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अमेरिका-ईरान समझौता और भारत के हित

June 17, 2026

अमेरिका-ईरान समझौता और भारत के हित

Posted on 17.06.2026 Time 10.18 AM, Wednesday, by Sarvesh Kumar Singh

सर्वेश कुमार सिंह

सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की सहमति बन गई। इसकी घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उनके मीडिया प्लेटफार्म सोशल ट्रूथ पर हो गई है। अभी समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर हुए हैं यानिकि भौतिक हस्ताक्षर होना बाकी है। भौतिक हस्ताक्षर होने के बाद ही समझौते को अंतिम माना जाएगा। ये हस्ताक्षर 19 जून को जिनेवा में होंगे। लेकिन, डिजिटल हस्ताक्षर वाले समझौते को अस्थायी समझौता माना जा सकता है। इसे यह भी माना जा सकता है कि दोनों देश सैद्धान्तिक रूप से युद्धविराम और एक व्यापक समझौते के लिए सहमत हो गए हैं।

प्रारंभिक समझौते का दुनिया के अधिकाश देशों ने स्वागत किया है। अलबत्ता इस्राइल ने समझौता मानने और इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। इस्राइल के अपने हित हैं, वह उनकी अनदेखी नहीं कर सकता है। लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप इस्राइल पर समझौता मानने का दवाब बना रहे हैं, जिसे इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होने कहा है कि हमें अपने हित देखने हैं। इस्राइल लेबनान, गाजा और सीरिया से पीछे नही हटेगा। जबकि ईरान चाहता है कि समझौते में इस्राइल को भी शामिल किया जाए और वह लेबनान में हमले बंद करे, वहां कब्जा की गई जमीन को छोड़े। लेकिन, इस्राइल ने साफ कह दिया है कि यह समझौता इस्राइल के लिए बाध्यकारी नहीं है। हालांकि इस्राइल ने जो मुद्दे उठाये हैं वे भी अहम हैं जैसे उसने कहा है कि आरंभिक समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने या उसके नियंत्रण की कोई बात शामिल नहीं है। क्योंकि इस्राइल इस बात के लिए कटिबद्ध है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उधर ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए भी अमेरिका ने कोई शर्त नहीं लगाई है।  बैंजामिन ने कहा है कि न तो आज और न ही कल हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। इसलिए समझौते को इस्राइल ने सिरे से खारिज कर दिया है। उसने अमेरिका को साफ बता दिया है क उसे इस्राइल के आंतरिक और सैन्य मामलों में हस्तक्षेप करने का उसे कोई अधिकार नहीं है। इतना कड़ा रुख अपनाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह समझौता आधा अधूरा ही है और युद्ध की आशंका आगे भी बनी रहेगी। इस्राइल और ईरान के बीच फिर किसी भी समय युद्ध छिड़ सकता है।

सोशल ट्रूथ पर डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया है कि अब होर्मुज खुल गया है। तेल की स्वतंत्र रूप से आवाजाही होगी। कोई टोल नही लगेगा। ईरान होर्मुज से बारूदी सुरंगें हटाएगा और अमेरिका ईरान के समुद्री तटों की नाकेबंदी खत्म करेगा। इससे दुनिया को राहत मिलेगी। स्वतंत्र रूप से तेल के टैंकर वाले जहाज होर्मुज से निर्बाध आवाजाही कर सकेंगे। साथ ही ईरान से भी तेल खरीदा जा सकेगा। लेकिन ट्रंप इस बात पर मौन हैं कि ईरान के 60 प्रतिशत संबर्धित यूरेनियम का क्या होगा। उस पर किसका निंयत्रण होगा। क्या उसे ईरान नष्ट करेगा। क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र के लिए सिर्फ 5 प्रतिशत संबंर्धित यूरेनियम की ही आवश्यकता होती है। हालांकि ईरान ने यह भी कहा है कि अगले दौर की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को शामिल किया जा सकता है। फिलहाल यह समझौता अगले साठ दिन के लिए लागू होने जा रहा है। इन साठ दिनों में अमेरिका और ईरान एक दूसरे पर हमले नहीं करेंगे। यह युद्ध एक तरह से 108 दिन बाद समाप्ति की ओर है। माना जाना चाहिए कि अब दोनों के बीच हवाई और मिसाइल हमले नहीं होंगे।

