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सात रंगों की स्पार्क है जिंदगी

October 8, 2026

सात रंगों की स्पार्क है जिंदगी

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में डॉ. शिल्पी बख्शी शुक्ला के कहानी संग्रह ‘स्पार्क’ का विमोचन

लखनऊ। राष्ट्रीय पुस्तक मेले में नारी सरोकारों से जुड़ी लेखिका डॉ. शिल्पी बख्शी शुक्ला के कहानी संग्रह ‘स्पार्क’ का विमोचन उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने किया। समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने की। इस अवसर पर अपर्णा यादव ने कहा कि जिंदगी में उत्साह, संवेदना और सकारात्मक सोच की एक छोटी-सी चिंगारी भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है। ‘स्पार्क’ की कहानियां जीवन के विभिन्न रंगों को सामने लाती हैं और पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि संग्रह की कुछ कहानियां उनके मन को गहराई से छू गईं।

पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने कहा कि लेखन साहित्य के अनंत सागर की यात्रा है। एक रचनाकार अपने अनुभवों और संवेदनाओं को शब्द देकर समाज के सामने रखता है और यही साहित्य की सबसे बड़ी ताकत है।

विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डॉ. मनीष शुक्ल ने कहा कि एक लेखक अपनी कलम के माध्यम से समाज में ‘स्पार्क’ पैदा करता है। उसकी रचनाएं विचारों को जन्म देती हैं और पाठकों को नई दृष्टि प्रदान करती हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री ने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और जीवन को समझने की खिड़की भी हैं। उन्होंने नई पीढ़ी से नियमित रूप से किताबें पढ़ने और साहित्य से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि गंभीर और स्थायी ज्ञान के लिए उनका महत्व और बढ़ गया है।

लेखिका डॉ. शिल्पी बख्शी शुक्ला ने अपनी दो कहानियों का पाठ किया, जिसे उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने सराहा।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के प्रमुख सचिव राजेश सिंह, नीरज श्रीवास्तव और अलका प्रमोद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन जरीन अंसारी ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और पुस्तकप्रेमी उपस्थित रहे।

October 4, 2026

समाज का राजनीति पर पीएम, पत्रकारिता पर अधिक विश्वास: चौधरी भूपेंद्र सिंह

एनयूजे की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद योद्धा में शुरू

अयोध्या, 04 अक्टूबर 2026, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि पत्रकारिता पर समाज का विश्वास कायम है। जबकि राजनेताओं पर विश्वास सबसे कम है। वे आज यहां हनुमान बाग आश्रम के सभागार में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे) की राष्ट्रीय परिषद बैठक में मुख्य अतिथि पद से विचार व्यक्त कर रहे थे।

राष्ट्रीय परिषद के उद्घाटन समारोह  में श्री चौधरी ने कहा कि पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं और मुद्दों पर आप दो दिन तक चर्चा करेंगे। आपका दायित्व चुनौती पूर्ण है। यह समय पत्रकारिता के लिए अति महत्व का है, क्योंकि ये डिजिटल और सोशल मीडिया का युग है। सूचनाओं का प्रवाह और गति अत्यधिक तीव्र है। ऐसे समय में आपका दायित्व और अधिक बढ़ जाता है। क्योंकि सच को उजागर करना, तथ्यों पर आधारित पत्रकारिता ही लोकतंत्र और सामाजिक एकता को मजबूत करती है। लेकिन सुनी हुई और बगैर तथ्यों की पत्रकारित समाज को नुकसान पहुंचा सकती है।

