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मोदी होना आसान नहीं

September 16, 2026

मोदी होना आसान नहीं

नरेंद्र मोदी
जन्मदिन पर विशेष
सुरेश हिंदुस्तानी
कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नहीं बनता, उसके द्वारा किए गए कर्म ही उसकी छवि बनाते हैं। भाग्य कुछ नहीं होता, कर्म से सब प्राप्त किया जा सकता है। गुजरात के निर्धन परिवार में जन्म लेने वाले नरेंद्र मोदी के व्यापक विस्तार की कहानी भी ऐसी ही है। मोदी ने अपने और अपने परिवार के बारे में कभी नहीं सोचा। उनके चिंतन के केंद्र में आम आदमी प्रमुखता से है। संभवतः वे पंडित दीनदयाल जी की उस उक्ति को धरती पर लाने का उपक्रम कर रहे हैं, जिसमें अंतिम छोर पर निवास करने वाले व्यक्ति का उत्थान छुपा हुआ है। तभी तो नरेंद्र मोदी कहते हैं कि 140 करोड़ देशवासी उनका परिवार है। इतना ही नहीं, वे अपने आपको प्रधान सेवक मानने में गौरव का अनुभव करते हैं। उन्होंने जनता के साथ जुड़ाव बनाने वाला यह कथन अपने जीवन में समाहित कर लिया है। ऐसा जीवन व्यतीत करने वाला व्यक्ति सामान्य नहीं हो सकता। इसलिए कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी होना आसान नहीं है।
किसी व्यक्ति के जीवन में प्राप्त होने वाला पद बड़ा हो सकता है, लेकिन पद से बड़ा होता है उसका व्यक्तित्व। कुर्सी शक्ति दे सकती है, किंतु उस शक्ति को धैर्य, संयम और संकल्प के साथ साधना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। भारत की राजनीति में नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व इसी कारण अलग दिखाई देता है। उनके समर्थकों के लिए वे संघर्ष से निकली उस यात्रा के प्रतीक हैं, जिसमें अभावों से उठकर व्यक्ति देश के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचता है। सच कहें तो मोदी होना आसान नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने वर्तमान राजनीतिक चुनौतियां नई नहीं हैं। सत्ता के गलियारों में जितनी प्रशंसा मिलती है, उतनी ही तीखी आलोचना भी उनका पीछा करती है। राजनीतिक प्रहारों की निरंतरता किसी भी व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा ले सकती है। लेकिन मोदी की राजनीतिक शैली की एक प्रमुख विशेषता यह रही है कि वे अपने समर्थकों की अपेक्षाओं और विरोधियों के आक्रोश के बीच अपना संतुलन बनाए रखने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। राजनीति में विरोध आवश्यक है। लोकतंत्र में सत्ता से प्रश्न पूछे जाने चाहिए। नीतियों की सकारात्मक आलोचना होनी चाहिए। लेकिन राजनीतिक असहमति जब व्यक्तिगत कटुता का रूप लेती है, तब लोकतंत्र की गरिमा प्रभावित होती है। ऐसे वातावरण में भी स्वयं को संयमित रखना किसी नेता के लिए सामान्य बात नहीं। आज की राजनीति केवल मोदी का समर्थन या विरोध पर ही केंद्रित हो गई है। इसे इस रूप में भी कहा जा सकता है कि मोदी का प्रचार विपक्षी दलों ने अधिक किया है।
मोदी की राजनीतिक यात्रा का सबसे प्रेरक पक्ष उनका संघर्ष है। एक सामान्य परिवार से निकलकर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने की कहानी भारतीय लोकतंत्र की उस शक्ति को रेखांकित करती है, जिसमें किसी व्यक्ति की सामाजिक पृष्ठभूमि उसकी अंतिम सीमा तय नहीं करती। अभावों में पला व्यक्ति भी अपने परिश्रम, अनुशासन और संकल्प के बल पर राष्ट्र के नेतृत्व तक पहुंच सकता है। यही मोदी की कहानी का सबसे बड़ा संदेश है।
संघर्ष व्यक्ति को तोड़ता नहीं, यदि उसके भीतर संकल्प जीवित हो तो वही संघर्ष उसे गढ़ता है।
मोदी के व्यक्तित्व की चर्चा करते समय उनके परिवार और व्यक्तिगत जीवन का पक्ष भी सामने आता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका परिवार सत्ता के केंद्र में दिखाई नहीं देता। सत्ता के शीर्ष पर रहते हुए पारिवारिक जीवन को राजनीतिक लाभ से दूर रखने की उनकी छवि उनके समर्थकों के लिए विशेष महत्व रखती है। भारतीय राजनीति में जहां परिवारवाद लंबे समय से बहस का विषय रहा है, वहां मोदी की व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करती है।
