Editorial 22.06.2026 MONDAY by Sarvesh Kumar Singh Editor, UP Web News
सम्पादकीय/सर्वेश कुमार सिंह
लखनऊ में भयावह अग्निकांड हुआ है। सोमवार की अपरान्ह एक घण्टे के भीतर दावानल बने एनिमेशन कोचिंग सेंटर में 15 छात्र छात्राओं की असमय मृत्यु हो गई। किसी को बचने और निकलने का रास्ता नहीं मिला। फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंची। बिल्डिंग में आपातकाली बचाव के कोई उपाय नहीं थे। अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं था। मानक विपरीत बनी बिल्डिंग में चल रही थीं व्यवसायिक गतिविधियां। ये सब ऐसे कारण हैं जो 15 बच्चों के लिए काल बन गए। आग की सूचना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में कार्यक्रम निरस्त करके लखनऊ दौडे चले आये। रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह तत्काल सभी कार्यक्रम छोड़ कर दिल्ली से लखनऊ रात में ही आ गए। लेकिन, ये जब पहुंचे तो सिर्फ इनके पास शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। कर भी क्या सकते थे, 15 जीवन तो वापस नहीं ला सकते। वे तो अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ चुके थे। राजधानी के 15 परिवारों की खुशियां, उनके सपने टूट गए। परिवार बिखऱ गए, उनके होनहार असमय ही भविष्य की सीडिय़ां चढ़ते हुए टूट गए, काल के गाल में समा गए।
राजधानी के जिस अलीगंज इलाके के पुरनिया चौराहे के पास यह अग्निकांड हुआ,वह व्यस्ततम क्षेत्र है। यहां आबादी के बीच ही मार्केट स्थापित है। बगैर किसी मानक के सैकड़ों दुकानें, आफिस, शोरूम और कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। किसी के पास कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं हैं। आवासीय भवनों और आवासीय भूखण्डों पर व्यवसायिक गतिविधियां चलती हैं, व्यवसायिक काम्पलेक्स बन गए हैं। लापरवाही की हालत यह है कि आवासीय भवनों में बिजली विभाग ने व्यवसायिक कनेक्शन दे दिये हैं। जिस एनीमेशन सेंटर के कोचिंग में आग लगी है। उसके नीचे पेट शाप है। गोदाम है, पहली मंजिल पर कोचिंग और दूसरी पर लायब्रेरी है। लेकिन, फायर विभाग ने कभी भी यहां आकर सत्यापन की कोशिश नहीं की थी। अगर की होती तो आज 15 घरों में अंधेरा न होता।
दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में लगी आग में एक महीना पहले ही 21 लोगों की मृत्यु हुई। इससे सबक लेने के की कोई कोशिश नहीं हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिये थे, लेकिन विभाग की नींद नहीं टूटी और 15 बच्चे कभी न टूटने वाली नींद में सो गए। लापरवाही कई स्तर पर हुई है। सरकारी विभागों से लेकर निजी स्तर तक। जहां सरकारी विभागों की सतर्कता की जिम्मेदारी है वहीं निजी संस्थान, दुकान, काम्पलेक्स के स्वामियों की भी जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा मानक पूरे करें। तकनीक का इस्तेमाल करें लेकिन, उसके खतरों से भी आगाह रहें। उसके उपायों पर भी विचार करके समाधान खोज कर रखें। इस अग्निकांड में एक बात महत्वपूर्ण सामने आयी है वह यह कि जब आग लगी तो एनिमेशन सेंटर के बायोमेट्रिक से खुलने वाले दरवाजे आग के बाद स्वतः सील हो गए। इससे बच्चे बाहर नहीं निकल सके। इसके साथ ही कोचिंग चलाने वालों ने छत की तरफ जाने वाला दरवाजा भी लाक किया हुआ था। इससे छात्र छात्राएं छत की तरफ नहीं भाग सके, ताकि उन्हें सांस मिल सकती। ऐसी स्थिति में वे कमरे में ही लाक हो गए, कुछ छात्र बाथरूम में घुस गए। लेकिन आग और उसके धुंये ने 15 बच्चों की सांसें रोक दीं। कुछ बच्चों ने कोशिश करके बिडों के शीशे तोड़ लिये और वे साहस करके दूसरी मंजिल से नीचे कूद गए। इससे उन्हें चोटें लगीं, कई को गंभीर चोट लगी। फ्रेक्चर हुए लेकिन कुछ बच्चों की जान बच गई. ऐसे नौ छात्र ट्रामा सेंटर में भर्ती कराये गए। घटना स्थल का दृश्य इतना भयावह था कि उसे देखकर कोई भी संयत नहीं रह सका, सबकी आंखों में आंसू थे। अभिभावकों की चीख पुकारें और विलाप ने अत्यधिक कष्टकारी दृश्य उत्पन्न किया। अब सरकार ने चार अधिकारियों को निलंबित किया है। कुछ दोषियों की गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन यह सरकारी कार्रवाई है जो होनी है , लेकिन वे जानें नहीं लौट सकतीं जो भविष्य की कल्पना संजो के इस कोचिंग सेंटर पर आयी थीं। सरकार प्रशासन और समाज सजग हो जाए और भविष्य के लिए कोई ऐसी व्यवस्था बना ले कि फिर किसी निर्दोष की जान न जाए।


