महात्मा रामचन्द्र जी महाराज की 127 वीं जयंती समारोह में गूंजी आध्यात्मिक चेतना
हजारों अभ्यासियों ने ध्यान साधना कर की विश्व कल्याण की कामना
( संजीव गुप्त द्वारा )
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज बाबूजी की 127 वीं जयंती समारोह का शुभारंभ ध्यान-साधना से हुआ।
हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान कर मानव कल्याण एवं विश्व शांति के लिए मंगल की कामना कीं। संपूर्ण आश्रम परिसर शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर पूज्य दाजी ने वर्चुअल माध्यम से दिये अपने संदेश में कहा कि
हर वह स्वप्न जो बिना प्रयास किए ही मर जाता हैै, वह स्वप्न देेखनेे वालेे को उस
स्वप्न की तुुलना मेंं कहींं अधिक निरंंतरता सेे सताता हैै जिसेे पूूरा करनेे की कोोशिश
की गई और वह नाकाम रहीी। यही वह ज्ञान हैै, जिसेे परंंपरााएँँ सदा सेे सिखाती आई
हैंं – अपूूर्णता केे संंस्कार, असफलता केे संंस्कारोंं सेे अधिक गहरेे घाव देेतेे हैंं। एक
पूूर्ण किया गया कार्य, चाहेे उसका अंंत दुु:खद ही क्योंं न हो, उसमेंं ऐसी सच्चाई
होती हैै जो शांंति प्रदान करती हैै जबकि छोड़ेे गए स्वप्न मेंं ऐसी कोई सच्चाई नहींं
होती। वह चेेतनाा मेंं जीवित रहता हैै, अनसुुलझा जोो निरंंतर वही प्रश्न पूूछता रहता
हैै, जिसका उत्तर देेनेे सेे भय हमेंं रोकता हैै। सहज मार्ग साधना पद्धति और हार्टफुुलनेेस केे अभ्यास मेंं जब हम शाम की सफ़ाई करतेे हैंं तब हम बैैठकर दिन भर केे संंस्कारोंं को पीछेे सेे बाहर निकल जानेे देेतेे हैंं। हमनेे जो किया, जो कहा, जो अनुुभव किया, उसेे हम अपनेे तंंत्र सेे निकाल देेतेे हैंं। लेेकिन उन संंस्कारोंं का क्या जो न किए गए कर्मोंं सेे
बनतेे हैंं? वह संंवाद, जिसेे हमनेे टाल दिया, वह सत्य जिसेे हमनेे कहा नहींं, वह
कदम जिसेे हमनेे उठाया नहींं, वह प्रेेम जिसेे हमनेे व्यक्त नहींं किया येे सभी
अकर्म भीअपनेे पीछेे छापेंं छोड़तेे हैंं। उन्होंने बताया कि दिव्य प्राणाहुति की जीवंत धारा अल्प समय में ही निष्ठापूर्ण दैनिक अभ्यास द्वारा साधक को समाधि की अवस्थाओं तक पहुँचा देती है। यह अमूल्य विद्या कालांतर में लुप्तप्राय हो गई थी, जिसे मिशन के आदि गुरु लाला जी महाराज ने पुनः खोजकर मानवता को प्रदान किया। इस पावन परंपरा को पूज्य बाबूजी महाराज ने जन–जन तक पहुँचाकर हृदय से हृदय तक आध्यात्मिक चेतना का वास्तविक संप्रेषण किया।
पूज्य दाजी ने अभ्यासियों का आवाहन किया कि वे अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पथ पर अग्रसर हों तथा अपने जीवन को साधना का सजीव माध्यम बनाएं।

सायंकालीन ध्यान सत्र में भी साधकों ने ध्यान साधना कर वातावरण और अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। आयोजन में उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, केंद्र प्रभारी सर्वेश चंद्रा, ए के गर्ग, आश्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार सिंह, राजगोपाल अग्रवाल,श्री गोपाल अग्रवाल, ममता सिंह, सुयश सिन्हा, कृष्णा भारद्वाज, हर्षवर्धन अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, राजीव श्रीवास्तव, सुरेंद्र मोहन सिन्हा, माया सिंह, अभिषेक आदि का विशेष सहयोग रहा।