मोदी की कहानी केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है। आज विश्व मंच पर भारत की उपस्थिति पहले से अधिक प्रभावशाली दिखाई देती है। अनेक देशों के साथ भारत के संबंधों का विस्तार हुआ है। वैश्विक मंचों पर भारत की शक्तिशाली भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की आवाज को गंभीरता से सुना जाना उस बदलते भारत का संकेत है, जो अपनी क्षमता, अपने हितों और अपनी सभ्यता की पहचान के साथ विश्व समुदाय के सामने खड़ा होना चाहते हैं। वे जब विदेश दौरा करते हैं, तब वे भारतीय मूल के नागरिकों से अवश्य मिलते हैं। इस दौरान भारतीय मूल के व्यक्तियों के चेहरे बहुत ही प्रफुल्लित दिखाई देते हैं। वे सभी मोदी को एक सफल नायक की श्रेणी में देखते हैं। अपनेपन का यह भाव मोदी के स्वभाव का ही परिणाम है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए विदेश यात्राओं या कूटनीतिक मुलाकातों का विषय नहीं है। यह उस आत्मविश्वास का विषय है, जिसके साथ भारत आज विश्व समुदाय से संवाद कर रहा है।
एक समय था जब दुनिया के अनेक शक्तिशाली देश भारत को मुख्यतः एक विकासशील राष्ट्र के रूप में देखते थे। आज भारत की अर्थव्यवस्था, उसकी युवा शक्ति, उसकी तकनीकी क्षमता, उसका विशाल बाजार और उसकी सामरिक भूमिका विश्व की चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस परिवर्तन का पूरा श्रेय किसी एक व्यक्ति को देना उचित नहीं होगा, लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने भारत की इस वैश्विक प्रस्तुति को निश्चित रूप से एक विशिष्ट राजनीतिक दिशा दी है। और यही मोदी की विशेषता का एक महत्वपूर्ण आयाम है। वे भारत को केवल वर्तमान के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व जितना मुखर है, उतना ही व्यक्तिगत जीवन में सादगी और अनुशासन की छवि से जुड़ा हुआ भी है। सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रियता, दैनिक रूप से लंबे कार्य घंटे, देश-विदेश की यात्राएं और करोड़ों लोगों की अपेक्षाओं का भार, प्रधानमंत्री का जीवन किसी सामान्य नौकरी की तरह नहीं होता। प्रत्येक निर्णय के पीछे राजनीतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय परिणाम जुड़े होते हैं।
और इसीलिए प्रधानमंत्री होना केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं है। यह हर दिन स्वयं को कटघरे में खड़ा करना भी है। एक ओर समर्थकों की अपेक्षाएं, दूसरी ओर विरोधियों के सवाल। एक ओर देश की आकांक्षाएं, दूसरी ओर विश्व की निगाहें। एक ओर वर्तमान की चुनौतियां, दूसरी ओर भविष्य के भारत की जिम्मेदारी। इन सबके बीच संतुलन बनाना ही नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा है।
नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनके जीवन को देखने का सबसे सार्थक तरीका यही है कि हम उनके संघर्ष, संकल्प और नेतृत्व की यात्रा को समझें। मतभेद लोकतंत्र की सुंदरता हैं। उनके भीतर एक ऐसा नेतृत्व दिखाई देता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होता। उनके आलोचक चाहे उनके निर्णयों से सहमत हों या नहीं, लेकिन यह भी एक तथ्य है कि नरेंद्र मोदी आज भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और चर्चित चेहरों में से एक हैं। उनकी यात्रा हमें एक महत्वपूर्ण बात सिखाती है कि ऊंचाई पर पहुंचना कठिन है, लेकिन उस ऊंचाई पर टिके रहकर निरंतर आगे बढ़ते रहना उससे भी कठिन है।
मोदी होना इसलिए आसान नहीं है। मोदी होने के निहितार्थ यही हैं संघर्ष को शक्ति में बदलना। आलोचना को सहने का धैर्य रखना। सफलता के बीच जमीन से जुड़े रहना। भारत की आकांक्षाओं को विश्व के सामने आत्मविश्वास से रखना। और सबसे बढ़कर, स्वयं से बड़ी किसी राष्ट्रीय आकांक्षा के लिए निरंतर काम करते रहना।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें देखने का एक दृष्टिकोण यह भी है कि एक साधारण पृष्ठभूमि से निकला व्यक्ति किस प्रकार भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में असाधारण राजनीतिक पहचान बना सकता है। राजनीति के निर्णयों का मूल्यांकन इतिहास करेगा। नीतियों की समीक्षा समय करेगा। उपलब्धियों और कमियों का आकलन आने वाली पीढ़ियां करेंगी। लेकिन संघर्ष की कहानी अपनी जगह रहती है। और नरेंद्र मोदी की कहानी का यही सबसे बड़ा भाव है, एक साधारण शुरुआत से असाधारण शिखर तक की यात्रा। इसलिए जन्मदिन के इस अवसर पर एक वाक्य सहज ही मन में उभरता है कि मोदी होना आसान नहीं।
Suresh Hindustani Journalist

