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टीएमयू के डॉ. मुकुल सैन का पेटेंट बदल देगा ऊंटों की सूरत-सीरत

July 13, 2026

टीएमयू के डॉ. मुकुल सैन का पेटेंट बदल देगा ऊंटों की सूरत-सीरत

Posted on 13.07.2026 Time 07.21 PM, Monday, Teerthankar Mahaveer University (TMU) Moradabad, Dr Mukul Sain, College of Agriculture Sciences, Patent on Camel, News Source Prof Shyam Sundar Bhatia

मुरादाबाद, 13 जुलाई 2026, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज के डॉ. मुकुल सैन प्रतिभा के धनी, नवाचार के प्रति उनका नज़रिया बेमिसाल, 2024 से लेकर 2026 तक 12 आईपीआर ग्रांटेड, इनमें से 10 आईपीआर भारतीय हैं, कनाडा से 01 कॉपीराइट भी उनकी उपलब्धियों में शुमार, डॉ. सैन की झोली में आधा दर्जन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस है, देश-विदेश में 28 शोध पत्रों के संग-संग अब तक दो किताबें भी हो चुकी हैं प्रकाशित

Dr. Mukul Sen of TMU will change the patent of camels Surat-Seerat

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज के डॉ. मुकुल सैन ने नवाचार में ऊंची छलांग लगाई है। डॉ. सैन ने घुमन्तू ऊंट पालकों के लिए जीवनदायिनी सरीखा डिजाइन पेटेंट यूके से प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है, इन दिनों राजस्थान में न केवल ऊंटों का जीवन संकट में है, बल्कि घुमन्तू पालकों की रोजी-रोटी पर भी दांव लगा है। यूं तो ऊंटों की संख्या राजस्थान में सर्वाधिक है। एक आंकड़ें के मुताबिक हिन्दुस्तान में कुल ऊंटों का 85 प्रतिशत ऊंट केवल राजस्थान में पाए जाते हैं। यह बात दीगर है, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, यूपी आदि में भी ऊंटों का पालन किया जाता है। एक दर्जन पेटेंट अपनी झोली में रखने वाले डॉ. सैन ने इनके दर्द को संजीदगी से समझा है। इस पेटेंट से उन्होंने रेगिस्तान का जहाज कहे जाने वाले ऊंटों और उनके कारोबारियों के लिए आशा की किरण जगा दी है। डॉ. सैन को सोलर असिसटेड मोबाइल कैमल डेयरी मिल्किंग मशीन का यूके के इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट्स ऑफिस से डिजाइन पेटेंट मिला है। यदि यह जमीनी हकीकत में बदलता है तो डिजाइन की गई इस मशीन में रेगिस्तान में भी 04 डिग्री तापमान तक घुमन्तू ऊंटों का दूध स्टोर किया जा सकता है। 20 लीटर क्षमता के डिजाइन की लागत करीब 1 से 1.5 लाख तक रहेगी। इस मशीन में चराई के दौरान मिल्किंग के बाद दूध ऑटोमेटिक ही ठंडा और स्टोर हो जाएगा। यह सौर ऊर्जा पर आधारित है, जोकि रेगिस्तान में भरपूर मात्रा में मिलती है। टीएमयू के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन इस एक्सक्लूसिव पेटेंट डिजाइन पर डॉ. मुकुल सैन को बधाई देते हुए कहते हैं, यह पेटेंट ऊंटों और ऊंट पालकों के लिए बेशकीमती सौगात है। उन्होंने उम्मीद जताई, इस नवाचार से ऊंट के दूध का गुणवत्तापूर्ण संरक्षण के संग-संग बाजार का भी विस्तार होगा। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज़ के डीन प्रो. प्रवीन कुमार जैन कहते हैं, कॉलेज के लिए यह गौरव का विषय है। ऐसे प्रसंस्करण भविष्य में दूध के क्षेत्र में नई संभावनाएं और नवाचार के द्वार खोलेंगे।

