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मांगों पर सहमति के बाद हुआ किशोरी आरुषि और किशोर सुधाकर का अंतिम संस्कार, गांव में पसरा मातम

November 5, 2026

मांगों पर सहमति के बाद हुआ किशोरी आरुषि और किशोर सुधाकर का अंतिम संस्कार, गांव में पसरा मातम

उ प्र समाचार सेवा

परिजनों की मांगों पर प्रशासन ने जताई सहमति, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता और तीन लोगों को संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन
नरेन्द्र मिश्रा
मैगलगंज खीरी ! जहानगर गांव में किशोरी आरुषि यादव और किशोर सुधाकर यादव के शव पेड़ से लटके मिलने की घटना के बाद बुधवार को गमगीन माहौल में दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों की विभिन्न मांगों पर प्रशासन की सहमति बनने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई। घटना के बाद से गांव में शोक और तनाव का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, आरुषि यादव और सुधाकर यादव जिला पंचायत इंटर कॉलेज, औरंगाबाद में पढ़ने गए थे। छुट्टी के बाद दोनों के घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। परिजन औरंगाबाद पुलिस चौकी पहुंचे और बेटी सहित गांव के एक युवक के लापता होने की सूचना दी। पुलिस ने तत्काल गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू कर दी। जनपद से डॉग स्क्वायड और ड्रोन कैमरे की मदद भी ली गई। तलाश के दौरान दोनों के शव कुकुरगोती के समीप एक पेड़ से लटके मिले। पुलिस ने शवों को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।

घटना के बाद मृतका के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इस दौरान परिजनों और पुलिस के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक भी हुई थी।

अंतिम संस्कार को लेकर बना तनाव

बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव गांव पहुंचे तो स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई। एहतियातन पुलिस ने सुबह से ही गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। पहले किशोर सुधाकर का अंतिम संस्कार कराया गया, जबकि आरुषि के परिजनों ने अपनी मांगें पूरी होने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। सूचना पर सीओ मितौली यादवेंद्र यादव और एसडीएम मितौली संत दास पवार मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया।

सांसद और पूर्व विधायक भी पहुंचे गांव

घटना की जानकारी मिलते ही धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया और पूर्व कस्ता विधायक सुनील कुमार लाला अपने समर्थकों के साथ जहानगर गांव पहुंचे। उन्होंने दोनों परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। सांसद ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई तथा प्रशासन से वार्ता कर मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

मांगों पर बनी सहमति, तब हुआ अंतिम संस्कार

परिजनों की मांगों को लेकर एडिशनल एसपी अमित राय, एसडीएम मितौली, सीओ मितौली, सांसद आनंद भदौरिया, पूर्व विधायक सुनील कुमार लाला और परिवार के सदस्यों के बीच वार्ता हुई। वार्ता के दौरान आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता तथा परिवार के तीन लोगों को संविदा पर नौकरी दिए जाने की मांगों पर प्रशासन की ओर से सहमति और आश्वासन दिया गया। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अंतिम संस्कार

घटना की संवेदनशीलता और गांव में व्याप्त तनाव को देखते हुए मोहम्मदी व मितौली के सीओ सहित कई थानों की पुलिस और पीएसी की एक कंपनी तैनात रही। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोनों किशोर-किशोरी का अंतिम संस्कार कराया गया।

इस दर्दनाक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। गांव में हर तरफ मातम पसरा हुआ है। वहीं, अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और घटना के वास्तविक कारणों के खुलासे पर टिकी हैं।

धर्म रक्षा हेतु प्राणार्पण करने वाले बलिदानी संत स्‍वामी लक्ष्‍मणानन्‍द सरस्‍वती जी

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ

अखिल भारतीय कार्यकारी मण्‍डल 2026

2,3,4 नवम्‍बर 2026, इन्‍दौर

सरकार्यवाह दत्‍तात्रेय होसबाले जी का वक्‍तव्‍य

भगवान जगन्नाथ की पावन भूमि ओड़िशा में समाज को दिशा देने में अनेक विभूतियों का योगदान रहा है। इसी कड़ी में अनुगुल जिले के गुरूजांग ग्राम में 15 अगस्त 1926 को जन्मे स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्‍वती जी एक विलक्षण संत थे, जिन्होंने हिन्दू विरोधी शक्तियों से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी।

