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पुण्यतिथि पर याद किये गये वरिष्ठ पत्रकार स्मृतिशेष राधेश्याम लाल कर्ण

November 3, 2026

पुण्यतिथि पर याद किये गये वरिष्ठ पत्रकार स्मृतिशेष राधेश्याम लाल कर्ण

रायबरेली। उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट के संस्थापक महामंत्री स्मृतिशेष राधेश्याम लाल कर्ण की द्वितीय पुण्यतिथि मनायी गयी। जिसमें भारी संख्या में जनपद के पत्रकार एवं समाज सेवियो एवं व्यापारियों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और उनके साथ बिताये गये अपने पलो को याद करके स्मरण लोगो से साझा किये। उक्त कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को रोटरी क्लब के सभागार में उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट के संस्थापक महामंत्री स्मृतिशेष राधेश्याम लाल कर्ण की द्वितीय पुण्यतिथि मनायी गयी और इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर अपनी-अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेम नारायण द्विवेदी ने की।
सभा में महावरी प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति के संयोजक गौरव अवस्थी अवस्थी द्वारा घोषणा की गयी इस इस बार उनके द्वारा आचार्य जी की स्मृति में आयोजित होने वाले पुस्तक मेले जो कि 12 नवम्बर से आयोजित होगा उसमें स्व. कर्ण की तरह ही अन्य दिवंगत सम्पादकों की स्मृति में एक फोटो गैलरी लगायी जायेगी जाये जिसे ऐसे कर्मठ सम्पादकों की फोटो लगायी जायेगी जिससे लोगों को प्रेरणा मिले।
इस अवसर पर पं0 नवल किशोर बाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता मिलिंद कुमार द्विवेदी, रघुनाथ द्विवेदी, अशोक शर्मा, महेश त्रिवेदी, समाज सेवी उमेश सिकरिया, अरविन्द श्रीवास्तव, गुरजीत सिंह तनेजा, उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट के प्रांतीय महामंत्री आनन्द कर्ण, विजय श्रीवास्तव, ठाकुर सिंह, संजय सिंह, आलोक सिंह, अनुज मौर्य, सारिका शुक्ला आदि ने अपने सम्बोधन में स्व. कर्ण की पत्रकारो के हितों की लड़ाई व संघर्ष पर चर्चा करते हुए बताया कि कैसे उन्होने पूरे प्रदेश में पत्रकारों की लड़ाई सबसे आगे रहकर लड़ते थे।
इस अवसर पर व्यापारी नेता अतुल गुप्ता, प्रियंका अवस्थी, कमल श्रीवास्तव, डा0 विजय श्रीवस्तव, डा0 सुनील द्विवेदी, डा0 रफत आलम, नीरज कुमार, अनिल मिश्र, धीरज श्रीवास्तव, अजीत कुमार, करण कुमार, प्रतीक चौहार, कुवर मयंक सिंह, जीसी चौहान आदि भारी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित रहे।

रेलवे के असिस्टेंट ऑपरेटिंग मैनेजर की संदिग्ध हालात में मौत, पत्नी ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

आगर। उत्तर मध्य रेलवे, आगरा मंडल के सहायक परिचालन प्रबंधक (AOM) अभिषेक कुमार कुशवाहा की रविवार रात करीब 10:30 बजे संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव डीआरएम कार्यालय स्थित उनके चैंबर में सोफे/कुर्सी पर पड़ा मिला।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पत्नी आस्था रानी और मां सुशीला देवी ने परिचालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं। पत्नी का आरोप है कि अभिषेक से अतिरिक्त ड्यूटी कराई जाती थी और काम के नाम पर मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। परिजनों का कहना है कि घटना के लिए अधिकारियों की कार्यशैली जिम्मेदार है।
क्या है पूरा घटनाक्रम
मूल रूप से गाजीपुर के रहने वाले अभिषेक का चार महीने पहले ही प्रमोशन होकर प्रयागराज के सतर्कता विभाग से आगरा तबादला हुआ था। रविवार को प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (PT) के चलते उनकी ड्यूटी डीआरएम कार्यालय के कंट्रोल रूम में थी। रात 10 बजे तक ड्यूटी के बाद वह अपने चैंबर में गए। कर्मचारियों से कहा था कि उन्हें ठीक नहीं लग रहा है। घर नहीं पहुंचने पर परिजन तलाशते हुए कार्यालय पहुंचे। रात करीब 10:30 बजे चैंबर में देखा तो वह सोफे पर अचेत पड़े थे। पास में उल्टी और कुछ गोलियां पड़ी मिलने की बात सामने आ रही है। उन्हें तुरंत रेलवे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