समझौते का विश्व के अन्य देशों और खासकर भारत पर क्या प्रभाव होगा। यह जानना भी जरूरी है। विश्व के सभी देश तेल की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। भारत कौ गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति खाडी के देशो से होती है। इस युद्द के कारण यह आपूर्ति प्रभावित हुई। क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने बंद कर दिया था। उधर अमेरिका ने ईरान के समुद्री तटों की नाकेबंदी कर दी थी। इसी नाकेबंदी के कारण भारत के तीन नाविकों की मृत्यु अमेरिकी हमले में हो गई थी। अमेरिका ने तीन विदेशी जहाजों पर ओमान के तट पर हमले किये थे, जिनपर भारतीय क्रू सवार थे। अब समझौते के बाद सभी तरह के प्रतिबंध हट जाएंगे। इससे भारतीय जहाजों को तेल और गैस लाने में कोई रोक टोक नहीं होगी। इसका असर पर देश में कच्चे तेल की कीमतो पर पड़ेगा। भारत का आयता बिल घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। कीमतें घटेंगीं तो घऱेलू बाजार में भी सरकार मूल्य घटाएगी। साथ ही आपूर्ति में कटौती और प्रतिंबध भी समाप्त हो जाएंगे। भारत को यूरिया की संभावित कमी का सामना भी नही करना पडेगा। कुल मिलाकर भारत के लिए और शेष विश्व के लिए यह समझौता लाभकारी है। हमें इस चर्चा में जाने की कोई जरूरत नहीं है कि इस समझौते में जीत अमेरिका की हुई है या ईरान की। विश्व के हित सुरक्षित हुए हैं यह संतोषजनक है।

June 11, 2026

चेतावनी या षडयंत्र

Article Posted on 11.06.2026 Time 07.36 PM by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News
Leader of opposition Rahul Gandhi

लोकसभा में नेता विरोधी दल राहुल गांधी

सर्वेश कुमार सिंह

लोकसभा में नेता विरोधी दल राहुल गांधी ने 03 जून को दिल्ली में एक विस्मयकारी और रहस्यमय बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत में भयंकर “आर्थिक सुनामी” आने वाली है। इसके साथ ही कहा कि “एक साल के भीतर मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे”। उनकी पहली बात राजनीतिक दल के आकलन के रूप में देखी जा सकती है। किंतु दूसरी बात “विस्मय और रहस्य” पैदा करती है। इससे भी ज्यादा ये किसी “गहरे षडयंत्र” की ओर इशारा करती है। क्योंकि उन्होंने अपने भाषण में ये नहीं कहा कि एक साल में भाजपा सरकार गिर जाएगी, बल्कि ये कहा कि “मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे”। इसका आशय तो ये है कि बीजेपी सरकार रहेगी,लेकिन मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे। यही बात षडयंत्र की ओर इशारा करती है। क्या मोदी जी के खिलाफ कोई साजिश रची गई है। जिसकी जानकारी राहुल गांधी को है। राहुल गांधी ने अपने इसी भाषण में देश में “इमरजेंसी” लगने की भी आशंका व्यक्त की है। उन्होंने ये भी कहा कि इंटेलीजेंस के बड़े लोग उन्हें रिपोर्ट दे रहे है। आखिर वे रिपोर्ट क्या है? देश जानना चाहता है।

