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वेतन एवं सेवा-शर्तों में न्यायसंगत सुधारों की मांग, आठवें वेतन आयोग से मिला शैक्षिक महासंघ

August 11, 2026

वेतन एवं सेवा-शर्तों में न्यायसंगत सुधारों की मांग, आठवें वेतन आयोग से मिला शैक्षिक महासंघ

नई दिल्ली/लखनऊ, 10 अगस्त 2026।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना देसाई, सदस्य सचिव श्री पंकज जैन एवं अन्य अधिकारियों से नई दिल्ली स्थित आयोग कार्यालय में भेंटवार्ता की। प्रतिनिधिमंडल में महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता एवं महामंत्री प्रो. गीता भट्ट शामिल रहे। महासंघ ने देशभर से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार विस्तृत ज्ञापन के विभिन्न बिंदुओं पर आयोग के समक्ष चर्चा की।

महासंघ ने मांग की कि वेतन पुनरीक्षण में महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, वास्तविक क्रय शक्ति तथा सेवा एवं सेवानिवृत्ति के दौरान आर्थिक सुरक्षा को प्रमुख आधार बनाया जाए। ज्ञापन में फिटमेंट फैक्टर 3.6 से बढ़ाकर 3.8, वार्षिक वेतनवृद्धि 5 से बढ़ाकर 6 प्रतिशत, उच्च वेतन स्तरों में अतिरिक्त चरण, वन स्टेप अप व्यवस्था की पुनर्बहाली तथा समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग रखी गई।
महासंघ ने महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत होने पर मूल वेतन में स्वतः समायोजन, मकान किराया भत्ते में वृद्धि, यात्रा भत्ते का वर्तमान लागत के अनुरूप पुनरीक्षण तथा आधिकारिक यात्राओं के पूर्ण व्यय की प्रतिपूर्ति का सुझाव दिया।
शिक्षकों एवं कर्मचारियों के व्यावसायिक विकास और शोध के लिए वित्तीय सहायता, डिजिटल एवं शैक्षणिक संसाधनों हेतु पृथक भत्ता, गृह निर्माण अग्रिम में वृद्धि तथा अवकाश सुविधाओं के विस्तार की मांग भी रखी गई।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 20-25 लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा, समूह बीमा सुरक्षा में वृद्धि तथा एलटीसी नकदीकरण बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया। पूरे सेवाकाल में कम से कम चार पदोन्नति के अवसर सुनिश्चित करने तथा कृत्रिम अवरोध समाप्त करने पर भी जोर दिया गया।
सेवानिवृत्ति सुरक्षा के तहत अंतिम आहरित वेतन के 60-67 प्रतिशत तक सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन में वृद्धि, ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने तथा पेंशन आंशिकीकरण की पुनर्बहाली अवधि घटाने की मांग की गई।
महासंघ ने आयोग से आग्रह किया कि आठवां केंद्रीय वेतन आयोग केवल वेतन संशोधन तक सीमित न रहकर वेतन, भत्ते, सेवा-शर्तों, पदोन्नति, अवकाश, सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन की समग्र समीक्षा करे। महासंघ ने लगभग पांच वर्ष के नियमित वेतन पुनरीक्षण चक्र अथवा महंगाई से जुड़ी स्वचालित पुनरीक्षण व्यवस्था लागू करने का भी सुझाव दिया।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. संजय मेधावी, प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह, शिवशंकर सिंह, डॉ. उदयन मिश्रा, डॉ. कमल कौशिक, प्रो. धर्मेन्द्र कुमार सिंह, ड. अनूप शर्मा, डॉ. स्वदेश कुमार सिंह, डॉ. श्वेता, प्रो. अनिल कुमार, डॉ. संतोष कुमार शुक्ल, प्रदीप तिवारी, सुनील कुमार मिश्र आदि पदाधिकारियों ने शिक्षक और शिक्षा हित में की गयी माँगों का समर्थन किया है।