चार महीने पहले ही पिता बने थे अभिषेक
परिवार में चार महीने पहले ही बेटे का जन्म हुआ था। पत्नी आस्था का कहना है कि वह अभिषेक को नौकरी छोड़कर गांव चलने के लिए कहती थीं, लेकिन वह जिम्मेदारी को लेकर गंभीर थे।
हंगामा और जांच
घटना के बाद बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी रेलवे अस्पताल के बाहर जमा हो गए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। घर से लाई गई डायरी, मोबाइल फोन और चैंबर से मिले साक्ष्य जांच में अहम माने जा रहे हैं। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

राजनारायण बसु : राष्‍ट्रीय चेतना के अग्रदूत

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ

अखिल भारतीय कार्यकारी मण्‍डल 2026

2,3,4 नवम्‍बर 2026, इन्‍दौर

राजनारायण बसु जी की 200वीं जयंती के अवसर पर माननीय सरकार्यवाह जी का वक्तव्

भारत का स्वाधीनता संग्राम भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है। ब्रिटिश आक्रमण जैसा सर्वंकष था वैसा ही समग्र हमारा उत्तर था। ब्रिटिशों के आक्रमण के कारण हमारा शिक्षित समाज अपने मूल से कट कर आत्मविस्मृति का शिकार होकर आत्मगौरव से शून्य हो रहा था। उस समय अनेक महापुरुषों ने राष्ट्रीय चेतना जगाने और राष्ट्र के स्वरूप की सुस्पष्ट कल्पना के लिए प्रभावी प्रयास किये उनमें राजनारायण बसु का नाम अग्रणी है।

7 दिसंबर 1826 को बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बोराल गांव में जन्मे राजनारायण बसु का द्विशताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। अपनी शिक्षा के बाद उन्होंने संस्कृत विद्यालय में अध्यापन कार्य करते हुए अपने जीवन को सामाजिक सुधार के कार्य हेतु समर्पित कर दिया। विशेष रूप से निर्धनों के उत्थान, नशा मुक्ति, महिलाओं में शिक्षा प्रसार और विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए उन्होंने विशेष प्रयास किए थे। इस दृष्टि से उन्होंने अपने भाई का विवाह एक विधवा से करा कर समाज के समक्ष एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

शिक्षित वर्ग में राष्ट्रीय चेतना जागृत कर उनमें आत्मगौरव और आत्मविश्वास का भाव विकसित करने के लिए उन्होंने अनथक प्रयास किए। उनका मानना था कि इन गुणों के बिना किसी भी राष्ट्र का उत्थान संभव नहीं है।

अपने उदेश्यों की प्राप्ति के लिए उन्होंने ‘राष्ट्रीय भाव’ के संवर्धन हेतु एक संस्था (Prospectus of a Society for Promotion of National Feeling) की रचना का प्रारूप तैयार किया। उनके निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप नवगोपाल मित्र द्वारा 1867 से प्रारम्भ किया गया ‘हिन्दू मेला’ राष्ट्रीय भाव के पोषण और संवर्धन का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। राजनारायण बसु ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का प्रबल समर्थन किया और हिन्दू मेले के माध्यम से स्वदेशी भाव को आगे बढ़ाया।

