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मैनपुरी में जमीन विवादों पर अब होगी तावड़तोड़ कार्रवाई

April 29, 2026

मैनपुरी में जमीन विवादों पर अब होगी तावड़तोड़ कार्रवाई

मैनपुरी। जनपद में वर्षों से चले आ रहे जमीन विवादों पर अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बड़ा फैसला लेते हुए 07 मई से “मिशन समाधान” अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। इस अभियान के तहत राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव पहुंचकर मौके पर ही विवादों का निपटारा करेंगी।
कागजों में नहीं धरातल पर होगा काम प्रशासन की रणनीति साफ है- अब फाइलों में नहीं, जमीन पर समाधान होगा। दोनों पक्षों की मौजूदगी में सीमांकन कराया जाएगा, पात्र को कब्जा दिलाया जाएगा और अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाएगा। खास बात यह है कि हर कार्रवाई का वीडियो, फोटो और दोनों पक्षों के हस्ताक्षर के साथ रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके बाद यदि कोई दोबारा विवाद खड़ा करता है तो सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी। जिले भर में एक साथ 24 टीमें इस अभियान में जुटेंगी। जिन गांवों में विवाद अधिक हैं, उन्हें प्राथमिकता सूची में रखा गया है। अभियान को तीन चरणों में बांटा गया है-पहले बड़े और लंबे समय से लंबित विवादों का निस्तारण, फिर क्लस्टर के आधार पर कार्रवाई और अंत में ऐसे गांवों को “विवाद रहित” घोषित किया जाएगा जहां कोई लंबित मामला नहीं बचेगा। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में निर्देश दिए हैं कि अब केवल फाइल फॉरवर्ड करने का दौर खत्म होगा। हर अधिकारी को खुद मौके पर जांच कर जवाब देना होगा। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई तय है। संदेश स्पष्ट है -तेजी, पारदर्शिता और स्थायी समाधान के जरिए ही जनता का भरोसा जीता जाएगा। “मिशन समाधान” से उम्मीद है कि मैनपुरी में जमीन विवादों की जड़ पर चोट होगी और लोगों को वर्षों की परेशानी से राहत मिलेगी।

विकास की लाइफ लाइन बनेगा एक्सप्रेस वे: नरेंद्र मोदी

उत्तर प्रदेश के हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

प्रविष्टि तिथि: 29 APR 2026 2:03PM by PIB Delhi

भारत माता की जय।

गंगा मइया की जय।

गंगा मइया की जय।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश जी पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी जितिन प्रसाद जी, पंकज चौधरी जी, यूपी सरकार के मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

सर्वप्रथम, मैं भगवान नरसिंह की इस पुण्य भूमि को प्रणाम करता हूं। यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर मां गंगा कृपा बहाती हुई गुजरती है। इसलिए, ये पूरा क्षेत्र ही तीर्थ से कम नहीं है। और मैं मानता हूं यूपी को एक्सप्रेसवे का ये वरदान, ये भी मां गंगा का ही आशीर्वाद है। अब आप कुछ ही घंटों में संगम भी पहुंच सकते हैं, और काशी में बाबा के दर्शन करके भी वापस आ सकते हैं।

साथियों,

जैसे मां गंगा हजारों वर्षों से यूपी की और इस देश की जीवन रेखा रही है, वैसे ही आधुनिक प्रगति के इस दौर में, उनके समीप से गुजरता ये एक्सप्रेसवे, ये यूपी के विकास की नई लाइफ लाइन बनेगा। ये भी अद्भुत संयोग है कि पिछले चार-पांच दिनों में, मैं मां गंगा के सानिध्य में ही रहा हूं। 24 अप्रैल को मैं जब बंगाल में था, तो मां गंगा के दर्शन किए थे, और फिर कल तो मैं काशी में था। आज सुबह ही फिर बाबा विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा और मां गंगा के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। और अब मां गंगा के नाम पर बने इस एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि यूपी सरकार ने इस एक्सप्रेसवे का नाम मां गंगा के नाम पर रखा है। इसमें विकास का हमारा विजन भी झलकता है, और हमारी विरासत के भी दर्शन होते हैं। मैं यूपी के करोड़ों लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे की बधाई देता हूं।

