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Ayodhya Yaja Fire: यज्ञ पंडाल में लगी आग, कोई जनहानि नहीं

March 28, 2026

Ayodhya Yaja Fire: यज्ञ पंडाल में लगी आग, कोई जनहानि नहीं

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Posted on 28.03.2026 Time 04.13 PM Saturday, Ayodhya

अयोध्या, 28 मार्च 26, सरयू तट पर किए जा रहे लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के अंतिम दिन पंडाल में आग लग गई। पंडाल पूरी तरह जलकर राख हो गया। किसी जनहानि की सूचना नहीं है।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सरयू तट पर 1251 कुण्डी लक्ष्मी नारायण महायज्ञ आयोजित किया। आज यज्ञ का अंतिम दिन था। याद स्थल पर मंत्री के साथ स्थानीय विधायक अभय सिंह और अनेक बीजेपी नेता मौजूद थे।

यज्ञ की समाप्ति के बाद पंडाल में आग लग गई। इससे पूरा पंडाल धू धू कर जल उठा। हालांकि आग लगने से पहले लोग वहां से निकल चुके थे। फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया।

मंत्री दयाशंकर सिंह का कहना है कि यज्ञ पूर्ण होने के बाद आग लगी है। पूर्ण आहुति भी हो चुकी थी।अगले कारणों की जांच कराई जाएगी।

Ayodhya, March 28 A fire broke out at the pandal on the last day of the Laxmi Narayan Mahayagya being performed on the banks of the Saryu, on March 26. The pandal was completely burnt to ashes. No casualty has been reported. State Transport Minister Dayashankar Singh organised 1251 Kundi Laxmi Narayan Mahayagya at Saryu beach. Today was the last day of the Yajna. Local MLA Abhay Singh and several BJP leaders accompanied the minister at the memorial site.