पंजाब के अबोहर में जन्मे डॉ. सैन ने ऊंटों और ऊंट पालकों के दर्द को करीब से देखा है। छोटूपन में यह दंश तो वह नहीं समझ पाए लेकिन एग्रीकल्चर और डेयरी में उच्च शिक्षा-दीक्षा के दौरान उन्होंने ऊंटों के जीवन कल्याण की ठानी। सोचा एक ऐसा डिजाइन ईजाद किया जाए, जिससे इनके दिन बहुर जाएं। डॉ. सैन नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टिटयूट- एनडीआरआई, करनाल से डेयरी इंजीनियरिंग में पीएचडी हैं। राजस्थान के बीकानेर में प्रवास के दौरान उन्होंने ऊंट के दूध की गुणवत्ता के संरक्षण की ठानी, क्योंकि इसमें औषधीय गुण हैं। जैसे ऊंट का दूध बेनिफिसियल एक्टिव प्रोटीन से भरपूर है। डायबिटीज और पेट के रोगों में वरदान है। इसका प्रयोग ऑटिज़्म रोगियों के लिए भी किया जाता है। अब तक इसका सर्वाधिक बाजार मिल्क पाउडर के रूप में है। अब उम्मीद की जाती है, यह लिक्विड रूप में भी मिल जाएगा। डॉ. सैन प्रतिभा के धनी हैं। नवाचार के प्रति उनका नज़रिया बेमिसाल है। 2024 से लेकर 2026 तक 12 आईपीआर ग्रांटेड हैं। इनमें से 10 आईपीआर भारतीय हैं, कनाडा से 01 कॉपीराइट भी उनकी उपलब्धियों में शुमार हैं। डॉ. सैन की झोली में आधा दर्जन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस हैं। 28 शोध पत्र देश-विदेश में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. सैन की 2020 में नेचुरल फाइबर कंपोजिस्ट्स, 2023 में फ्यूचरिस्टिक ट्रेंड्स इन एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड फूड साइंसेज़ पब्लिश हो चुकी हैं। इसके अलावा वेलेराइजेशन ऑफ वेस्ट राइस स्ट्रा और एडवांसेज़ इन इंडीजीनियस डेयरी प्रोडक्ट्स की पांडुलिपियां प्रकाशकों के पास हैं। इन पुस्तकों को स्प्रिंजर सरीखे इंटरनेशलन पब्लिशर्स प्रकाशित करेंगे। इसके अलावा आठ इंटरनेशनल बुक चौप्टर समेत एक लैब मैन्युअल भी उनकी झोली में है। डॉ. सैन भविष्य की प्लानिंग बताते हुए कहते हैं, दूध हमेशा से उनके चिंतन और मनन का विषय है। वह अब दूध के उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीकों पर भी रिसर्च करेंगे।

हकीकत यह है, ऊंटों और पालकों की दुश्वारियां जग जाहिर हैं। देश में सर्वाधिक ऊंटों की संख्या राजस्थान में है। राजस्थान के ख़ासकर बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर सरीखे जिलों में पुरसा हाल नहीं है। कड़वी सच्चाई यह है, राजस्थान सरकार की आंख मूंदु नीति के चलते ऊंट पालन कारोबार मुनाफे का सौदा कभी नहीं रहा है। इस पेटेंट के बाद न केवल ऊंट पालक अपना दूध बेच सकेंगे, बल्कि इनके प्रति मुहब्बत में भी इजाफा होगा, क्योंकि सरकार की मौजूदा नीति के मुताबिक ऊंट को न तो वध के लिए नहीं बेचा जा सकता है और न ही अवैध ट्रैफिकिंग की जा सकती है। राजस्थान की रीढ़ की हड्डी समझे जाने वाले ऊंट मशीनीकरण और परिवहन के आधुनिक साधनों के चलते ऊंटों की उपयोगिता में भारी गिरावट आई है। शोध रिपोर्टस के मुताबिक साढ़े चार दशक में राजस्थान में ऊंटों की संख्या 15 लाख से घटकर केवल एक लाख ही रह गई है। अंदेशा है, डायनासोर की मानिंद एक दिन ऊंट भी कागजों तक सिमट कर रह जाएंगे। ऐसे में डॉ. मुकुल सैन का पेटेंट ऊंटों और उनके पालकों के लिए भगवान सरीखा है। इस पेटेंट के बाद ऊंट से लेकर घुमन्तू पालकों तक की सूरत-सीरत बदल जाएगी। ऑटोमिल्किंग के संग-संग इमिडेट कूलिंग मिलेगी। हयूमन टच एक्सक्लूड हो जाएगा और दूध हाइजीन रहेगा। कोल्ड चेन मैनेजमेंट के कारण दूध की गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी। दूध उपलब्धता में बेहतर वृद्धि हो जाएगी। ऊंट के दूध में थैरेप्यूटिक गुण होने के कारण एक्सपोर्ट के वैश्विक द्वार खुल जाएंगे। अंततः ऊंटों की तेजी से गिरती संख्या का ग्राफ भी रूक जाएगा।