साथियों,

आज लोकतंत्र के उत्सव का भी एक अहम दिन है। बंगाल में इस समय दूसरे चरण का मतदान हो रहा है, और जो खबरें आ रही हैं, उनसे पता चलता है कि बंगाल में भारी मतदान हो रहा है। पहले चरण की तरह ही जनता वोट देने के लिए बड़ी संख्या में घरों से निकल रही हैं, लंबी-लंबी का कतारों की तस्वीरें सोशल मीडिया में छाई हुई हैं। पिछले 6-7 दशक में जो नहीं हुआ, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी, वैसे निर्भीक वातावरण में बंगाल में इस बार वोटिंग हो रही है। लोग भय मुक्त होकर वोट दे रहे हैं। ये देश के संविधान और देश के मजबूत होते लोकतंत्र का पुण्य प्रतीक है। मैं बंगाल की महान जनता का आभार व्यक्त करता हूं कि वो अपने अधिकार के प्रति इतनी सजग है, बड़ी संख्या में वोटिंग कर रही है। अभी वोटिंग खत्म होने में कई घंटे बाकी हैं, मैं बंगाल के जनता से आग्रह करूंगा कि लोकतंत्र के इस पर्व में ऐसे ही उत्साह से भाग लें।

साथियों,

कुछ समय पहले जब बिहार में चुनाव हुए, तो बीजेपी एनडीए ने प्रचंड जीत दर्ज की थी, एक इतिहास रच दिया था। अभी-अभी कल ही गुजरात में महा नगरपालिका, नगर पालिका, जिला पंचायतें, नगर पंचायतें, तहसील पंचायत, इन सबके चुनाव के नतीजे आए हैं। और आप मेरे उत्तरप्रदेश वासियों को खुशी होगी, 80 से 85 प्रतिशत नगर पालिका और पंचायतों को भाजपा ने जीत ली है। और मुझे विश्वास है कि इन पांच राज्यों के चुनाव में भी भाजपा ऐतिहासिक जीत की हैट्रिक लगाने जा रही है। 4 मई के नतीजे, विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करेंगे, देश के विकास की गति को नई ऊर्जा से भरेंगे।

साथियों,

देश के तेज विकास के लिए हमें तेजी से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निर्माण करना है। दिसम्बर 2021 में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करने मैं शाहजहाँपुर आया था। अभी 5 साल से भी कम समय हुआ है, और आप देखिए, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवेज में शुमार यूपी का सबसे लंबा ग्रीन कॉरिडॉर एक्सप्रेसवे, ये 5 साल के भीतर-भीतर बनकर तैयार हो गया है। आज

हरदोई से इसका लोकार्पण भी हो रहा है। यही नहीं, एक ओर गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हुआ है, तो साथ ही, इसके विस्तार की योजना पर काम भी शुरू हो गया है। जल्द ही, गंगा एक्सप्रेसवे, मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा। इसके और बेहतर उपयोग के लिए फ़र्रुख़ाबाद लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कर, इसे अन्य एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। ये है, डबल इंजन सरकार का विजन! ये है भाजपा सरकार के काम करने की स्पीड! ये है, भाजपा सरकार के काम का तरीका!

भाइयों-बहनों,

कुछ ही दिन पहले मुझे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण का अवसर मिला था। तब मैंने कहा था कि ये नए बनते एक्सप्रेसवे, विकसित होते भारत की हस्तरेखाएं हैं और ये आधुनिक हस्तरेखाएं, आज भारत के उज्ज्वल भविष्य का जयघोष कर रही हैं।

साथियों

अब वो दौर चला गया, जब एक सड़क के लिए दशकों तक इंतज़ार करना पड़ता था! एक बार घोषणा हो गई, तो वर्षों तक फाइलें चलतीं थीं! चुनाव के लिए पत्थर लग जाता था, उसके बाद सरकारें आती रहतीं थीं, जाती रहतीं थीं, लेकिन, काम का कुछ अता-पता नहीं लगता था। कभी-कभी तो पुराने फाइलें ढूंढने के लिए बड़े-बड़े अफसरों को दो-दो साल तक मेहनत करनी पड़ती थी। डबल इंजन सरकार में शिलान्यास भी होता है, और तय समय में लोकार्पण भी होकर के रहता है। इसलिए ही, आज यूपी के एक्सप्रेसवेज़ से भी ज्यादा रफ्तार अगर कहीं है, तो वो यूपी के विकास की रफ्तार ही है।

साथियों,

ये एक्सप्रेसवे केवल एक हाइस्पीड सड़क नहीं है। ये नई संभावनाओं का, नए सपनों का, नए अवसरों का गेटवे है। गंगा एक्सप्रेसवे करीब 600 किलोमीटर लंबा है। पश्चिमी यूपी में मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, सम्भल और बदायूँ। मध्य यूपी में शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली। पूर्वी यूपी में प्रतापगढ़ और प्रयागराज, इनके आस पास के दूसरे जिले, गंगा एक्सप्रेसवे, इससे इन इलाकों के करोड़ों लोगों का जीवन बदलेगा।