दरअसल भारत में कई राजनीतिक दल ऐसे है जो लगातार पराजय से हताश और निराश है। ये दल राजनैतिक सफलता की लालसा में कुछ भी करने और किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है। ऐसी ही पार्टी है कांग्रेस। ये अब मोदी जी और भाजपा से राजनीतिक मुकाबला नहीं कर पा रही है। जब कोई दल या व्यक्ति स्थापित सिद्धांतों और मानदंडों का पालन करके सफलता अर्जित नहीं कर पाता है तो वह षडयंत्र का सहारा लेता है। मोदी जी के “एक साल के भीतर प्रधानमंत्री नहीं रहने की बात”  किसी ऐसे ही षडयंत्र का हिस्सा तो नहीं? प्रश्न गंभीर और चिंतनीय है। न केवल भारत सरकार और भाजपा के लिए बल्कि इस देश के करोड़ों देशवासियों के लिए भी।

राहुल गांधी बुधवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में “आदिवासी कांग्रेस” के सम्मेलन को जब संबोधित कर रहे थे, तो उन्होंने आर्थिक सुनामी की आशंका के साथ ये भी कहा कि देश का सिस्टम कोलैप्स कर चुका है। प्रोटेक्शन सिस्टम खत्म हो गया है। इलेक्शन कमीशन, अधिकारी सब डरे हुए है। इंस्टीट्यूशनल रिवॉल्ट हो रहा है। ये सब बातें कह कर वे न केवल दुनिया के सामने भारत की छवि धूमिल कर रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया के अभूतपूर्व संकट के दौरान भारत को कमजोर बता कर राष्ट्रीय संकट खड़ा कर रहे है। भारत इस समय गंभीर ऊर्जा आपूर्ति की चुनौती का सामना कर रहा है। इसके लिए नए नए आपूर्तिकर्ता देशों की तलाश जारी है। तब भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था दर्शाया जाना जरूरी है। नेता विरोधी दल होने के बावजूद राहुल गांधी ये भूल गए कि वर्तमान ऊर्जा संकट और अर्थव्यवस्था को स्थिर तथा अधिक मजबूत बनाने की चुनौती भारत की है न कि भाजपा की। इसे कांग्रेस और भाजपा के रूप में नहीं बल्कि देश के रूप में देखने की जरूरत है। यदि दुनिया में ये संदेश जायेगा कि भारत का सिस्टम कोलैप्स कर गया है, भयंकर आर्थिक सुनामी आने वाली है, तो कौन सा देश तेल गैस हमें देगा? यह संकट किसी राजनीतिक दल या किसी नेता विशेष का नहीं बल्कि, भारत के 140 करोड़ देशवासियों का होगा।

दरअसल राष्ट्र की मुख्यधारा और राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करना राहुल गांधी की आदत बन गई है। गत वर्ष जुलाई में जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “इंडिया की इकॉनमी एक डेड इकॉनमी”  है, तो पूरे देश में अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ गुस्सा था। उस समय भी 31 जुलाई 2025 को राहुल गांधी ने एक्स (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर लिखकर ट्रंप की बात का समर्थन किया था। उन्होंने लिखा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा सब जानते है कि भारत की अर्थव्यवस्था मृत हो चुकी है”। हालांकि उनके इस बयान की देशभर में निंदा हुई और कांग्रेस की किरकिरी हुई। मगर ये राहुल गांधी है जो न समझने को तैयार है और न ही राजनीतिक परिपक्वता लाने को। खैर नुकसान उनके बयानों से कुछ अंश में देश का तो होता ही है, बल्कि उनकी पार्टी का ज्यादा होता है।

कांग्रेस को अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए अपने इस बड़बोले नेता पर लगाम कसनी चाहिए। लेकिन फिर वहीं प्रश्न आखिर घंटी बांधेगा कौन ?