सिविल चिकित्सालय में पहली बार गंभीर न्यूरोसर्जरी सफलतापूर्वक प्रारंभ

लखनऊ, 10 अगस्त 2026 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय, लखनऊ में न्यूरोसर्जन की तैनाती के बाद पहली बार गंभीर न्यूरोसर्जरी का सफलतापूर्वक शुभारंभ हुआ। चिकित्सालय में न्यूरोसर्जरी की यह उपलब्धि गंभीर एवं जटिल रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

चिकित्सालय के निदेशक एवं प्रमुख अधीक्षक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने सफल शल्यक्रिया के लिए पूरी शल्य टीम को बधाई देते हुए कहा कि सिविल चिकित्सालय पीड़ित मानवता की सेवा के लिए पूरी तरह तत्पर है। उन्होंने कहा कि सरकारी चिकित्सालय में इस प्रकार की जटिल न्यूरोसर्जरी का सफल होना मरीजों को बेहतर एवं सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रीढ़ की हड्डी में टीबी के कारण स्पाइनल कॉर्ड पर था दबाव

जनपद सिद्धार्थनगर के मधुकरपुर गांव निवासी विनय तिवारी (37 वर्ष) पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से कमर में गंभीर दर्द से पीड़ित थे। मरीज को टीबी की बीमारी भी थी। लगातार समस्या बने रहने पर उन्होंने सिविल चिकित्सालय में न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी से परामर्श लिया।

मरीज की जांच एवं MRI में रीढ़ की हड्डी के L3 vertebra में TB infection के कारण स्पाइनल कॉर्ड/न्यूरल संरचनाओं पर गंभीर दबाव पाया गया। इसके कारण मरीज के बाएं पैर की जांघ एवं घुटने के नीचे की मांसपेशियों की ताकत काफी कम हो रही थी। चिकित्सकों के अनुसार, यदि समय रहते उचित उपचार नहीं किया जाता तो मरीज के दोनों पैरों में स्थायी कमजोरी अथवा पैरालिसिस का गंभीर खतरा हो सकता था।

डॉ. विनोद कुमार तिवारी के अनुसार, ऐसी स्थिति में शल्यक्रिया अत्यंत सावधानी एवं विशेषज्ञता के साथ करना आवश्यक होता है, क्योंकि स्पाइनल कॉर्ड एवं संबंधित न्यूरल संरचनाओं को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त क्षति होने पर होने वाली न्यूरोलॉजिकल कमजोरी स्थायी भी हो सकती है।

टाइटेनियम स्क्रू एवं रॉड से किया गया फिक्सेशन

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी के नेतृत्व में शल्यक्रिया की तैयारी की गई। अनुभवी एनेस्थीसिया टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। शल्यक्रिया के दौरान L2-L4 spinal fixation करते हुए Titanium screws एवं rods का उपयोग किया गया।

ऑपरेशन लगभग दो घंटे चला और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

डॉ. तिवारी ने बताया कि इसी प्रकार की जटिल शल्यक्रिया निजी क्षेत्र में कराने पर लगभग 3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जो सामान्य परिवारों के लिए वहन करना कठिन होता है। सिविल चिकित्सालय में यह उपचार उपलब्ध होने से मरीजों को अत्यंत महत्वपूर्ण राहत मिलेगी।

ऑपरेशन के बाद मरीज के पैरों में ताकत में सुधार

ऑपरेशन के बाद मरीज विनय तिवारी की स्थिति संतोषजनक है। वर्तमान में उनका उपचार सिविल चिकित्सालय के न्यूरोसर्जरी वार्ड में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज के पैरों में ताकत आनी शुरू हो गई है तथा वह दोनों पैरों को चला पा रहा है।

मरीज की पत्नी श्रीमती सोनी तिवारी ने समय पर उपचार एवं सफल शल्यक्रिया के लिए सिविल चिकित्सालय के चिकित्सकों एवं पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

एनेस्थीसिया एवं नर्सिंग टीम का महत्वपूर्ण योगदान

सफल शल्यक्रिया में एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में डॉ. राजेश, डॉ. कासिम की अनुभवी टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही सिस्टर पूजा एवं सिस्टर किरण ने भी शल्यक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी.सी. पांडे एवं अधीक्षक डॉ. शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि सिविल चिकित्सालय में गंभीर एवं जटिल रोगों का उपचार उपलब्ध होना मरीजों के लिए बड़ी राहत है।

निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने कहा कि रीढ़ की हड्डी की टीबी जैसी गंभीर बीमारी में समय पर जांच एवं उपचार अत्यंत आवश्यक है। उपचार में देरी होने पर न्यूरोलॉजिकल कमजोरी बढ़ सकती है और दोनों पैरों में पैरालिसिस का खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने चिकित्सालय की पूरी टीम को इस चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए बधाई दी।

17 अगस्त को श्री कोतवालेश्वर महादेव की नगर भ्रमण यात्रा

लखनऊ। चौक स्थित श्री कोतवालेश्वर महादेव सावन के तीसरे सोमवार 17 अगस्त को शाम 4 बजे चांदी की पालकी में बैठकर नगर का भ्रमण यात्रा करेंगे। यह जानकारी मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता में देते हुए श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री विशाल गौड़ ने देते हुए बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कोतवालेश्वर महादेव यात्रा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। महंत ने बताया मंदिर से निकलते ही श्री कोतवालेश्वर महादेव जी को लखनऊ प्रशासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया जाएगा यात्रा चौक कोतवाली स्थिति श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर चौक चौराहा, खुन-खुन जी रोड कोनेश्वर मंदिर में हरिहर का दिव्य एव अद्भुत मिलन होगा। तत्पश्चात यात्रा कोणेश्वर चौराहा घूम कर, चौक चौराहा, कंचन मार्केट, चरक चौराहा, कमला नेहरू मार्ग होते हुए, श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर में संपन्न होगी,वह विशेष पूजन किया जाएगा। श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर आकर प्रसाद आरती और वितरण से सम्पन्न होगी। यात्रा में यमराज भूत प्रेत गंधर्व रंगोलिया लखनऊ बनारस की झांकियां रथ ब्रास बैंड प्रशासनिक बैंड होंगे। सभी महिलाएं और पुरुष पीले वस्त्र धारण करेंगे। इस अवसर पर शासन प्रशासन के समस्त अधिकारी, उपमुख्यमंत्री मंत्री, विधायक भक्त और नगर वासी भारी संख्या मे उपस्थित रहेंगे।

