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विश्व हृदय दिवस पर विशेषज्ञ बोले- सीने के दर्द को न समझें गैस, तुरंत लें डॉक्टरी सलाह

September 29, 2026

विश्व हृदय दिवस पर विशेषज्ञ बोले- सीने के दर्द को न समझें गैस, तुरंत लें डॉक्टरी सलाह

​विश्व हृदय दिवस: जिला चिकित्सालय सहित खीरी जनपद में डोंट मिस ए बीट थीम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित​
डोंट मिस ए बीट जिला चिकित्सालय से लेकर सीएचसी तक खीरी में गूंजा हृदय को स्वस्थ रखने का संदेश
उ प्र समाचार सेवा
​लखीमपुर खीरी। जिला चिकित्सालय खीरी में आज विश्व हृदय दिवस के अवसर पर “डोंट मिस ए बीट” (Don’t miss a beat) थीम के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस), जिला चिकित्सालय लखीमपुर खीरी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित चिकित्सकों ने जनमानस को हृदय रोग के लक्षणों, कारणों और उचित उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
​मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि विश्व हृदय दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय के साथ-साथ जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों— मितौली, बांकेगंज, रमियाबेहड़, फरधान, पलिया, बिजुआ, निघासन, गोला, पसगवां, फूलबेहड़, कुंभी, मोहम्मदी, धौरहरा, नकहा और खमरिया में भी जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

​मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि हृदय शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसकी देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने समय पर लक्षणों की पहचान कर तुरंत उचित उपचार लेने की सलाह दी। उन्होंने ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, मानसिक तनाव और जंक फूड का अत्यधिक सेवन हृदय रोगों का प्रमुख कारण बन रहा है। ‘डोंट मिस ए बीट’ थीम का मुख्य उद्देश्य यही है कि हम अपने दिल की सेहत को प्राथमिकता दें। सीने में भारीपन, सांस फूलना या जबड़े और बाएं हाथ में दर्द को कभी भी गैस या सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

​वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आर.पी. वर्मा ने बताया कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम, ताजे फल-सब्जियों का सेवन और धूम्रपान तथा शराब से पूरी तरह दूरी बनाकर हम हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

​एनसीडी सेल के डॉ. शिशिर पांडे ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, इसलिए 30 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच अवश्य करानी चाहिए। उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और मधुमेह को नियंत्रित रखना एक स्वस्थ हृदय के लिए सबसे आवश्यक कदम है।

​डॉ. शिखर बाजपेई ने भी हृदय रोग से बचाव के संबंध में अपने विचार जनमानस से साझा किए और तनाव मुक्त जीवन जीने की सलाह दी।
​इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. रचित मिश्रा, डॉ सइय्यद मोहम्मद रजा, डॉ. इंद्रेश राजावत, स्टाफ नर्स नीरज वर्मा, स्टाफ नर्स सरिता सिंह, एनसीडी सेल ऑपरेटर महेंद्र, योगा इंस्ट्रक्टर राहुल वर्मा, जिला चिकित्सालय खीरी हेल्प डेस्क विभाग से पंकज कुमार शुक्ला, हेल्प डेस्क मैनेजर सुरेंद्र कश्यप, राम जी माथुर, स्टाफ नर्स सर्वेश वर्मा और वीरेश कुमार सहित अस्पताल का स्टाफ एवं आम जनमानस उपस्थित रहे।

August 23, 2026

लखीमपुर मेडिकल कॉलेज मरीज के लिए बना संजीवनी, गले की जटिल गांठ की हुई सफल सर्जरी

बेहतर इलाज की तलाश में लखनऊ पहुंचे मरीज को लखीमपुर में मिला नया जीवन

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने की गले की जटिल गांठ की सफल सर्जरी

उ प्र समाचार सेवा
लखीमपुर खीरी। बेहतर इलाज की तलाश में राजधानी लखनऊ के अस्पतालों की दौड़ लगा रहे एक गंभीर मरीज को गृह जनपद में ही बड़ी राहत मिल गई। लखीमपुर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने एक महीने की गहन चिकित्सकीय जांच और सटीक योजना के बाद मरीज के गले में मौजूद बड़ी व जटिल गांठ का सफल ऑपरेशन कर उसे पूरी तरह स्वस्थ कर दिया।

