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न्यूयॉर्क से शिकागो तक – वही सनातन ध्वनि: 1893 से 2026 तक

August 30, 2026

न्यूयॉर्क से शिकागो तक – वही सनातन ध्वनि: 1893 से 2026 तक

Dr Mohan Bhagwat, Sar Sanghchalak RSS

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डा मोहन भागवत

न्यूयॉर्क, 29 अगस्त 2026, दोपहर 2 बजे, जब दुनिया के सबसे प्रसिद्ध मंचों में से एक – न्यूयॉर्क का मेडिसन स्क्वायर गार्डन – में 5000 से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी, 26 अलग-अलग भाषाओं में शाखा चलाने वाले स्वयंसेवक और 250 से ज्यादा हिंदू, योग, मंदिर और इंटरफेथ संगठनों के प्रतिनिधि जुटे, तो लगा जैसे इतिहास खुद को दोहरा रहा है।

133 साल पहले, 11 सितंबर 1893 को, शिकागो के Art Institute में 7000 लोगों के सामने एक 30 साल के संन्यासी ने कहा था – “Sisters and Brothers of America!”

और कल उसी अमेरिका में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा –

> “अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको मानना होगा कि सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। Diversity is a decoration of our inner unity, it must be preserved.”

ये दो वाक्य एक ही सूत्र के दो छोर हैं।

1. मंच एक, संदेश एक

*विवेकानंद 1893:* World Parliament of Religions. 12 भारतीय प्रतिनिधि थे – बौद्ध, जैन, ब्रह्म समाज, मुस्लिम, ईसाई भी। पर जिसने तालियों की गड़गड़ाहट 2 मिनट तक रुकने नहीं दी, वो थे विवेकानंद। उनका मूल मंत्र था – “I am proud to belong to a religion which has taught the world both tolerance and universal acceptance. We believe not only in universal toleration, but we accept all religions as true.”

उन्होंने गीता का श्लोक सुनाया – “यो यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्” – जो जैसे मेरे पास आता है, मैं वैसे ही उसे अपनाता हूँ।

उन्होंने मेंढक और कुएं (कूप मंडूक) की कहानी सुनाई – हर पंथ अपने कुएं को ही पूरा समंदर समझता है।

*भागवत 2026:* Universal Oneness Celebration, आयोजक – American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD). रक्षाबंधन के दिन। थीम – वसुधैव कुटुम्बकम्।

आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पहले ही कहा था – “This is an interfaith gathering with diverse, multicultural audience, reflecting Bharatiya ethos which is fundamentally inclusive.”

भागवत जी ने वहीं से आगे बढ़ाया:
“All humanity is one. Diversity is the rule of nature, but unity is the truth underpinning it.”

विवेकानंद ने सहिष्णुता (tolerance) की बात की थी, भागवत जी ने संरक्षण (preservation) की। 1893 में कहना था कि दूसरों को सहो, 2026 में कहना है कि दूसरों की पहचान को अपनी तरह ही बचाओ।

2. डेटा क्या कहता है – क्यों अब ये बात जरूरी है?

– अमेरिका में आज भारतीय मूल के 54 लाख से ज्यादा लोग हैं। 2023 में US Census के अनुसार, उनमें से 48% हिंदू पहचान रखते हैं। ये दुनिया का सबसे शिक्षित और सबसे अधिक आय वाला डायस्पोरा है – औसत घरेलू आय $145,000।
– पर Pew Research 2024 के अनुसार, 31% हिंदू-अमेरिकियों ने कहा कि पिछले साल उन्हें धर्म के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ा। यानी शिकागो में जो सवाल था – “हिंदू कौन है?” – वही सवाल आज न्यूयॉर्क में भी है।
– आरएसएस का शताब्दी वर्ष 2025-26 है। संगठन 1925 से शुरू हुआ, आज 65,000+ शाखाएं। पिछले 8 महीनों में दत्तात्रेय होसबाले जी अमेरिका, UK, जर्मनी में बुद्धिजीवियों से मिले। भागवत जी की ये यात्रा उसी वैश्विक संवाद का हिस्सा है।

3. शिकागो से साकेत तक का सेतु

विवेकानंद ने अमेरिका को भारत का आध्यात्मिक परिचय दिया था। तब भारत गुलाम था। आज भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है, पर नैरेटिव की लड़ाई वही है।

1893 में Professor John Henry Wright ने विवेकानंद को कहा था – “To ask for your credentials is like asking the sun to state its right to shine.”

