Web News

www.upwebnews.com

बोलने से पहले सोचना चाहिए, और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए’ – यह संस्कार केवल पुस्तकालय ही दे सकता है: अमित शाह

July 12, 2026

बोलने से पहले सोचना चाहिए, और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए’ – यह संस्कार केवल पुस्तकालय ही दे सकता है: अमित शाह

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय का लोकार्पण किया

किसी देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में जुटने वाली युवाओं की भीड़ से तय होता है

राष्ट्र निर्माण और उसे वैभव दिलाने वाली हर गतिविधि का मूल है ज्ञान और विवेक, और यह केवल पुस्तकालय ही दे सकता है

गृह मंत्री जी ने युवाओं से आह्वान किया कि – एक बार पुस्तकालय से जुड़िए, पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे-बुरे का विवेक स्वयं जाग जाएगा

गांधीनगर के प्रत्येक गाँव में पुस्तकालय खोल उन्हें बड़े पुस्तकालय से लिंक किया गया, अब गाँव का बच्चा पुस्तकालय में जिस पुस्तक का नाम लिखता है, वह पुस्तक उसी गाँव में उसे उपलब्ध हो जाती है

Posted Date:- Jul 11, 2026 पीआईबी

नई दिल्ली 11 जुलाई 2026, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के अध्यक्ष केशव चंद्र सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में जुटने वाली युवाओं की भीड़ से तय होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को आगे बढ़ाने वाली, राष्ट्र-निर्माण और राष्ट्र को वैभव दिलाने वाली सारी गतिविधियों का मूल ज्ञान एवं विवेक में होता है। यह ज्ञान सिर्फ एक पुस्तकालय ही दे सकता है।

श्री शाह ने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे एक बार पुस्तकालय से अवश्य जुड़ें। पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे-बुरे का विवेक स्वयं जाग जाएगा। गृह मंत्री ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस छोटे से कस्बे में वह पैदा हुए और उनका बचपन बीता, वहाँ एक समृद्ध पुस्तकालय था। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय के माध्यम से कब उनकी अध्ययन यात्रा वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गई, उन्हें पता नहीं चला।

 

 

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज सभागार में उन्होंने एक वाक्य लिखा देखा कि “बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि शब्द कभी वापस नहीं आते।” उन्होंने कहा कि कोई भी वाक्य बोलने से पहले सोचना चाहिए और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए कि क्या सोचना है, और यह संस्कार सिर्फ पुस्तकालय से ही मिल सकता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय का उनके जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र में उन्होंने एक छोटा सा प्रयोग किया है। उनके संसदीय क्षेत्र के लगभग हर गाँव में एक पुस्तकालय खोला गया है, जिनमें लगभग 3-4 हजार पुस्तकें हैं। इन पुस्तकालयों को मुख्य पुस्तकालय से लिंक किया गया है, जिसमें सवा लाख पुस्तकें हैं। इसके अलावा, चार मोबाइल वैन भी चलाई गई हैं। उन्होंने कहा कि गांवों के बच्चे पुस्तकालय में अपनी पसंद की पुस्तक का नाम लिख कर उसे मँगवाने का अनुरोध करते हैं, और हर शुक्रवार के दिन बच्चों को उनकी पसंद की पुस्तक गांव में ही उपलब्ध कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि हमने हर पुस्तकालय को स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया है।