बताते चलें कि गले में तेज दर्द और बड़ी गांठ की समस्या से जूझ रहा मरीज लखनऊ के चक्कर काट-काटकर परेशान हो चुका था। थक-हारकर जब वह लखीमपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचा, तो ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा ने प्राथमिक परीक्षण के बाद मामले की गंभीरता को समझा। करीब एक माह तक मरीज के सभी जरूरी टेस्ट और विस्तृत मेडिकल इवैल्यूएशन करने के बाद सर्जरी की योजना बनाई गई।
गांठ का आकार बड़ा होने और संवेदनशील नसों के करीब होने के कारण यह सर्जरी काफी जोखिम भरी थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. आर. के. कोली तथा ई एन टी सर्जन डॉ. मनोज शर्मा की संयुक्त टीम ने बेहद सूझबूझ के साथ बिना किसी जटिलता या अत्यधिक रक्तस्राव के गांठ को पूरी तरह बाहर निकाल दिया।

लखीमपुर खीरी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य जिले के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस सफल सर्जरी के बाद अब लखीमपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन के लिए बड़े शहरों के महंगे अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है।

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*ई एन टी सर्जन के अनुसार: टीबी की पुष्टि न होने के बाद किया गया ऑपरेशन*

​”मरीज लखनऊ से कुछ पुरानी रिपोर्टों के साथ हमारे पास आया था, एक जाँच मे टी बी की गांठ होने का शक हुआ, जिससे असमंजस की स्थिति बन गयी। ”

सटीक स्थिति जानने के लिए हमने अल्ट्रासाउंड, यूएसजी-गाइडेड FNAC और गांठ के अंदर के पदार्थ की CBNAAT जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट में यह पुष्ट हो गया कि यह टीबी (Tuberculosis) नहीं है।

टीबी की गांठ और सामान्य सिस्ट के इलाज का तरीका पूरी तरह अलग होता है, इसलिए यह जांच आवश्यक थी।
​जांच व लक्षणों के आधार पर यह ‘डर्मॉइड सिस्ट’ लग रही थी, जो थायरॉयड कार्टिलेज से शुरू होकर सीने की हड्डी के अंदर (रेट्रोस्टर्नल) तक फैली हुई थी। इसी आधार पर सुरक्षित सर्जरी कर गाठ को निकाला गया। अंतिम पुष्टि के लिए सैंपल पैथोलॉजिकल जांच हेतु भेजा गया है।”
​— डॉ. मनोज शर्मा
असिस्टेंट प्रोफेसर, ईएनटी विभाग, लखीमपुर मेडिकल कॉलेज

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*मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर. के. कोली* ने जानकारी देते हुए कहा कि यह ट्यूमर थायरॉयड कॉर्टिलेज के साथ-साथ श्वास नली से भी चिपका हुआ था, जिसे काफी जटिलता और सावधानी के साथ निकाला गया। इस दौरान श्वास नली तथा मस्तिष्क को जाने वाली महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रूप से प्रिजर्व किया गया। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, संबद्ध जिला चिकित्सालय, इस प्रकार के जटिल मरीजों को उन्नत जांच एवं बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सदैव तत्पर है।

डॉ आर के कोली,वरिष्ठ जनरल सर्जन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय लखीमपुर खीरी

August 20, 2026

बायोजेंटा बनाएगी एंटी-कैंसर दवाएं, 1250 करोड़ के निवेश से बाराबंकी में बड़े फार्मा प्रोजेक्ट का भूमि पूजन

*13 एकड़ में बनेगी फॉर्मा फैक्ट्री, 2,000 से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार*

*एंटी-कैंसर दवाओं के साथ ह्युमन हार्मोन्स और अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जाएगा*

*नकली दवाओं के क्रय पर शिकंजे के साथ यूपी को फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में जुटा एफएसडीए*

*लेटर ऑफ कंफर्ट पाने वाली 17 कंपनियों में फैक्ट्री शुरू करने वाली पहली इकाई बनेगी बायोजेंटा*

*एलओसी प्राप्त करने वाली अन्य कंपनियां के भी जल्द भूमि पूजन और निर्माण के चरण तक पहुंचने की संभावना*