साथियों,

इन क्षेत्रों को गंगा जी और उनकी सहायक नदियों की उपजाऊ मिट्टी का वरदान मिला है। लेकिन, पहले की सरकारों ने जिस तरह किसानों की उपेक्षा की, उसके कारण किसान परेशानियों में ही घिरकर के रह गए! यहाँ के किसानों की फसलें बड़े बाज़ारों तक नहीं पहुँच पाती थीं। कोल्ड स्टोरेज की कमी थी। लॉजिस्टिक्स का अभाव था। किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता था। अब उन कठिनाइयों का समाधान भी तेजी से होगा। गंगा एक्सप्रेसवे से कम समय में बड़े बाज़ारों तक पहुँच मिलेगी। यहाँ खेती के लिए जरूरी इनफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। इससे हमारे किसानों की आय बढ़ेगी।

साथियों,

गंगा एक्सप्रेसवे यूपी के एक छोर को दूसरे छोर से तो जोड़ता ही है। ये NCR की असीम संभावनाओं को भी करीब लाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियाँ तो दौड़ेंगी ही, इसके किनारे नए औद्योगिक अवसर विकसित होंगे। इसके लिए हरदोई जैसे दूसरे जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर विकसित किए जा रहे हैं। इससे हरदोई, शाहजहाँपुर, उन्नाव समेत सभी 12 जनपदों में नए उद्योग आएंगे। अलग-अलग सेक्टर्स जैसे फार्मा, टेक्सटाइल आदि के क्लस्टर्स विकसित होंगे। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

साथियों,

हमारे ये युवा मुद्रा योजना और ODOP जैसी योजनाओं, उसकी ताकत से खुद भी नए-नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं। यहाँ छोटे उद्योग, MSMEs को बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा से उनके लिए भी नए रास्ते खुलेंगे। मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री, संभल का handicraft, बुलंदशहर के सिरेमिक, हरदोई का हैंडलूम, उन्नाव का लेदर, प्रतापगढ़ के आंवला प्रॉडक्ट्स, ये सब बड़े स्केल में देश दुनिया के मार्केट में पहुंचेगे। लाखों परिवारों की इससे आमदनी बढ़ेगी। आप मुझे बताइए, क्या पुरानी सपा सरकार में हरदोई, उन्नाव जैसे जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर बनाने की कल्पना तक हो सकती थी क्या? हमारे हरदोई से भी एक्सप्रेसवे गुजरेगा, ये कोई सोच सकता था क्या कभी? ये काम केवल भाजपा सरकार में ही संभव है।

साथियों,

पहले यूपी को पिछड़ा और बीमारू प्रदेश कहा जाता था। वही उत्तर प्रदेश, आज 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने के लिए आगे बढ़ रहा है। ये एक बहुत बड़ा लक्ष्य है। लेकिन, इसके पीछे उतनी ही बड़ी तैयारी भी है। क्योंकि, यूपी के पास इतनी असीम क्षमता है। देश की इतनी बड़ी युवा आबादी का potential यूपी के पास है। इस ताकत का इस्तेमाल हम यूपी को manufacturing हब बनाने के लिए कर रहे हैं। यूपी में नए उद्योग और कारखाने लगेंगे, यहाँ जब बड़ी मात्रा में निवेश आएगा, तभी यहाँ आर्थिक प्रगति के दरवाजे खुलेंगे, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भाइयों-बहनों,

इसी विज़न को केंद्र में रखकर बीते वर्षों में लगातार काम हुआ है। आप सब खुद भी महसूस कर रहे हैं, जिस यूपी की पहचान पहले पलायन से होती थी, आज उसे इन्वेस्टर्स समिट और इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर के लिए जाना जा रहा है। यूपी की इन्वेस्टर समिट में देश और दुनिया से कंपनियाँ आतीं हैं। यूपी में हजारों करोड़ रुपए का निवेश हो रहा है। आज अगर भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है तो, उसमें बहुत बड़ा योगदान यूपी का है। आज भारत जितने मोबाइल बना रहा है, उसमें आधे मोबाइल हमारे यूपी में बन रहे हैं। अभी कुछ ही हफ्ते पहले, मैंने नोएडा में सेमीकंडक्टर प्लांट का शिलान्यास भी किया है।

