नऐ दिल्ली 12 अगस्त 26, वर्ष 2027 की जनगणना का पहला चरण, अर्थात् गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना, 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही पूरा हो चुका है। शेष राज्यों में जनगणना का पहला चरण सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत के राजपत्र में दिनांक 3 अगस्त, 2026 की अधिसूचना के अनुसार , जनगणना का दूसरा चरण, अर्थात् लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर के हिमपातग्रस्त क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमपातग्रस्त क्षेत्रों में जनसंख्या गणना, 1 सितंबर, 2026 से 30 सितंबर, 2026 तक की जाएगी, जिसमें 1 अक्टूबर 2026 से 5 अक्टूबर, 2026 तक पुनरीक्षण दौर भी शामिल होगा। 17 अगस्त, 2026 से 31 अगस्त, 2026 तक स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध होगा।
जनगणना 2027 के पहले चरण के संचालन के लिए डेटा संग्रह हेतु मोबाइल एप्लिकेशन और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोग में लाए जा रहे हैं। जनगणना में पहली बार उत्तरदाताओं को ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना की सुविधा भी दी गई है। जनगणना के दूसरे चरण के लिए डिजिटल उपकरण विकसित किए जा चुके हैं।
जनगणना 2027 के पहले चरण के लिए मास्टर ट्रेनर, फील्ड ट्रेनर, एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर आदि का प्रशिक्षण अधिसूचित कार्यक्रम के अनुसार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के समन्वय से पूरा हो चुका है/चल रहा है।
अब तक जनगणना कर्मियों के प्रशिक्षण, मानव संसाधन सहायता, तकनीकी अवसंरचना, जनगणना कर्मियों को मानदेय के भुगतान आदि के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 4102 करोड़ रुपये की कुल राशि जारी की जा चुकी है।
गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
नई दिल्ली, 12 अगस्त 26 केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात के गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के पुस्तकालयों को आपस में जोड़ने के लिए विकसित ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप का शुभारंभ किया
‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ एक नया विचार; हर गांव में बच्चों को पढ़ने की ओर ले जाने के लिए एक पुस्तकालय की शुरुआत इसका उद्देश्य ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप से आज 752 पुस्तकालय जुड़ चुके हैं। 2 लाख 80 हजार पुस्तकों से युक्त चार पुस्तकालयों को इन ग्रामीण पुस्तकालयों के साथ जोड़ा गया । गांधीनगर, कलोल और साणंद विधानसभा सीटों के सभी गांवों में पाँच-छह हजार पुस्तकों से युक्त 63 पुस्तकालय खोलने की शुरुआत हुई है
गृह मंत्री ने पुस्तकालयों के लिए खुद ऐसी पुस्तकों की सूची तैयार की है, जो बच्चों में पढ़ने की रुचि जगाएंगे और उन्हें ज्ञान के अगाध सागर में डुबकी लगाने की प्रेरणा देंगे
सांसद निधि से दी गईं वैन हर पंद्रह दिन में गांवों में जाकर पहले दी हुई पुस्तकों को वापस लाएंगी और ऐप पर रजिस्टर्ड पुस्तकों को गांव के पुस्तकालयों में डिलीवर करेंगी
नई दिल्ली, 12 अगस्त 26, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “ट्रायम्फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स” का विमोचन किया। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमें श्री राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा का विमोचन करने का अवसर मिला है और मुझे प्रसन्नता है कि मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सका।”
प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपने गहरे व्यक्तिगत संबंध का समरण करते हुए कोविंद जी के मार्गदर्शन और वर्षों से उनके स्नेह के प्रति अपने गहरे सम्मान को रेखांकित किया। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी के साथ मेरा लंबा परिचय, उन्हें निकटता से जानने का सौभाग्य, राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और सबसे बढ़कर, मेरे प्रति उनका विशेष स्नेह और आत्मीयता, ये सब मेरे लिए सबसे बड़ी संपत्ति रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व और क्षमताओं की गहराई की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह साहित्यिक कृति राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों का एक चिरस्थायी प्रमाण होगी। श्री मोदी ने कहा, “मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा स्वयं भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बन जाएगी।”
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के प्रति कोविंद जी के आजीवन योगदान की विशालता की सराहना करते हुए और इस बारे में अधिक विवरण न देते हुए लोगों को स्वयं इस वृत्तांत को जानने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने कहा कि पुस्तक विमोचन में केवल एक परिचयात्मक प्रस्तुति ही होनी चाहिए और बेहतर यही है कि आप सभी पुस्तक को पढ़कर ही इसका पूरा लाभ उठाएं।