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।

3/11 ऑफिसर्स कॉलोनी, कैसरबाग लखनऊ 226001

मॉब 9140624166

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

June 10, 2026

नरेंद्र मोदी सरकार के उत्कृष्ट 12 वर्ष

Narendra Modi Prime Minister

सर्वेश कुमार सिंह

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने आज देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना दिया। उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का 4398 दिन के कार्यकाल का रिकॉर्ड तोड़ा है। इसके साथ ही उनके प्रधानमंत्री के कार्यकाल को 12 वर्ष 15 दिन आज पूरे हुए। श्री मोदी ने 26 मई 2014 को भाजपा नीत राजग गठबंधन के नेता के रूप में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। दूसरी बार 30 मई 2019 और तीसरी बार 9 जून 2024 को शपथ ली।

मोदी ने अपने 12 साल के कार्यकाल में भाजपा के मुख्य और चिरप्रतीक्षित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया और उन मांगों को पूरा किया। इसमें सबसे प्रमुख श्रीरामजंभुमि मंदिर निर्माण, कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति शामिल है। एक और ऐसा मुद्दा और मांग है जिसे भाजपा और संघ विचार परिवार उठाता रहा है, वह है देश में समान नागरिक संहिता लागू करना। ये अभी कुछ राज्यों में लागू हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय कानून की आवश्यकता है।

अगर हम मोदी जी के कार्यकाल को सफलता और विकास के पैमाने पर मापने की कोशिश करे तो ये उत्कृष्ट कार्यकाल है। किसी भी देश की प्रगति उसकी तीन तरह की सुरक्षा पर निर्भर करती है। सामाजिक,आर्थिक सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और बाहरी सुरक्षा। मोदी सरकार इन तीनों में खरी साबित हुई है। सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर मोदी सरकार ने जो काम किए है वे इससे पहले की किसी सरकार ने ना तो सोचे और ना ही क्रियान्वित हुए। समाज के तीनों वर्गों किसान और मजदूर, व्यापारी और उद्योग तथा सेवा क्षेत्र सभी के लिए मोदी सरकार ने कोई न कोई नई और लाभकारी योजना शुरू की है। इसमें किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, गांव में हर घर शौचालय, और हर नल से पानी, संपूर्ण विद्युतीकरण जैसी योजनाओं को धरातल पर उतारा है। किसान सम्मान निधि के रूप में गत 12 साल में 4 लाख 30 हजार करोड़ रुपए वितरित हुए है। लगभग 9 करोड़ किसान परिवार लाभान्वित हो रहे है।

व्यापारियों के लिए मुद्रा ऋण, जीएसटी का सरलीकरण, आयकर में छूट की सीमा बढ़ाना शामिल है। विश्व व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए विश्व बाजार की खोज कर निर्यात को बढ़ाया गया है। सेवा क्षेत्र सर्वाधिक प्रगति वाला क्षेत्र बना हुआ है। इसमें यूपीआई लेनदेन ने क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। आज हमारी अर्थव्यवस्था का आकार 345 लाख करोड़ के आसपास है,जोकि वर्ष 2014 में 180 लाख करोड़ था। गत वित्तीय वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही है। विदेशी मुद्रा भंडार जून के प्रथम सप्ताह में 682 अरब डॉलर है, ये 2014 में 304 अरब डॉलर था। मोदी सरकार के 12 साल में स्वर्ण भंडार भी दो गुना हो गया है। वर्तमान स्वर्ण भंडार 880 मीट्रिक टन है जोकि 2914 में 557 मीट्रिक टन था।

आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर भारत के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियां थीं। एक जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण और दूसरी माओवादी उग्रवादियों नक्सलियों का खत्मा। दोनों मोर्चों पर मोदी सरकार ने गृहमंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व को प्रोत्साहित कर और उन्हें खुली छूट देकर निर्णायक प्रहार कर दिया। जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। वहां अब सेना और सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी नहीं होती बल्कि वहां अब वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल संचालित हो रही है। नक्सलवाद की समाप्ति एक दिवास्वप्न माना जाता था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह ने तो एक बार कह दिया था कि नक्सलवाद देश की सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन उनकी सरकार कुछ कर नहीं सकी। मोदी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षाबलों के संयुक्त अभियान, अमित शाह की सफल रणनीति से आज देश नक्सलवाद मुक्त हो गया है। अमित शाह ने तारीख तय करके इस समस्या को जड़ मूल से उखाड़ फेंका। उन्होंने 31 मार्च 2026 की तारीख तय की थी नक्सलवाद की समाप्ति के लिए और इसी तारीख को संसद में नक्सलमुक्त भारत होने की घोषणा कर दी। पाक प्रायोजित और आईएसआई से संचालित नेटवर्क को भी मोदी सरकार ने तोड़ दिया है। बाहरी सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की ताकत को मई 2025 में सम्पूर्ण विश्व ने ऑपरेशन सिंदूर के रूप में देख लिया। आज हम रक्षा क्षेत्र में आयातक देश से निर्यातक देश बन गए है। हम ब्रह्मोस मिसाइल और तेजस विमान निर्यात करने की तैयारी में है।

मोदी है तो मुमकिन है, ये नारा अब 2047 में विकसित भारत के स्वप्न को भी साकार करेगा। हम अगले दो वित्तीय वर्ष में यानी कि लगभग 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। सामाजिक,आर्थिक, और आंतरिक सुरक्षा के लिए देश को एक समान नागरिक संहिता और जनसंख्या नियंत्रण कानून की भी सख्त आवश्यकता है। ये उम्मीद भी मोदी जी ही निकट भविष्य में पूरी करेंगे।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