साथियों,

आप सब जानते हैं, AI के इस दौर में, सेमीकंडक्टर कितनी बड़ी फील्ड बनती जा रही है। यूपी उसमें भी लीड लेने के लिए आगे बढ़ रहा है। भविष्य में असीम अवसरों वाला बहुत बड़ा क्षेत्र

यूपी के लोगों के लिए खुल रहा है।

साथियों,

उत्तर प्रदेश का औद्योगिक विकास आज भारत की सामरिक ताकत भी बन रहा है। आज देश के दो डिफेंस कॉरिडॉर्स में से एक यूपी में है। बड़ी-बड़ी डिफेंस कंपनियाँ यहाँ अपनी फ़ैक्टरी लगा रहीं हैं। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें, जिनका लोहा दुनिया मानती है, आज वो यूपी में बन रहीं हैं। रक्षा उपकरणों के निर्माण में जो छोटे-छोटे पार्ट्स चाहिए होते हैं, उनकी सप्लाइ के लिए MSMEs को काम मिलता है। इसका बहुत बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के MSME सेक्टर को हो रहा है। छोटे-छोटे जिलों में भी अब युवा बड़े-बड़े उद्योगों से जुड़ने का सपना देख सकते हैं।

साथियों,

आज उत्तर प्रदेश इतनी तेज गति से विकास कर रहा है, क्योंकि, यूपी ने पुरानी सियासत को भी बदला है, और नई पहचान भी बनाई है। आप याद करिए, एक समय यूपी की पहचान गड्ढों से होती थी। आज वही यूपी, देश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवेज वाला प्रदेश बन चुका है। पहले यहाँ पड़ोस के जिले तक जाना भी बड़ा मुश्किल था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में 21 एयरपोर्ट हैं, 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। अब तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भी हो चुका है। गंगा एक्सप्रेसवे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुछ ही घंटों की दूरी पर है।

भाइयों-बहनों,

हमारा उत्तर प्रदेश भगवान राम और भगवान कृष्ण की धरती है। लेकिन, पिछली सरकारों ने अपनी करतूतों के कारण अपराध और जंगलराज को यूपी की पहचान बना दिया था। यूपी के माफियाओं पर फिल्में बनतीं थीं। लेकिन, अब यूपी की कानून व्यवस्था का देश भर में उदाहरण दिया जाता है।

भाइयों बहनों,

संसाधनों का बंदरबाँट करने वाले जिन सपाइयों के हाथ से सत्ता गई है, उन्हें यूपी की ये प्रगति

पसंद नहीं आ रही है। वो एक बार फिर यूपी को पुराने दौर में धकेलना चाहते हैं। वो एक बार फिर, समाज को बांटना और तोड़ना चाहते हैं।

साथियों,

समाजवादी पार्टी विकास विरोधी भी है और नारी विरोधी भी है। अभी बीते दिनों देश ने एक बार फिर सपा और काँग्रेस जैसी पार्टियों का असली चेहरा देखा है। केंद्र की NDA सरकार संसद में नारीशक्ति वंदन संशोधन लेकर आई थी। अगर ये संशोधन पास हो जाता, तो, साल 2029 के चुनाव से ही महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण मिलता! बड़ी संख्या में हमारी माताएँ बहनें सांसद विधायक बनकर दिल्ली-लखनऊ पहुँचती। वो भी, किसी और वर्ग की सीटें कम हुये बिना! लेकिन, सपा ने इस संशोधन बिल के खिलाफ वोट किया।

साथियों,

इस बिल से सभी राज्यों की सीटें भी बढ़तीं। हमने संसद में साफ साफ कहा था, सभी राज्यों की सीटें एक ही अनुपात में बढ़ेंगी। लेकिन यूपी को गाली देकर पॉलिटिक्स करने वाली DMK जैसी पार्टियां, उन्हें इस बात पर आपत्ति थी कि यूपी की सीटें क्यों बढ़ेंगी? आप देखिए, समाजवादी पार्टी संसद में उन्हीं के सुर में सुर मिला रही थी। ये सपा वाले यहाँ से आपके वोट लेकर संसद जाते हैं, और, संसद में यूपी के लोगों को गाली देने वालों के साथ खड़े होते हैं। इसीलिए, यूपी के लोग कहते हैं, समाजवादी पार्टी कभी सुधर नहीं सकती है। ये लोग हमेशा महिला विरोधी राजनीति ही करेंगे। ये हमेशा तुष्टीकरण और अपराधियों के साथ खड़े होंगे। सपा कभी भी परिवारवाद और जातिवाद से ऊपर नहीं उठ सकती। ये लोग हमेशा विकास विरोधी राजनीति ही करेंगे। यूपी को सपा और उसके सहयोगियों से सावधान रहना है।

