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OHCR दोहरा चरित्र

October 12, 2026

OHCR दोहरा चरित्र

एडिटोरियल 12 अक्टूबर 2026 सोमवार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग कार्यालय ने भारत के आंतरिक मामलों मे हस्ताक्षऐप कर अनाधिकार चेष्टा की है। रविवार को उच्चायोग कार्यलय ने राजधानी दिल्ली मे हुए 10 अक्टूबर के प्रदर्शन मे पुलिस कार्यवाई को अनावश्यक और अधिक बल प्रयोग बताया है। आयोग ने सी जे पी के प्रदर्शन का समर्थन किया, गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग की। घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। ओएचसी एच आर की यह हरकत किसी भी हालत मे स्वीकार नहीं की जा सकती। ये भारत के प्रति कटुता और भेदभाव को दर्शाता हैं। दिल्ली पुलिस ने जो भी कार्रवाई की वो आवश्यक थी। आखिर पुलिस की भी अपनी कुछ जिम्मेदारी हैं। पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग किया।

दूसरी तरफ इस संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग की नाक के नीचे पुरे यूरोप मे पुलिस जनता पर अत्यचार कर रही हैं उसे ये दिखाई नहीं देता। पाकिस्तान ने दो महीने पहले पुलिस और सेना लगाकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर मे लोगों पर गोली चलई। 40 से अधिक लोग मारे गए। पाक सेना और पुलिस बलुचिस्तान और खेबर पाखंटून खवा मे लोगों को मर रही हैं। वहा इस उच्चायोग को कुछ दिखयी नहीं देता।

फ्रांस मे उग्र प्रदर्शन हुए, वहाँ 7000 लोग गिरफ्तार हुए।

भारत मे हुए प्रदर्शन का समर्थन और तत्काल प्रतिक्रिया ये भी दर्शाती है की विदेश की कितनी रूचि भारत सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन मे है। सरकार के खिलाफ जो भी प्रदर्शन हो रहे हैँ वे उन्हीं दलों के हैँ जो पहले से मोदी और भाजपा के विरोधी हैँ। केवल कोक्रोच जनता पार्टी नया समूह उभरा है। इस पार्टी के दो नेता अभिजीत दीपके और ध्रुव राठी विदेश से आकर भारत मे प्रफर्शनकारी बने हैं। दरअसल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कांग्रेस ने की थी। राहुल गाँधी ने सरकार के साथ मिलकर चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया। इसके लिए दो दिन तक कांग्रेस ने मार्च और राजघाट पर धरना किया। इसी मांग को सीजेपी आगे बढ़ा दिया। इसमें कम्युनिस्ट पार्टियां, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस ने भी समर्थन कर उग्र प्रदर्शन की योजना बनायीं। इससे निपटने के लिए सरकार ने आवश्यक उपाय किये। पुरे दिन दिल्ली की सड़कों पर अफरा तफरी रही। बगैर अनुमति प्रदर्शन की योजना बना कर सीजेपी ने दिल्ली के जंतर मंतर जाने का प्रयास किया जिसे पुलिस ने विफल कर दिया गया। प्रदर्शनकरियों ने बेरीकेड्स तोड़ दिए। पुलिस से बदसुलुकी की। लेकिन पुलिस ने संयम का परिचय दिया। कहीं कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई। नेताओं की गिरफ़्तारी हुई। लेकिन आश्चर्यजनक ये हैं की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार को यहाँ मनवाधिकारों का उल्लंघन दिखयी दिया।

भारत मे एक वर्ग और कुछ पार्टी ऐसी हैं जो नरेंद्र मोदी और भाजपा को सत्ता मे नहीं देखना चाहती। वे हर हाल मे उन्हें सत्ता से हटाना चाहती है। कोई भी मुद्दा हो एवएकजुट हो जाती हैं। चाहे वो किसान आंदोलन हो या सी ए ए विरोधी आंदोलन हो। सब मोदी विरोधी एकजुट हो जाते हैं। आंदोलन को जेन जी की आवाज बताकर युवाओं को जुटाया जाता है। पहले धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग, अब ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा की मांग हो रही है। कुछ दिन बाद ये नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगेंगे।

आज की परिस्थितियों मे जागरूक समाज को बहुत सतर्क रहने की जरुरत है। देश कमजोर न हो, विकास वधित न हो। विदेशी हसक्षेप ना हो। इसलिए ऐसे मंसूबों का विफल होना जरुरी है जो युवा शक्ति को गुमराह कर अपनी राजनीती चमका रहे हैं।