June 5, 2026

राजनैतिक तथा सामाजिक बदलाव के 12 वर्ष

Posted on 05.06.2026
मृत्युंजय दीक्षित
बारह वर्ष पूर्व 26 मई को भारतीय राजनीति में एक स्वर्णिम अध्याय का आरम्भ हुआ । देश में पहली बार पूर्ण बहुमत की विशुद्ध गैर कांग्रेसी सरकार बनी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत राजनीति का मंगल युग आरम्भ हुआ, जिसने भारत के जन जन आकांक्षाओं विस्तार दिया। सरकारी फाइलों में दब चुके सपनों ने चन्द्रमा पर उतर कर भारतीय ध्वज फहरा दिया, अंतरिक्ष की सैर कर आए और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बनने की ओर चल पड़े। ये भारत के “फ्रेजाइल फाइव” से “टॉप फाइव” की यात्रा के बारह वर्ष हैं। मोदी सरकार का यह 12 वर्षों का कार्यकाल राष्ट्र के पुनर्निर्माण का काल है। भारत वैश्विक पटल पर एक ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित हो रहा है। आज युद्ध और राजनैतिक अस्थिरता के समय भी जब विश्व के कई देशों में सत्ता परिवर्तन हो रहे हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बनी हुई है।
सामान्य नागरिक जीवन से राष्ट्र जीवन तक एक भी ऐसा पक्ष नहीं है जो नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी विचारों से अछूता रहा हो – स्वच्छ भारत मिशन और मेक इन इंडिया से लेकर रक्षा आत्मनिर्भरता, आयुष्मान भारत और सांस्कृतिक पुनरोदय तक सभी नए भारत को गढ़ रहे हैं संकल्प से सिद्धि की यह यात्रा अद्भुत है।
भाजपा के तीन पारंपरिक संकल्पों की सिद्धि: सनातन समाज के श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ को राजनैतिक समर्थन देने के श्री लाल कृष्ण अडवाणी के निर्णय के बाद भाजपा का राजनैतिक कद तेजी से बढ़ा। श्री राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य श्री राममंदिर का निर्माण भाजपा के एजेंडे में आया। परिस्थितियां ऐसी हो गयीं कि विरोधी, “मंदिर वहीं बनायेंगे” के नारे में “लेकिन तारीख नहीं बताएँगे“ जोड़कर पार्टी और उसके समर्थकों का उपहास करने लगे। आज श्री रामजन्मभूमि स्थल पर भव्य श्री राम मंदिर बन चुका है और पूरे विश्व के हिन्दू समाज को गर्व की अनुभूति करा रहा है।
इसी प्रकार भाजपा का दूसरा प्रमुख नीतिगत विषय धारा 370 रहा जिसके लिए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जे अपना जीवन तक अर्पित कर दिया। कश्मीर की विभाजनकारी पार्टियाँ चुनौती देती रहीं कि 370 हटी तो कोई यहाँ तिरंगा उठाने वाला नहीं रहेगा लेकिन 370 भी हटी, 35 ए भी हटी और आज कश्मीर राष्ट्र की मुख्यधारा में बह रहा है। समान नागरिक संहिता भाजपा का तीसरा परंपरागत मुद्दा था जिस पर भाजपा की सशक्त राज्य सरकारें एक -एक कर निर्णय ले रही हैं और राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू होती जा रही है।
आतंकवाद के विरुद्ध शुन्य सहनशीलता तथा रक्षा आत्मनिर्भरता : भारत में 2014 के बाद भी कुछ बड़े आतंकी हमले हुए किंतु मोदी काल में भारत ने उनका भीषण प्रतिकार किया। वर्ष 2025 में पहलगाम में हुए हमले के प्रतिरोध में किए गए भारत के ऑपरेशन सिंदूर की धमक पूरे विश्व में सुनाई दी । नया भारत शत्रु के घर में घुसकर वार करता है। भारत ने आतंकवाद व सीमा पार खतरों को देखते हुए अपनी सेनाओं को लगातार मजबूती प्रदान कर रहा है। अब भारत आधुनिकतम स्वदेशी मिसाइलों, ड्रोन तथा रक्षा तकनीक का विकास कर रहा है। सुरक्षा खतरों को देखते हुए अब स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम भी विकसित किये जा रहे हैं । उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा गलियारे विकसित किये जा रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत : वर्तमान अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चला रहे हैं। मेक इन इंडिया के माध्यम से आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है। कोविड काल के बाद से लेकर अब तक सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों इलेक्ट्रानिक्स, फार्मास्युटिकल, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल से लेकर सेमीकंडक्टर के निर्माण लिए विशेष योजनाओं का आरम्भ हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक तरफ “लोकल फॉर वोकल“ अभियान का श्रीगणेश किया दूसरी ओर “ईज ऑफ़ डुइंग बिजनेस” को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अवस्थापना ढांचे में व्यापक बदलाव – मोदी सरकार ने जीवन की सरलता के लिए अवस्थापना ढांचे में व्यापक बढ़ोत्तरी करी है। आधुनिक एक्सप्रेस वे और विश्वस्तरीय एयरपोर्ट्स का जाल बिछाकर सरकार ने विकसित भारत को गति प्रदान की है। विज्ञान व अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत अभूतपूर्व प्राग कर रहा है इसरो ने कई बड़े अभियान सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं। नया भारत नए उर्जा स्रोतों की ओर देख रहा है।
डिजिटल इंडिया अभियान – यूपीआई ने भारत की अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाया। आज दुनिया के कई देश भारत के डिजिटल मॉडल को अपना रहे हैं।
आर्थिक सुधार : जीएसटी की अर्थव्यवस्था ने देश की अर्थव्यवस्था को पारदर्शी बनाया है। जीएसटी ने कई करों को समाप्त कर एक एकल कर प्रणाली लागू की जिससे “एक राष्ट्र एक कर“ का सपना साकार हुआ।
भारत की सॉफ्ट पॉवर: भारत की योग, अध्यात्म, कला , संस्कृति और खेलों जैसी सॉफ्ट पॉवर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की वैश्विक चमक को धार दी। 21 जून को पूरा विश्व योग दिवस मनाता है। विश्व के कोने कोने से लोग कुम्भ मेले को समझने आए। खेलो इंडिया ने भारत की युवा शक्ति को वैश्विक मंचों के लिए तैयार किया । भारत के हैंडीक्राफ्ट को विश्व के मंचों पर पहचान मिली। नारी सशक्तीकरण को यह सरकार एक नए सोपान पर ले गई – मोदी जी ने नारी के नेतृत्व में सशक्तीकरण की बात कही। ट्रिपल तलाक की कुप्रथा की समाप्ति से लेकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम और लखपति दीदी की मुस्कराहट तक आज का भारत स्त्रियों के साथ और उनके नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है
माओवाद से मुक्ति: प्रधानमंत्री नेंद्र मोदी के कार्यकाल की बड़ी सफलताओं में यदि नक्सली आतंक के सफाए और माओवाद से मुक्ति की बात न की जाए तो ये चर्चा अधूरी रह जाएगी। मोदी जी के नेतृत्व में वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह ने संकल्प लेकर 31 मार्च 2026 को नाक्साली आतंक की समाप्ति की बात कही थी और उअसको सिद्ध करके दिखाया।
आज केवल भारत ही नहीं वरन पूरा विश्व प्रधानमंत्री मोदी की ओर आशा की दृष्टि से देखता है। कोविड काल में भारत ने जिस प्रकार से वसुधैव कुटुम्बकम के ध्येय वाक्य को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न देशों की सहायता की, अपनी दृष्टि और मित्रता के स्वरूप स्पष्ट रखे, आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं अपनाया जिसके परिणाम स्वरुप मोदी जी को 32 राष्ट्र अपना विशिष्ट सम्मान दे चुके हैं। प्रधानमंत्री को मिलने वाला ऐसा प्रत्येक सम्मान भारत का सम्मान है।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं.- 9198571540