साथियों,

आज देश एक ही संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है- विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी भूमिका है। आप सब देख रहे हैं, आज पूरी दुनिया कैसे

युद्ध, अशांति और अस्थिरता में फंसी हुई है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों में हालात खराब हैं। लेकिन, भारत विकास के रास्ते पर उसी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। बाहर के दुश्मनों को ये पसंद नहीं आ रहा। भीतर बैठे कुछ लोग भी सत्ता की भूख में भारत को नीचा दिखाने की कोशिशों में लगे हैं। फिर भी, हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि, विकास के नए-नए कीर्तिमान भी गढ़ रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम आधुनिक से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं। गंगा एक्सप्रेसवे इसी दिशा में एक और मजबूत कदम है। मुझे विश्वास है, गंगा एक्सप्रेसवे, जिन संभावनाओं को हमारे दरवाजे तक लेकर आएगा, यूपी के लोग अपने परिश्रम और अपनी प्रतिभा से उन्हें साकार करके रहेंगे। इसी संकल्प के साथ, आप सभी को एक बार बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद!

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

बहुत-बहुत धन्यवाद

प्रदेश के विकास का एक्सप्रेस वे बनेगा गंगा एक्सप्रेस वे मृत्युंजय दीक्षित

Mratunjay Dixit, Journalist lucknow

मृत्युंजय दीक्षित
उत्तर प्रदेश में अवस्थापना विकास के क्रम में निर्मित गंगा एक्सप्रेस वे आम जनमानस के लिए खुल रहा है जिसे प्रदेश के विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस वे प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र (दिल्ली -एनसीआर) को पूर्वी क्षेत्र से जोड़ने वाला पहला सीधा हाई स्पीड एक्सप्रेस वे है। इस परियोजना पर 36,230 करोड़ की लागत आर्इ है। यह एक्सप्रेस वे मेरठ के बिजौली गाँव से प्रारंभ होकर बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, शाहजहांपुर, संभल, बंदायू, उन्नाव, हरदोई, प्रतापगढ़, रायबरेली होते हुए प्रयागराज जिले के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा। इस एक्सप्रेस वे के प्रारंभ हो जाने के बाद देश के एक्सप्रेस वे नेटवर्क में यूपी की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत हो जाएगी और परियोजनाओं की कुल लंबाई 1910 किमी हो जाएगी। छह लेन का यह एक्सप्रेस वे पूरी तरह ग्रीनफील्ड व एक्सेस -कंट्रोल्ड है। इसमें 3.75 मीटर चौड़ी सर्विस रोड, 17 टोल प्लाजा 8 मुख्य पुल और 381 अंडरपास शामिल हैं।
यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस है जिस पर होटल, ढाबा और ईवी चार्जिंग स्टेशन से लेकर अस्पताल तक बनाए गए हैं। इस एक्सप्रेस वे पर विश्वस्तरीय फूड चेन और मोटेल तक की सुविधाएं मिलेगी। 594 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे का 80 प्रतिशत निर्माण अडानी इंटरप्राइजेज ने किया है।अडानी ने प्रयागराज से बदायूं तक 464 किमी लंबा एक्सप्रेस वे बनाया है जबकि शेष 20 प्रतिशत आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर ने बनाया है।
एक्सप्रेस वे मतल्टीनेशनल चेन भी उपलब्ध – एक्सप्रेस वे पर लखनऊ के खानपान और चिकनकारी की झलक दिखाई पड़ेगी। इस वे पर एक बड़ा डाइनिंग फूड एरिया विकसित किया गया है। पहली बार किसी एक्सप्रेस वे पर ट्रक लेन बनाया गया है। मोटेल भी तैयार हो गया है जहां विश्राम के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे उपलब्ध हैं। स्टारबक्स जैसे बड़े ब्रांड के साथ गंगा भोग ढाबा भी है। इसमें लोकप्रिय मुरथल ढाबे को लाने का भी प्रयास चल रहा है। यहां पर एक ट्रामा सेन्टर भी तैयार किया गया है।एक्सप्रेस वे पर सुविधा केंद्रों में बच्चों के लिए चिल्ड्रन प्ले एरिया भी बनाया गया है जहां बच्चों के खेलने के लिए झूला पार्क भी बनाया गया है।ड्राइवरों के लिए भी अलग- अलग विश्राम एरिया बनाया गया है।हर क्षेत्र में वाहनों के लिए सर्विस सेंटर बनाया गया है।यह एक्सप्रेस वे 12 जिलों को जोड़ते हुए प्रयागराज से मेरठ की दूरी मात्र 6 घंटे में समेट देगा। वाहनों की 120 किमी प्रति घंटा गति, एयर स्ट्रिप, हाईटेक टेाल और दुर्घटना रोकने वाली अलर्ट स्ट्रिप्स जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस यह एक्सप्रेस वे प्रदेश की कनेक्टिविटी के परिदृश्य को बदलकर रख देगा।