2026 में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और USCIRF ने भागवत जी के वीज़ा रद्द करने की मांग की। आरएसएस का उत्तर वही रहा – “We invite anyone interested in learning more to participate in these open forums of dialogue.”

यही तो फर्क है – विरोध के जवाब में संवाद।

निष्कर्ष: एक ही मंत्र का विस्तार

विवेकानंद ने कहा था – “सब रास्ते एक ही सच तक जाते हैं।”
भागवत जी ने कहा – “सबकी पहचान को बचाना ही उस सच तक पहुंचने का तरीका है।”

एक ने दुनिया को बताया कि हिंदू धर्म क्या सोचता है, दूसरे ने दुनिया को दिखाया कि हिंदू समाज कैसे जीता है – शाखा में, सेवा में, विविधता में।

1893 में तालियां बजीं थीं क्योंकि अमेरिका ने पहली बार सहिष्णुता सुनी थी। 2026 में मेडिसन स्क्वायर गार्डन खचाखच भरा था क्योंकि अमेरिका अब सहिष्णुता से आगे – एकता का अनुभव करना चाहता है।

सपा के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है जेपीएनआईसी: सीएम योगी

जयप्रकाश नारायण के नाम का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता, जनता के पैसे पर डकैती की छूट नहीं: मुख्यमंत्री*

*रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ सीएम योगी ने किया वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण, पुष्पांजलि भी अर्पित की*

*जाति के नाम पर समाज को बांट रही सपा, हम बटेंगे नहीं, तो कटेंगे भी नहीं: सीएम योगी*

*सीएम ने कहा- दंगों की बादशाह है सपा, कर्फ्यू उसकी पहचान और सरकारी खजाने में लूट-खसोट उसकी आदत*

*लखनऊ, गोरखपुर व बदायूं में वीरांगनाओं के नाम पर गठित की गईं तीन महिला पीएसी बटालियन*

*लखनऊ, 30 अगस्त।* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है। सपा ने इसे अपनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अड्डा जैसा बना दिया था। एक महापुरुष के नाम का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता। प्रदेश सरकार अपराध व अपराधियों के साथ-साथ बेईमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले जयप्रकाश नारायण के नाम पर सपा शासनकाल में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च करने के बावजूद यह अधूरा रहा। जिस काम को 18 महीने में पूरा होना था, वह दो साल बाद भी अधूरा था। सेंटर पर सपा का कब्जा रखने के लिए एक कमेटी गठित की गई, जिसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, अखिलेश के निजी सचिव और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी शामिल थे।

*जनता के पैसे पर डकैती की छूट नहीं*
सीएम योगी ने कहा कि जेपीएनआईसी पर खर्च हुए 864 करोड़ रुपये सैफई सिंडिकेट के नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनता के हैं। जनता के पैसे पर किसी राजनीतिक दल को डकैती डालने की छूट नहीं दी जा सकती। सरकार ने कमेटी भंग कर इस सेंटर को वापस लिया है। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण के मार्गदर्शन में इसे संचालित कर जयप्रकाश नारायण की स्मृति को जीवंत किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के खजाने से खर्च धनराशि की वसूली का प्रयास किया जाएगा। सरकार ने जिन लोगों के हाथ से खजाना छीन लिया, वे अब अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।

*दंगा-कर्फ्यू, जातीय राजनीति सपा की पहचान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीडीए के नाम पर समाज को बांटने वाली सपा के लोगों ने कभी महापुरुषों का सम्मान तक नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर सपा नेताओं के मुंह से श्रद्धांजलि का एक शब्द नहीं निकला, एक ट्वीट तक नहीं किया। सपा दंगों की बादशाह है। कर्फ्यू उसकी पहचान और सरकारी खजाने में लूट-खसोट उसकी आदत रही है। खाली जमीनों पर सपाई गुंडों का कब्जा और महिलाओं- बेटियों में भय का माहौल पिछली सरकार की सबसे बड़ी पहचान रहा है।