अयोध्या में पांच सौ साल के संघर्ष के बाद भगवान श्रीराम जी का भव्य दिव्य मंदिर निर्मित हुआ है। इसके लिए लंबा आंदोलन चला, अदालती लड़ाई हुई। इस आंदोलन के दौरान पत्रकारों का सहयोग महत्वपूर्ण था। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया ने आंदोलन को मुखर किया और कवरेज में प्रमुखता दी। आंदोलन की सफलता का जब इतिहास लिखा जाएगा तब पत्रकारों के योगदान को भी लिखा जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी महराज के नेतृत्व में अयोध्या सज रही है, नए रूप में संवर रही है। त्रेता कालीन युग का गौराव वापस लौट रहा है। कभी यहां राम विरोधियों ने आस्था पर कुठाराघात किया था। आज यहां दीपोत्सव होता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का कोई हिडेन एजेंडा नहीं है। भाजपा ने पालमपुर बैठक में राम मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर करने के लिए संकल्प व्यक्त किया था। पार्टी ने धरा 370 हटाने, समान नागरिक संहिता की बात भी कही थी।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि जनता दल (सेकुलर) के प्रदेश अध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा कि सभी बड़े राजनेता पत्रकार रहे। उन्होंने महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, डा राममनोहर लोहिया का उल्लेख किया। एनयूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा सैद्धांतिक पत्रकारिता और वैचारिक संघर्ष के साथ एनयूजे की 1972 में स्थापना हुई। हमारे संगठन ने 1975 में आपातकाल का विरोध किया। उन्होंने कहा आज भी समाज का पत्रकारिता पर सबसे ज्यादा विश्वास है। उद्घाटन समारोह में नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, एनयूजे महासचिव त्रियुग नारायण तिवारी , उपज महामंत्री आनंद कर्ण ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह ने किया। आभार अयोध्या उपज के अध्यक्ष प्रो कृष्ण मुरारी सिंह ने व्यक्त किया। मंच संचालन विवेकानंद पांडे ने किया।

एनयूजे की राष्ट्रीय परिषद में 22 राज्यों से लगभग 200 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

September 29, 2026

एटा में सड़क किनारे खाई में मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा, शिनाख्त के प्रयास जारी

 

एटा 29 सितंबर उप्रससे। जनपद के मलावन थाना क्षेत्र में एक 30 वर्षीय मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो गई। युवक का शव कुंवर मनोहर सिंह इंटर कॉलेज के पास सड़क किनारे गड्ढे में मिला।

स्थानीय लोगों ने आज मंगलवार सुबह 9 बजे पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही मलावन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कर शव पोस्टमार्टम के लिए मुख्यालय भेज दिया।
फिलहाल मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस युवक की पहचान करने और उसके परिवार का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

वर्जन
थाना प्रभारी छत्रपाल सिंह ने बताया कि युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त था और अक्सर भटकता रहता था। पुलिस घटना स्थल की जांच कर रही है।

सरायन नदी की बाढ़ से सीतापुर शहर के करीब 11 मोहल्ले प्रभावित, 2 हजार से अधिक घरों में पहुंचा पानी

आलोक कुमार बाजपेयी
सीतापुर(उप्र समाचार सेवा)। लगातार बढ़ते जलस्तर के चलते सरायन नदी ने एक बार फिर शहर के तटीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। नदी के उफान से शहर के करीब 11 मुहल्ले प्रभावित हुए हैं और स्थानीय स्तर पर 2 हजार से अधिक घरों में बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। कई स्थानों पर सड़कें और गलियां जलमग्न होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरायन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण तरीनपुर, लोनियनपुरवा, दुर्गापुरवा, आलमनगर, गदियाना, नई बस्ती, मछली मंडी, कोट कर्बला, हबीबपुर , केशव ग्रीन सिटी , आगा कालोनी, समेत नदी किनारे और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। इससे पहले भी सरायन का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया था और कई तटीय मोहल्लों में घरों तक पानी पहुंचने की खबरें सामने आई थीं।

प्रशासन की निगरानी बढ़ी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहा है। जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने हाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को प्रभावित लोगों की सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन-पानी की व्यवस्था करने तथा जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत चौकियों और आश्रय स्थलों पर व्यवस्थाएं की गई हैं तथा जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार शहर में चिन्हित विद्यालयों, धर्मशालाओं और अन्य बाढ़ आश्रय स्थलों में 600 से अधिक लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी की गई है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

अधिकारियों ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों के लिए टीमें सक्रिय रखी गई हैं।।