*गाज़ियाबाद, गौतमबुध नगर समेत अन्य जिलों में भी निर्माण कार्य शुरू*

*बाराबंकी, 20 अगस्त।* उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के साथ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग अब प्रदेश को फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में बाराबंकी के मेडिकल पार्क में बायोजेंटा ग्लोबल की 1,250 करोड़ रुपये की फार्मास्युटिकल परियोजना का भूमि पूजन एवं शिलान्यास हुआ। करीब 13 एकड़ भूमि में स्थापित होने वाली इस फैक्ट्री में एंटी-कैंसर दवाओं के साथ ह्युमन हार्मोन्स और अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जाएगा। कंपनी की परियोजना से प्रदेश में फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग को नई गति मिलने के साथ 2,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

*गुणवत्तापूर्ण दवा निर्माण को बढ़ावा देना है उद्देश्य*
भूमि पूजन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कमिश्नर रोशन जैकब ने कहा कि विभाग को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। एफएसडीए अब अपनी नियामक एवं प्रवर्तन की जिम्मेदारियों के साथ उत्तर प्रदेश फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस पॉलिसी-2023 के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग का उद्देश्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण दवा निर्माण को बढ़ावा देना और निवेशकों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है।

*नकली दवाओं पर कार्रवाई से मैन्युफैक्चरिंग हब तक*
एफएसडीए की भूमिका को अब केवल नकली और अवैध दवाओं पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। एक ओर विभाग दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अवैध कारोबार पर शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी ओर नए फार्मास्युटिकल निवेश को जमीन पर उतारने के लिए फैसिलिटेटर की भूमिका निभा रहा है। बायोजेंटा की परियोजना इसी बदलाव की महत्वपूर्ण मिसाल है। डॉ रोशन जैकब ने बताया कि हाल में लखनऊ में आयोजित नेशनल फार्मा कॉन्क्लेव में देश की फार्मा इंडस्ट्री के बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट्स ने भाग लिया था। कॉन्क्लेव के दौरान 17 यूनिट्स को लेटर ऑफ कंफर्ट (एलओसी) सौंपे गए। इनमें बायोजेंटा भी शामिल थी। ये यूनिट्स उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों से हैं और प्रदेश में फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में निवेश करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि बायोजेंटा नई यूनिट्स में साइट पर काम शुरू करने वाली पहली इकाई है। उम्मीद है कि एलओसी प्राप्त करने वाली अन्य कंपनियां भी जल्द भूमि पूजन और निर्माण के चरण तक पहुंचेंगी। उन्होंने बताया कि इनमें से सात यूनिट्स उत्पादन शुरू कर चुकी हैं और अब उनकी सब्सिडी की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

*13 एकड़ में बनेगी फैक्ट्री, कैंसर की दवाओं का होगा निर्माण*
बायोजेंटा ग्लोबल के एमडी दीपनारायण शर्मा ने बताया कि कंपनी की वैश्विक स्तर पर 35 देशों में मौजूदगी है और वह हिमाचल प्रदेश में भी काम कर रही है। अब कंपनी ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में अपनी नई फैक्ट्री स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से फैक्ट्री की स्थापना के लिए बाराबंकी मेडिकल पार्क में 13 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने और परियोजना को आगे बढ़ाने की गति से वह प्रभावित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लिए जा रहे फैसलों की सराहना की। वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले दीपनारायण शर्मा ने कहा कि उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में काम किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश लौटकर यहां नई फैक्ट्री स्थापित करना उनके लिए भावनात्मक और महत्वपूर्ण अनुभव है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित फैक्ट्री में कैंसर संबंधी दवाइयों, हार्मोन्स और अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य अपनी फैसिलिटी में गुणवत्तापूर्ण दवाओं का निर्माण करना है, ताकि लोगों को सुरक्षित और बेहतर जीवन के लिए आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो सकें। साथ ही परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 2,000 से अधिक युवाओं को रोजगार देने और राज्य के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने में योगदान देने का लक्ष्य रखा गया है।

