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श्री आदिगुरु शंकराचार्य 

April 21, 2026

श्री आदिगुरु शंकराचार्य 

जयंती वैशाख शुक्ल पंचमी (21 अप्रैल 2026)

 Article Posted on 21,04,2026 Time 08.51 AM Tuesday

श्री आदिगुरु शंकराचार्य का जन्म दक्षिण भारत के केरल प्रदेश के कालड़ी (कालटी/कालादि) नामक ग्राम में हुआ ऐसा माना जाता है। बाल्यकाल से ही वे अत्यंत कुशाग्र बुद्धि और प्रतिभाशाली थे। उन्होंने अपनी मातृभाषा के साथ-साथ वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य शास्त्रीय विषयों का अध्ययन अल्पायु में ही प्रारंभ कर दिया। उनके पिता का देहांत बचपन में ही हो गया, जिसके बाद उनकी माता ने उनका उपनयन संस्कार कराकर उन्हें गुरुकुल में विधिवत् शिक्षा हेतु भेजा। वहाँ उन्होंने वेद-शास्त्र, वेदांग, दर्शन आदि का गहन अध्ययन किया और शीघ्र ही अपनी विलक्षण प्रतिभा के कारण विद्वानों में प्रतिष्ठा प्राप्त की।

यद्यपि उनके जीवन से जुड़ी अनेक घटनाएँ परंपरागत कथाओं पर आधारित हैं, तथापि यह निर्विवाद है कि वे अत्यंत कम आयु में ही उच्च कोटि के विद्वान और आचार्य के रूप में प्रसिद्ध हो गए थे। उनकी विद्वता और शिक्षण-कौशल के कारण अनेक जिज्ञासु उनके संपर्क में आए और उनसे प्रभावित हुए।

आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथों में उपनिषदों, ब्रह्मसूत्र तथा श्रीमद्भगवद्गीता पर लिखे गए भाष्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। भाष्यकार के रूप में उनका स्थान भारतीय दर्शन के इतिहास में अद्वितीय है। उनकी व्याख्या-शैली तार्किक, गूढ़ और अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। उनके ग्रंथ केवल दार्शनिक सिद्धांतों का प्रतिपादन ही नहीं करते, बल्कि साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को सुदृढ़ रूप से स्थापित किया और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को एक नवीन दार्शनिक आधार प्रदान किया। उनके विचारों में समन्वय, एकत्व और सार्वभौमिकता का संदेश निहित है। इसी कारण वे केवल एक दार्शनिक ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक के रूप में “जगद्गुरु” के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

आदि शंकराचार्य ने ‘अद्वैत वेदांत’ का सिद्धांत दिया, जिसका मूल भाव है – ‘ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या है, जीव और ब्रह्म एक हैं।‘ इस सिद्धांत ने यह स्पष्ट किया कि सभी जीवों में एक ही परमात्मा का अंश है, जिससे मानव मात्र की एकता का संदेश मिलता है।

 

 

जगदगुरु श्री शंकराचार्य पर विचार

दीनदयाल उपाध्याय

  • भारतीय राष्ट्र-जीवन में भगवान श्री कृष्ण के पश्चात श्री शंकराचार्य का ही आविर्भाव राष्ट्र की मूलभूत एकता को व्यावहारिक स्वरूप देने में समर्थ हुआ।
  • भगवान कृष्ण ने गीता के द्वारा भिन्न-भिन्न विचार-धाराओं में एकात्मता निर्माण करने का प्रयत्न किया तथा राष्ट्र की इस एकात्मता को धर्मराज युधिष्ठिर के चतुरन्त साम्राज्य के रूप में स्थापित किया। आचार्य शंकर ने यद्यपि धर्मराज के समान किसी राजनैतिक महापुरुष को भारतीय एकता का प्रतीक नहीं बनाया, किन्तु राष्ट्र-जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में एकता का निर्माण करके तथा उस एकता के संस्कारों को डालने वाली परम्परा को पुष्ट करके जो सांस्कृतिक जीवन की एकात्मता को शक्ति दी है, उसके कारण आज तक छिन्न-विच्छिन्न होने पर भी भारत आंतरिक एकता को सत्यसृष्टि में परिणत करने को लालायित है।
  • अनेक में एक के अपने प्राचीन सिद्धांत को आचार्य शंकर ही आत्मिक, भौतिक, नैतिक, धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्रों में अपने अद्वैत के सिद्धान्त का प्रतिपादन करके व्यावहारिक जगत में लाये। यही सिद्धांत मानव मात्र की शांति और कल्याण का कारण होगा।[1]
  • आचार्य शंकर के सिद्धान्त और प्रयत्नों के परिणामस्वरूप भारतवर्ष एक ओर तो रूढ़िवादी कर्मकाण्ड और दूसरी ओर नास्तिकवादी जड़वाद के गर्त में गिरने से बच गया।
  • आचार्य शंकर ने भारतवर्ष का उद्धार किया, हम भी अपने इस महान राष्ट्र-पुरुष के प्रति इससे अच्छी कौन सी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं कि उनके इस एकत्व के सिद्धान्त को अपने जीवन में लाकर पुनरपि भारतवर्ष को उन्नत एवं वैभवशाली बनावें।
  • बत्तीस वर्ष की आयु में इतना महान कार्य करने वाले आचार्य शंकर के अखण्ड कर्ममय जीवन से हमारे जीवन को भी कर्म की स्फूर्ति प्रदान हो तथा अपने पुरुषार्थ, निश्चय निष्ठा और त्याग के बल पर अद्वैत के सत्य सिद्धान्तों के द्वारा सम्पूर्ण संसार को सच्ची शान्ति का सुख देकर उन्हें जगद्‌गुरु के वास्तविक पद पर आसीन करावें। यही है उनका पुण्य स्मरण एवं उनकी सच्ची पूजा।[2]
  • शंकराचार्य ने समस्त हिन्दू-राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने एवं उसे संगठित करने का प्रयास किया। देश के चारों कोनों पर चार धामों के प्रति श्रद्धा केन्द्रित करते हुए उन्होंने सम्पूर्ण भारतवर्ष की, मातृ- भू की मूर्ति जन-जन के ह्रदय पर अंकित कर दी।… चार धामों के समान ही उन्होंने शंकराचार्यों की अध्यक्षता में भारत के चारों कोनों में चार मठ स्थापित किये।[3]