प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी के लिए इस संस्मरण के शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व राष्ट्रपति के शब्दों से भावी पीढ़ियों को प्रेरणा लेने की इच्छा जताई। श्री मोदी ने कहा, “देश की नई पीढ़ी को भी उनके लेखन और अनुभवों को पढ़ना चाहिए, जिससे सभी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।”
पुस्तक के शीर्षक, “ट्रायम्फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स” का विश्लेषण करते हुए, प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत कठिनाइयों और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक सफलता के संदर्भ में इसके दोहरे महत्व की व्याख्या की। श्री मोदी ने कहा, “जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के फलस्वरूप प्राप्त विजय भारत गणराज्य और उसके लोकतंत्र की है।”
प्रधानमंत्री ने आम मानवीय प्रवृत्तियों की तुलना पूर्व राष्ट्रपति की उदारता से करते हुए कहा कि जहां कई लोग अपनी कठिनाइयों के लिए समाज को दोषी ठहराते हैं, वहीं कोविंद जी का उदार हृदय, जो भारतीय मूल्यों में गहराई से निहित है, समाज को अपनी सफलता में समान भागीदार मानता है। श्री मोदी ने कहा, “जब हृदय उदार होता है और भारतीय मूल्य समाहित होते हैं, तो व्यक्ति समाज की कमियां ढूंढने में समय नष्ट नहीं करता, बल्कि उसके सकारात्मक पक्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।”
प्रधानमंत्री ने आत्मकथा से बचपन की एक अत्यंत दुखद घटना का उल्लेख करते हुए, जब कानपुर देहात में घर में लगी आग में कोविंद जी की मां घर के आवश्यक सामान को बचाने की कोशिश कर रही थीं, उनकी जान चली जाने का हृदयविदारक वृतांत सुनाया। श्री मोदी ने कहा, “आप कल्पना कीजिए कि इतनी कम उम्र में ऐसी घटना होना और मां को खो देना कितना कष्टदायक रहा होगा!”
इस त्रासदी से उपजी दृढ़ता को उजागर करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे एक पड़ोसी महिला ने मां की तरह कोविंद जी के पालन-पोषण में सहायता की, जिसने सामाजिक सद्भाव के प्रति उनकी समझ को गहराई से प्रभावित किया। श्री मोदी ने कहा, “इससे उन्होंने समाज की एकता और सद्भाव की शक्ति को समझा और उन कठिनाइयों ने कोविंद जी को और भी मजबूत बनाया।”
प्रधानमंत्री ने इस त्रासदी के बाद पिता की अहम भूमिका पर बल देते हुए बताया कि कोविंद जी के पिता ने परिवार का कुशलतापूर्वक मार्गदर्शन किया और बच्चों में अच्छे संस्कार डाले। श्री मोदी ने कहा, “जिस तरह उन्होंने परिवार को संभाला और बच्चों को अच्छे संस्कार दिए, उसी वजह से कोविंद जी अपने पिता को अपना आदर्श मानते हैं।”
प्रधानमंत्री ने अपने संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए कोविंद जी द्वारा शिक्षा पर की गई निर्भरता का उल्लेख करते हुए, देश के सर्वोच्च पद तक उनकी असाधारण यात्रा पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने कड़ी मेहनत की और संसाधनों की कमी को अपनी दुर्बलता नहीं बनने दिया, जिसके परिणामस्वरूप वे उस स्थान तक पहुंचे जिसकी उस समय लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी।”
प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति की अटूट विनम्रता की प्रशंसा करते हुए एक अत्यंत भावुक क्षण का स्मरण किया जब कोविंद जी ने अपने गांव परौंख लौटकर वहां की मिट्टी को प्रणाम किया और अपने पूर्व शिक्षकों के चरण स्पर्श किए। श्री मोदी ने कहा, “उनके आचरण ने भारत के मूल्यों की ऐसी छवि विश्व के समक्ष प्रस्तुत की जिस पर प्रत्येक भारतीय गर्व कर सकता है।”
प्रधानमंत्री ने सदियों की दासता से उत्पन्न ऐतिहासिक सामाजिक-आर्थिक आघातों पर विचार करते हुए, महात्मा गांधी, बाबासाहेब अंबेडकर और ज्योतिबा फुले जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के अथक संघर्षों और दूरदर्शी सपनों को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा, “कितने महान व्यक्तित्वों ने ऐसे भारत के पुनर्निर्माण का सपना देखा था, जहां सबसे निर्धन व्यक्ति को भी सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिल सके।”
प्रधानमंत्री ने इन ऐतिहासिक आकांक्षाओं को आधुनिक उपलब्धियों से जोड़ते हुए, कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों को समतावादी समाज के सदियों पुराने सपने को अथक परिश्रम से साकार करने का श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने परिश्रम और क्षमता से न केवल अपना जीवन बदला, बल्कि सदियों पुराने उस सपने को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”
इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित युवाओं की निरंतर आवश्यकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने ऐसी पीढ़ी का आह्वान किया जो बाधाओं से विचलित न हो और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की राह बनाने का साहस बनाए रखे। श्री मोदी ने कहा, “इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।”