*400 से अधिक फार्मा कॉलेज और एक लाख से ज्यादा रिटेल स्टोर यूपी की ताकत*
डॉ रोशन जैकब ने कहा कि फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के पास कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे, 400 से अधिक फार्मा कॉलेज और एक लाख से अधिक रिटेल फार्मा स्टोर मौजूद हैं। ये सुविधाएं फार्मा उद्योग के लिए मजबूत बाजार, कनेक्टिविटी और कुशल मानव संसाधन का आधार तैयार करती हैं। प्रदेश के पास पर्याप्त भूमि बैंक भी उपलब्ध है। इससे फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग की पूरी चेन को विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। एपीआई से लेकर फॉर्मूलेशन और एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग तक की गतिविधियों को एक मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम के भीतर विकसित किया जा सकता है।

*एनसीआर से निकटता, एक्सप्रेसवे और बड़ा बाजार भी बने ताकत*
उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति भी फार्मा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। एनसीआर के निकटता के कारण प्रदेश को विशाल बाजार मिलता है। इसके अलावा राज्य में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मोबिलिटी कॉरिडोर का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के बीच स्थित होने के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स की सुविधाएं भी बेहतर हैं। प्रदेश में भारत सरकार और अन्य प्रमुख वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों की मौजूदगी से रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आएएंडडी) के लिए भी मजबूत आधार उपलब्ध है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में शिक्षित और कुशल मानव संसाधन फार्मास्युटिकल उद्योग के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण ताकत है।

*फार्मा कॉन्क्लेव के बाद तेजी से धरातल पर उतर रहा निवेश*
प्रदेश में फार्मास्युटिकल निवेश को गति देने में हाल में आयोजित फार्मा कॉन्क्लेव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कॉन्क्लेव में सन फार्मा, सिप्ला, डॉ. रेड्डीज, जायडस कैडिला, मैनकाइंड फार्मा, टॉरेंट फार्मा और डाबर सहित फार्मा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। कई प्रमुख उद्योगपतियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के साथ वन-टू-वन बैठकें कर प्रदेश में निवेश, नीतिगत सहयोग और उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं पर चर्चा की थी।
इसके बाद 17 कंपनियों को एलओसी जारी किए गए। अब बायोजेंटा का भूमि पूजन इस प्रक्रिया को निवेश से निर्माण और निर्माण से उत्पादन की दिशा में बढ़ता हुआ कदम दिखाता है। सात यूनिट्स के उत्पादन शुरू करने और बायोजेंटा द्वारा साइट पर काम शुरू करने से प्रदेश की फार्मा नीति के क्रियान्वयन के परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

*योगी सरकार का लक्ष्य यूपी को फार्मा हब बनाना*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख फार्मास्युटिकल विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने के लिए निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत प्रोत्साहन को एक साथ आगे बढ़ा रही है। सरकार का जोर केवल निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उन्हें धरातल पर उतारने पर है।बाराबंकी में बायोजेंटा का ₹1,250 करोड़ का प्रोजेक्ट इसी नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एक तरफ एफएसडीए नकली, अवैध और घटिया दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, तो दूसरी तरफ गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक दवाओं के निर्माण के लिए नई औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित कर रहा है। ऐसे में रेगुलेशन के साथ मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा देने का यह दोहरा मॉडल उत्तर प्रदेश को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

इस अवसर पर एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, यूपीसीडा के सीईओ बलकार सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार जीएन सिंह समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।

August 12, 2026

लखनऊ में नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क पर एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई, चार के खिलाफ एफआईआर

बिना दवा सप्लाई के करोड़ों की फर्जी बिलिंग का आरोप

*39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट का हिसाब नहीं मिला, बंद फर्म के जरिए भी कागजी लेनदेन*

*एफएसडीए आयुक्त के निर्देश पर राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद थाने में दर्ज की गई एफआईआर*

*लखनऊ, 12 अगस्त।* नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन के खिलाफ योगी सरकार सख्ती से निपट रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बुधवार को लखनऊ में एक और बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग के अनुसार, अमीनाबाद में बिना वास्तविक दवा की आपूर्ति किए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए नकली एवं काउंटरफिट दवाओं को बाजार में खपाने का खेल चल रहा था। मामले में चार आरोपियों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।

एफआईआर में अंकुर अवस्थी, प्रोपराइटर हेल्थ प्लस, मनीष बाजपेयी, संचालक एमके फार्मा, गोविंद शुक्ला, संचालक राम फार्मा और ऐजाज अहमद, संचालक पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस, सहारनपुर को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन फर्मों के बीच बिना वास्तविक दवा सप्लाई के आपस में बिलिंग की गई और कागजों पर लेनदेन दिखाकर दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया गया।