*मिशन शक्ति से महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डबल इंजन की भाजपा सरकार मातृशक्ति को सशक्त बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में शुरू हुआ मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान और स्वावलंबन से जुड़ा अभियान है। जब बेटी को सुरक्षा मिलती है तो उसमें संरक्षण का भाव पैदा होता है। सम्मान मिलने पर वह अपने जीवन की दिशा स्वयं तय करती है और जब उसे स्वावलंबन के अवसर मिलते हैं तो वह अपनी गति को प्रगति में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ती। आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई दे रहा बदलाव इसी सशक्तीकरण का परिणाम है। हम बीमारू छवि से निकल कर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बने हैं।

*प्रेरित करेगी वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा*
सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को समर्पित है, जिसका लोकार्पण मोदी जी ने किया। यहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं देश की अखंडता, अंत्योदय और सुशासन की प्रेरणा देती हैं। इसी तरह वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य अश्वारोही प्रतिमा भारतीय नारी की गरिमा, शौर्य और तेजस्विता का प्रतीक बनकर देशवासियों को प्रेरित करेगी।

*पीएसी में तीन महिला बटालियन गठित*
सीएम ने कहा कि अच्छी सरकार ही अच्छा कार्य करती है। सपा सरकार के समय दंगाइयों की काल बनी पीएसी को समाप्त करने की चेष्टा की गई। भाजपा सरकार ने पीएसी की सभी 54 कंपनियों को पुनर्गठित किया। साथ ही तय किया कि पीएसी में बेटियां भी नेतृत्व की भूमिका निभाएंगी। इसी क्रम में प्रदेश में वीरांगनाओं ऊदा देवी, झलकारी बाई व अवंतीबाई लोधी के नाम पर तीन महिला बटालियन गठित की गई हैं। इनमें एक लखनऊ, दूसरी गोरखपुर और तीसरी बदायूं में निर्माण के अंतिम चरण में है।

*50 हजार बेटियों को मिलेगी स्कूटी*
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर स्कूटी प्रदान की जाएंगी। 27, 28 और 29 अगस्त को हर बेटी, बहन व माता को परिवहन निगम व सिटी बस सेवा में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। अब 60 वर्ष से अधिक उम्र की प्रत्येक महिला को निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा शुरू कर दी गई है।

*वीरांगना ने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की चूलें*
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी का जीवन देश की स्वतंत्रता और नारी शक्ति के अदम्य साहस का प्रतीक है। मात्र 26 वर्ष की उम्र में अवंतीबाई लोधी ने प्रथम स्वातंत्र्य समर में नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं। बैरकपुर में मंगल पांडे ने जो चिंगारी प्रज्वलित की, उसे झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने आगे बढ़ाया। मेरठ में धनसिंह गुर्जर कोतवाल के नेतृत्व में यह संघर्ष और विस्तृत हुआ। झांसी व ग्वालियर के बीच वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने इसी संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका जीवन हमें एकजुट रहने की प्रेरणा देता है। अगर हम बटेंगे नहीं, तो कटेंगे भी नहीं।

*अवंतीबाई से कल्याण सिंह तक महापुरुषों का सम्मान*
सीएम योगी ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी के सम्मान में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ ने विधान भवन के सामने उनकी अश्वारोही प्रतिमा स्थापित कराई थी। अलीगढ़ में उनके नाम पर स्टेडियम का निर्माण भी कराया जा रहा है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लखनऊ में तिरंगा फहराने वाले अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के सम्मान में उन्नाव के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया गया है। बुलंदशहर में कल्याण सिंह की स्मृति में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया गया है। लखनऊ के कैंसर संस्थान का नाम भी बाबूजी के नाम पर रखा गया और वहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई है।

*महापुरुषों के प्रति श्रद्धा-सम्मान की भावना जीवंत रहे*
मुख्यमंत्री ने क्षत्रिय लोधी महासभा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के आयोजकों का आभार जताते हुए समाज की एकता और महापुरुषों के आदर्शों को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी, अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी और श्रद्धेय बाबूजी कल्याण सिंह ने समाज की एकता को मजबूती देने के साथ राष्ट्र को भी सशक्त बनाने का कार्य किया। इन महापुरुषों के प्रति श्रद्धा व सम्मान की भावना आने वाली पीढ़ियों में भी जीवंत रहे, इसके लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित भाजपा पदाधिकारी, लोधी महासभा के प्रतिनिधि, विधायक और बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

