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भारत की शक्ति उसके सांस्कृतिक स्वबोध में निहित : डॉ. मोहन भागवत

October 20, 2026

भारत की शक्ति उसके सांस्कृतिक स्वबोध में निहित : डॉ. मोहन भागवत

विजयादशमी उद्बोधन में सरसंघचालक ने पंच परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता पर दिया विशेष बल

( हेमेन्द्र क्षीरसागर पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार )

नागपुर में 20 अक्टूबर 2026,  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी उत्सव पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन भारतीय समाज के आत्मबोध, सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित रहा। संघ की शताब्दी के कार्यक्रमों के समापन अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सशक्त, आत्मनिर्भर और विश्वकल्याण के लिए प्रतिबद्ध भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और चारित्रिक उत्थान से संभव है।

हम भारत के लोग

सरसंघचालक के उद्बोधन का मूल स्वर अपनी सभ्यतागत पहचान को समझने और उसे समकालीन जीवन में उतारने का रहा। भारत की विविधता को कमजोरी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संपन्नता मानते हुए उन्होंने उस एकात्म भाव को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। जो विभिन्न मत-पंथों, भाषाओं, जातियों और प्रादेशिक पहचानों के बावजूद नागरिकों को एक सूत्र में बांधता है। संविधान की भावना के अनुरूप ‘हम भारत के लोग’ का बोध तभी सार्थक होगा। जब समान राष्ट्रीय हित, पारस्परिक सम्मान और कर्तव्यनिष्ठा हमारे व्यवहार में दिखाई दें।

प्रतिबद्धता का संदेश

संत रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष का संदर्भ इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उनका जीवन श्रम की प्रतिष्ठा, भक्ति, स्वधर्मनिष्ठा और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देता है। स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जैसे महापुरुषों का स्मरण भी त्याग, सेवा और सांस्कृतिक चेतना के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देता है।

दैनिक आचरण का हिस्सा

संघ के शताब्दी वर्ष में रेखांकित पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध एवं स्वदेशी तथा नागरिक अनुशासन को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सामाजिक जीवन की दिशा बदलने वाला व्यापक अभियान बताया। इनका वास्तविक महत्व तभी है, जब वे नारों और आयोजनों तक सीमित न रहकर दैनिक आचरण का हिस्सा बनें। परिवार में संस्कार, समाज में समानता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता। स्वदेशी के प्रति आग्रह और नागरिक कर्तव्यों का पालन राष्ट्रनिर्माण की आधारशिलाएं हैं।

विकास का प्रतिमान

विज्ञान, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रगति को स्वीकार करते हुए उद्बोधन में सरसंघचालक ने उनके विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। तकनीक अपने आप में समाधान नहीं, उसका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य और नैतिक दृष्टि से किया जाता है। डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध सामग्री, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और नई पीढ़ी के सामने उपस्थित चुनौतियों के संदर्भ में परिवार, समाज और शासन की साझा जिम्मेदारी रेखांकित की। विकास का प्रतिमान ऐसा होना चाहिए, जिसमें आर्थिक समृद्धि के साथ पर्यावरणीय संतुलन, मानवीय गरिमा और सामाजिक उत्तरदायित्व भी सुरक्षित रहें।

सद्भाव, संवाद और नागरिक मर्यादा

डॉ. मोहन भागवत के उद्बोधन का महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक तनावों और आंदोलनों के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण रहा। समस्याओं के समाधान के लिए संवाद, जनसहभागिता और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन आवश्यक है। मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, किंतु उन्हें मनभेद, द्वेष और सामाजिक विभाजन में बदलने से रोकना सभी की जिम्मेदारी है। शासन-प्रशासन, राजनीतिक नेतृत्व और समाज के प्रत्येक वर्ग से अपेक्षा है कि व्यवहार में संवेदनशीलता, शालीनता और नागरिक सम्मान बना रहे। ग्रामीण विद्यालयों और ग्राम विकास में जनसहभागिता के उदाहरण बताते हैं कि सामाजिक समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों या आंदोलनों पर निर्भर नहीं रह सकता। समाज की सक्रिय भागीदारी, सहयोग और स्वावलंबन स्थायी परिवर्तन की राह खोलते हैं।