सुरेश हिन्दुस्तानी वरिष्ठ पत्रकार

पुलिस अधीक्षक ने पुलिस कार्यालय में की जनसुनवाई, फरियादियों की समस्याएं सुनीं

हाथरस। पुलिस अधीक्षक हाथरस श्री चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बुधवार को पुलिस कार्यालय में जनसुनवाई कर आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना। जनसुनवाई के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे फरियादियों ने अपनी शिकायतें और समस्याएं पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखीं। पुलिस अधीक्षक ने सभी फरियादियों की बात को ध्यानपूर्वक सुनते हुए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आमजन की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक शिकायत की जांच निष्पक्षता और गंभीरता के साथ करते हुए विधिक एवं नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, उनमें प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए।
पुलिस अधीक्षक ने यह भी कहा कि जनसामान्य की समस्याओं को समयबद्ध तरीके से सुना और निस्तारित किया जाना पुलिस की प्राथमिकता है। जनसुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

हाथरस में भगवान परशुराम की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने से आक्रोश, जिला पंचायत अध्यक्ष ने की कार्रवाई की मांग

हाथरस। भगवान परशुराम की प्रतिमा क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश है। मामले को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय ने सीओ सिटी को शिकायती पत्र सौंपकर घटना की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
शिकायती पत्र में उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ी प्रतिमा को क्षति पहुंचाने की घटना गंभीर है। ऐसी घटनाओं से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं और क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका रहती है। उन्होंने पुलिस से मामले को गंभीरता से लेते हुए घटना की जांच कराने की मांग की।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने पुलिस अधिकारियों से प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की। पुलिस द्वारा शिकायत के आधार पर मामले की जांच किए जाने की बात सामने आई है। घटना से जुड़े तथ्यों की स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।

सिसैया खुर्द मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने लिया संज्ञान

ग्रामीणों से मिले प्रतिनिधिमंडल ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

धौरहरा क्षेत्र के गांव पहुंचकर अधिकारियों से भी ली जानकारी
उ प्र समाचार सेवा
लखीमपुर-खीरी।धौरहरा क्षेत्र के सिसैया खुर्द गांव में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुए विवाद का मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने पुलिस पर घरों में घुसकर मारपीट करने और कई लोगों को घायल करने के आरोप लगाए हैं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने प्रकरण का संज्ञान लिया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
पुलिस अधीक्षक से मुलाकात के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता सीधे सिसैया खुर्द गांव पहुंचे। उनके साथ जिला महामंत्री राजेश सिंह, जिला उपाध्यक्ष विनोद लोधी, कौशल किशोर तिवारी, सुनील दीक्षित, विकास शुक्ला और मंडल अध्यक्ष भोला नाथ मिश्रा सहित प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा। प्रतिनिधिमंडल ने गांव पहुंचकर घटना से प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। ग्रामीणों ने प्रतिनिधिमंडल को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए पुलिस पर लगाए गए आरोपों से अवगत कराया।भाजपा जिलाध्यक्ष ने मौके पर धौरहरा कोतवाल और सहायक विकास अधिकारी पंचायत को भी बुलाया तथा मामले की जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से भी मामले की वास्तविक स्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।ग्रामीणों के अनुसार घटना के बाद करीब 16 लोग घायल हुए हैं। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घरों में घुसकर मारपीट की। वहीं, पुलिस की ओर से घटना को लेकर अलग पक्ष सामने आने की संभावना है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। प्रतिनिधिमंडल के गांव पहुंचने और अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई है। जांच पूरी होने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

एटा में मां के दूसरे रिश्ते से परेशान युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, कमरे में लटका मिला शव

एटा 16 सितंबर उप्रससे। जनपद के जसरथपुर थाना क्षेत्र में आज बुधवार दोपहर करीब 11:30 बजे युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। घटना की वजह पारिवारिक कलह मानी जा रही है।

पुलिस ने बताया अभय प्रताप सिंह (20) ने घर के पास फांसी लगाकर आत्महत्या की। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ पुलिस आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटा रही है।

जसरथपुर थाना प्रभारी सुबोध कुमार उपाध्याय ने बताया कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार अभय की मां करीब 14 साल पहले सराय अगहत निवासी बृजवीर सिंह से शादी के बाद राहुल बाबा के साथ रहने लगी थीं। राहुल बाबा अभय के जैविक पिता नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, उसके जैविक पिता बृजवीर सिंह बताए गए हैं। राहुल बाबा के किसी अन्य महिला से संबंध होने की बात को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। इसी पारिवारिक कलह के कारण अभय तनाव में था। हालांकि पुलिस अभी घटना के पीछे की पूरी वजह की जांच कर रही है और परिवार के लोगों से भी जानकारी ली जा रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है। पुलिस आत्महत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

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