वायुसेना के लिए भी अहम बनेगा एक्सप्रेस वे – यह एक्सप्रेस वे नागरिकों का सफर आसान बनाने के साथ ही भारतीय वायुसेना की ताकत भी बनने वाला है। एक्सप्रेस वे पर शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किमी की हवाई पट्टी का भी निर्माण किया गया है। आपातकालीन स्थिति व युद्ध होने पर रणनीतिक तौर पर यह हवाई पट्टी लड़ाकू विमानों के उतरने व उड़ान भरने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी। इस हवाई पट्टी का निर्माण सभी प्रकार के लड़ाकू व परिवहन विमानों के हिसाब से किया गया है। इस पर राफेल सुखोई -0 एमकेआई मिराज 2000 जगुआर और मिग 29 जैसे लडाकू और सी -130 जे सुपर हरक्यूलिस और एएन -32 जैसे वायुसेना के विमान उतरने के साथ-साथ उड़ान भी भर सकेंगे। इस पर रात में भी लड़ाकू विमानो के उतरने और उड़ान भरने की सुविधा होगी। इसके लिए एक्सप्रेस वे पर प्रीसिज़न अप्रोच लाइंटिंग सिस्टम व उन्नत नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही इाई इंटेसिटी रनवे लाइटिंग का उपयोग किया गया है। हवाई पट्टी की सुरक्षा के लिए 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जो किसी भी आपातकालीन स्थिति पर नज़र रखने के लिए सहायक हैं।
इस एक्सप्रेस वे का संचालन पूरी तरह आरम्भ हो जाने के बाद 12 जिलों के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी जिससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे तथा पलायन कम होगा। प्रदेश सरकार की योजना इसके किनारे 27 औद्योगिक क्लस्टर बनाने की है जिसके लिए भूमि का अधिग्रहण हो चुका है और आवंटन चल रहा है।इससे रसद आपूर्ति, खाद्य प्रसंस्करण वस्त्र उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। मेरठ के खेल उद्योग, हापुड़ के हथकरघा, बंदायू के जरी जरदोजी और प्रयागराज के कृषि उत्पादों को अब दिल्ली और पूर्वांचल के बाजारो तक पहुंचना आसान होगा।
प्रमुख विशेषताएं – इस एक्सप्रेस वे की पूरी सड़क पर जल संचयन प्रणाली लगाई गई है ताकि वर्षा का जल सीधे जमीन के अंदर जाए और भूजल स्तर पर बना रहे। यह भारत का सबसे लंबा निरंतर नियंत्रित प्रवेश एक्सप्रेस वे है जहां आवारा पशुओं व स्थानीय यातायत के अनियंत्रित प्रवेश को पूरी तरह से रोका गया है। यह परियोजना टिकाऊ इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके निर्माण में भारी मात्रा में कोयले की राख का उपयोग किया गया है जो प्रदूषणा कम करने में सहायक है। पहले सभ्यताएं नदियों के किनारे बसती थीं किंतु अब एक्सप्रेस वे के किनारे होती हैं इसे ध्यान मे रखते हुए एक्सप्रेस वे किनारे 18 लाख से अधिक पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण की गुणवत्ता को एक्सीलेंट रेटिंग मिली है ।
विशिष्ट सुरक्षा तकनीक भी – यहां पर विशिष्ट सुरक्षा तकनीक का प्रयोग किया गया है। सड़क के दोनों किनारों पर व्हाइट एलर्ट स्ट्रिप लगाई गई है। यदि किसी चालक को झपकी आ जाए और वाहन इन स्ट्रिप पर चढ़ जाए तो तेज कंपन और आवाज पैदा होगी जिससे चालक तुरंत सतर्क हो जाएगा और दुर्घटना टल जाएगी। इस सड़क पर चलने के दौरान झटके और कंपन महसूस नही होंगे।
मंदिर आर्थिकी व पर्यटन को गति मिलेगी – गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण हो जाने के बाद अब मंदिर आधारित आर्थिकी व पर्यटन को भी गति मिलेगी। यह एक्सप्रेस वे यात्रा को ही आसान नहीं करेगा अपितु प्रदेश में आध्यात्मिक व धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा । 12 जिलों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेस वे से प्रमुख आध्यात्मिक व धार्मिक स्थल जुड़ रहे हैं – इनमें गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिकादेवी शक्ति पीठ और त्रिवेणी संगम शामिल हैं। एक्सप्रेस वे शुरू हो जाने के बाद श्रद्धालु इन तीर्थों के दर्शन आसानी से कर सकेंगे । आगामी समय में वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र तक इसका विस्तार किया जिससे वाराणसी , विन्ध्याचल और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी।