August 10, 2026

क्रान्तिकारियों का उद्देश्य गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर, भारत को स्वतंत्र कराना था : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ पर
काकोरी शहीद स्मारक में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए
लखनऊ : 09 अगस्त, 2026  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि आज काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं पावन तिथि है। 09 अगस्त, 1925 को भारत माता के महान सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी कि भारत की धरती गुलामी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। महान क्रान्तिकारियों ने सन् 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर से भारत छोड़ो आन्दोलन तक आजादी की लड़ाई के लिए कार्यक्रमों की लम्बी श्रृंखला खड़ी की थी। मुख्यमंत्री जी ने क्रान्तिकारियों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृतियों को नमन करते हुए काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े हुए सभी महानायकों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री जी आज यहाँ काकोरी शहीद स्मारक में काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने काकोरी शहीद स्मारक में स्थित शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री जी ने वन्दे मातरम् तथा काकोरी के शहीदों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित चित्र एवं अभिलेख प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने शहीद स्मारक प्रांगण में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया तथा फोटो बूथ पर सेल्फी ली। कार्यक्रम के दौरान भारतेन्दु नाट्य अकादमी के कलाकारों ने नाट्य प्रस्तुति दी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 09 अगस्त, 1925 को काकोरी में पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खाँ, चन्द्रशेखर आजाद, राजेन्द्र प्रसाद लाहिड़ी जैसे महान क्रान्तिकारियों ने उस खजाने को अपने कब्जे में लेने का कार्य किया, जिस गाढ़ी कमाई को अंग्रेजों ने हड़प लिया था। जिन क्रान्तिकारियों ने अपना पूरा जीवन भारत माता के लिए समर्पित कर दिया था, उनमें काशी में जन्में श्री शचीन्द्रनाथ बख्शी तथा श्री मनमोहननाथ गुप्त को आजीवन कारावास की सजा हुई। उनकी जागीर ब्रिटिश शासन ने जब्त कर ली थी। पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खाँ और राजेन्द्र प्रसाद लाहिड़ी, इन सभी महान क्रान्तिकारियों को क्रमशः गोरखपुर, प्रयागराज, फैजाबाद तथा गोण्डा में फांसी दी गई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद ने कहा था कि ‘आजाद हमेशा आजाद रहेगा।’ वह अंतिम दम तक वे अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते प्रयागराज की धरती पर शहादत को प्राप्त हुए। क्रान्तिकारियों का उद्देश्य गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर, भारत को स्वतंत्र कराना था। काकोरी में घटित इस घटना को ब्रिटिश शासन ने डकैती कहा था। दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में भी जिन लोगों के हाथों में सत्ता आयी, उन्होंने भी काकोरी डकैती काण्ड के नाम पर इस घटना के क्रान्तिकारियों को अपमानित करने का काम किया था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत ऐसे ही गुलाम नहीं हुआ। भारत की गुलामी के कारण हमारी आपसी फूट व षड्यंत्र थे। आज भारत को कमजोर करने वाली ताकतें जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर लगातार फूट डालने का कार्य कर रही हैं। इन राष्ट्र विरोधी ताकतों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जिन लोगों ने आपको अपने क्रांतिकारियों व नायकों से दूर रखा, उन्होंने भारत की युवा पीढ़ी के साथ सबसे बड़ा अन्याय किया। नायकों पर गौरव की अनुभूति का अवसर न देना युवा पीढ़ी को आदर्श, गौरव और प्रेरणा से विमुख करने जैसा है। आजादी के बाद जिन लोगों ने सत्ता सम्भाली, उन लोगों ने क्रान्तिकारियों को अपमानित करने का पाप किया। काकोरी के शहीदों के अलावा चन्द्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना ऊदादेवी पासी, अवन्तीबाई, झलकारीबाई के नाम पर कोई स्मारक न बने, लोग इनका नाम भी न जानने पाएं, इसलिए इन क्रान्तिकारियों के नाम पर संस्थाओं का नाम नहीं रखा गया। आजादी के बाद भी इसके लिए लगातार साजिशें की गईं।
मुख्यमंत्री जी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने आजादी के नायकों को सम्मान देने का कार्य किया। बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर से जुड़े पंच तीर्थ, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खाँ के स्मारकों से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया गया। काकोरी की घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन नाम देकर क्रान्तिकारियों को सम्मान दिया। इन क्रान्तिकारियों के नाम पर अब डाक टिकट जारी हो रहे और संस्थाओं के नाम रखे जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने जनता का आह्वान किया कि हम सभी क्रान्तिकारियों को खोजें। हमारे गाँव, क्षेत्र, जनपद आदि में अनेक गुमनाम नायक होंगे, जिन्होंने ‘तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें’ के भाव के साथ आजादी के लिए सर्वस्व समर्पित किया। आजादी के बाद सत्तालोलुप लोगों ने अपने वैभव को देखा। क्रान्तिकारियों को भुला दिया गया, उन्हें पाठ्यक्रमों में स्थान नहीं दिया गया। देश, समाज के खिलाफ षड्यंत्र हुआ और फिर से बाँटने की साजिश प्रारम्भ कर दी गई। मुख्यमंत्री जी ने अपील की कि क्रान्तिकारियों तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से जुड़ी बिखरी सामग्री को एकत्र करें। उनसे जुड़े स्मारकों की मरम्मत-सौन्दर्यीकरण से जुड़ें और पुष्पांजलि देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि क्रान्तिकारियों के लिए देश की आजादी की लड़ाई सर्वोपरि थी। उनकी स्मृति को जीवन्त बनाए रखने के लिए काकोरी में शताब्दी महोत्सव का आयोजन किया गया। एक वर्ष में क्रान्तिकारियों की स्मृतियों में अनेक कार्यक्रम किए गए। काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े परिवारों की वर्तमान पीढ़ी और देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों को भी सम्मान दिया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने आह्वान किया कि विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तब साकार होगी, जब सभी के मन में राष्ट्र सर्वोपरि का भाव होगा। अपनी मातृभूमि, भाषा, स्वदेशी उत्पादों को लेकर लोगों को जागरूक करें। 15 अगस्त को स्वाधीनता दिवस है। इस दौरान हर घर में तिरंगा फहराना चाहिए और प्रत्येक संस्था में वन्दे मातरम् का गान होना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों और सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश अंग्रेजों की पराधीनता से मुक्त हुआ है। 09 अगस्त सम्पूर्ण क्रान्ति की शुरुआत का दिन है। अनेक बलिदानों की श्रृंखला इसी दिन से प्रारम्भ हुई।
उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आजादी के लिए सर्व समाज के लोगों ने बलिदान दिया। काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस के इस भव्य एवं गरिमामय समारोह में उपस्थित सभी लोगों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग का स्मरण करना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर देश को आजादी दिलाई। प्रत्येक बच्चे और विद्यार्थी को यहां से यह प्रण लेकर जाना चाहिए कि जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमकर देश को आजादी दिलाई, उनके बलिदान को हमेशा याद रखा जाए।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि काकोरी की यह वही पवित्र भूमि है, जहाँ अमर बलिदानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया था। काकोरी ट्रेन एक्शन में देश के सपूतों ने भारत को अंग्रेजों की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया। नई पीढ़ी तक राष्ट्रीय गौरव और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का संदेश पहुंचाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रतिवर्ष 09 अगस्त को इस पावन धरती पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मान देने का कार्य किया जाता है।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, शहीदों के परिजन, छात्र-छात्राएँ सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