पं० बलदेव उपाध्याय

  • आद्य जगदुगुरु शंकराचार्य का जीवन-चरित्र भारतवासियों के लिए सदैव से प्रेरणास्रोत रहा है। आचार्य शंकर के जीवन चरित की आधुनिक युग में उपादेयता बताते हुए पं० बलदेव उपाध्याय लिखते हैं, “राजनीतिक आन्दोलन के इस युग में हम अपने धर्म संरक्षक तथा प्रतिष्ठापकों को एक प्रकार से भूलते चले जा रहे हैं परन्तु शंकराचार्य का पावन चरित्र भुलाने की वस्तु नहीं है, वह निरन्तर मनन करने की चीज है। आचार्य का हमारे ऊपर इतना अधिक उपकार है कि उनकी जयंती हमारे लिए राष्ट्रीय पर्व है, उनका चरित्र परमार्थ के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक बहुमूल्य सम्बल है।“[4]

विष्णु प्रभाकर

  • अपनी पुस्तक ‘शंकराचार्य’ में प्रभाकर लिखते हैं, “सारे भारत में जिसने एक आत्मा की, एक ज्योति की, कल्पना की, सभी जीवों को जिसने ब्रह्म माना, उस अनोखे आचार्य को हम बार-बार प्रणाम करते हैं। जिसने केवल दिलों को नहीं हिलाया, दिमाग पर भी चोट की, बुद्धि के सहारे विवेचन किया और जनसाधारण के दिलों को जीत लिया, उस अनोखे जादूगर को हम बार-बार प्रणाम करते हैं।“[5]

[1] दीनदयाल उपाध्याय, जगदगुरू श्री शंकराचार्य, लोकहित प्रकाशन, पृष्ठ 102

[2] दीनदयाल उपाध्याय, जगदगुरू श्री शंकराचार्य, लोकहित प्रकाशन, पृष्ठ 102

[3] दीनदयाल उपाध्याय, जगदगुरू श्री शंकराचार्य, लोकहित प्रकाशन, भूमिका (मनोगत) से उद्धृत

[4] प. बलदेव उपाध्याय (चार शब्द), श्री शंकर दिग्विजय (माधवकृत) श्री श्रवणनाथ ज्ञानमंदिर, हरिद्वार, पृष्ठ 26

[5] विष्णु प्रभाकर, शंकराचार्य, पृष्ठ 36

घर में दंपत्ति को चाकुओं से गोद डाला


*घर में पाँलिश कारीगर व पत्नी की चाकुओं से गोदकर हत्या*

-सिविल लाइंस में डबल मर्डर
-शहर में चक्कर की मिलक में देर रात हुईं सनसनीखेज वारदात
-बच्चों की गुहार पर भी नहीं पसीजे हत्यारोपी, चाकुओं से ताबड़तोड़ किए वार
-16 हजार रुपए का विवाद बना डबल मर्डर की वजह