*बिना लाइसेंस दवाओं का कारोबार करने का आरोप*
विभाग के मुताबिक अमीनाबाद स्थित हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी ने वैध औषधि लाइसेंस के बिना बड़े पैमाने पर दवाओं के भंडारण और लेनदेन का रिकॉर्ड तैयार किया। जांच में गोविंद शुक्ला की भूमिका भी सामने आई, जिन्हें विभाग ने फर्म के मुख्य कर्ताधर्ताओं में शामिल बताया है। जांच के अनुसार, हेल्थ प्लस और राम फार्मा एक ही फ्लोर पर संचालित हो रहे थे और इनके माध्यम से कथित तौर पर दवाओं के अवैध डायवर्जन और कागजी लेनदेन का नेटवर्क चलाया जा रहा था। सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस नामक फर्म, जो पिछले करीब दो वर्षों से बंद बताई गई है, का इस्तेमाल भी कथित तौर पर फर्जी खरीद और कागजी रोटेशन के लिए किया गया।

*8.87 करोड़ रुपये की खरीद दिखाने का दावा*
मामले में एमके फार्मा की भूमिका भी जांच के घेरे में है। विभाग के अनुसार, फर्म के संचालक मनीष बाजपेयी ने वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई। जांच के दौरान विभाग को कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें अन्य फर्मों के नाम पर Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup की खरीद दर्शाई गई थी।
विभाग का कहना है कि साक्ष्य छिपाने के लिए लैपटॉप का पुराना डेटा भी डिलीट किया गया। दवाओं के निर्माताओं और संबंधित फर्मों से सत्यापन कराया गया तो उन्होंने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया और संबंधित बैचों को काउंटरफिट बताया।

*39.20 लाख Zoryl M1 का नहीं मिला हिसाब*
जांच में एमके फार्मा से Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख दवाओं का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। विभाग का आरोप है कि इन दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। एफएसडीए के अधिकारियों के मुताबिक, पूरे मामले में फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने, कूटरचना, नकली दवाओं के कारोबार और अवैध धन अर्जित करने की आशंका की जांच की जा रही है। इसी आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 और 338 के तहत कार्रवाई की गई है।

*लखनऊ में पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले*
नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के खिलाफ चल रहे अभियान में लखनऊ में इससे पहले भी कई बड़ी कार्रवाई की जा चुकी हैं। विभाग के अनुसार, अमीनाबाद की आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ फर्जी बिलिंग और सॉफ्टवेयर में हेरफेर के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इनमें महाराजा इंटरप्राइजेज, शिव शक्ति फार्मा, श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स, अपोलो फार्मेसी, शिव शक्ति मेडिकल, मीत इंटरप्राइजेज, विद्या फार्म और आरएन फार्मा के साथ मार्ग सॉफ्टवेयर के डिस्ट्रीब्यूटर आबिद अली शामिल हैं।

जुलाई 2026 में अमीनाबाद के एक कथित अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई थीं। इसी तरह आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास करीब 1.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं। बख्शी का तालाब क्षेत्र में भी अवैध भंडारण और परिवहन के मामले में कार्रवाई की गई।

*आगरा में भी सामने आया बड़ा नेटवर्क*
एफएसडीए के अभियान के दौरान आगरा में भी नकली, री-लेबल की गई और सरकारी सप्लाई की दवाओं के अवैध कारोबार के कई मामले सामने आए हैं। विभाग के अनुसार, कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट में की गई कार्रवाई में 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज कराई गईं।
जांच में कथित तौर पर फर्जी बिलों के जरिए टोरेंट फार्मा की नकली Chymoral Forte और Aciloc जैसी दवाओं की बिक्री तथा ESI और सरकारी कोटे की दवाओं की कालाबाजारी का मामला सामने आया। इसके अलावा अस्पतालों और सरकारी संस्थानों के लिए भेजी गई दवाओं के मूल लेबल हटाकर नए लेबल और मनमानी एमआरपी लगाकर खुले बाजार में बेचने का मामला भी पकड़ा गया।