मातृभाषा के प्रयोग के महत्व पर वे सदैव बल देते थे और उनका मानना था कि मातृभाषा आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण आधारशिला है। वे हिन्दू धर्म को भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का आधार मानते थे।

1873 मे उन्होंने “हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता” (The Superiority of Hinduism) नामक ग्रन्थ की रचना की, जिसमें उन्होंने हिन्‍दू संस्कृति के दार्शनिक सामर्थ्य और विशिष्टताओं को अभिव्यक्त किया। भारत की राष्ट्रीय चेतना के पितामह के रूप में विख्यात राजनारायण बसु ने “महा हिन्दू समिति” की परिकल्पना सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय जागरण के एक आधारभूत माध्यम के रूप में की थी। उन्होंने इस योजना का उल्लेख 1880 के दशक में प्रकाशित अपनी प्रसिद्ध पुस्तिका ‘वृद्ध हिन्दूर आशा’ (The Old Hindu’s Hope) में किया था।

राजनारायण बसु महर्षि श्री अरविन्द के नाना थे। उनके विचारों और राष्ट्रवादी दृष्टि ने युवा अरविन्द को गहरे रूप से प्रभावित किया थाl

राष्ट्रीय पुनर्जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन में रवीन्द्रनाथ ठाकुर, स्वामी विवेकानंद और भगिनी निवेदिता सहित अनेक नायक उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रखकर प्रेरणा प्राप्त करते थे।

राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत, महान देशभक्त, समाज सुधारक और दूरदर्शी व्यक्तित्व के धनी राजनारायण बसु की 200 वी जयंती के अवसर पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत विचार और दर्शन आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं तथा हमें आत्मगौरव, सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता के शाश्वत महत्व का स्मरण कराते हैं। राष्ट्र उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।

समाज के हर क्षेत्र में संघ का योगदान: बलवीर सिंह

शाहजहांपुर, 01 नवंबर 2026 (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा) समाज जीवन के हर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने योगदान किया है। राष्ट्रवादी पत्रकारिता के साथ साथ समाज में सेवा भाव पैदा करने का बड़ा कार्य भी संघ ने किया है। उक्त विचार इंडियन फॉर्मर्स फर्टिलाइजर्स को ऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के उपाध्यक्ष ठाकुर बलवीर सिंह ने व्यक्त किए। वे उत्तर प्रदेश समाचार सेवा द्वारा आयोजित संघ शताब्दी विशेषांक “आराधना” के विमोचन एवं संगोष्ठी में मुख्य अतिथि पद से विचार व्यक्त कर रहे थे।

राष्ट्रवादी पत्रकारिता में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का योगदान विषयक संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए श्री सिंह ने कहा संघ ने हिंदू एकता और संगठन कार्य के साथ साथ राष्ट्रनिष्ठ, हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं का निर्माण किया है, वे आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता पूर्वक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने संघ कार्य और भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्पित कई कार्यकर्ताओं के संस्मरण भी सुनाए।

उत्तर प्रदेश समाचार सेवा के संपादक सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवक संगठन है जो न केवल राष्ट्र के लिए समर्पित है अपितु भविष्य की योजना के तहत राष्ट्र के लिए राष्ट्रवादी पत्रकारिता को संरक्षण देकर ऐसे पत्रकारों को आगे बढ़ाने का काम करता है जो की वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा के आधार पर समस्त संसार के कल्याण की कामना करते हैं और इस दिशा में अपनी लेखनी को भी चलाते हैं l
उन्होंने कहा कि आज देश में बहुत सारे मीडिया संस्थान हैं लेकिन राष्ट्रवादी पत्रकारिता के क्षेत्र में पांचजन्य,तरुण भारत ,हिंदुस्तान समाचार, ऑर्गेनाइजर और राष्ट्रधर्म जैसी पत्र पत्रिकाओं का बहुत बड़ा योगदान है जो राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर अपना काम कर रही हैं।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व जिला बौद्धिक प्रमुख शिव शंकर त्रिपाठी ने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोगों ने आपातकाल लगाकर अत्याचार करना शुरू किया तो संघ ने सोचा कि क्यों ना राष्ट्रवादी विचारधारा वाली पार्टी को सत्ता में लाया जाए ताकि देश की जनता को अन्याय अत्याचार और उत्पीड़न से निजात मिल सके फिर संघ ने अपनी विचारधारा के लोगों को राजनीति में स्थापित करने का और सक्रिय करने का काम किया जिसका परिणाम आज हमारे सामने है और भाजपा केंद्र व प्रदेश की सत्ता में है उन्होंने कहा कि संघ केवल राष्ट्र का चिंतन ही नहीं करता अपितु तो राष्ट्र के समक्ष आने वाली हर एक समस्या के निराकरण के लिए तत्पर रहता है आज तक का इतिहास है कि अब तक राष्ट्र के सामने जितने भी समस्याएं आई संघ ने उनका डटकर मुकाबला किया।