गृह मंत्री ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम से समर्पित यह पुस्तकालय युवाओं के ज्ञान और चिंतन का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि वह दिल्ली के सभी पुस्तकालयों को आपस में लिंक करें और स्कूलों को इनसे जोड़ने के लिए एक ठोस योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि एक कार्ययोजना बनाकर पुस्तक प्रेमियों को पुस्तकालयों से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय के कर्मियों से भी आग्रह किया कि वे नई दिल्ली के आसपास के 10 विधानसभा क्षेत्रों के सभी स्कूलों से संपर्क कर युवाओं को पुस्तकालय से जोड़ें और उन्हें यहाँ आने के लिए प्रेरित करें। एक बार जब युवा पढ़ने की आदत बना लेंगे, तो वह स्वयं आगे बढ़ेंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान सागर में गोता लगाने का साहस देता है और सागर के नीचे पड़े मोतियों व रत्नों को चुनकर ऊपर लाने की प्रेरणा भी देता है। ज्ञान सागर के गोते से निकले ये मोती और रत्न ही व्यक्तित्व को निखारते हैं, देश को आगे बढ़ाते हैं, देश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाते हैं, देश को संस्कारित, शिक्षित और सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी को पढ़े बिना इस देश की आत्मा, संस्कृति, स्वाभिमान और संघर्ष को नहीं जाना जा सकता, और पुस्तकालय इसमें सबसे मज़बूत ज़रिया बन सकता है।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय भवन में 30,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। यहां रिसर्च करने वालों के लिए अलग व्यवस्था है, बहुउद्देशीय आधुनिक सभागार है, आधुनिक रीडिंग एरिया है, किड्स जोन है, रिसर्च सेंटर है और ई-लाइब्रेरी है, जिसमें 1 करोड़ पुस्तकें ऑनलाइन पढ़ी जा सकती हैं। वाई-फाई फ्री है। कई मॉनिटर लगाए गए हैं, जहां पुस्तकालय में अध्ययन के लिए आने वाले लोग नोट्स ले सकते हैं, डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी विचार प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ आरएफआईडी आधारित अत्याधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली लागू है। ओपेक कैटलॉग के माध्यम से नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया से भी जुड़ाव होगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में युवा अपनी रुचि के विषय चुनें और उन महानुभावों को पढ़ें, जिन्होंने अपना पूरा जीवन उन विषयों पर लगाया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तकालय में 1 करोड़ ई-बुक्स उपलब्ध हैं। यह दिल्ली के युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है कि उन्हें मुफ़्त में 1 करोड़ ई-बुक्स और 32,000 भौतिक पुस्तकों का एक्सेस होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण (जेपी) एक ऐसे विचारक और क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जीवन में अनेक विचारधाराओं को अपनाया और हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास किया। वे भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख सेनानी थे। आजादी के बाद उन्होंने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया। समाजवाद अपनाया, समाजवादी कांग्रेस बनाई, विनोबा भावे के भूदान आंदोलन और सर्वोदय विचारधारा को गांव-गांव तक फैलाया। चंबल क्षेत्र में 250 से अधिक डाकुओं को सरेंडर कराया और चार राज्यों के 22 जिलों में डकैती की समस्या समाप्त की। श्री शाह ने कहा कि इमरजेंसी के समय जेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री का डटकर विरोध किया, बिहार-गुजरात में छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया और ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान दिया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जेपी, अटल जी, अडवाणी जी सहित हजारों नेताओं को जेल में डाला गया। तब दिनकर जी का नारा “अंधेरे में एक प्रकाश, जयप्रकाश” पूरे देश में गूंजा। 1977 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री रायबरेली से हारीं और पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। उन्होंने कहा कि जेपी ने पूरी जिंदगी लोकतंत्र की रक्षा की।

गृह मंत्री ने दिल्ली के सभी किशोरों और युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान की पिपासा तृप्त करने के माध्यम के रूप में शुरू किए गए जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे पुस्तकालय का लाभ उठाकर अपने जीवन को निखारें और देश को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।

 

RSS प्रांत प्रचारक बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर चिंता व्यक्त की गई

Posted on 12.07.2026 Time 08.19 PM Sunday, RSS, Rashtriya Swayamsevak Sangh, Belgavi, Karnataka

बेलगावी (कर्नाटक), 12 जुलाई 2026,  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय प्रान्त प्रचारक बैठक आज कर्नाटक के बेलगावी में संपन्न हो गई। इस बैठक में पू. सरसंघचालक डा. मोहन भागवत जी, मा. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी सहित 226 कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बैठक में मार्च 2026 के बाद संघ के विभिन्न स्तरों पर संपन्न हुए प्रशिक्षण वर्गों की समीक्षा की गई। इस वर्ष देशभर में कुल 83 संघ शिक्षा वर्ग और 12 कार्यकर्ता विकास वर्ग संपन्न हुए जिसमें कुल 18842 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसमें शाखा संचालन, संघ कार्यपद्धति, ग्राम विकास, कुटुम्ब प्रबोधन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण जैसे विषय सम्मिलित थे।

शाखाओं के स्तर पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन की दृष्टि से विस्तार से चर्चा की गई और सितम्बर मास में अधिकतम शाखा विस्तार योजना पर भी चर्चा की गई। साथ में शताब्दी वर्ष के संपन्न हुए कार्यक्रमों की समीक्षा तथा निर्धारित शेष कार्यक्रमों की योजना पर भी विचार किया गया। शताब्दी वर्ष के विभिन्न कार्यक्रमों में सम्पर्क में आए लोगों को सामाजिक कार्यों और पंच परिवर्तन के विषयों में सक्रिय करने की योजना पर विचार हुआ। पूजनीय सरसंघचालक जी की वर्ष 2026-27 की प्रवास योजना पर भी चर्चा की गई।

बैठक में वर्तमान परिदृश्य के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई जिसमें मुख्य रूप से जनगणना के संदर्भ में जानकारी और जनसांख्यिकी असंतुलन से उत्पन्न चुनौतियाँ आदि विषय शामिल रहे। ड्रग्स के बढ़ते दुष्प्रभाव पर चिंता के साथ ही नशा मुक्ति के लिए प्राथमिकता से प्रयासों की आवश्यकता तथा सन्त शिरोमणि रविदास महाराज जी के 650 वें जन्म जयंती वर्ष के कार्यक्रमों की योजना पर भी चर्चा हुई।