August 9, 2026

सावन की मल्हार पर झूमा आमोद आश्रम, “झूलैं राम जी हिंडोरा” कार्यशाला का समापन

अवधी लोकगीतों की सुरमयी यात्रा संपन्न, महिलाओं ने बांधा समां*

*लोकसंस्कृति के संरक्षण की मिसाल बनी सावनी सुर कार्यशाला*

लखनऊ, 9 अगस्त। राजधानी के गोमती नगर स्थित संस्था आमोद आश्रम द्वारा आयोजित सावनी सुर की कार्यशाला “झूलैं राम जी हिंडोरा” का शनिवार को भव्य समापन हुआ। आश्रम परिसर में विगत 2 अगस्त से चल रही इस साप्ताहिक कार्यशाला में सावन मास की परंपरागत झूला गीतों, कजरी और लोकधुनों का प्रशिक्षण दिया गया, जिसने प्रतिभागियों को अवध की समृद्ध लोकसंस्कृति से रूबरू कराया।

कार्यशाला के प्रशिक्षक प्रसिद्ध अवधी लोकगायक श्री शिवपूजन शुक्ल रहे, जिन्होंने पूरे सप्ताह प्रतिभागियों को स्वर, ताल और भाव की बारीकियां सिखाईं। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्रीमती श्रद्धा मिश्रा उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं हमारी लोक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं और महिलाओं की इतनी उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर उन्हें विशेष प्रसन्नता हुई।

गुरु शिवपूजन शुक्ल ने भी इस अवसर पर प्रतिभागियों की लगन की सराहना करते हुए कहा कि मात्र एक सप्ताह में महिलाओं ने जिस तन्मयता से सावनी गीतों को आत्मसात किया, वह अवधी लोकसंगीत के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।

कार्यक्रम में नगर की लगभग 50 महिलाओं ने सक्रिय प्रतिभाग किया और समापन अवसर पर सामूहिक रूप से सावनी गीतों व झूला गीतों की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी को भावविभोर कर दिया। एक प्रतिभागी ने कहा कि इस कार्यशाला ने उन्हें बचपन की सावन की यादें फिर से जीने का अवसर दिया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथियों ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और आयोजकों को बधाई दी।

आमोद आश्रम की सचिव श्रीमती अनिता श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षक और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी लोक कला और संस्कृति के संरक्षण हेतु इस तरह के आयोजन निरंतर करती रहेगी।

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