March 19, 2026

राष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की 

Posted on 19.03.2026 Time 08.48 PM Thursday, Ayodhya 
  • श्रीरामलला का दर्शन-पूजन किया
  • प्रभु श्रीराम ने इस अयोध्या नगरी में जन्म लिया, इसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना अत्यन्त सौभाग्य की बात : राष्ट्रपति
  • आज भारतीय नव सम्वत्सर की प्रथम तिथि पर, श्रीराम जन्मभूमि के परिपूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्रीराम यंत्र की स्थापना की जा रही : मुख्यमंत्री
अयोध्या : 19 मार्च, 2026,  भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु  ने आज चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस एवं सनातन नव संवत्सर (विक्रम संवत्-2083) पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की तथा श्रीरामलला का दर्शन-पूजन किया।
राष्ट्रपति जी ने देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतवासियों और श्रीराम भक्तों को नव वर्ष तथा आगामी रामनवमी पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने इस अयोध्या नगरी में जन्म लिया। इसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना अत्यन्त सौभाग्य की बात है। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’, अर्थात् प्रभु श्रीराम ने इस भूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था। इसी अयोध्या अर्थात् अवधपुरी और आसपास की लोकभाषा में सन्त तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना की थी। मानस में प्रभु श्रीराम सीता माता से कहते हैं कि ‘जद्यपि सब बैकुंठ बखाना, बेद पुरान बिदित जगु जाना, अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ’, अर्थात् सबने बैकुण्ठ का बखान किया है तथा वह वेद-पुराणों में वर्णित तथा जग प्रसिद्ध है, लेकिन बैकुण्ठ भी हमें अवधपुरी जैसा प्रिय लगता है।
राष्ट्रपति जी ने प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रधानमंत्री जी को लिखे गये अपने पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उस पत्र में यह भाव व्यक्त किया गया था कि सौभाग्य की बात है कि हम सब अपने राष्ट्र की पुनर्स्थापना के नये काल चक्र के शुभारम्भ के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस एवं सनातन नव संवत्सर पर अयोध्या आकर स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रही हूं।
राष्ट्रपति जी ने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या सम्भवतः उससे पूर्व ही हम विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे। 21वीं सदी में हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना’, अर्थात् राम राज्य में कोई भी दुःखी, निर्धन, बुद्धिहीन और संस्कारहीन नहीं है। विगत दशक के दौरान देश के 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारा गया। राम राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और समाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। प्रभु श्रीराम का माता शबरी से भावपूर्ण मिलन, निषादराज से स्नेह-सम्बन्ध, युद्ध में कोल-भील, वानर समुदाय का सहयोग लेना, जटायु, जामवन्त आदि को सम्मान तथा स्नेह की प्रेरणा प्रदान करना जैसे अनेक प्रसंग सर्वस्व समावेशी जीवन दर्शन अपनाने का आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
राष्ट्रपति जी ने कहा कि वर्तमान सन्दर्भ में यह सुखद है कि सामाजिक समावेश तथा आर्थिक न्याय के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जीव-जन्तुओं की सुरक्षा हेतु बड़े पैमाने पर तय किये गये लक्ष्यों को मूर्त रूप प्रदान किया जा रहा है। राम राज्य के आदर्शां पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे। प्रभु श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का आदर्श वाक्य है, ‘रामो विग्रहवान् धर्मः‘, अर्थात् प्रभु श्रीराम धर्म के प्रतिमान स्वरूप हैं। धर्म के व्यापक अर्थों के आधार पर निजी और सामूहिक जीवन को संचालित करके ही हम प्रभु श्रीराम की सच्ची आराधना कर सकेंगे।
प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से इस मन्दिर तथा परिसर की भव्यता बढ़ती ही जा रही है। मैं माता अन्नपूर्णा, माँ दुर्गा, प्रभु श्रीराम परिसर तथा श्रीरामलला का दर्शन कर धन्य हो गयी हूँ। प्रभु श्रीराम की असीम कृपा से आज इस पावन परिसर में पुण्य लाभ की प्राप्ति हुई है। सप्त मन्दिर में माता शबरी, निषादराज, माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र तथा महर्षि अगस्त्य की पवित्र मूर्तियों का दर्शन करने व आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। सभी देवी-देवताओं की कृपा देशवासियों पर बनी रहे, हम सब आधुनिक विश्व में राम राज्य जैसी व्यवस्था स्थापित कर सकें। हम सब जनसामान्य की भाषा में सुनते रहे हैं कि ‘मुझमें राम, तुझमें राम, हम सबमें राम समाए‘। रामभक्ति के पवित्र बन्धन में जुड़कर पुण्य के भाव के साथ हम राष्ट्र का निर्माण करें।
इस दिव्य मन्दिर में द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना और पूजन करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह प्रभु श्रीराम की असीम कृपा का प्रमाण है। यह श्रीराम यंत्र कांची कामकोटि पीठम के पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती जी द्वारा प्रदत्त है। प्रभु श्रीराम और भगवान शंकर के बीच दैवीय स्नेह के आदर्शों को उनके भक्तों ने अपनी उपासना पद्धतियों में बनाये रखा है।
राष्ट्रपति जी ने कहा कि श्री रामेश्वर में शिवलिंग की स्थापना और विधिवत पूजा करने के पश्चात स्वयं प्रभु श्रीराम ने गोस्वामी तुलसीदास जी के शब्दों में कहा कि ‘सिव समान प्रिय मोहि न दूजा‘। श्रीराम यंत्र भगवान शंकर की उपासना परम्परा से जुड़े कांची कामकोटि पीठ तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के बीच प्रगाढ़ स्नेह का प्रतीक है। यह पारस्परिक स्नेह हमारी सनातन परम्परा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। यह मन्दिर परिसर कला और शिल्प की अनुपम अभिव्यक्तियों से समृद्ध है। ऐसा लगता है कि मानो स्वयं भगवान विश्वकर्मा जी ने यहाँ विद्यमान निर्माण और शिल्प से जुड़ी संस्थाओं, शिल्पकारों और श्रमिकों को कुशलता और प्रेरणा प्रदान की है। सभी श्रमिक, शिल्पकार और निर्माण संस्थाएँ सराहना की पात्र हैं।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्रदेशवासियों को भारतीय कालगणना के प्रथम दिवस पर प्रारम्भ हिन्दू नव संवत्सर पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह नववर्ष सभी के जीवन में नवचेतना, नवऊर्जा और नवसंकल्प का संचार करे। यह शुभ और पावन संयोग है कि श्रीराम मन्दिर के द्वितीय तल के गर्भगृह में श्रीराम यंत्र की स्थापना हो रही तथा हिन्दू नववर्ष का प्रथम प्रभात उदित हो रहा है।