एकता ही राष्ट्रशक्ति

वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश सामने आया। इतिहास से सीखना आवश्यक है, लेकिन अतीत की कटुता को वर्तमान के सामाजिक संबंधों पर हावी होने देना उचित नहीं। भारत की शक्ति उसकी विविधताओं के बीच आत्मीयता, साझा विरासत और परस्पर सम्मान बनाए रखने में निहित है।

विश्वकल्याण में योगदान

समग्रतः सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का विजयादशमी का यह उद्बोधन राष्ट्रनिर्माण को शासन की जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक संकल्प के रूप में देखने की प्रेरणा देता है। भारत को समर्थ और विश्वकल्याण में योगदान देने वाला राष्ट्र बनाने के लिए सांस्कृतिक आत्मबोध के साथ वैज्ञानिक दृष्टि, सामाजिक समरसता, नागरिक अनुशासन और मानवीय संवेदना का समन्वय आवश्यक है। वास्तविक विजय तभी होगी, जब राष्ट्रीय एकता केवल विचार न रहकर प्रत्येक नागरिक के आचरण में प्रतिबिंबित हो।

September 13, 2026

ब्रिक्स सिर्फ़ देशों का समूह नहीं है, बल्कि समाधानों का पारिस्थितिकीतंत्र है: मोदी

नई दिल्ली 13 सितम्बर 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि ब्रिक्स सिर्फ़ देशों का समूह नहीं है, बल्कि समाधानों का पारिस्थितिकीतंत्र है और पिछले दो दिनो की चर्चाओं ने इस विश्वास को और मज़बूत किया है।

श्री मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर सत्र में आशा प्रकट की कि ब्रिक्स सम्मेलन में स्वीकार किया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ साझा विज़न और भविष्य के सहयोग के लिए स्पष्ट दिशा देगा। उन्होंने सभी परिणामों को समय-सीमा के भीतर ऐसे कार्यों में बदलने की ज़रूरत पर बल दिया जिनका ज़मीनी स्तर पर असर दिखाई दे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि ब्रिक्स का ढांचा कागज़ी कार्रवाई से आगे बढ़कर असल ज़िंदगी में ठोस असर डाले।

श्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। दुनिया अब इस समूह से ठोस परिणामों की आशा करती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सामूहिक प्रयासों से निश्चित रूप से इन उम्मीदों पर खरा उतरेगा। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के अगले अध्यक्ष के तौर पर चीन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नई दिल्ली सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी ब्रिक्स देशों, सहयोगी देशों और उनकी टीमों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने नेताओं की सक्रिय भागीदारी और बहुमूल्य योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि नेताओं के महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने सहयोग को व्यापक और प्रगाढ बनाया है। उन्‍होंने कहा कि उनकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती अहमियत, खुलेपन और समावेशिता का प्रमाण है।