Exclusive News

Dr. Mukul Sen of College of Agricultural Sciences, Tirthankar Mahavir University, Moradabad, is a man of talent, his approach to innovation is unparalleled, 12 IPRs granted from 2024 to 2026, out of which 10 IPRs are Indian, 01 copyright from Canada is also among his achievements, Dr. Sen has half a dozen international conferences in his pocket, 28 research papers published at home and abroad as well as two books so far. Dr. Mukul Sen of College of Agricultural Sciences, Tirthankar Mahavir University, Moradabad has taken a leap in innovation. Dr. Sain has received a design patent from the UK for a lifeline for nomadic camel herders. Significantly, these days not only the life of camels is in crisis in Rajasthan, but the livelihood of nomadic herders is also at stake. Rajasthan has the highest number of camels. According to a statistic, 85% of the total camels in India are found in Rajasthan alone. Camels are also reared in Gujarat, Haryana, Punjab, UP, etc. Dr. Sain, who holds a dozen patents in his pocket, has understood their pain intimately. With this patent, he has given a ray of hope to the camels and their traders who are called the ship of the desert. Dr. San has received a design patent for a solar assisted mobile camel dairy milking machine from the Intellectual Property Rights Office, UK. The designed machine can store milk of nomadic camels up to 04 ° C even in the desert if it changes to the ground reality. 20 liters capacity

July 12, 2026

अमेरिकी हमलों के विरोध में ईरान ने हार्मुज बंद किया

Posted on 12.07.2026 Time 11.22 PM, Tehran, Hormuj strait

ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमले

तेहरान, 12 जुलाई 2026, अमरीका ने आज सुबह ईरान पर फिर से हवाई हमले किए हैं। ये हमले ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक पोत पर हमला किए जाने के बाद किए गए। ईरान के हमले में पोत में आग लग गई थी और चालक दल को उसे छोड़ना पड़ा था।

अमरीकी सेंट्रल कमान ने बताया कि हमलों में ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिसाइल, ड्रोन और संचार ढांचा शामिल हैं।

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कतर और कुवैत ने कहा कि उन्होंने आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को बीच में ही मार गिराया, जबकि बहरीन ने भी मिसाइल अलर्ट जारी किया। ईरान ने जॉर्डन स्थित एक अमरीकी सैन्य अड्डे पर भी हमला करने का दावा किया है।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है और चेतावनी दी है कि यदि अमरीकी हमले जारी रहे तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा।

बोलने से पहले सोचना चाहिए, और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए’ – यह संस्कार केवल पुस्तकालय ही दे सकता है: अमित शाह

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय का लोकार्पण किया

किसी देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में जुटने वाली युवाओं की भीड़ से तय होता है

राष्ट्र निर्माण और उसे वैभव दिलाने वाली हर गतिविधि का मूल है ज्ञान और विवेक, और यह केवल पुस्तकालय ही दे सकता है

गृह मंत्री जी ने युवाओं से आह्वान किया कि – एक बार पुस्तकालय से जुड़िए, पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे-बुरे का विवेक स्वयं जाग जाएगा

गांधीनगर के प्रत्येक गाँव में पुस्तकालय खोल उन्हें बड़े पुस्तकालय से लिंक किया गया, अब गाँव का बच्चा पुस्तकालय में जिस पुस्तक का नाम लिखता है, वह पुस्तक उसी गाँव में उसे उपलब्ध हो जाती है

Posted Date:- Jul 11, 2026 पीआईबी

नई दिल्ली 11 जुलाई 2026, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के अध्यक्ष केशव चंद्र सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में जुटने वाली युवाओं की भीड़ से तय होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को आगे बढ़ाने वाली, राष्ट्र-निर्माण और राष्ट्र को वैभव दिलाने वाली सारी गतिविधियों का मूल ज्ञान एवं विवेक में होता है। यह ज्ञान सिर्फ एक पुस्तकालय ही दे सकता है।

श्री शाह ने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे एक बार पुस्तकालय से अवश्य जुड़ें। पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे-बुरे का विवेक स्वयं जाग जाएगा। गृह मंत्री ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस छोटे से कस्बे में वह पैदा हुए और उनका बचपन बीता, वहाँ एक समृद्ध पुस्तकालय था। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय के माध्यम से कब उनकी अध्ययन यात्रा वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गई, उन्हें पता नहीं चला।

 

 

