों, भाषाओं, जातियों और प्रादेशिक पहचानों के बावजूद नागरिकों को एक सूत्र में बांधता है। संविधान की भावना के अनुरूप ‘हम भारत के लोग’ का बोध तभी सार्थक होगा। जब समान राष्ट्रीय हित, पारस्परिक सम्मान और कर्तव्यनिष्ठा हमारे व्यवहार में दिखाई दें।

प्रतिबद्धता का संदेश

संत रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष का संदर्भ इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उनका जीवन श्रम की प्रतिष्ठा, भक्ति, स्वधर्मनिष्ठा और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देता है। स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जैसे महापुरुषों का स्मरण भी त्याग, सेवा और सांस्कृतिक चेतना के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देता है।

दैनिक आचरण का हिस्सा

संघ के शताब्दी वर्ष में रेखांकित पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध एवं स्वदेशी तथा नागरिक अनुशासन को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सामाजिक जीवन की दिशा बदलने वाला व्यापक अभियान बताया। इनका वास्तविक महत्व तभी है, जब वे नारों और आयोजनों तक सीमित न रहकर दैनिक आचरण का हिस्सा बनें। परिवार में संस्कार, समाज में समानता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता। स्वदेशी के प्रति आग्रह और नागरिक कर्तव्यों का पालन राष्ट्रनिर्माण की आधारशिलाएं हैं।

विकास का प्रतिमान

विज्ञान, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रगति को स्वीकार करते हुए उद्बोधन में सरसंघचालक ने उनके विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। तकनीक अपने आप में समाधान नहीं, उसका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य और नैतिक दृष्टि से किया जाता है। डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध सामग्री, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और नई पीढ़ी के सामने उपस्थित चुनौतियों के संदर्भ में परिवार, समाज और शासन की साझा जिम्मेदारी रेखांकित की। विकास का प्रतिमान ऐसा होना चाहिए, जिसमें आर्थिक समृद्धि के साथ पर्यावरणीय संतुलन, मानवीय गरिमा और सामाजिक उत्तरदायित्व भी सुरक्षित रहें।

सद्भाव, संवाद और नागरिक मर्यादा

डॉ. मोहन भागवत के उद्बोधन का महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक तनावों और आंदोलनों के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण रहा। समस्याओं के समाधान के लिए संवाद, जनसहभागिता और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन आवश्यक है। मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, किंतु उन्हें मनभेद, द्वेष और सामाजिक विभाजन में बदलने से रोकना सभी की जिम्मेदारी है। शासन-प्रशासन, राजनीतिक नेतृत्व और समाज के प्रत्येक वर्ग से अपेक्षा है कि व्यवहार में संवेदनशीलता, शालीनता और नागरिक सम्मान बना रहे। ग्रामीण विद्यालयों और ग्राम विकास में जनसहभागिता के उदाहरण बताते हैं कि सामाजिक समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों या आंदोलनों पर निर्भर नहीं रह सकता। समाज की सक्रिय भागीदारी, सहयोग और स्वावलंबन स्थायी परिवर्तन की राह खोलते हैं।

एकता ही राष्ट्रशक्ति

वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश सामने आया। इतिहास से सीखना आवश्यक है, लेकिन अतीत की कटुता को वर्तमान के सामाजिक संबंधों पर हावी होने देना उचित नहीं। भारत की शक्ति उसकी विविधताओं के बीच आत्मीयता, साझा विरासत और परस्पर सम्मान बनाए रखने में निहित है।

विश्वकल्याण में योगदान

समग्रतः सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का विजयादशमी का यह उद्बोधन राष्ट्रनिर्माण को शासन की जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक संकल्प के रूप में देखने की प्रेरणा देता है। भारत को समर्थ और विश्वकल्याण में योगदान देने वाला राष्ट्र बनाने के लिए सांस्कृतिक आत्मबोध के साथ वैज्ञानिक दृष्टि, सामाजिक समरसता, नागरिक अनुशासन और मानवीय संवेदना का समन्वय आवश्यक है। वास्तविक विजय तभी होगी, जब राष्ट्रीय एकता केवल विचार न रहकर प्रत्येक नागरिक के आचरण में प्रतिबिंबित हो।

August 18, 2026

भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित

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Posted on 17.08.2026, Delhi BJP List

नई दिल्ली 17 अगस्त 2026, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सिंहा ने आज अपनी कार्यकारिणी घोषित कर दी।