बिजनौर में शिक्षा प्रेरकों ने बकाया की मांग को लेकर धरना दिया

किरतपुर 29 अप्रैल।साक्षर भारत मिशन के तहत संविदा पर प्रत्येक ग्राम सभा में रखे गए जनपद बिजनौर के शिक्षा प्रेरकों ने बकाया मानदेय के भुगतान के लिए आज खंड शिक्षा अधिकारी किरतपुर के कार्यलय में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। धरना स्थल पर पहुंचे उप सचिव – साक्षर भारत मिशन /खंड शिक्षा अधिकारी किरतपुर एवं खंड विकास अधिकारी किरतपुर को अपने बकाया मानदेय भुगतान संबंधित दो सूत्रीय मांग पत्र दिया।

धरना स्थल पर एकत्र हुए विकास खंड किरतपुर के शिक्षा प्रेरको ने सरकार पर प्रेरकों को बेरोजगार करने और उनका लगभग 18 महीने का मानदेय न देने का आरोप लगाते हुए शिक्षा प्रेरकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। तथा कहा कि साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 -10 में पूरे प्रदेश में साक्षर भारत मिशन योजना लागू करके प्रत्येक ग्राम सभा पर एक महिला एवं एक पुरुष प्रेरक को तैनात करके 15 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित करने का कार्य दिया था। लेकिन सरकार ने जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरको के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए साक्षर भारत मिशन योजना को 31 मार्च 2018 को बंद कर दिया था। सरकार द्वारा प्रेरकों से बीएलओ से लेकर हाउसहोल्ड सर्वे और अन्य सरकारी योजनाओं में भी काम लिया गया था। इन सब के बावजूद भी अकेले जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरकों को उनका 18 माह का मानदेय आठ वर्ष बाद भी नहीं दिया गया। जिसके कारण बेरोजगारी का दंश झेल रहे प्रेरकों के परिवार में रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस अवसर पर प्रेरक एकता कल्याण समिति (पंजीकृत) के जिला अध्यक्ष पुखराज सिंह मलिक ने बताया कि बकाया मानदेय के संबंध में भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 को साक्षरता विभाग की ऑडिट कराई गई थी। ऑडिट टीम द्वारा धनराशि के सापेक्ष वांछित साक्षरता कर्मियों का सत्यापन/ प्रमाणित विवरण निर्धारित प्रपत्र पर उपलब्ध करा कर साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों का अवशेष मानदेय का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन भारत सरकार ने बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनके अवशेष मानदेय 8 वर्ष बाद भी निर्गत नहीं किया। जिसके चलते बेरोजगार हो चुके शिक्षा प्रेरकों के परिवार में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। धरना स्थल पर पहुंचे प्रेरक एकता कल्याण समिति के जिला अध्यक्ष श्री पुखराज सिंह मलिक ने भारत सरकार से मांग की कि साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य कर चुके और बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को उनका बकाया मानदेय एक मुफ्त दिलाया जाए तथा साक्षरता कर्मियों को अनुभव के आधार पर किसी भी विभाग में समायोजित किया जाए। अथवा बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को बेरोजगारी भत्ता दिलाया जाए। साक्षरता कर्मियों ने इस अवसर पर उप बेसिक शिक्षा अधिकारी किरतपुर एवं खंड विकास अधिकारी किरतपुर को प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम दो सूत्रीय मांग पत्र देकर प्रेरकों का मानदेय एकमुश्त दिलाने एवं साक्षरता कर्मियों को किसी भी विभाग में समायोजित करने की मांग की। ब्लॉक अध्यक्ष बाबूराम सिंह की अध्यक्षता एवं महिपाल सिंह के संचालन में संपन्न सांकेतिक धरना प्रदर्शन में सर्वश्री चौधरी ईशम सिंह (जिला महामंत्री), रविंद्र सिंह, अंजार अहमद, बाबूराम सिंह, महिपाल सिंह, मनीराम सिंह, तारा सिंह, दिलशाद आलम, कनक देवी, मनोहरी देवी, शबनम परवीन, नाजिया परवीन, भीम सिंह, भूपेंद्र सिंह आदि सैकड़ो प्रेरक उपस्थित रहे।