मुख्यमंत्री जी ने ‘रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे, रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः’ श्लोक से अपने सम्बोधन की शुरूआत करते हुए कहा कि आज भारतीय नव सम्वत्सर की प्रथम तिथि पर, श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के परिपूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्रीराम यंत्र की स्थापना की जा रही है। अब हम अयोध्या के बारे में वह बातें कह सकते हैं, जिन्हें प्रभु श्रीराम ने स्वयं कहा था कि ‘अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ, जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिसि बह सरजू पावनि’। सरयू माता इस अयोध्या धाम को अपने निर्मल जल से पवित्र करते हुए पूरे क्षेत्र को आलोकित कर रहीं हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के लिए भूमि-पूजन, श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, श्रीराम दरबार के पवित्र विग्रह की स्थापना, श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ध्वजारोहण तथा आज श्रीराम यंत्र की स्थापना का कार्य प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी को आनन्द से परिपूर्ण कर देता है।
भारत की आस्था अनेक प्रकार के संघर्षों व विप्लवों को झेलने के बाद भी 500 वर्षों तक निरन्तर बनी रही। शासन चाहे जिसका रहा हो, संघर्ष हमेशा जारी रहा। परिणामस्वरूप 500 वर्षों की प्रतीक्षा के उपरान्त श्रीरामलला अयोध्या धाम में अपने मन्दिर में विराजमान हुए हैं। श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर भव्य मन्दिर मात्र नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्र मन्दिर का प्रतीक बन चुका है। आज रामराज्य की अवधारणा साकार होती हुई दिखायी दे रही है। ‘राम राज बैठें त्रैलोका, हरषित भए गए सब सोका, बयरु न कर काहू सन कोई, राम प्रताप बिषमता खोई। बरनाश्रम निज निज धरम, निरत बेद पथ लोग, चलहिं सदा पावहिं सुखहि, नहिं भय सोक न रोग’।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान में दुनिया में अनेक जगह युद्ध चल रहे हैं। भय, अव्यवस्था व आर्थिक अराजकता है। हम भारत के अयोध्याधाम में भयमुक्त होकर राष्ट्रपति जी के सान्निध्य में श्रीराम यंत्र की स्थापना के कार्यक्रम में सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। हमारे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता तथा लोगों की आस्था ने भारत को सदैव ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ बनाये रखा है। श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम से जुड़कर न केवल उत्तर प्रदेशवासी, बल्कि देश-दुनिया का प्रत्येक धर्मावलम्बी गौरव की अनुभूति कर रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2025 में प्रदेश में 156 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक आध्यात्मिक तथा धार्मिक स्थलों की यात्रा पर आए हैं। दुनिया के किसी भी देश की इतनी आबादी नहीं है। यह नया तथा बदलता हुआ भारत है। वर्तमान पीढ़ी सही दिशा में जा रही है। आज युवा नया वर्ष मनाने के लिए मन्दिरों में जाता है। यही उसके संस्कार हैं। यहाँ जो बात अम्मा जी ने कही है, वह नये भारत में अक्षरशः देखने को मिल रही है।

इस अवसर पर विदुषी माता अमृतानन्दमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि तथा सन्तगण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

February 23, 2026

देहरादून के वरिष्ठ पत्रकार रामप्रताप मिश्र साकेती नहीं रहे

Ram Pratap Mishra Saketi, Senior Journalist Dehradun

Posted on 23.02.2026, Monday, Time 07.59 PM, Dehradun, Ram Pratap Mishra Saketi, Ayodhya

देहरादून। वरिष्ठ पत्रकार मेरे सहयोगी रहे रामप्रताप मिश्र साकेती नहीं रहे। उनके निधन का समाचार जानकार बहुत कष्ट हुआ। बहुत ही स्पष्ट विचार, धुन के पक्के, अति स्वाभिमानी और गैर समझौतावादी साकेती का जीवन सीधा सपाट और विवाद रहित था। वे मेरे साथ 1988 में जुड़े थे, जब हम देहरादून में विश्व मानव दैनिक के प्रभारी थे। अखाड़ा बाजार के नारायण मार्केट में तीसरी मंजिल के कार्यालय में वे मिलने आए थे और फिर उसी दिन हमारे साथ संवाददाता के रूप में जुड़ गए थे। 100 कांवली रोड उनका पता था, जो उनकी पहचान बन गया था, क्योंकि वे बाहरी पत्र पत्रिकाओं में नियमित छपते थे और साथ ये पता भी। उन्होंने मेरे देहरादून रहने तक इस अखबार में काम किया। फिर दैनिक जागरण से जुड़े। जब मैं पाञ्चजन्य से जुड़ा तो वे देहरादून से पाञ्चजन्य का सहयोग करते थे। वे उत्तराखण सूचना विभाग से भी कुछवर्ष जुड़े रहे।
संप्रति भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड की पत्रिका देवकमल का संपादन कर रहे थे। देहरादून के मित्रों से मिली जानकारी के अनुसार उनका निधन कल बुलंदशहर में हुआ, जहां उनका बेटा नौकरी में है। साकेती जी मूल रूप से अयोध्या जनपद के निवासी थे। लगभग 45 साल पहले वे अयोध्या से देहरादून आ गए थे और यहीं के होकर रह गए।
साकेती जी को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करे। ॐ शांति शांति शांति।