अध्यक्ष

नितिन नहीं सिन्हा, बिहार

उपाध्यक्ष

वसुंधरा राजे, राजस्थान, तीरथ सिंह रावत, उत्तराखंड, राम माधव , दिल्ली, प्रो तारिक मंसूर, उत्तर प्रदेश, रेखा वर्मा, उत्तर प्रदेश, वैजयंत जय पांडा, उड़ीसा, डी पुरंदेश्वरी, आंध्र प्रदेश, वर्ष बेन नरेंद्र भाई दोषी, गुजरात, डा भारती प्रवीण पावर, महाराष्ट्र, सरदार मनजीत सिंह बदल , पंजाब, लालसिंह आर्य मध्यप्रदेश, प्रो एम नागराज, कर्नाटक, डा मधु चंद्र कर , पश्चिम बंगाल

महामंत्री संगठन

बी एल संतोष, दिल्ली

सह महामंत्री संगठन

शिवप्रकाश, महाराष्ट्र, सौदान सिंह, चंडीगढ़

राष्ट्रीय महा

विनोद तबसे, महाराष्ट्र, सुनील बंसल, दिल्ली, विप्लव कुमार देव, त्रिपुरा, स्मृति ईरानी, उत्तर प्रदेश, डा सतीश पुनिया, राजस्थान, गजेंद्र पटेल मध्य प्रदेश, हरीश द्विवेदी , उत्तर प्रदेश, संजय भाटिया, हरियाणा।

राष्ट्रीय मंत्री

कविता पाटीदार, मध्य प्रदेश, के सुरेंद्रन, केरलम, डा भोला सिंह, उत्तर प्रदेश, डा प्रदीप वर्मा, झारखंड, जगदीश ईश्वर भाई पटेल, गुजरात, डा संदीप पाठक, दिल्ली, फेंगनून कोन्याक, नागालैंड, संगीता यादव, उत्तर प्रदेश, अनिल एंटोनी केरलम, डा एम वेंकटेश्वरन, तमिलनाडु, सिद्धार्थ शंभू, बिहार, डा स्वदेश सिंह दिल्ली, मृगांका देव बर्मन, असम, रोहन गुप्ता, गुजरात, जयप्रकाश, दिल्ली।

राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष

पीयूष गोयल, महाराष्ट्र

सह कोषाध्यक्ष

राजेश मंगल, राजस्थान

राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी

तरुण चुग, पंजाब

केंद्रीय कार्यालय सचिव

महेंद्रनाथ पांडे, उत्तराखंड

पूर्वोत्तर राज्य संयोजक

डा संबित पात्रा, उड़ीसा

सह संयोजक पूर्वोत्तर

राजीव बब्बर, दिल्ली

समस्त सेल प्रभारी

विष्णु दत्त शर्मा, मध्य प्रदेश

सह संयोजक

ऋतुराज सिन्हा, बिहार, विष्णु वर्धन रेड्डी, आंध्र प्रदेश

मोर्चा प्रभारी

युवा मोर्चा, डॉ हेमांग जोशी, गुजरात

महिला मोर्चा, रूप कुमारी चौधरी, छत्तीसगढ़

ओबीसी मोर्चा, अमरपाल मौर्य, उत्तर प्रदेश

किसान मोर्चा, बंशीलाल गुर्जर, मध्य प्रदेश

अनुसूचित जाति मोर्चा, शिवेश कुमार राम, बिहार

अनुसूचित जन जाति मोर्चा, मन्ना लाल रावत, राजस्थान,

अल्पसंख्यक मोर्चा, कुंवर बासित अली, उत्तर प्रदेश।

मीडिया प्रभारी

अनिल बलूनी, उत्तराखंड

सह प्रभारी

आशीष ऊषा अग्रवाल, मध्य प्रदेश, प्रदीप भंडारी, दिल्ली, सिद्धार्थ यादव, दिल्ली।

सोशल मीडिया प्रभारी

दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़,

सह प्रभारी

प्रीति गांधी, महाराष्ट्र, शिवानंद द्विवेदी, दिल्ली, आलोक भट्ट उत्तराखंड,अरुण यादव, हरियाणा

 

 

 

 

बीजेपी केंद्रीय टीम में यूपी के 8 नेताओं को जगह

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Posted on 17.08.2026, Delhi News, BJP

नई दिल्ली 17 अगस्त 2026 (UP Samachar Sewa), भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सिंहा ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। इसमें रेखा वर्मा और स्मृति ईरानी समेत 8 नेताओं को जगह मिली है। यूपी के बस्ती से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है ।