बैठक में सभी ने श्री रामजन्मभूमि मंदिर में दानपेटी चढ़ावे की गिनती में हुई अनियमितता की घटना पर दु:ख व्यक्त किया तथा तीर्थक्षेत्र न्यास के निवेदन पर चल रही एसआईटी एवं पुलिस कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुँचेगी यह विश्वास व्यक्त किया। तीर्थक्षेत्र न्यास से यह अपेक्षा की गई कि वह यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो जिससे समस्त राम भक्तों की राम मंदिर के प्रति श्रद्धा और गहरी आस्था पर आघात हो।

July 9, 2026

प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया

Posted Date:- Jul 09, 2026, PM Narendra Modi, Australia, Melbourne

मेलबॉर्न (ऑस्ट्रेलिया) 09 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माननीय श्री एंथनी अल्बनीज ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया। इन दोनों कार्यक्रमों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सीईओ व बिजनेस लीडर्स, ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सुपरएनुएशन फंड तथा संस्थागत निवेशकों के प्रतिनिधियों और ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।

सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत की सुदृढ़ आर्थिक वृद्धि, नीतिगत सुधार, डिजिटल परिवर्तन और इनोवेशन का बढ़ता इकोसिस्टम ऑस्ट्रेलियाई भागीदारों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी तालमेल को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, माइनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, एविएशन, लॉजिस्टिक्स, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, फ़ूड प्रोसेसिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का बड़े पैमाने पर कार्य करने का सामर्थ्य और ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता मिलकर दोनों देशों के लिए एक परस्पर लाभकारी स्थिति का निर्माण करते हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया और इस बात पर विशेष बल दिया कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में गहरा सहयोग न केवल दोनों देशों की प्रतिभाओं को भविष्य के लिए तैयार करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने में भी मदद करेगा।

सीईओ फोरम के बाद, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को भी संबोधित किया, जिसमें दोनों पक्षों के 200 से अधिक सीईओ और बिजनेस लीडर्स का एक बड़ा समूह शामिल था। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्वाभाविक तालमेल के बारे में बात करते हुए, उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्य, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक समान दृष्टिकोण, लोगों के बीच मजबूत संबंध (पीपल-टू-पीपल टाइज) और मजबूत राजनीतिक समझ ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को एक साथ बढ़ने और समृद्ध होने के लिए एक एक अच्छा माहौल तैयार किया है। वर्ष 2022 के आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट-ईसीटीए) पर आधारित व्यापार और निवेश संबंधों की वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए, उन्होंने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट-सीईसीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का आह्वान किया, ताकि व्यावसायिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाया जा सके। उन्होंने बिजनेस लीडर्स से दोनों पक्षों की विशिष्टताओं का लाभ उठाने और ग्लोबल समाधान तलाशने का आग्रह किया, विशेष रूप से रेयर अर्थ्स, लिथियम, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन), सेमीकंडक्टर्स, एआई और डिफेंस सप्लाई चेन के क्षेत्रों में। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने यह सुझाव भी दिया कि द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि भारत के राज्य और ऑस्ट्रेलिया के प्रांत अपनी मूल क्षमताओं के आधार पर मजबूत आर्थिक साझेदारी स्थापित करें। दोनों मंचों पर हुई चर्चाओं से उत्पन्न आशावाद और सार्थक विचारों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंध निरंतर समृद्ध होते रहेंगे।

July 4, 2026

कार्य विस्तार के साथ विचारों को कायम रखना बड़ी चुनौती: डॉ. मोहन भागवत जी

News Posted on 04.07.2026, Time 07.24 PM Saturday, Nagpur RSS

नागपुर, 03 जुलाई 2026। लक्ष्मीनगर स्थित साइंटिफिक सोसायटी सभागार में आयोजित ‘डॉ. हेडगेवार – आधुनिक युग के शालिवाहन’ यूट्यूब वीडियो के सार्वजनिक प्रसारण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि किसी भी संगठन का कार्य समय के साथ विस्तार पाता है, प्रतिष्ठा बढ़ती है और समाज में उसके प्रति विश्वास तथा सम्मान भी बढ़ता है। लेकिन ऐसे समय में सबसे बड़ी चुनौती अपने मूल विचारों और तत्वों को कायम रखने की होती है। कार्य का स्वरूप बदल सकता है, पर उसके मूल तत्व नहीं बदलने चाहिए। स्वयंसेवक बनना कोई अल्पकालीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवनभर निरंतर चलने वाली साधना है। जिसके लिए अहंकार ही नहीं, बल्कि अपने स्वभाव तक का समर्पण करना पड़ता है। यहां तक कि ‘समर्पण का भी अहंकार’ मन में नहीं आना चाहिए।