स्वामीजी अपनी युवावस्था में प्रजामण्डल से जुड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। विवाह के पश्चात् दीक्षा लेकर उन्होंने संन्यास ग्रहण किया और हिन्दू धर्म-शास्‍त्रों और संस्‍कृत व्‍याकरण का सूक्ष्मता से अध्ययन किया।

ओड़िशा के कन्धमाल में स्थानीय समाज में सक्रिय अराष्‍ट्रीय तत्वों के विरुद्ध खड़े रहने हेतु वे अपना केंद्र उसी क्षेत्र के चकापाद में बनाकर रहने लगे। स्वामी जी ने आध्यात्मिकता के अधिष्‍ठान पर जनजाति समाज की भौतिक उन्नति और अपनी संस्कृति के प्रति उनमें स्वाभिमान जागृत करने के व्यापक प्रयास किए। संस्‍कृत शिक्षा, महिला भजन केन्‍द्र, कृषि, गोपालन और जल संरक्षण के लिए जनजाति क्षेत्र के समाज को प्रेरित कर स्वामी जी ने उन्हें स्‍वाभिमान और स्वावलंबन का मार्ग दिखाया। शुद्धि यज्ञों का आयोजन कर वे जनजाति समाज को सदाचरण की प्रतिज्ञा कराते थे।

समाज की श्रद्धा के प्रतीक ‘’धरणीपेनु’’ की पूजा को समसामयिक सन्दर्भों के साथ प्रस्तुत कर स्वामी जी ने समाज की जड़ों को सुदृढ़ता प्रदान की।

भगवान जगन्‍नाथ की यात्राओं और यज्ञादि के आयोजनों द्वारा उन्‍होंने वहॉं के समाज में पुन: अपनी धार्मिक आस्‍थाओं के दृढ़ीकरण और परंपराओं के प्रति गौरव का भाव जागृत किया। इस हेतु उन्‍होंने जगन्‍नाथ जी के निर्माल्‍य, तुलसी के पौधे की मिट्टी एवं पत्‍तों तथा गंगा जल का उपयोग कर घर वापसी की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बना दिया।

स्‍वामी जी के इन प्रयासों के कारण वहॉं सक्रिय असामाजिक और अराष्ट्रीय तत्व असहजता का अनुभव करने लगे। उन्होंने स्वामी जी पर प्रत्यक्ष आक्रमण के अनेक प्रयास किये किन्तु स्वामी जी और भी अधिक दृढ़ता से पैर जमा कर अपना कार्य अनवरत करते रहे।

अंततः असहिष्‍णु मतांध शक्तियों ने जन्‍माष्‍टमी के पवित्र दिन जलेशपट्टा आश्रम पर आक्रमण कर स्‍वामी जी सहित चार अन्‍य शिष्‍यों की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी। महान बलिदानी संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जीवन मातृभूमि तथा धर्म रक्षा के लिए समर्पित था। यह परम पवित्र कार्य ही उनके जीवन का उद्देश्य था। उनका व्‍यक्तित्‍व और उनके कृतित्व एक दूसरे से अभिन्न थे, जो उनके विचारों और आचरण की अटूट एकरूपता को प्रतिबिंबित करते थे। आज अनेक कार्यकर्ता उनके बलिदान की प्रेरणा को हृदय में धारण कर धार्मिक आस्‍थाओं के दृढ़ीकरण और परंपराओं के संरक्षण हेतु कटिबद्ध है। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ वेदांत केसरी स्‍वामी लक्ष्‍मणानंद सरस्‍वती जी की जन्‍मश‍ती पर अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता है।

शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्‍वामी श्रद्धानंद जी

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ

अखिल भारतीय कार्यकारी मण्‍डल 2026

2,3,4 नवम्‍बर 2026, इन्‍दौर

सरकार्यवाह दत्‍तात्रेय होसबाले जी का वक्‍तव्‍य

स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद, समाज-सुधारक, धर्म प्रचारक और शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष पूर्ण होने के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें आदरपूर्वक स्मरण करता है। पंजाब के जालंधर जिले के तलवन ग्राम में जन्मे स्वामीजी संन्यास दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात्‌ समाज जागरण के विविध कार्यों में जुट गए।

भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर अंग्रेजों द्वारा किये जा रहे कुठाराघात का निर्भयता से सामना करने हेतु उन्होंने हरिद्वार क्षेत्र में गुरुकुल काँगड़ी की स्थापना कर उसे भारतीय शिक्षा दृष्टि के आधार पर एक वैकल्पिक शिक्षा संस्था के रूप में विकसित किया। भारतीय संस्कृति, वेदों सहित समस्त भारतीय वांग्मय और आधुनिक समकालीन विषयों के अध्ययन के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी गुरूकुल काँगड़ी की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

भ्रान्त धारणाओं के कारण पिछड़ी जातियों के लोगों को न केवल केरलम् “वैकम” के शिव मंदिर में प्रवेश करने से, अपितु मंदिर के चारों ओर के सार्वजनिक मार्गों पर चलने से भी वंचित रखा गया था। इस भेद-भाव के विरुद्ध ‘वैकम’ में एक ऐतिहासिक आंदोलन किया गया था। इस राष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण आंदोलन में स्वामी श्रद्धानंद जी स्वयं सहभागी हुए। इस महत्‌ कार्य हेतु वे श्री नारायण गुरु से भी मिले थे। सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति कार्य में उनकी सक्रियता के कारण भारतरत्‍न डॉ. बी. आर. आम्बेडकर भी उन्हें सामाजिक और आर्थिक दुर्बल वर्गों का एक महान और सच्चा हितैषी मानते थे।

स्वतंत्रता आंदोलन में समाज जागृति हेतु उन्होंने ‘सद्धर्म प्रचार’, ‘तेज’, ‘वीर अर्जुन’ और ‘लिब्रेटर’ नामक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारम्भ कर अंग्रेजों के झूठ, कपटऔर षड़यंत्रों को उजागर करते हुए निर्भीक, अडिग और सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता के प्रतिमान प्रस्तुत किये।

विषम परिस्थितियों, भ्रान्त सामाजिक व धार्मिक मान्यताओं के कारण हिन्दू समाज निरंतर मतान्तरण का शिकार हो रहा था, ऐसे मतान्तरित लोगों की पुन: हिन्दू धर्म में वापसी के द्वार बंद थे। ऐसी परिस्थिति में स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से मतान्तरित हिन्दुओं को अपने धर्म में वापस लाने का कार्य शुरू किया। मोपला नरसंहार के बाद स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन के द्वारा केरल सहित सारे देश में हजारों लोगों की घरवापसी की।

पुरुषार्थ और परमार्थ को पूरी प्रखरता और प्रामाणिकता से प्रकट करने के उनके निरंतर प्रयासों से विचलित होकर 23 दिसम्बर 1926 को अब्दुल रशीद नामक एक मतांध व्यक्ति द्वारा दिल्‍ली में उनकी दुर्भाग्यपूर्ण हत्या कर दी गई। कर्मण्यता के प्रेरणा पुरुष स्वामी श्रद्धानंद जी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करता है तथा उनके जीवनकार्य से प्रेरणा लेकर धर्मरक्षा के लिए सदैव सक्रिय रहने का संकल्प लेने का सभी से आग्रह करता है।

गृह संपर्क अभियान में दस करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचे संघ के कार्यकर्ता: दत्तात्रेय होसवाले

देश में एक लाख से अधिक स्थान प्रत्यक्ष संघ कार्ययुक्त

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक संपन्न

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, पंच परिवर्तन के क्रियान्वयन तथा शाखा विस्तार और समाज जागरण के विषयों पर विचार-विमर्श और योजना

इंदौर, 04 नवंबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक इन्दौर में संपन्न हुई। बैठक के अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने पत्रकारों को संबोधित किया। पत्रकार वार्ता के प्रारंभ में सरकार्यवाह जी ने डेली कॉलेज के प्रबंधन का व्यवस्था के लिए और मीडिया के बंधुओं का कार्यकारी मंडल की बैठक और संघ के विषयों को सकारात्मक रूप से समाज के बीच प्रचारित-प्रसारित करने के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया एवं दीपावली पर्व की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

सरकार्यवाह जी ने बताया कि बैठक में देशभर से 406 अपेक्षित में से 398 कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रतिवर्षानुसार दशहरा और दीपावली के बीच आयोजित इस बैठक में शताब्दी वर्ष में आयोजित कार्यक्रमों का वृत्त प्रस्तुत किया गया। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम समाज के व्यापक सहयोग से संपन्न हुए। यह समाज की सज्जन शक्ति को संघ से अवगत कराने का अवसर था।