प्रधानमंत्री ने आत्मकथा को महत्वपूर्ण प्रेरक साधन बताते हुए सुझाव दिया कि कोविंद जी के जीवन का विस्तृत विवरण युवा शक्ति को आकार देने के लिए एक निर्णायक मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा। श्री मोदी ने कहा, ” कोविंद जी की यह आत्मकथा ऐसी युवा शक्ति के निर्माण के लिए आवश्यक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।”
प्रधानमंत्री ने कोविंद जी के राजनीतिक उदय का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि कैसे मोरारजी देसाई के साथ काम करने से उनकी राष्ट्र सेवा की अंतर्निहित इच्छा को राजनीति में एक समर्पित करियर में परिवर्तित होने का अवसर मिला। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी के भीतर जो राष्ट्र सेवा की भावना थी, मोरारजी के साथ काम करके उन्हें उसके लिए एक मार्ग मिल गया।”
प्रधानमंत्री ने सेवा के निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए संसद में, राज्यपाल के रूप में और अंततः राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न भूमिकाओं में कोविंद जी के अटूट समर्पण की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने सेवा को अपना लक्ष्य बनाकर कार्य किया और संसद में उनका कार्यकाल इसका साक्षी है।”
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने परियोजना का निरीक्षण कर कार्य में तेजी लाने के दिये निर्देश
– *बैकुण्ठ धाम से क्रिकेट स्टेडियम तक बनेगा 2.3 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर, अगले माह से शुरू होगा कार्य*
ग्रीन काॅरिडोर परियोजना के अंतर्गत गोमती नदी पर निर्मित किये जा रहे बैकुण्ठ धाम ब्रिज पर जल्द ही वाहन फर्राटा भरेंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बुधवार को परियोजना का निरीक्षण करके नवम्बर, 2026 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। इस ब्रिज के बनने से निशातगंज से डालीबाग व हजरतगंज के मध्य सफर काफी आसान हो जाएगा और बड़ी आबादी को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि बैकुण्ठ धाम के पास गोमती नदी पर लगभग 70 करोड़ रूपये की लागत से 330 मीटर लंबा 6-लेन ब्रिज निर्मित किया जा रहा है। इसके बनने से समतामूलक और 1090 चौराहे पर ट्रैफिक का लोड काफी कम हो जाएगा। निशातगंज से डालीबाग व हजरतगंज की ओर जाने वाले लोग ब्रिज के माध्यम से सीधे सफर तय कर सकेंगे। बुधवार को स्थल निरीक्षण करके कार्य की प्रगति की समीक्षा की गयी, जिसमें पाया गया कि लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि सम्बंधित अधिकारियों को कार्य की गति बढ़ाकर नवम्बर, 2026 तक ब्रिज तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। काम पूरा होते ही आवागमन के लिए ब्रिज खोल दिया जाएगा।
*1090 चौराहे पर बनेगा 2.3 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर*
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि ग्रीन काॅरिडोर परियोजना के अंतर्गत बैकुण्ठ धाम से रिवर फ्रंट, क्रिकेट स्टेडियम के मध्य लगभग 2.3 किलोमीटर लंबा 4-लेन फ्लाईओवर निर्मित किया जाना है। लगभग 293 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले इस फ्लाईओवर के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्यदायी संस्था से अनुबंध करके अगले माह से फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाए।
*बैकुण्ठ धाम से कनेक्ट होगा फ्लाईओवर*
उपाध्यक्ष ने बताया कि फ्लाईओवर का निर्माण कार्य बैकुण्ठ धाम ब्रिज के एप्रोच प्वाइंट से ही शुरू कराया जाएगा। भविष्य में फ्लाईओवर बनने पर इसे बैकुण्ठ धाम ब्रिज से सीधा कनेक्ट कर दिया जाएगा, जिससे कि ग्रीन काॅरिडोर पर ट्रैफिक को बिना अवरोध गति प्रदान की जा सकेगी। निरीक्षण में एलडीए के मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, पीआईयू के प्रभारी ए0के0 सिंह सेंगर, अधिशासी अभियंता अजीत कुमार एवं मनोज सागर समेत अन्य अधिकारी व अभियंता उपस्थित रहे।
मुंबई, 12 अगस्त 26, आज सुबह घाटकोपर पश्चिम के चिराग नगर स्थित एक चॉल में भूस्खलन होने से सात लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। यह घटना सुबह लगभग 3 बजकर 48 मिनट पर हुई, जब एक छोटी पहाड़ी से मिट्टी और मलबा चॉल के दो से तीन कमरों पर गिर गया।
भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्य चलाया गया, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगम, दमकल विभाग, पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया के लगभग 50 कर्मी शामिल थे। घायलों का इलाज कुर्ला भाभा अस्पताल और राजावाड़ी अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने घटनास्थल का दौरा किया और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये और प्रत्येक घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि मानसून से पहले ही संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क किया गया था और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई थी।