श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब

महात्मा रामचन्द्र जी महाराज की 127 वीं जयंती समारोह में गूंजी आध्यात्मिक चेतना
हजारों अभ्यासियों ने ध्यान साधना कर की विश्व कल्याण की कामना
( संजीव गुप्त द्वारा )
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज बाबूजी की 127 वीं जयंती समारोह का शुभारंभ ध्यान-साधना से हुआ।
हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान कर मानव कल्याण एवं विश्व शांति के लिए मंगल की कामना कीं। संपूर्ण आश्रम परिसर शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर पूज्य दाजी ने वर्चुअल माध्यम से दिये अपने संदेश में कहा कि
हर वह स्वप्न जो बिना प्रयास किए ही मर जाता हैै, वह स्वप्न देेखनेे वालेे को उस
स्वप्न की तुुलना मेंं कहींं अधिक निरंंतरता सेे सताता हैै जिसेे पूूरा करनेे की कोोशिश
की गई और वह नाकाम रहीी। यही वह ज्ञान हैै, जिसेे परंंपरााएँँ सदा सेे सिखाती आई
हैंं – अपूूर्णता केे संंस्कार, असफलता केे संंस्कारोंं सेे अधिक गहरेे घाव देेतेे हैंं। एक
पूूर्ण किया गया कार्य, चाहेे उसका अंंत दुु:खद ही क्योंं न हो, उसमेंं ऐसी सच्चाई
होती हैै जो शांंति प्रदान करती हैै जबकि छोड़ेे गए स्वप्न मेंं ऐसी कोई सच्चाई नहींं
होती। वह चेेतनाा मेंं जीवित रहता हैै, अनसुुलझा जोो निरंंतर वही प्रश्न पूूछता रहता
हैै, जिसका उत्तर देेनेे सेे भय हमेंं रोकता हैै। सहज मार्ग साधना पद्धति और हार्टफुुलनेेस केे अभ्यास मेंं जब हम शाम की सफ़ाई करतेे हैंं तब हम बैैठकर दिन भर केे संंस्कारोंं को पीछेे सेे बाहर निकल जानेे देेतेे हैंं। हमनेे जो किया, जो कहा, जो अनुुभव किया, उसेे हम अपनेे तंंत्र सेे निकाल देेतेे हैंं। लेेकिन उन संंस्कारोंं का क्या जो न किए गए कर्मोंं सेे
बनतेे हैंं? वह संंवाद, जिसेे हमनेे टाल दिया, वह सत्य जिसेे हमनेे कहा नहींं, वह
कदम जिसेे हमनेे उठाया नहींं, वह प्रेेम जिसेे हमनेे व्यक्त नहींं किया येे सभी
अकर्म भीअपनेे पीछेे छापेंं छोड़तेे हैंं। उन्होंने बताया कि दिव्य प्राणाहुति की जीवंत धारा अल्प समय में ही निष्ठापूर्ण दैनिक अभ्यास द्वारा साधक को समाधि की अवस्थाओं तक पहुँचा देती है। यह अमूल्य विद्या कालांतर में लुप्तप्राय हो गई थी, जिसे मिशन के आदि गुरु लाला जी महाराज ने पुनः खोजकर मानवता को प्रदान किया। इस पावन परंपरा को पूज्य बाबूजी महाराज ने जन–जन तक पहुँचाकर हृदय से हृदय तक आध्यात्मिक चेतना का वास्तविक संप्रेषण किया।
पूज्य दाजी ने अभ्यासियों का आवाहन किया कि वे अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पथ पर अग्रसर हों तथा अपने जीवन को साधना का सजीव माध्यम बनाएं।


सायंकालीन ध्यान सत्र में भी साधकों ने ध्यान साधना कर वातावरण और अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। आयोजन में उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, केंद्र प्रभारी सर्वेश चंद्रा, ए के गर्ग, आश्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार सिंह, राजगोपाल अग्रवाल,श्री गोपाल अग्रवाल, ममता सिंह, सुयश सिन्हा, कृष्णा भारद्वाज, हर्षवर्धन अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, राजीव श्रीवास्तव, सुरेंद्र मोहन सिन्हा, माया सिंह, अभिषेक आदि का विशेष सहयोग रहा।

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