इससे पहले सम्मेलन के खुले सत्र में श्री मोदी ने कहा कि महामारियों, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं ने यह दिखा दिया है कि परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि इसीलिए ब्रिक्स देशों ने इस समूह के भीतर लचीलापन और संकटों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रधानमंत्री ने चुनौतियों की समय पर पहचान, पहले से तैयारी और तत्काल कदम उठाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली’  पर आम सहमति बन गई है। श्री मोदी ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए भी ‘पूर्व चेतावनी डेटा एकीकरण दिशानिर्देश’ तैयार कर लिए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने आगाह किया है कि प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियार की तरह प्रयोग प्रगति के मार्ग में बड़ी बाधा बन सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने नई तकनीकों को अपनाने में समावेशिता पर विशेष जोर दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए ‘ब्रिक्स-एम.एस.एम.ई. सहयोग पोर्टल’ स्थापित करने की पहल का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, शहरों के बीच बेहतर तौर-तरीकों को साझा करने की सुविधा के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ का गठन किया गया है। श्री मोदी ने बताया कि स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ‘ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना की गई है, जो स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को अधिक विश्वसनीय, कुशल और सुलभ बनाने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स के भीतर विकसित समाधानों के लाभों को ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुसार ढाला और उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘ब्रिक्स रसद आपूर्ति श्रृंखला सहयोग प्रारूप’ आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय और सुदृढ़ बनाने में मदद करेगा। नवाचार के तहत, ‘ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क’ स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को आपस में जोड़ेगा। उन्होंने बताया कि भारत ने नए और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स स्टार्टअप नवाचार कोष’ का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही, ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’ से किसानों के लिए नए अवसर सृजित होंगे, जिसके जरिए एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल बनाया जाएगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स सहयोगी देशों के नेताओं का स्वागत किया। इन नेताओं में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग, सऊदी अरब के विदेश मंत्री युवराज फैसल बिन फरहान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरश शामिल हैं। सामूहिक फोटो सत्र के बाद, सभी नेता इस समय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार’ विषय पर आधारित मुख्य सत्र में भाग ले रहे हैं।

ब्रिक्स के दस सहयोगी देशों में बेलारूस, बोलिविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। सत्र के समापन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कजाखस्तान, फिलीपींस, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका और बुरुंडी के राष्ट्रपतियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इसके अलावा, वह नाइजीरिया और युगांडा के उपराष्ट्रपतियों के साथ भी बैठकें करेंगे। यह शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है।

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन से अलग मिस्र के राष्ट्रपति अबदुल फत्ताह अस्सीसी के साथ बैठक की।श्री मोदी कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोक़ायेफ, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और बुरुंडी के राष्ट्रपति एवारिस्ते इंदायिशिमिये के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करने वाले हैं। इसके अलावा, वे नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ भी बैठकें करेंगे।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्र: “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना” में प्रधानमंत्री के प्रारंभिक वक्तव्य

Posted Date:- Sep 13, 2026

Your Highness,
Excellencies,
नमस्कार।

ब्रिक्स के विस्तृत परिवार में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

आज यह सभागार अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है। यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और अभूतपूर्व विश्वास का प्रमाण है।

Friends,

भारत की अध्यक्षता में हमने सभी प्रयास Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability, इन चार स्तंभों पर केंद्रित किये हैं। मुझे खुशी है कि आप सबके सहयोग और समर्थन से हम अपने साझा vision को win-win सहयोग में बदल सके।

आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और सामान्य मानव के जीवन पर इसका बहुत negative प्रभाव भी हो रहा है, और व्यापक प्रभाव भी हो रहा है।

महामारियों, climate disasters और supply-chain disruptions ने दिखाया है कि आज के interconnected world में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में Resilience बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है।

इसी सोच के साथ, infectious diseases के prevention और response के लिए BRICS Integrated Early Warning System पर सहमति बनी है। Disaster Management के लिए Early Warning Data Integration Guidelines तैयार की गई हैं। BRICS Logistics Supply Chain Cooperation Framework हमारी supply chains को अधिक reliable और resilient बनाने में सहायक होगा।

Friends,

Innovation के अंतर्गत BRICS Incubator Network हमारे start-ups और incubators को आपस में जोड़ेगा। Innovative और scalable solutions को बढ़ावा देने के लिए हमने BRICS Startup Innovation Fund का प्रस्ताव रखा है।

BRICS Network on Digital Agriculture किसानों के लिए नई संभावनाएं तैयार करेगा। इसके माध्यम से AI, geospatial technology और Digital Public Infrastructure को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ा जाएगा।

Technology और Critical Minerals का weaponization हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए हमने technology के adoption में inclusivity पर बल दिया है।

Friends,

भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है।

हमारा प्रयास रहा है कि ब्रिक्स cooperation केवल सरकारों तक सीमित न रहे। हमारे entrepreneurs, farmers, researchers, women, youth और सामान्य नागरिक भी इसके सक्रिय भागीदार बनें।