आगरा में एक अन्य कार्रवाई में Telma-H और Jardiance जैसी दवाओं की कथित री-लेबलिंग तथा निरस्त या कागजी फर्मों के जरिए करीब 1.88 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का खुलासा हुआ।

विभाग के अनुसार, आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध, नकली तथा सरकारी/डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। मई 2026 में एक अवैध गोदाम से करीब 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की इंसुलिन, वैक्सीन और डिफेंस/ईएसआई
सप्लाई की दवाएं बिना आवश्यक कोल्ड-चेन के रखी मिली थीं। वहीं, करीब 50 लाख रुपये की नकली Oxalgin DP भी जब्त की गई थी।

*दूसरे राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच*
एफएसडीए अब नकली दवाओं के इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच कर रहा है। विभाग के मुताबिक लखनऊ के अमीनाबाद में एक अवैध गोदाम से बरामद नकली दवाओं के स्रोत की जांच राजस्थान तक पहुंची है। इस मामले में भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेन्द्र गुज्जर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। देहरादून में कथित तौर पर विभिन्न ब्रांड की नकली दवाएं तैयार करने वाली एक अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है। मामले में राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विनय भटनागर, गौरव त्यागी और विनय चन्द्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

*लाइसेंस निरस्तीकरण और एजेंटों पर भी होगी कार्रवाई*
विभाग ने नकली और काउंटरफिट दवाओं की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए प्रदेशभर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश डॉ रोशन जैकब ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर लगातार निगरानी रखने को कहा है। उनके अनुसार, जांच में दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। उद्देश्य नकली, अमानक, री-लेबल और अवैध दवाओं की सप्लाई चेन को उसके स्रोत तक पहुंचकर समाप्त करना है।

August 11, 2026

आरएमएलआईएमएस रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के उत्साहजनक परिणाम

75 मरीजों के मूल्यांकन में बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी, कम दर्द और उच्च मरीज संतुष्टि

लगभग 80% मरीज 48 घंटे में स्वतंत्र रूप से चलने लगे, जबकि 60% मरीज तीन दिनों के भीतर हुए डिस्चार्ज

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान , लखनऊ के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक सामने आए हैं। विभाग में रोबोटिक सर्जरी से उपचारित 75 मरीजों के पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी, जीवन की गुणवत्ता तथा मरीजों की संतुष्टि का मूल्यांकन किया गया। इस गुणवत्ता आकलन में मरीजों में तेज रिकवरी, कम दर्द, शीघ्र गतिशीलता और उपचार के प्रति उच्च स्तर की संतुष्टि देखने को मिली।

रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी आधुनिक शल्य चिकित्सा की एक उन्नत तकनीक है, जो सर्जन को ऑपरेशन के दौरान बेहतर सटीकता, नियंत्रण और सूक्ष्म गतिविधियों को करने में सहायता प्रदान करती है। छोटे चीरे, कम पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द, छोटे निशान, शीघ्र गतिशीलता तथा दैनिक गतिविधियों और काम पर अपेक्षाकृत जल्दी लौटना इसके प्रमुख संभावित लाभ हैं।

75 मरीजों के आकलन में सामने आए उत्साहजनक परिणाम

आरएमएलआईएमएस में किए गए गुणवत्ता एवं जीवन-गुणवत्ता आकलन में रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीजों की रिकवरी के कई सकारात्मक संकेत सामने आए।

लगभग 80 प्रतिशत मरीजों ने ऑपरेशन के 48 घंटे के भीतर स्वतंत्र रूप से चलना-फिरना शुरू कर दिया। यह शीघ्र शारीरिक रिकवरी और सामान्य गतिविधियों की ओर तेजी से लौटने का महत्वपूर्ण संकेत है।

इसी प्रकार, 60 प्रतिशत मरीजों को रोबोटिक सर्जरी के तीन दिनों के भीतर सुरक्षित रूप से अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कम अवधि में अस्पताल से डिस्चार्ज होने से मरीजों को अपने घर के परिचित वातावरण में जल्दी लौटने और सामान्य दिनचर्या की ओर तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है।

पोस्ट-ऑपरेटिव अवधि में मरीजों में दर्द भी प्रभावी रूप से नियंत्रित रहा। अधिकांश मरीजों में न्यूनतम दर्द निवारक दवाओं की आवश्यकता पड़ी और मरीजों में शीघ्र गतिशीलता एवं बेहतर रिकवरी देखी गई। आकलन में सर्जरी के बाद की जटिलताएं भी कम रहीं।