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज सभागार में उन्होंने एक वाक्य लिखा देखा कि “बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि शब्द कभी वापस नहीं आते।” उन्होंने कहा कि कोई भी वाक्य बोलने से पहले सोचना चाहिए और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए कि क्या सोचना है, और यह संस्कार सिर्फ पुस्तकालय से ही मिल सकता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय का उनके जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र में उन्होंने एक छोटा सा प्रयोग किया है। उनके संसदीय क्षेत्र के लगभग हर गाँव में एक पुस्तकालय खोला गया है, जिनमें लगभग 3-4 हजार पुस्तकें हैं। इन पुस्तकालयों को मुख्य पुस्तकालय से लिंक किया गया है, जिसमें सवा लाख पुस्तकें हैं। इसके अलावा, चार मोबाइल वैन भी चलाई गई हैं। उन्होंने कहा कि गांवों के बच्चे पुस्तकालय में अपनी पसंद की पुस्तक का नाम लिख कर उसे मँगवाने का अनुरोध करते हैं, और हर शुक्रवार के दिन बच्चों को उनकी पसंद की पुस्तक गांव में ही उपलब्ध कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि हमने हर पुस्तकालय को स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया है।

गृह मंत्री ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम से समर्पित यह पुस्तकालय युवाओं के ज्ञान और चिंतन का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि वह दिल्ली के सभी पुस्तकालयों को आपस में लिंक करें और स्कूलों को इनसे जोड़ने के लिए एक ठोस योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि एक कार्ययोजना बनाकर पुस्तक प्रेमियों को पुस्तकालयों से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय के कर्मियों से भी आग्रह किया कि वे नई दिल्ली के आसपास के 10 विधानसभा क्षेत्रों के सभी स्कूलों से संपर्क कर युवाओं को पुस्तकालय से जोड़ें और उन्हें यहाँ आने के लिए प्रेरित करें। एक बार जब युवा पढ़ने की आदत बना लेंगे, तो वह स्वयं आगे बढ़ेंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान सागर में गोता लगाने का साहस देता है और सागर के नीचे पड़े मोतियों व रत्नों को चुनकर ऊपर लाने की प्रेरणा भी देता है। ज्ञान सागर के गोते से निकले ये मोती और रत्न ही व्यक्तित्व को निखारते हैं, देश को आगे बढ़ाते हैं, देश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाते हैं, देश को संस्कारित, शिक्षित और सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी को पढ़े बिना इस देश की आत्मा, संस्कृति, स्वाभिमान और संघर्ष को नहीं जाना जा सकता, और पुस्तकालय इसमें सबसे मज़बूत ज़रिया बन सकता है।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय भवन में 30,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। यहां रिसर्च करने वालों के लिए अलग व्यवस्था है, बहुउद्देशीय आधुनिक सभागार है, आधुनिक रीडिंग एरिया है, किड्स जोन है, रिसर्च सेंटर है और ई-लाइब्रेरी है, जिसमें 1 करोड़ पुस्तकें ऑनलाइन पढ़ी जा सकती हैं। वाई-फाई फ्री है। कई मॉनिटर लगाए गए हैं, जहां पुस्तकालय में अध्ययन के लिए आने वाले लोग नोट्स ले सकते हैं, डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी विचार प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ आरएफआईडी आधारित अत्याधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली लागू है। ओपेक कैटलॉग के माध्यम से नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया से भी जुड़ाव होगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में युवा अपनी रुचि के विषय चुनें और उन महानुभावों को पढ़ें, जिन्होंने अपना पूरा जीवन उन विषयों पर लगाया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तकालय में 1 करोड़ ई-बुक्स उपलब्ध हैं। यह दिल्ली के युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है कि उन्हें मुफ़्त में 1 करोड़ ई-बुक्स और 32,000 भौतिक पुस्तकों का एक्सेस होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण (जेपी) एक ऐसे विचारक और क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जीवन में अनेक विचारधाराओं को अपनाया और हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास किया। वे भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख सेनानी थे। आजादी के बाद उन्होंने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया। समाजवाद अपनाया, समाजवादी कांग्रेस बनाई, विनोबा भावे के भूदान आंदोलन और सर्वोदय विचारधारा को गांव-गांव तक फैलाया। चंबल क्षेत्र में 250 से अधिक डाकुओं को सरेंडर कराया और चार राज्यों के 22 जिलों में डकैती की समस्या समाप्त की। श्री शाह ने कहा कि इमरजेंसी के समय जेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री का डटकर विरोध किया, बिहार-गुजरात में छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया और ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान दिया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जेपी, अटल जी, अडवाणी जी सहित हजारों नेताओं को जेल में डाला गया। तब दिनकर जी का नारा “अंधेरे में एक प्रकाश, जयप्रकाश” पूरे देश में गूंजा। 1977 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री रायबरेली से हारीं और पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। उन्होंने कहा कि जेपी ने पूरी जिंदगी लोकतंत्र की रक्षा की।