June 3, 2026

करुणानिधि की दिग्भ्रमित संतति

Article 03.06.26

सर्वेश कुमार सिंह

तमिल राजनीति में प्रमुख स्थान रखने वाली पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) का आधारभूत सिद्धांत नास्तिकवाद है। किंतु वर्तमान परिवेश और राजनीतिक लालसा ने इसे हिंदुत्व विरोध के रूप में परिवर्तित कर दिया है। हाल के चुनाव में पराजय का मुंह देखने के बावजूद पार्टी हिंदुत्व विरोध की राजनीति को सुचारू रखना चाहती है।

हालांकि यह पार्टी का मूल सिद्धांत नहीं था। द्रमुक ने उग्र दक्षिणवाद, तमिल अस्मिता और धर्मनिरपेक्षता को आधार बनाया था। एम करुणानिधि व्यक्तिगत तौर पर नास्तिक थे। वे किसी भगवान या धर्म में आस्थावान नहीं थे। हिंदी, हिंदू परंपराओं का उन्होंने विरोध किया, किंतु कभी हिंदुत्व या सनातन को समाप्त करने की बात नहीं कही, जैसी कि उनकी तीसरी पीढ़ी की संतति द्वारा कही जा रही है। बल्कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में हिंदू मंदिरों के संरक्षण, हिंदू मंदिरों की संपत्ति की रक्षा के लिया कानून बनाए गए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री रहते हुए एम करुणानिधि ने एक जनवरी 2000 को इस शताब्दी और सहस्राब्दी के पहले दिन कन्याकुमारी में संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा का अनावरण किया था। वे हिन्दू संस्कृति और संत परंपरा के महान विभूति थे। यह प्रतिमा तीन सागरो, सिंधु सागर, गंगा सागर और हिंद महासागर के तट पर स्थापित हुई। प्रतिमा 133 फीट ऊंची और 7000 टन वजन की है। संत तिरुवल्लुवर ईशा पूर्व 30 में चेन्नई के मलयापुर नगर में रहते थे। इनके द्वारा लिखी गई पुस्तक तिरुक्कुरल है, जिसमें 1330 दोहे है। जिन्हें 10/10 दोहों के 133 अध्यायों में विभक्त किया गया है। इस पुस्तक का विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है। तमिलनाडु में तिरुवल्लुवर के जन्म के आधार पर काल गणना की जाती है। तमिलनाडु में मकर संक्रांति के दो दिन बाद तिरुवल्लुवर दिवस मनाया जाता है। सार्वजनिक अवकाश भी होता है। विधानसभा की कार्यवाही आरंभ होने से पूर्व तिरुवल्लुवर की स्तुति होती है। इस हिंदू संत की प्रतिमा अनावरण से एम करुणानिधि ने परहेज नहीं किया था।