सेवा कार्यों में स्वयंसेवकों की सहभागिता

भारत में अलग-अलग स्‍थानों पर नैसर्गिक आपदाओं के समय वहाँ के स्‍वयंसेवकों, सामाजिक संस्‍थाओं और समाज ने साथ मिलकर अलग-अलग स्‍थानों पर सेवा प्रदान करने का प्रयास किया।

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में अत्‍यधिक बाढ़ के कारण पीड़ित शहर एवं ग्रामीण परिवारों को 350 कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर राहत किट का वितरण किया। 6000 से अधिक लोगों के भोजन के लिए स्‍थाई व्‍यवस्‍था चलाई। 5600 लोगों को चिकित्‍सा प्रदान की। साथ ही साथ पशुओं के टीकाकरण का भी प्रयास हुआ।

लखनऊ क्षेत्र में अति वर्षा के कारण शहर में भीषण बाढ़ की स्थिति में 300 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों के लिए भोजन, पानी, दवाईयां इत्‍यादि जीवन उपयोगी वस्‍तुओं का वितरण किया।

असम के शिवसागर और जोरहाट जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 1600 से अधिक स्‍वयंसेवकों ने 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी, दवाईयां इत्‍यादि सहायता उपलब्‍ध कराई। 5 करोड़ से अधिक राशि जमा करके यह सेवा कार्य किया गया।

उड़ीसा और आंध्र क्षेत्र में अर्नब चक्रवात के कारण समुद्र सीमा से जुड़े पूरे क्षेत्र में कंधमाल, गंजम, श्रीकाकुलम, विजयवाड़ा जिलों में वहां के स्‍वयंसेवक, समाज को साथ में लेकर पीड़ि‍तों की विविध सहायता हेतु सक्रिय हैं।

कार्य विस्तार : एक लाख से अधिक स्थानों पर प्रत्यक्ष संघ कार्य

शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवकों द्वारा किए गए शाखा विस्तार की भी समीक्षा के साथ ही शाखाओं को अधिक प्रभावी एवं नियमित बनाने, उनका दृढ़ीकरण करने तथा अधिकाधिक स्थानों पर शाखाएं प्रारंभ करने के संबंध में भी विचार-विमर्श हुआ।

देश में कुल 63,208 स्थानों पर 99,423 दैनिक शाखाएं लग रही हैं। इस वर्ष दैनिक शाखाओं की संख्या में 12,025 की वृद्धि तथा 8,156 शाखा स्थानों की वृद्धि हुई। कुल 26,826 स्थानों पर 34,982 साप्ताहिक मिलन और 13,363 स्थानों पर 14,096 मासिक मंडली लग रही है। साप्ताहिक मिलन संख्या में 2,712 तथा मासिक मंडली संख्या में 463 की वृद्धि हुई। पिछले वर्ष 93,156 कुल स्थानों की तुलना में इस वर्ष कुल 1,03,397 स्थान प्रत्यक्ष संघ कार्ययुक्त हो गए हैं।

संघ की भौगोलिक रचना में अब 46 प्रांतों के स्थान पर देशभर में 88 संभाग होंगे।

शताब्दी वर्ष कार्यक्रम वृत्त : दस करोड़ से अधिक घरों में संपर्क

शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी। इन कार्यक्रमों के आगामी क्रियान्वयन, अनुवर्तन तथा उनके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने के विषय में विचार- विमर्श हुआ। विशेष रूप से पंच परिवर्तन के विषयों को समाज के व्यवहार में प्रभावी रूप से उतारने तथा उनके निरंतर अनुवर्तन की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

शताब्दी वर्ष में कार्य विस्तार और समाज में संघ, हिन्दुत्व पंच-परिवर्तन के विचार को ले जाने की दृष्टि से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गए।

हिन्दू सम्मेलन — समाज के सभी लोग साथ आएं, सामाजिक समरसता, एक-दूसरे के सहयोग और सकारात्मक जीवन शैली के विषयों पर प्रयासों के लिए आयोजित हिन्दू सम्मेलनों में 4,93,76,694 समाज जन सम्मिलित हुए, जिनमें सवा दो करोड़ से अधिक मातृशक्ति की सहभागिता उल्लेखनीय है। 3,08,449 ग्रामों सहित 37,080 ग्रामीण मंडलों और 28,584 नगरीय बस्तियों में कुल 65,664 हिन्दू सम्मेलन आयोजित हुए। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और अंडमान जैसे स्थानों पर भी हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन हुआ।