पॉक्सो अधिनियम, 2012 पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

विधि के विद्यार्थियों ने जीवंत नुक्कड़ नाटक का किया प्रदर्शन
शाहजहाँपुर, 29 सितम्बर ( संजीव गुप्त ) स्वामी शुकदेवानन्द विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय स्थित विधिक सहायता केंद्र द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शाहजहाँपुर के तत्वाधान में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय जनपद एवं सत्र न्यायाधीश श्री धर्मेंद्र कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि अपर जनपद न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार शर्मा तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शाहजहांपुर श्रीमती अपेक्षा सिंह उपस्थित रहीं। आयोजित शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को उनके विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा न्याय तक पहुँच के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विद्यार्थियों द्वारा अतिथियों का चन्दन तिलक, बैज एवं पुष्पकलिका भेंट कर स्वागत किया गया। इसके उपरांत डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया तथा अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि माननीय जनपद न्यायाधीश श्री धर्मेंद्र कुमार पांडेय जी ने अपने संबोधन में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के उद्देश्य एवं बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न तथा अश्लील सामग्री से संबंधित अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना तथा ऐसे मामलों में बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए विधिक संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए केवल कानून का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की जानकारी और उनका प्रभावी अनुपालन भी आवश्यक है। उन्होंने प्रियदर्शिनी मट्टू प्रकरण तथा निर्भया प्रकरण का उल्लेख करते हुए अपराधों की गंभीरता और प्रभावी अन्वेषण एवं न्यायिक प्रक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि थाने में शिकायत दर्ज नहीं की जाती है, तो पीड़ित न्यायालय की सहायता ले सकता है। पॉक्सो मामलों में बच्चे को भयमुक्त वातावरण प्रदान करने, संवेदनशील तरीके से बयान दर्ज करने तथा आवश्यक परामर्श की व्यवस्था पर भी उन्होंने जोर दिया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुराग अग्रवाल ने कहा कि जागरूकता तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ सकारात्मक अभिवृत्ति और तत्परता भी हो। उन्होंने विद्यार्थियों से विधिक ज्ञान प्राप्त कर स्वयं जागरूक बनने तथा समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों के साथ संवेदनशील एवं विश्वासपूर्ण व्यवहार रखने का आह्वान किया, ताकि बच्चे बिना भय के अपनी समस्या साझा कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों को समझें और अपने आस-पास के बच्चों तथा समाज को भी उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुरेश कुमार शर्मा ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत होने वाले अपराधों और बच्चों की सुरक्षा के संबंध में वर्तमान आपराधिक कानून तथा पॉक्सो अधिनियम के बीच संबंध और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए विशेष कानूनी संरक्षण की आवश्यकता समझाई।उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। बाल संरक्षण और लैंगिक अपराधों की रोकथाम के उद्देश्य से पॉक्सो अधिनियम बनाया गया, जिसमें बच्चों के अनुकूल न्यायिक प्रक्रिया, शिकायत, साक्ष्य एवं पीड़ित के संरक्षण की विशेष व्यवस्था है।
विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अपेक्षा सिंह ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराध, यौन उत्पीड़न एवं बाल अश्लीलता से संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों को गुड व बैड टच, अनुचित व्यवहार की रिपोर्टिंग तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम बालक एवं बालिका दोनों पर समान रूप से लागू होने वाला लैंगिक रूप से तटस्थ कानून है। पीड़ित बच्चे की सुरक्षा एवं गरिमा को ध्यान में रखते हुए न्यायालय में उसकी गवाही के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने अभिभावकों और समाज से बच्चों के प्रति संवेदनशील एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विधि अध्ययन संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “काश! किसी ने सुना होता” शीर्षक नुक्कड़ नाटक रहा। नाटक के माध्यम से विधिक अधिकारों एवं जागरूकता के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया । नाटक को प्रदीप कुमार सिंह द्वारा तैयार किया गया। अंत में विधि अध्ययन संकाय के प्रभारी डॉ. जयशंकर ओझा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधि समाज के आंतरिक एवं नैतिक मूल्यों को नियंत्रित और संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आज नैतिक मूल्यों को जीवन में वास्तविक रूप से अपनाना तथा बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सभी को जागरूक होना आवश्यक है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अनिल कुमार (संयोजक), श्री प्रदीप कुमार सिंह (सह-संयोजक), डॉ. दीप्ति गंगवार, श्री अशोक कुमार, डॉ. प्रेम सागर, श्री मृदुल शुक्ला, अजीत कुमार, सचिन कुमार, श्री विजय सिंह, डॉ. अमरेंद्र सिंह, डॉ. अमित कुमार यादव, डॉ ज्योत्सना गुप्ता, रूपल मिश्रा एवं समस्त शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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