अंकों में छिपे जीवन के रहस्य को समझने की एक नई कोशिश है ‘अंक ब्रह्म’

वाराणसी, 30 अगस्त 2026 (उप्र समाचार सेवा), ज्ञान और साधना की धरती काशी में रविवार को एक सार्थक बौद्धिक अवसर जुड़ा, जब आचार्य विशाल पोरवाल द्वारा लिखित तथा वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक विजय विनीत द्वारा संपादित पुस्तक ‘अंक ब्रह्म : जीवन, भाग्य और ऊर्जा का विज्ञान’ का विमोचन सिगरा स्थित आरके ग्रैंड होटल में हुआ।

समारोह में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल, प्रो. नागेंद्र पांडेय, नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. सुभाष पांडेय और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. सदानंद शुक्ल, विख्यात ज्योतिषविद चंद्रमौली उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में ज्योतिषाचार्य, वेद के पुरोधा, शिक्षक, पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने पुस्तक “अंक ब्रह्म”की सराहना करते हुए कहा कि इसकी भाषा अत्यंत सरल और सहज है, जिससे सामान्य पाठक भी इसे पढ़कर समझ सकता है और अपने अंकों से अपने भविष्य की गणना कर सकता है। उन्होंने पुस्तक को युवाओं के बीच बढ़ती रुचि के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

ज्योतिष वित्त प्रोफेसर नागेंद्र पांडे ने कहा कि ‘अंक ब्रह्म’ केवल भविष्य बताने की कोशिश नहीं करता, बल्कि अंकों को व्यक्तित्व, ऊर्जा, आत्मविश्लेषण और जीवन-प्रबंधन से जोड़कर देखने का प्रयास करता है। मूलांक, भाग्यांक, नामांक, नवग्रह, करियर, व्यापार, धन, विवाह, राजनीति, वास्तु और जीवन-प्रबंधन जैसे अनेक विषय इसमें समाहित हैं।

पुस्तक के संपादक विजय विनीत ने कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा को सरल भाषा में नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। उनका कहना था कि अंक हमारे जीवन के सहयात्री हो सकते हैं, लेकिन हमारे जीवन के स्वामी नहीं। अंक दिशा का संकेत दे सकते हैं, किंतु उपलब्धि कर्म, परिश्रम और पुरुषार्थ से ही आती है।

“अंक ब्रह्म” के लेखक आचार्य विशाल पोरवाल ने कहा कि यह भाग्य के सामने मनुष्य को असहाय नहीं बनाती, बल्कि उसे अपने भीतर झांकने और अपने पुरुषार्थ को पहचानने की प्रेरणा देती है।

इस अवसर पर विकास मिश्रा, दिलीप श्रीवास्तव, घनश्याम आलोक श्रीवास्तव, सुमनलता, डॉ. एस.एस. पांडेय, रचना वर्मा, पत्रकार राजेंद्र दुबे, सी.बी. तिवारी, राजकुमार, अधिवक्ता एवं ज्योतिषा स्वाति बरनवाल समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आचार्य पवन त्रिपाठी ने किया तथा राजीव नारायण पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम की शुरुआत चर्चित पार्श्वगायिका अनशिका सिंह के भजन से हुई।

🌺 अंकों से संकेत मिल सकते हैं, लेकिन जीवन की दिशा अंततः हमारे कर्म ही तय करते हैं।

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असंतुलित कार दुर्घटनाग्रस्त होकर खाई में गिरी,एक की मौत चार घायल