उन्होंने अपने कार्यकाल में कई हिन्दू हित के निर्णय लिए। एम करुणानिधि यथार्थवादी थे। उन्होंने रामसेतु पर प्रतिकूल टिप्पणी भी की थी। श्रीराम को काल्पनिक बताने वालों में करुणानिधि भी थे। किंतु सरकार में प्रमुख की भूमिका में उन्होंने कई हिन्दू पक्ष में फैसले लिए। उन्होंने ही पुजारियों को वेतन और पेंशन शुरू की। मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया, कुम्भाभिषेकम आरम्भ कराया। मंदिरों की जमीन बेचने से रोकने के लिए कानून बनाया। यह भी उल्लेखनीय है कि रामानुचार्य पर बने धारावाहिक की पटकथा एम करुणानिधि ने लिखी थी।

आज उन्हीं की संतति और पार्टी के लोग सनातन और हिंदुत्व को खत्म करने की बात करते है। द्रमुक के ही एक नेता वीरमणि ने 26 अप्रैल 2019 को एक कार्यक्रम में श्रीकृष्ण पर टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने डीएमके भवन ने आयोजित कार्यक्रम में श्रीकृष्ण की तुलना यौन उत्पीड़न और जबरन वसूली करने वालों से कर दी थी। यह कार्यक्रम तमिल साप्ताहिक तुगलक में प्रकाशित उस लेख का जवाब देने के लिए आयोजित था, जिसमें कहा गया था कि सांस्कृतिक पतन की शुरुआत पेरियार युग आरम्भ होने के साथ हुईं।

एम करुणानिधि की राजनीतिक धारा को उनकी संतति ठीक से समझ नहीं पाई। यही वजह है कि उनके पोते उदयनिधि नास्तिकवाद को हिंदू विरोध का पर्याय मानकर उसका विरोध कर रहे है। उन्हें ये समझ और जानकारी ही नहीं है कि नास्तिकवाद के लिए भी हिन्दू दर्शन में उचित स्थान मिला है। वे द्रमुक को धर्मनिरपेक्ष के बजाय हिंदू विरोधी बना रहे है।

इसीलिए पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के बेटे और एम करुणानिधि के पोते उदयनिधि स्टालिन ने 12 मई को विधानसभा में नेता विरोधी दल की हैसियत से दिए भाषण में सनातन को समाप्त करने की बात कही। उन्होंने इसका आधार और औचित्य ये बताया कि सनातन बांटने की बात करता है। विभाजनकारी है। सनातन और हिंदुत्व विरोध की बात उदयनिधि ने पहली बार नहीं कही है। बल्कि 2 सितंबर 2023 को भी सनातन विरोधी बयान दिया था। इसमें उन्होंने सनातन को डेंगू और मलेरिया बताया था और इसे जड़ से खत्म करने की बात कही थी।

उनके बयानों पर पिता एम के स्टालिन ने सफाई देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा मेरी पत्नी दुर्गा नियमित मंदिर जाती है, मैने कभी नहीं कहा क्यों जाती है। लेकिन ये सफाई अपर्याप्त है। उदयनिधि को सनातन समाज से क्षमा मांगनी चाहिए। साथ दी दादा एम करुणानिधि की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की समझ को आत्मसात करना चाहिए।

लेखक लखनऊ में स्वतंत्र पत्रकार हैं।

संपर्क 9140624166

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