Post on 21.4.26
Tuesday Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
सोमवार रात शहर में चक्कर की मिलक में एक दंपति की बेदर्दी से हत्या हो गई। डबल मर्डर की खबर से सनसनी मच गई। दोहरे मर्डर की सूचना पर डीआईजी, एसएसपी ने घटनास्थल पहुंचे और मुआयना किया। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से अहम सुराग जुटाए हैं।हत्या की वजह 16 हजार रुपए का विवाद बना।
घटना सिविल लाइंस क्षेत्र में चक्कर की मिलक की है।बर्तन की पाँलिश के कारीगर राजा (30) ने पड़ोसी फहीम से 2 लाख 40 हजार रुपए में मकान खरीदा। बताते है कि राजा ने दो लाख रुपए देकर मकान का कब्जा ले लिया। घर में राजा अपनी पत्नी फरा, आठ साल की बेटी अफ्शा, 5 साल का आतिफ व डेढ़ साल के दूसरे बेटे अब्बास के साथ रहने लगा।राजा ने फ़हीम से रजिस्ट्री कराने को कहा। बकाए पैसे का विवाद खूनी संघर्ष की वजह बन गया।
दरअसल फहीम 24 हजार की बजाय 40 हजार रुपए लेकर रजिस्ट्री कराने को कहा। सोलह हजार रुपए की खातिर सोमवार को हुआ विवाद खूनी रूप ले गया।
रविवार की शाम को इसी विवाद में हुईं कहासुनी के बाद राजा ने फहीम की पिटाई कर दी। इसके बाद सोमवार की रात को फहीम का बेटा फरजंद, चचेरे भाई और एक अन्य के साथ घर में राजा के घर पहुंचा।आरोपियों ने राजा से मारपीट शुरू कर दी। बचाव में आई पत्नी फरा कोपीट दिया। आरोप है कि हमलावरों ने राजा और पत्नी फरा को चाकुओं के कई वार किए। दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
सिविल लाइंस में डबल मर्डर की सूचना से हड़कंप मच गया।डीआईजी मुनिराज,एसएसपी सतपाल अंतिल,एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह समेत अन्य पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया।पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी।हमलावरों की तलाश की जा रही है। फोरेंसिक टीम ने अहम साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी का दावा किया है।

बाबा साहब की प्रतिमा तोड़ने पर शिव सेना का विरोध

Posted on 21.04.26
Monday Moradabad
Rajesh Bhatia
मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
ठाकुरद्वारा में बाबा साहब डॉ अंबेडकर की प्रतिमा खंडित करने पर शिव सेना ने विरोध जताया।शिव सेना जिला प्रमुख वीरेंद्र अरोड़ा के समर्थकों संग ग्राम नारायणपुर जाने के ऐलान से पुलिस प्रशासन सतर्क हो गए। पुलिस ने शिव सेना प्रमुख को घर से बाहर नहीं जाने दिया। पुलिस ने पार्टी नेता को पूरे समय नजरबंद रखा।
पार्टी के जिला प्रमुख ने इस मामले को इस मामले में एसपी देहात और सीओ से भी रखा।
शिवसैनिकों ने मामले में निष्पक्ष जांच न होने पर ठाकुरद्वारा में बड़े आंदोलन की चेतावनी दीं।
शिवसेना प्रतिनिधि मंडल में वीरेन्द्र अरोड़ा,कमल सिंह राव, मुदित उपाध्याय,शिबू पांडे, अरुण ठाकुर, पंकज पाल, दीपक,रिंकू,सुरेश सैनी,अशोक सैनी, शरद कपूर आदि रहे।

April 20, 2026

केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को और बद्रीनाथ धाम के कपाट गुरुवार को खुलेंगे

देहरादून, 20 अप्रैल 26, कल से शुरू हुई गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की तीर्थयात्रा सुचारू रूप से चल रही है। वहीं, रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन ने यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

इस बीच, केदारनाथ मंदिर को पुष्पों से सजाने का काम शुरू हो गया है। बाबा केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा की पालकी रात्रि विश्राम के लिए गौरीकुंड पहुंच गई है। इसके अलावा, चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। जिला और पुलिस प्रशासन ने सुचारू और सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

महिला आरक्षण पर कांग्रेस ने दोहरा आचरण दिखाया

रांची, 20 अप्रैल 26, भारतीय जनता पार्टी ने आज झारखंड में विभिन्न स्थानों पर अपने “महिला जनकक्रोश” अभियान के अंतर्गत संवाददाता सम्‍मेलन का आयोजन किया। इसमें पार्टी नेताओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न होने के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने देवघर में कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करके अपना दोहरा आचरण दिखा रहे हैं। धनबाद में पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कहा कि वंशवादी और तुष्टीकरण की राजनीति में लिप्त दल महिलाओं को उनके अधिकार देने के खिलाफ हैं। हजारीबाग में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को महिला सशक्तिकरण का दुश्मन बताया। जमशेदपुर में एक संवाददाता सम्‍मेलन में सांसद मनीष जायसवाल ने इसे देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात बताया और कहा की कि पार्टी 25 अप्रैल को राज्यव्यापी विरोध मार्च का आयोजन करेगी।

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