हमने BRICS CONNECT के माध्यम से skills, employability, women in workforce, social security और capacity building को बढ़ावा दिया है।

छोटे उद्यमों को knowledge, finance और नए markets से जोड़ने के लिए, BRICS MSME Cooperation Portal का इनिश्यटिव लिया गया है।

हमारे शहरों के बीच best practices साझा करने के लिए BRICS Urban Mobility Hub की स्थापना की गई है।

Friends,

भारतीय सभ्यता में प्रकृति को माँ का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, पूरक हैं। BRICS में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है।

यही Sustainability का आधार है। यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस दिशा में हमने कई पहलुओं पर प्रगति की है।

Smart Grids और Energy Storage के लिए हमने BRICS Digital Centre of Excellence बनाया है। यह हमारे clean energy systems को अधिक reliable, efficient और accessible बनाने में मदद करेगा।

Agro-Ecology और Regenerative Agriculture के Centers of Excellence, पारंपरिक ज्ञान को modern science से जोड़ेंगे। Community-based climate adaptation के लिए तैयार किये गए सिद्धांत, indigenous knowledge को climate action का महत्वपूर्ण आधार बनाएँगे।

Friends,

इन चारों स्तंभों पर आगे बढ़ते हुए BRICS के माध्यम से हमने inclusive global growth को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। क्योंकि हमारा मानना है कि BRICS में विकसित solutions का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के अनुरूप adaptable और accessible बनाना चाहिए।

साथियों,

मैं मेरे निजी अनुभव से कह सकता हूं कि BRICS में Global South के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि BRICS में-

उनकी आवाज सुनी जाती है।
उनके अनुभव का सम्मान होता है।
और solutions उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं।

BRICS की शक्ति हमारी diversity और cooperation में है।

We may be rooted in different realities, but together, we rise through cooperation, and blossom for humanity.

हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने, और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए।

आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्रधानमंत्री ने “समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने” पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की

Posted Date:- Sep 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान “समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने” पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की।

2. अपने वक्तव्य में, प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि:

  1. ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने के मामले में सबसे अग्रिम पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे। हमें “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” को “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलना होगा।
  2. वैश्विक शासन में आज की वास्तविकताओं को दर्शाना चाहिए, जिसमें विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है।
  3. ग्लोबल साउथ को केवल नियम मानने वाले के बजाय नियम बनाने वाले की भूमिका में लाने के प्रयास किए जाने चाहिए। ब्रिक्स के माध्यम से, हम ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को वार्ता कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता प्रदान कर सकते हैं।
  4. समुद्री नाविक, वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, फिर भी संकट के समय उन्हें अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने समुद्री नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

3. प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य का समापन यह कहते हुए किया कि चूंकि हमारा भविष्य साझा है, इसलिए उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए – आवाज उठाने से लेकर प्रभाव छोड़ने तक, और विशेषाधिकार से लेकर साझेदारी तक। प्रधानमंत्री का प्रारंभिक वक्तव्य यहां देखा जा सकता है।

4. सत्र का समापन नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ, जो भविष्य में ब्रिक्स सहयोग की साझा प्राथमिकताओं, प्रतिबद्धताओं और दिशा को तय करता है। यह घोषणापत्र यहां देखा जा सकता है।

प्रधानमंत्री की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक

Posted Date:- Sep 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन जनवादी गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की।

दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों के प्रति रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। मतभेदों को विवादों का रूप नहीं लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिकताओं—पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित—से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास का एक आवश्यक आधार बनी हुई है। उन्होंने सीमा से संबंधित मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने जन-से-जन संबंधों में हुई प्रगति का संज्ञान लिया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कारोबारी संबंधों तथा लोगों की अधिक आवाजाही को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के संबंध में, उन्होंने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों सहित एक-दूसरे की चिंताओं का समाधान करने तथा सार्थक और पूर्वानुमेय बाजार पहुंच को सुगम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों तथा चुनौतियों के समाधान के लिए साझे आधार का लगातार विस्तार करते रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की सफलता में उसके योगदान की सराहना की।

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