फिरोजाबाद, 30 अगस्त 2026 (उप्र समाचार सेवा)
जनपद के थाना जसराना क्षेत्र के तहत शनिवार रात में एटा शिकोहाबाद मार्ग पर एक कार ओवर टैक करने के प्रयास मे असंतुलित होकर खाई में गिर गई। दुर्घटना में कार सबार पांच लोग घायल हो गए जिसमें उपचार के दौरान एक घायल
की मौत हो गई।
जसराना क्षेत्र में शिकोहाबाद एटा मार्ग पर शनिवार रात में सोरों से मैनपुरी की ओर जा रही एक कार खडीत के पुल के समीप दूसरे वाहन को ओवरटेक करने के प्रयास में असंतुलित होकर नीचे खाई में जा गिरी । दुर्घटना के साथ मौके पर कार सवारों का चीत्कार मच गया। दुर्घटना के साथ ग्रामीणों भी पहुंच गए सूचना पर पुलिस ‌भी पहुंच गई। ग्रामीणों की मदद से घायलों को बाहर निकाल कर
स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया घायलों की हालत गंभीर होने के कारण सभी को फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज ट्रामा सेंटर में भेज दिया गया। दुर्घटना में घायल नरेंद्र कुमार,, मनीष कुमार विपिन कुमार ,बृजेंद्र सिंह तथा अंकुश शामिल है जो कस्बा घिरोर जनपद मैनपुरी के निवासी हैं सोरों से मैनपुरी के लिए वापस लौट रहे थे उपचार के दौरान रविवार को एक घायल नरेंद्र कुमार 26 वर्ष की मौत हो गई है। दुर्घटना की सूचना पर सभी परिजन ट्रामा सेंटर पहुंच गए। पुलिस द्वारा शब का पोस्टमार्टम कराया गया‌‌ है।

तुलसीदास जयंती पखवाड़ा समापन 31 को

अवध भारती संस्थान ने नेपाल सहित यूपी के विभिन्न जिलों में की तुलसी यात्रा एवं तुलसी सभा

समापन समारोह में “सूबेदार-राजदेवी अवधी सम्मान-2026” से सम्मानित होंगे 15 अवधी आराधक

बीकेटी/लखनऊ। अवध भारती संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जयंती पखवाड़ा के समापन एवं सूबेदार-राजदेवी अवधी सम्मान-2026 अलंकरण समारोह का आयोजन 31 अगस्त 2026, दिन सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे, एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, बख्शी का तालाब, लखनऊ में किया जाएगा।
इस अवधी अनुष्ठान के संयोजक नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने बताया कि इस समारोह में गोस्वामी तुलसीदास जयंती पखवाड़े के तहत नेपाल सहित यूपी के विभिन्न जिलों में तुलसी यात्रा निकाली गईं। यात्रा के अंत में तुलसी सभाओं का आयोजन किया गया। इसके अगुवा राम बहादुर मिश्र
(अध्यक्ष, अवध भारती संस्थान) हैं।
नागेन्द्र ने बताया कि समापन समारोह में तुलसीदास के जीवनवृत्त और उनके रचनात्मक पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा। साथ ही, तुलसी जयंती पखवाड़े पर आयोजित तुलसी यात्राओं और तुलसी सभाओं का विश्लेषण किया जाएगा।
कार्यक्रम संयोजक श्री चौहान ने अवगत कराया कि इस समारोह में 15 अवधी आराधकों को “सूबेदार-राजदेवी अवधी सम्मान-2026” से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान एमएलसी पवन सिंह चौहान के माता-पिता की सुस्मृति में दिया जाएगा।
इस समारोह के मुख्य अतिथि सीतापुर एमएलसी एवं एसआर ग्रुप के चेयरमैन पवन सिंह चौहान होंगे। इसकी अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित करेंगे। इसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान करेंगे। वहीं, साहित्यकार प्रदीप सारंग गोस्वामी तुलसीदास जयंती पखवाड़ा का विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे।
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इन अवधी आराधकों को सम्मान

प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित, डॉ राम बहादुर मिश्र, सर्वेश अस्थाना, डॉ अर्जुन पाण्डेय, आत्म प्रकाश मिश्र, सुमोना एस. पांडेय, कुसुम वर्मा, नीरजा शुक्ला, सुशील कुमार राय, प्रदीप सारंग, सुनील कुमार वर्मा, रमाकांत तिवारी रामिल, योगेश चौहान, चेतराम अज्ञानी एवं नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान
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तुलसी अनुष्ठान में सहयोगी संस्थाएँ

एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स बीकेटी, उप्र साहित्य सभा लखनऊ, लोकरंग फाउंडेशन लखनऊ, आँखें फाउंडेशन बाराबंकी, अवधी साहित्य संस्थान अमेठी, कमला नारायण ट्रस्ट उप्र, श्रेयस शोध संस्थान लखनऊ, समदृष्टि सेवा न्यास रायबरेली, महाजन सेवा संस्थान त्रिवेदीगंज, गुलजार फाउंडेशन बाराबंकी, शिव गंगा साहित्य सेवा समिति मसौली, काव्य कार्यशाला बाराबंकी, लोक संस्कृति शोध संस्थान
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