Rekha Verma Vice President BJP

रेखा वर्मा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा

प्रो डा तारिक मंसूर भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

नितिन नवीन की टीम में उत्तर प्रदेश के धौरहरा से पूर्व सांसद रेखा वर्मा को एक बार फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। दूसरे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति , विधानपरिषद सदस्य डा तारिक मंसूर को को बनाया गया है। पूर्व मंत्री और अमेठी से पूर्व सांसद स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।

Harish Duivedi BJP Ex MP

Smriti Irani Ex MP BJP

बुलंदशहर के सांसद भोला सिंह और संगीता यादव को मंत्री बनाया गया है। वहीं पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अमरपाल मौर्य को नियुक्त किया गया है। अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर कुंवर बासित अली को नियुक्त किया गया है।

संगीता यादव राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय जनता पार्टी

Sangeeta Yadav BJP National Secretary

Bhola Singh MP Bulandshahr

भोला सिंह संसद भाजपा बुलंदशहर

पार्टी ने पिछली कार्यकारिणी के प्रमुख नेताओं डा दिनेश शर्मा, लक्ष्मी कांत वाजपेई, डा राधामोहन दास अग्रवाल , राजेश अग्रवाल को इस बार जगह नहीं दी है।

अमरपाल मौर्य, बीजेपी

Kumwar Basit Ali BJP Minority Morcha

August 15, 2026

मोदी जी का संबोधन हर क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र बनने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा: अमित शाह

Amit Shah

नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी का भाषण विकसित भारत के लिए हर क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा स्वतंत्रता आंदोलन का प्रखर जयघोष रहे ‘वंदे मातरम’ का आजादी के 80 वर्ष बाद आज पहली बार लाल किले की प्राचीर से गान हुआ। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर रोम-रोम पुलकित हो उठा

मोदी जी ने अपने संबोधन में ‘नशामुक्त भारत’, ‘सुरक्षित भारत’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ विकसित भारत बनाने का व्यापक रोडमैप दिया

प्रधानमंत्री जी ने देश को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने और सभी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘सप्तधारा’ की सात शक्तियों का मंत्र दियa

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज कहा कि 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वदेशी, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के संकल्प से भरा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संबोधन हर क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र बनने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में कहा, “80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ‘नशामुक्त भारत’, ‘सुरक्षित भारत’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ विकसित भारत बनाने का व्यापक रोडमैप दिया। प्रधानमंत्री जी ने बीते 12 वर्षों में सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, एनर्जी व रेलवे-परिवहन में हुई अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख करते हुए देश को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने और सभी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘सप्तधारा’ की सात शक्तियों का मंत्र दिया। मोदी जी ने युवा शक्ति के सामर्थ्य को दिशा देने के लिए एक वर्ष में एक करोड़ से अधिक युवाओं को AI स्किलिंग देने, फ्री ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क बनाने और 2036 ओलंपिक के लिए टैलेंट हंट अभियान की घोषणाएँ कीं। साथ ही, 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर और 8 नई सेमीकंडक्टर यूनिट्स जैसे बड़े लक्ष्य रखे। स्वदेशी, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के संकल्प से भरा मोदी जी का यह संबोधन हर क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र बनने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।”

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ‘नशामुक्त भारत’, ‘सुरक्षित भारत’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ विकसित भारत बनाने का व्यापक रोडमैप दिया। प्रधानमंत्री जी ने बीते 12 वर्षों में सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, एनर्जी व…

— Amit Shah (@AmitShah) August 15, 2026

श्री अमित शाह ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “वंदे मातरम्, जो स्वतंत्रता आंदोलन का प्रखर जयघोष रहा, उसका आजादी के 80 वर्ष बाद आज पहली बार लाल किले की प्राचीर से गान हुआ। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर न सिर्फ रोंगटे खड़े हो गए, बल्कि रोम-रोम पुलकित हो उठा।”

‘वंदे मातरम्’, जो स्वतंत्रता आंदोलन का प्रखर जयघोष रहा, उसका आजादी के 80 वर्ष बाद आज पहली बार लाल किले की प्राचीर से गान हुआ।

इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर न सिर्फ रोंगटे खड़े हो गए, बल्कि रोम-रोम पुलकित हो उठा। pic.twitter.com/snWJ9tgEvz

— Amit Shah (@AmitShah) August 15, 2026

विकसित भारत का सपना पूरा करने को विकास की सप्त धारा का आह्वान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में विकसित भारत की दिशा में भारत की अगली ऊंची छलांग का आह्वान किया