February 15, 2026

अयोध्या: राममंदिर में 22 को संघ का घोष वादन

Posted on 15.02.2026 Time 03.55 PM Sunday, Ayodhya, Ram Mandir, RSS Ghosh

अयोध्या, 15 फरवरी। रामनगरी में 22 फरवरी को एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज होने जा रहा है, जब पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घोष वादन श्रीराम जन्मभूमि परिसर में गूंजेगा। 21 से 23 फरवरी तक आयोजित रामार्चनम कार्यक्रम के तहत यह आयोजन होना है। दिल्ली प्रांत से आए 230 स्वयंसेवक रामपथ पर पथ संचलन करते हुए राम मंदिर में घोष वादन की प्रस्तुति देंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
दिल्ली प्रांत के स्वयंसेवकों का दल 20 को रामनगरी पहुंच जाएगा। 21 को यह दल अभ्यास करेगा, जबकि 22 को राम मंदिर में आयोजन होगा। संघ के घोष दल की ओर से नगाड़ा, तुरही, शंख, बांसुरी, शृंग और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से राष्ट्र भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया जाएगा। संघ के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में होने वाला घोष वादन मुख्य रूप से पारंपरिक वाद्य यंत्रों के समूह के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसे सैन्य बैंड की शैली में बजाया जाता है। निश्चित धुनों और तालों पर आधारित प्रस्तुति होगी। इस कार्यक्रम के लिए एक विशेष धुन तैयार की गई है।

विशेष बात यह है कि घोष वादन केवल संगीत नहीं, बल्कि अनुशासन, समन्वय और संगठन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। एक साथ सैकड़ों स्वयंसेवकों का एक लय में कदमताल और वादन, श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। घोष वादन के दौरान स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में सुसज्जित होकर अनुशासित पंक्तियों में प्रस्तुति देंगे, जो संगठन की एकात्मता को दर्शाता है। यह आयोजन यह भी दर्शाएगा कि राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक बन रहा है।

तीन माह से चल रही थी तैयारी
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के घोष वादन कार्यक्रम को लेकर पिछले तीन माह से चल रही थी। कार्यकर्ताओं ने नियमित अभ्यास सत्रों में भाग लिया और विशेष समन्वय बैठकों के माध्यम से कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। राम मंदिर परिसर में पहली बार होने जा रहे इस घोष वादन को अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा के साथ प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रस्तावित पथ संचलन की रूट योजना, समय निर्धारण और सुरक्षा समन्वय को लेकर भी लगातार तैयारी होती रही।

January 31, 2026

Ayodhya राम मन्दिर में रखी जाएगी 400 वर्ष पुरानी रामायण

राम मन्दिर

अयोध्या, 30 जनवरी 2026, श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में 400 वर्ष पुरानी रामायण रखी जाएगी। यह रामायण दिल्ली विश्वविद्यालय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेंट की है। इसे लेकर ट्रस्ट के महामंत्री चंपतराय दिल्ली से अयोध्या लौट आये हैं।

श्रीरा मन्दिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को यहां शुरु हुई। बैठक में समिति क अध्यक्ष पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र ने बताया कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली ने 400 वर्ष पुरानी रामायण भेंट की है। यह रामायण मूलतः बाल्मीकि रामायण पर टिप्पणी है जोकि संस्कृत में है। इस रामायण को पहले राष्ट्रपति भवन में रखवाया गया था। अब इसे राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपा गया है।

उन्होंने बताया कि दूसरे तल पर रामकथाओं का संग्रहालय बनाया जाना है। इसमें विभिन्न भाषाओं में बाल्मीकि रामायण को जो भी रूपांतरण है वह यहां रखा जाएगा। रामकथाओं के मन्दिर में श्रीराम यंत्र भी रखा जाएगा जिसे पहले ही कांची कामकोटि के शंकराचार्य ट्रस्ट को सौंप चुके हैं।

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