जनता दल एस के प्रदेश अध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए क्रांतिकारियों के साथ-साथ पत्रकारों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ,बाल गंगाधर तिलक गणेश शंकर विद्यार्थी की भूमिका हमेशा स्मरणीय रहेगी डॉक्टर लोहिया और माननीय अटल जी ने भी पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका अदा की है देश की एकता अखंडता को मजबूत करने में पत्रकारों का बहुत बड़ायोगदान हैं l


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉक्टर आनंद प्रकाश मिश्रा ने कहा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने कार्यकर्ताओं को भेज कर सक्रिय किया जिन्होंने संगठन बनाकर पूरे देश के लिए एक नई सोच नई दिशा और नए विचार पैदा किया और विभिन्न क्षेत्रों में इन संगठनों ने समाज और राष्ट्र के लिए अपनी भूमिका अदा की ।राष्ट्रवादी पत्रकारिता में संघ का अभूतपूर्व योगदान है। अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एवं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अंशुमन सिंह मैसी ने संघ की और उसके कार्यों की भूरी भूरी प्रशंसा की तथा कहा कि आज देश में हर क्षेत्र में संघ के स्वयंसेवक अपनी राष्ट्रवादी भूमिका अच्छे ढंग से निर्वाह कर रहे हैं इस अवसर पर ”संघ शताब्दी विशेषांक”आराधना का  अतिथियों ने विमोचन किया ।तत्पश्चात अतिथि गणों को प्रतीक चिन्ह वह साल भेंट करके मंच पर सम्मानित किया गया कार्यक्रम की कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सुरेश चंद्र मित्र ने किया तथा कार्यक्रम के संयोजक संजीव कुमार गुप्त ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संयोजक के रूप में मोहम्मद इरफान,डॉक्टर विजय जौहरी सिंह मोहम्मद आरिफ पत्रकार, सरदार शर्मा, सुरेश सिंह, सुयश सिन्हा, नरेश पांचाल, टीवी के पत्रकार प्रेम शंकर गंगवार, वरिष्ठ पत्रकार बलराम शर्मा, अनिल मिश्रा, राजीव मिश्रा, सुशील नारंग,संजीव मिश्रा, नगर निगम के पार्षद राजेश गंगवार एवं आईटीआई के डिप्टी डायरेक्टर आकाश मैसी, सीतापुर के संवाददाता आलोक कुमार बाजपेयी भी उपस्थित थे।

November 2, 2026

RSS कार्यकारी मंडल की बैठक दो नवंबर से इंदौर में

अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक (इंदौर): प्रमुख निर्णय, भावी रणनीतियां और शताब्दी वर्ष की समीक्षा

इंदौर 01 नवम्बर 2026 (यूपी समाचार सेवा) RSS राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक 2 से 4 नवंबर तक इंदौर में आयोजित होने जा रही है।

31 अक्टूबर 2026 को हुए प्रेस संवाद में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इस बैठक के एजेंडे, संघ के विस्तार और भविष्य के सामाजिक अभियानों की रूपरेखा साझा की।
इस बैठक से जुड़ी मुख्य बातें और आगामी योजनाएं बिंदुवार नीचे दी गई हैं:

1. बैठक का स्वरूप और मुख्य सहभागी
● अपेक्षित सदस्य:
देशभर से लगभग 408 वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रमुख कार्यकर्ता इस बैठक में हिस्सा लेंगे।

● शीर्ष नेतृत्व:
बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह और 11 क्षेत्रों व 46 प्रांतों के संघचालक, कार्यवाह व प्रचारक शामिल हो रहे हैं।

2. शताब्दी वर्ष (2025-2026) की उपलब्धियां और समीक्षा

● शताब्दी वर्ष का समापन:
विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक चले शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का लेखा-जोखा इस बैठक में परखा जाएगा।

● हिंदू सम्मेलन:
इस दौरान देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलनों का सफल आयोजन हुआ, जिसमें बस्तियों और ग्रामीण मंडलों तक व्यापक जनसमर्थन मिला।

● वैश्विक संवाद:
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड प्रवास के दौरान हुए वैश्विक संवाद की समीक्षा होगी, जिसका उद्देश्य हिंदुत्व और विश्व कल्याण में भारत की भूमिका को स्पष्ट करना था।

3. संघ कार्य का अभूतपूर्व विस्तार

● दैनिक शाखाओं में वृद्धि:
वर्तमान में देशभर में संघ की 1,01,151 दैनिक शाखाएं चल रही हैं।

● व्यापक पहुंच:
साप्ताहिक मिलन और अन्य गतिविधियों को मिलाकर संघ का कार्य रिकॉर्ड 1,10,849 स्थानों तक पहुंच चुका है।

● वार्षिक प्रगति:
पिछले वर्ष अक्टूबर की तुलना में इस साल 13,000 से अधिक नई दैनिक शाखाओं की शुरुआत हुई है।

4. संगठनात्मक बदलाव और आगामी चुनाव

● ढांचागत बदलाव:
संघ की संगठनात्मक संरचना को और मजबूत करने के लिए कुछ बदलावों पर विचार होगा।

● आंतरिक चुनाव:
मार्च में नागपुर में होने वाली ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ से पहले जिला, विभाग, प्रांत और क्षेत्र स्तर पर संगठनात्मक चुनाव कराए जाएंगे।

● नया नेतृत्व:
इसी चुनावी प्रक्रिया के तहत आगामी मार्च में नए सरकार्यवाह का निर्वाचन भी संपन्न होगा।

5. समाज सुधार और भावी जन-आंदोलन

● नशामुक्ति अभियान:
युवाओं में बढ़ते नशे के चलन को रोकने के लिए संघ सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के साथ मिलकर एक व्यापक जनजागरण अभियान शुरू करेगा।

● संत रविदास जयंती:
संत रविदास जी की 650वीं जयंती के निमित्त हुए कार्यक्रमों की समीक्षा और आगे के अभियानों की रूपरेखा तय होगी।

● पंच परिवर्तन का संदेश: समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्य), स्व का बोध और नागरिक कर्तव्यों (पंच परिवर्तन) को गहराई से स्थापित करने के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी।

6. महिला, युवा सहभागिता और वैचारिक स्पष्टता

● सक्रिय भागीदारी:
गृह संपर्क और सम्मेलनों में महिलाओं तथा विश्वविद्यालय परिसरों के युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। युवाओं के सुझावों के आधार पर ही भविष्य के कार्यक्रम तय होंगे।

● वैचारिक विमर्श और तकनीक:
सुनील आंबेकर के अनुसार, संघ नई तकनीक का विरोधी नहीं है, बल्कि उसके सही मानवीय उपयोग का पक्षधर है। संघ लगातार ‘हिंदुत्व क्या है’ और ‘भारत की सही पहचान क्या है’ जैसे विषयों पर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए खुले संवाद के लिए तैयार है।
बैठक के अंतिम दिन (4 नवंबर को) सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक के अंतिम निर्णयों और प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी देंगे।

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