Posted Date:- Aug 15, 2026

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में 2047 तक विकसित भारत की दिशा में भारत की यात्रा में तेजी लाने के उद्देश्य से कई आह्वान किए। प्रधानमंत्री ने देश की कार्य संस्कृति, सोच और व्यापक महत्वाकांक्षा में बदलाव का आह्वान करते हुए, नागरिकों, सरकारों, उद्योग, किसानों, युवाओं और समाज के अन्य वर्गों द्वारा सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री के संबोधन के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं:

1. आगामी सुधार: प्रधानमंत्री ने सुधारों की गति में तेजी लाने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत के लिए सुधार न तो कोई मजबूरी है और न ही एक प्रचलित शब्द है, बल्कि दृढ़ विश्वास का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार, समाज, उद्योग, उत्पादक और किसान सभी को पारंपरिक प्रणालियों, सोच और लक्ष्यों में सुधार करना होगा। प्रधानमंत्री ने केंद्र, राज्यों और उद्योग जगत से 2047 की आकांक्षाओं के अनुसार प्रणालियों, नीतियों और नियमों को आकार देते हुए एक साथ आगे बढ़ने और सुधारों को लगातार आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

2. विकसित भारत के लिए ‘सप्त धारा’: प्रधानमंत्री ने लाल किले से भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और आने वाले पांच-सात वर्षों में देश को नई गति देने के लिए शक्ति की सात धाराओं, “सप्त धारा” का आह्वान किया। ये सात धाराएं हैं :

  • विनिर्माण शक्ति: भारत को घटकों और डिजाइन से लेकर संपूर्ण उत्पादों के निर्माण तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित करनी चाहिए और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय केंद्र बनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने लागत, गुणवत्ता और व्यापकता, प्रतिस्पर्धी कारखानों, उपयोगकर्ता के अनुकूल उत्पादों, आकर्षक पैकेजिंग और शून्य-दोष सटीक विनिर्माण पर जोर दिया। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “गुणवत्ता, गुणवत्ता, गुणवत्ता” भारतीय विनिर्माण का मंत्र होना चाहिए।
  • कृषि और खाद्य उत्पादन: प्रधानमंत्री ने खेत से निर्यात बाजार की ओर बढ़ने और भारत के पारंपरिक खाद्य पदार्थों, श्रीअन्न, मसालों, फलों और फूलों को वैश्विक ब्रांडों में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने रसायन मुक्त खेती और वैश्विक मानकों को पूरा करने वाले कृषि उत्पादों पर भी जोर दिया।
  • प्रौद्योगिकी और नवाचार: एआई, क्वांटम, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा केंद्रों सहित उभरते क्षेत्रों के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल दुनिया के लिए एक बाजार ही नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक नवाचार केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेड-इन-इंडिया 6जी को हर कोने तक पहुंचाना देश का लक्ष्य होना चाहिए।
  • गति शक्ति: प्रधानमंत्री ने शहरों, आधुनिक राजमार्गों, अंतर्देशीय जलमार्गों, हवाई अड्डों और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स को जोड़ने वाली हाई-स्पीड रेल के माध्यम से निर्बाध और तेज कनेक्टिविटी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बंदरगाहों को माल की लोडिंग और अनलोडिंग से आगे बढ़ना चाहिए और बंदरगाह-आधारित विकास और वृद्धि का इंजन बनना चाहिए।
  • रक्षा शक्ति: प्रधानमंत्री ने रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकियों को विकसित करके वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित करने और हाइपरसोनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने साइबर सुरक्षा को एक ऐसा क्षेत्र बताया, जहां भारतीय युवाओं की क्षमताओं का उपयोग भारत और दुनिया के लिए किया जा सकता है।
  • हरित अर्थव्यवस्था और नीली अर्थव्यवस्था: प्रधानमंत्री ने हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित गतिशीलता और हरित विनिर्माण में वैश्विक स्तर हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन, महासागर प्रौद्योगिकी और नीली अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भारत की तटरेखा द्वारा पेश किए गए अवसरों पर भी प्रकाश डाला।
  • भारत की सॉफ्ट पावर: प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य सेवा और भारत में रोगमुक्त होने में भारत की ताकत को दुनिया के सामने ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने हस्तशिल्प, संस्कृति, फिल्मों, वीएफएक्स, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट पर भी प्रकाश डाला, जहां भारत विश्व स्तर पर अपनी ताकत स्थापित कर सकता है। उन्होंने विदेशी पर्यटकों, वैश्विक खेल आयोजनों और संगीत कार्यक्रमों को भारत में आकर्षित करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करने का आह्वान किया।