इस अवसर पर मिलिंद रहाटगांवकर की दृकश्रव्य श्रृंखला ‘असु आम्ही सुखाने, पत्थर पायातील’ के 101वें भाग का लोकार्पण सरसंघचालक जी ने किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश अवचट, सचिव श्रीराम पिंपळीकर सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

सरसंघचालक जी ने कहा कि किसी भी संस्था के कार्य का विस्तार होने पर समाज में उसके प्रति विश्वास और प्रेम बढ़ता है। संघर्ष और उपेक्षा का दौर समाप्त होने लगता है, संसाधन उपलब्ध होने लगते हैं और प्रशंसा भी मिलने लगती है। लेकिन यह आत्मसंतुष्ट होकर बैठ जाने का समय नहीं होता। यह निरंतर आत्ममंथन करने का समय है कि हमारा समर्पण अभी भी ध्येय के प्रति उतना ही दृढ़ है या नहीं तथा हमारे प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं। विचारों और सिद्धांतों को केवल पुस्तकों से नहीं समझा जा सकता। उन्हें जीवन में उतारना पड़ता है। किसी भी कार्य को समझने के लिए उसकी जड़ों तक जाना आवश्यक है। दूसरों से अपेक्षा करने से पहले स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य केवल सक्रिय कार्यकर्ता तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसा स्वयंसेवक बनाना है जो अपने जीवन में संघ के संस्कारों को जीता हो।

उन्होंने कहा कि संघ की शाखा केवल दैनिक गतिविधियों का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण की प्रयोगशाला है। शाखा से निकलने वाला स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर समाज के लिए कार्य करता है। पढ़ने और सुनने की अपेक्षा संघ को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से अधिक गहराई से समझा जा सकता है। उन्होंने स्वयंसेवक निर्माण की प्रक्रिया को आजीवन साधना बताते हुए कहा कि यह एक दिन में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है। स्वयंसेवक को जीवनभर स्वयं को निरंतर विकसित करना पड़ता है। इसके लिए केवल समय या श्रम का नहीं, बल्कि अपने स्वभाव और अहंकार तक का समर्पण आवश्यक है। समर्पण करने के बाद भी व्यक्ति के भीतर ‘मैं समर्पित हूं’ का अहंकार नहीं आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक का पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन आदर्श होना चाहिए। समाज में श्रेष्ठ आचरण प्रस्तुत करते हुए नए स्वयंसेवकों का निर्माण करना ही वास्तविक सक्रियता है। देश-विदेश से अनेक लोग संघ के कार्य को देखने आते हैं। क्या उनके देशों के युवाओं को भी समाज के प्रति समर्पित होकर कार्य करने का प्रशिक्षण संघ दे सकता है, ऐसा वह पूछते हैं।

उन्होंने संघ को लेकर प्रचलित एक धारणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी संगठन या संस्था का ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं चलाता। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संगठन स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं, जबकि संघ का मूल कार्य केवल व्यक्ति निर्माण और समाज के लिए समर्पित स्वयंसेवकों का निर्माण करना है।

June 28, 2026

प्रधानमंत्री को राष्‍ट्रपति के विशेष सम्‍मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्‍ल्‍यू हॉरिजन’ से सम्मानित किया गया

Posted Date:- Jun 28, 2026

सेशेल्स के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने एक विशेष समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को आज राष्ट्रपति के विशेष सम्मान – ‘गार्जियन ऑफ द ब्‍ल्‍यू हॉरिजन’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री को यह सम्मान उनके हरित नेतृत्व, विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने के प्रयासों और नीली अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन और लघु द्वीप विकासशील राज्यों की विकासात्मक आकांक्षाओं को बढ़ावा देने के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के लिए प्रदान किया गया है। यह पहली बार है जब यह विशेष सम्मान प्रदान किया गया है।

प्रधानमंत्री ने यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रतिबद्ध सभी देशों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उनकी विशेष मित्रता को और मजबूत करने में सहायक होगा। यह सम्मान प्रधानमंत्री की हरित ग्रह के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली), एक पेड़ मां के नाम, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस- को स्‍वीकार करता है। यह सम्मान प्रधानमंत्री को सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए दिए गए कई पुरस्कारों- एफएओ द्वारा दिया गया एग्रीकोला मेडल, सियोल शांति पुरस्कार और संयुक्त राष्ट्र का ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’ में से एक है।

यह सम्मान हिंद महासागर क्षेत्र में क्षमता विकास, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास की पहलों और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भारत की बढ़ती भूमिका को सेशेल्स द्वारा दिए जाने वाले महत्व को दर्शाता है।

« Newer Posts — Older Posts »