गृह मंत्री ने दिल्ली के सभी किशोरों और युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान की पिपासा तृप्त करने के माध्यम के रूप में शुरू किए गए जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे पुस्तकालय का लाभ उठाकर अपने जीवन को निखारें और देश को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।

 

July 9, 2026

प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया

Posted Date:- Jul 09, 2026, PM Narendra Modi, Australia, Melbourne

मेलबॉर्न (ऑस्ट्रेलिया) 09 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माननीय श्री एंथनी अल्बनीज ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया। इन दोनों कार्यक्रमों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सीईओ व बिजनेस लीडर्स, ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सुपरएनुएशन फंड तथा संस्थागत निवेशकों के प्रतिनिधियों और ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।

सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत की सुदृढ़ आर्थिक वृद्धि, नीतिगत सुधार, डिजिटल परिवर्तन और इनोवेशन का बढ़ता इकोसिस्टम ऑस्ट्रेलियाई भागीदारों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी तालमेल को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, माइनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, एविएशन, लॉजिस्टिक्स, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, फ़ूड प्रोसेसिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का बड़े पैमाने पर कार्य करने का सामर्थ्य और ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता मिलकर दोनों देशों के लिए एक परस्पर लाभकारी स्थिति का निर्माण करते हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया और इस बात पर विशेष बल दिया कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में गहरा सहयोग न केवल दोनों देशों की प्रतिभाओं को भविष्य के लिए तैयार करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने में भी मदद करेगा।

सीईओ फोरम के बाद, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को भी संबोधित किया, जिसमें दोनों पक्षों के 200 से अधिक सीईओ और बिजनेस लीडर्स का एक बड़ा समूह शामिल था। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्वाभाविक तालमेल के बारे में बात करते हुए, उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्य, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक समान दृष्टिकोण, लोगों के बीच मजबूत संबंध (पीपल-टू-पीपल टाइज) और मजबूत राजनीतिक समझ ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को एक साथ बढ़ने और समृद्ध होने के लिए एक एक अच्छा माहौल तैयार किया है। वर्ष 2022 के आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट-ईसीटीए) पर आधारित व्यापार और निवेश संबंधों की वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए, उन्होंने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट-सीईसीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का आह्वान किया, ताकि व्यावसायिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाया जा सके। उन्होंने बिजनेस लीडर्स से दोनों पक्षों की विशिष्टताओं का लाभ उठाने और ग्लोबल समाधान तलाशने का आग्रह किया, विशेष रूप से रेयर अर्थ्स, लिथियम, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन), सेमीकंडक्टर्स, एआई और डिफेंस सप्लाई चेन के क्षेत्रों में। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने यह सुझाव भी दिया कि द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि भारत के राज्य और ऑस्ट्रेलिया के प्रांत अपनी मूल क्षमताओं के आधार पर मजबूत आर्थिक साझेदारी स्थापित करें। दोनों मंचों पर हुई चर्चाओं से उत्पन्न आशावाद और सार्थक विचारों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंध निरंतर समृद्ध होते रहेंगे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बांदा में किया 710 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन

Posted on 09.07.2026 Time 07.03 PM, Thursday, Banda, CM Yogi Adityanath visit, UP News , Bundelkhand News

बांदा (बुंदेलखड), 09 जुलाई 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गुरुवार को सप्त ऋषियों की महान परंपरा से विभूषित, महर्षि वामदेव की तपोभूमि और नीलकंठ महादेव की कृपा से अभिसिंचित पावन धरा जनपद बाँदा के सर्वांगीण विकास हेतु ₹710 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं का आज लोकार्पण व शिलान्यास किया।

इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को नियुक्ति-पत्र, स्वीकृति-पत्र, चेक, आयुष्मान एवं मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा कार्ड, आवास की चाबी तथा टूल किट भी वितरित किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन में आज बुंदेलखंड उत्कृष्ट कनेक्टिविटी से जुड़कर विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। इस मौके पर बांदा के जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।

रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का किया अनावरण

मुख्यमंत्री जी ने राष्ट्रधर्म तथा भारत की आन, बान और शान की रक्षा के लिए रानी अवंतीबाई लोधी जी ने अपना सर्वस्व समर्पित कर वीरगति का वरण किया। जनपद बाँदा में आज उनकी भव्य प्रतिमा का अनावरण किया।

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