मरीजों की प्रतिक्रिया इस मूल्यांकन का सबसे उत्साहजनक पहलू रही। सर्वेक्षण में शामिल 100 प्रतिशत मरीजों ने भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर दोबारा रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी को चुनने की इच्छा व्यक्त की। यह मरीजों के उपचार अनुभव, आराम और संतुष्टि के उच्च स्तर को दर्शाता है।

सिर्फ सामान्य सर्जरी नहीं, जटिल कैंसर सर्जरी में भी रोबोटिक तकनीक का उपयोग

आरएमएलआईएमएस के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में रोबोटिक तकनीक का उपयोग विभिन्न प्रकार की जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी में किया जा रहा है। इनमें कैंसर संबंधी जटिल ऑपरेशन भी शामिल हैं।

मूल्यांकन किए गए मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा हेपेटोबिलियरी सर्जरी का रहा, जो लगभग 38.3 प्रतिशत था। इसके बाद 23.4 प्रतिशत मामले एडवांस्ड कोलोरेक्टल सर्जरी के थे। बेरियाट्रिक सर्जरी और इसोफैगो-गैस्ट्रिक सर्जरी के साथ जटिल हर्निया रिपेयर प्रत्येक लगभग 19.1 प्रतिशत मामलों में किए गए।

इस विविधता से यह स्पष्ट होता है कि रोबोटिक सर्जरी का उपयोग केवल अपेक्षाकृत सरल प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि चयनित मरीजों में जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और ऑन्कोलॉजिकल सर्जरी में भी किया जा रहा है।

विशेष रूप से जटिल कैंसर संबंधी प्रक्रियाओं में भी मरीजों में शीघ्र गतिशीलता, बेहतर शारीरिक रिकवरी और पोस्ट-ऑपरेटिव स्वास्थ्य लाभ की सकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई।

मरीजों की संतुष्टि ने बढ़ाया भरोसा

रोबोटिक सर्जरी की सफलता का आकलन केवल ऑपरेशन की तकनीकी सफलता से नहीं किया जाता, बल्कि मरीज के अनुभव, दर्द, गतिशीलता, अस्पताल में रहने की अवधि और जीवन की गुणवत्ता जैसे पहलुओं से भी किया जाता है।

आरएमएलआईएमएस में किए गए मूल्यांकन में इन सभी पहलुओं पर सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए। मरीजों ने कम दर्द, जल्दी चलने-फिरने, अस्पताल में कम समय रहने और उपचार के समग्र अनुभव के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की।

विशेष रूप से 100 प्रतिशत मरीजों द्वारा आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में दोबारा रोबोटिक सर्जरी चुनने की इच्छा व्यक्त करना इस तकनीक के प्रति मरीजों के विश्वास और संतुष्टि का महत्वपूर्ण संकेत है।

आरएमएलआईएमएस के निदेशक डॉ. सी. एम. सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक को मरीजों के लिए सुलभ और किफायती बनाना है।

उन्होंने कहा:

“आरएमएलआईएमएस में अत्याधुनिक रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराना संस्थान की मरीज-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक का लाभ मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती रूप में उपलब्ध कराया जाए। रोबोटिक सर्जरी के इन उत्साहजनक प्रारंभिक परिणामों से हमें इस दिशा में आगे बढ़ने का और प्रोत्साहन मिला है।”

आरएमएलआईएमएस में प्राप्त प्रारंभिक परिणाम यह दर्शाते हैं कि रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के माध्यम से उपयुक्त मरीजों में पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी को बेहतर बनाया जा सकता है।

विशेष रूप से शीघ्र स्वतंत्र गतिशीलता, कम अवधि में अस्पताल से छुट्टी, प्रभावी दर्द नियंत्रण और उच्च मरीज संतुष्टि इस प्रारंभिक गुणवत्ता आकलन के महत्वपूर्ण निष्कर्ष रहे हैं।

आरएमएलआईएमएस में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की उपलब्धता संस्थान की उस व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और मरीज-केंद्रित देखभाल को एक साथ लाकर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क:- प्रो0 अंशुमन पांडे
फोन न0-8176007038
सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान , लखनऊ

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