गृह संपर्क — संघ की सौ वर्षों की यात्रा और संघ विचार को लेकर कार्यकर्ताओं ने गृह संपर्क अभियान चलाया। कुल 4,63,340 ग्रामों और 41,825 नगरीय बस्तियों में 10,22,05,665 घरों में संघ के कार्यकर्तों की टोलियाँ संपर्क करने पहुंची। गृह संपर्क में कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक घर में 15 से 20 मिनट बैठ कर चर्चा की।

युवा कार्यक्रम — शताब्दी वर्ष में 21,237 स्थानों पर महाविद्यालयीन विद्यार्थियों हेतु आयोजित 57,243 कार्यक्रमों में कुल 31,26,404 विद्यार्थियों की सहभागिता रही। इसी प्रकार युवा व्यवसायियों के लिए आयोजित 14,285 कार्यक्रमों में कुल 6,90,835 युवा व्यवसायी सम्मिलित हुए। इस प्रकार कुल 38,17,239 युवाओं की प्रत्यक्ष उपस्थिति इन कार्यक्रमों में रही।

प्रमुख जन गोष्ठी — जिला केंद्रों और अन्य प्रमुख स्थानों पर आयोजित 3,207 प्रमुख जन गोष्ठियों में 4,29,262 प्रमुख समाज जन सम्मिलित हुए।

सामाजिक सद्भाव बैठक — समाज के विभिन्न वर्गों में सद्भाव, सहयोग, भेदभाव रहित समाज निर्माण और साथ मिलकर सामाजिक चुनौतियों के समाधान का कार्य करने की दृष्टि से समाज का नेतृत्व करने वाले बंधु भगिनियों की सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन किया गया। देशभर में 5,028 ग्रामीण खंडों और 3,318 नगरों में कुल 8,346 सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन हुआ, जिनमें 36,916 मातृशक्ति सहित 3,79,581 समाज प्रमुखों की सहभागिता रही।

युवाओं में नशे के प्रचलन को रोकने के विशेष प्रयास

युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन से पूरा समाज और सरकार चिंतित है। संघ, सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से नशीले पदार्थों से युवाओं को बचाने का सभी से आग्रह करता है। नशे के व्यापार के अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र से बचाने का कार्य, प्रशासन और सरकार कर रही है। गृह मंत्रालय इस विषय में विशेष कार्य कर रहा है। बैठक में नशे के विरुद्ध सामाजिक चेतना और पुनर्वास में सामाजिक संगठनों के साथ कार्य करने की योजना बनायी गयी।

तीन प्रमुख व्यक्तित्वों पर वक्तव्य

बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी की ओर से तीन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के संबंध में वक्तव्य जारी किये गए।

  1. राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत श्री राजनारायण बसु की 200वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन एवं योगदान का स्मरण करते हुए जारी वक्तव्य में निर्धनों के उत्थान, नशा मुक्ति, महिलाओं में शिक्षा प्रसार और विधवाओं के पुनर्विवाह सहित स्वदेशी, स्वभाषा और स्वधर्म संरक्षण में उनके विशेष प्रयासों का स्मरण किया गया।
  2. शुद्धि आंदोलन के पुरोधा स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100वें वर्ष के अवसर पर उनके जीवन, कार्य एवं योगदान स्मरण करते हुए सरकार्यवाह जी के वक्तव्य में उन्हें आदरांजलि अर्पित की गई।
  3. ओडिशा के कंधमाल जनजातीय क्षेत्र में स्वाभिमान, स्वावलंबन एवं स्वधर्म की जागृति के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के जन्म के 100वें वर्ष के अवसर पर सरकार्यवाह जी के वक्तव्य में उनका पुण्य स्मरण किया गया। स्वामी लक्ष्मणानंद जी का जीवन संस्कृत शिक्षा, महिला भजन केन्द्र, गोपालन, कृषि और जल संरक्षण द्वारा जनजातीय क्षेत्र के स्वावलंबन को समर्पित रहा। आपने धरणी पेनु पूजा, जगन्नाथ जी के निर्माल्य, गंगा जल और तुलसी के पौधे की मिट्टी और पत्तों से घर वापसी का सुगम मार्ग प्रवर्तित किया।