3. भारत की महत्वाकांक्षाओं को व्यापक बनाएं: देश को बड़ा सोचने का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने पूछा कि आने वाले दशक में फॉर्च्यून 500 में भारत की 50 कंपनियां क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भारतीय बैंक को दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में शामिल होना चाहिए और एक या दो भारतीय दवा कंपनियों को दुनिया की पांच सबसे बड़ी फार्मा कंपनियों में जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने भारतीय कानून फर्मों, रेटिंग एजेंसियों, परामर्श फर्मों और लेखा फर्मों को दुनिया की अग्रणी फर्मों में उभरने का आह्वान किया, भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने और भारतीय ब्रांडों को दुनिया को आकर्षित करने वाले देश की पहचान बनने का भी आह्वान किया।

4. भारतीय गुणवत्ता को वैश्विक पहचान बनाएं: प्रधानमंत्री ने निर्माताओं, उद्यमियों और एमएसएमई से वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता की पहचान बनाने की जोरदार अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को लागत, गुणवत्ता और पैमाने में वैश्विक मानकों को पूरा करना चाहिए और ऐसे उत्पादों की पेशकश करनी चाहिए जो विश्व बाजारों में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने एमएसएमई से भारत के व्यापार समझौतों से पैदा हुए अवसरों का लाभ उठाने और गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर वैश्विक मानकों को पूरा करते हुए भारतीय उत्पादों को विश्व बाजारों में ले जाने का आग्रह किया।

5. कार्य संस्कृति में बदलाव लाएं और भारत के व्यापक लक्ष्यों का मिलान करें: प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सदी की अगली तिमाही भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और देश न तो रुक सकता है और न ही अपनी गति को धीमा होने दे सकता है। उन्होंने देश की कार्य संस्कृति, सोच और काम की गति को बदलने का आह्वान करते हुए कहा कि जो कार्य पिछले पांच-सात दशकों में पूरे नहीं हुए थे, उन्हें आने वाले पांच-सात वर्षों में पूरा करना होगा।

6. नशा मुक्त भारत- हर परिवार को जुड़ना चाहिए: नशीली दवाओं के दुरुपयोग को भारत के युवाओं के सामने एक बड़ी चुनौती बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा मुक्त भारत को एक सामूहिक जिम्मेदारी बनना चाहिए। माई भारत स्वयंसेवकों, गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों और आध्यात्मिक गुरूओं को शामिल करके 100 सप्ताह के नशा मुक्त भारत अभियान की चर्चा करते हुए, उन्होंने प्रत्येक परिवार से अभियान से जुड़ने और नशा मुक्त भारत के सपने को साकार करने में योगदान देने का आह्वान किया।

7. महिला आरक्षण : प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से एक साथ आने की सीधी अपील की। नारी शक्ति वंदन अधिनियम की चर्चा करते हुए, उन्होंने राजनीतिक दलों से जल्द से जल्द यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले और वे भारत की नीतियों को आकार देने में योगदान देने में सक्षम हों।

8. जनगणना में युवाओं द्वारा भागीदारी का नेतृत्व : नीतियों, योजनाओं और देश के लिए भविष्य की योजना को लेकर सटीक जानकारी की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपने परिवारों को मौजूदा जनगणना में सटीक रूप से भाग लेने में मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार के साथ बैठने, फॉर्म को समझने, सही विवरण दर्ज करने और जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।

9. स्वयं से ऊपर राष्ट्र; कर्तव्य ही पहचान : पंच प्रण को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से गुलामी की मानसिकता को खत्म करना जारी रखने का आह्वान किया और इस संकल्प को दोहराया कि राष्ट्र का हित स्वयं से ऊपर होना चाहिए और कर्तव्य हमारी पहचान बनना चाहिए।

10. सपनों को संकल्प में और संकल्प को सफलता में बदलें: विकसित भारत की दिशा में सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास के आह्वान के साथ समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि समय, अवसर और संकल्प भारत का है। उन्होंने नागरिकों से सपनों को संकल्प में, संकल्प को शक्ति में और शक्ति को सफलता में बदलने, हर कदम को विकास की दिशा में एक कदम बनाने, एक साथ आगे बढ़ने और सामूहिक रूप से एक विकसित भारत का निर्माण करने का आह्वान किया

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