सरसंघचालक जी का विदेश प्रवास

अगस्त- सितम्बर में सरसंघचालक जी के तीन देशों के प्रवास में विश्व एकता और मानव एकता के लिये भारत के संदेश को देने का प्रयास किया गया। सरसंघचालक जी इस प्रवास में समाज जीवन विभिन्न क्षेत्रों के वहां के प्रमुख लोगों से व्यक्तिगत एवं समूहों में मिले, जिसमें प्रमुख विश्वविद्यालयों के विद्वानों से वार्तालाप शामिल रहा। साथ ही स्वामी नारायण मंदिर, खालसा गुरुद्वारा और जैन मंदिर में भी गये। विदेशों में लोगों को कार्यकर्ता निर्माण की संघ की कार्यपद्धति, हिन्दुत्व एवं भारत की राष्ट्रीयता को समझने की उत्सुकता थी। सरसंघचालक जी ने इन विषयों पर संवाद भी किया।

पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि टेक्नॉलॉजी को रोकना संभव नहीं है। सोशल मीडिया में अनावश्यक सामग्री के प्रसार के बारे में सरकार को सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व को साथ लेकर कोई कानून बनाना पड़े, तो आवश्यक निर्णय करे। संघ, परिवार में संस्कार और अनुशासन का आग्रह करता है। मोबाइल छोड़कर परिवार में एक साथ बैठकर सकारात्मक विषयों पर चर्चा हो। परिवार में जीवन मूल्यों और समाज को संस्कार सिखाने की ज़िम्मेदारी लेनी होगी।

लोकतंत्र और जेन जी जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन के लिये चुनाव की व्यवस्था है। अराजकता, अशांति के द्वारा यह कार्य देश के हित में नहीं है। भारत और विदेशों में ऐसे षड्यंत्र चल भी रहे हैं, इनसे सचेत रहना चाहिए। युवाओं की आकांक्षाओं पर संवाद होना चाहिये। नयी पीढ़ी के साथ सकारात्मक संवाद करना चाहिये। युवाओं में आक्रोश का भाव आता है, उसको चैनलाइज करना चाहिये। उन्हें अराजक षडयंत्र से बचाना चाहिये और उनकी आकांक्षाओं को समझना चाहिये। युवा ऊर्जा, सामाजिक संवेदना और सेवा भाव से युक्त होते हैं, उन्हें सकारात्मक कार्य से जोड़ने के प्रयास करना चाहिये। अराजक शक्तियाँ भारत में हावी ना हों। समाज में अच्छा सोचने वाले लोगों की निष्क्रियता से अराजकता को बल मिलता है, अतः सज्जन शक्ति को सक्रिय होना होगा।

 

संघ के पंजीयन से संबंधित प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज और संघ अलग ना हो, पूरे समाज को ही संगठित करना अपना कार्य है, अतः संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत संघ कार्य कर रहा है।

पंच परिवर्तन और समाज परिवर्तन के सभी कार्यों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ रही है, महिलाओं को छोड़ कर समाज की कल्पना भी संभव नहीं है। समाज के अनुमोदन से चलने वाले संघ का कार्य अरुणाचल, मिजोरम, त्रिपुरा जैसे दुर्गम और केरल और पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।

November 4, 2026

बलदेव में भारी मात्रा में अवैध पटाखे बरामद, 21 वर्षीय युवक गिरफ्तार

44 कार्टून और चार बोरों में भरी आतिशबाजी जब्त, विस्फोटक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज

मथुरा। दीपावली के मद्देनजर अवैध आतिशबाजी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बलदेव पुलिस ने भारी मात्रा में पटाखों के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने 3 नवंबर की रात 11:55 बजे अवैरनी चौराहे के पास संस्कार लाइब्रेरी वाली गली में कार्रवाई करते हुए प्रेम (21) पुत्र मनीष कुमार निवासी बलदेव को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 44 कार्टून और चार प्लास्टिक के बोरों में भरी विभिन्न प्रकार की आतिशबाजी बरामद की गई।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना बलदेव में मुकदमा  कर विधिक कार्रवाई की है।

कार्रवाई करने वाली टीम में थानाध्यक्ष अभय कुमार शर्मा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुबोध कुमार भारद्वाज सहित थाना बलदेव के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।

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